By | March 8, 2023

Aunty Ki Chudai Story: हैलो दोस्तो, मैंने आपका दोस्त राहुल, तो आज जायदा समय न लेते हुये सीधा कहानी पे आता हु,

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लेकिन बाद में भारती जब वापस आयी तो राहुल के साथ उसकी काफी बात हुई मैसेज के ज़रिये,  भारती अब  राहुल और उसकी माँ की हरकतों के बारे में जानती थी और साथ ही उसके अंदर भी हलकी उत्तेजना थी और जानने की, पर फिलहाल वह बस चुप रही, 

लेकिन सब बदलने वाला था जब अचानक से राहुल उसके कमरे में जा पहुंचा ठीक उसी वक़्त जब वह अपने कपडे बदल रही थी भारती सिर्फ अपनी एक कमर की लम्बाई की टी-शर्ट पहनी हुई थी और नीचे केवल एक लाल रंग की पेंटी ने  थी।

राहुल को पहले देख उसे काफी गुस्सा आयी लेकिन जब वह राहुल और उसकी माँ की करतूते के बारे में सोचा  तो वह खुद को रोक नहीं पायी ओर राहुल को कमरे में आने को बोली, राहुल को अपने बेड पर बैठा कर उसकी गोद में चढ़ कर बैठ गयी, भारती उसके आँखों में आँखे डाल कर वह बोल गयी जो राहुल ने कभी सोचा नहीं था,  Aunty Ki Chudai Story

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राहुल के कमर के अगल बगल अपने घुटने रख भारती राहुल के गोद में बैठी उसकी आँखों में आँखे डाल वह बोली: तुम मुझे चोदना है ?

राहुल को एक पल यकीन नहीं हुआ की क्या उसने सही सुना?

राहुल दबी आवाज़ में बोला: क्या? भारती अपने हाथो में राहुल के गाल को पकड़ उसे देख बोली: चोदोगे मुझे?

राहुल: क्या तुम सीरियस हो?

भारती: हाँ क्या तुम…

राहुल: क्या बोलना?

भारती: क्या तुम मेरे साथ वह सब करोगे जो कल रात तुमने आंटी के साथ किया!

राहुल: क्या! राहुल को जितनी ख़ुशी हुई थी वह सब एक पल में डरावने सपने के तरह बदल गयी वह घबराता हुआ सोचने लगा की उसके और उसकी माँ के बारे में इसे कैसे पता चला, भारती उसकी घबराहट पर उसके गाल पर हाथ सहलाती हुई बोली: क्यों डर गए?

राहुल: तू तुम कहना क्या चाहती हो? भारती ने अपनी कमर को काफी धीरे धीरे हिलाना शुरू कर दिया,  राहुल के शार्ट में तने लंड पर अपनी चूत का हिस्सा धीरे धीरे रगड़ दिया और  बोली: मुझे सब पता है की कल रात तुम अपनी माँ के साथ क्या कर रहे थे।

राहुल: तुम बस बाते बना रही हो।

भारती: मैंने कल रात सब कुछ देख लिया समझे।

राहुल: का… का… क्या देखा?

भारती: यही की कल रात तुम सोफे पर आंटी को कैसे चोद रहे थे,

!राहुल: तू… तुमने कैसे देखा?

भारती: अब वह सब जाने दो न ये बताओ तुम और आंटी ये सब में आये कैसे?

राहुल के पास अब कुछ नहीं था कहने को एक तरफ उसकी माँ ने कविता आंटी को भी बता दी थी और अब भारती भी सब जानती थी वह ये सोच रहा था की भला घर में कोई भी ऐसा है जिसे माँ बेटे के बारे में अब नहीं पता।

राहुल: प्लीज किसी को बताना मत यार प्लीज। भारती राहुल की गोद  से उतर कर उसके सामने खड़ी होकर बोली: हम्म ओके नहीं बताउंगी… पर एक शर्त पे, 

राहुल: क्या बोलो।

भारती: जब भी में कहूँगी , तुम्हें आंटी को चुदना होगा और मुझे भी ।

राहुल: माँ… मतलब। 

भारती: यही की जब भी में कहूँगी तुम मुझे मज़ा देने आओगे जब भी चाहे दिन हो या रात दोगे ? राहुल के लिए घबराहट की बात तो ये सब थी ही पर इस बात से उसे ख़ुशी भी थी लेकिन एक और सवाल था उसके अंदर वह ये की क्या वह अब इन तीनो को खुश रख पायेगा। Aunty Ki Chudai Story

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राहुल: पर माँ और आंटी का क्या? भारती सीधी खड़ी होकर बोली: हम्म्म… उन्हें नहीं पता चलना चाहिए खास कर मेरी माँ को हमारे बारे में बिलकुल नहीं पता चलना चाहिए वरना मैं सबसे पहले अपनी माँ को ही बताउंगी की तुम और तुम्हारी माँ क्या गुल्ल खिला रहे है, राहुल एक पल सोचा और फिर हस्स पड़ा, उसकी हसी देख भारती बोली: व्हाट? हस्स क्यों रहे हो?

राहुल: तुम्हारी माँ को पता है सब, भारती के चेहरे पर से उसकी घमंड भरी नेतागिरी की रंग उड़ गयी और वह बोली: क्या कैसे? अब रंग भारती के चेहरे उड़ा हुआ तब और वह देख राहुल घमंड में मुस्कुराता हुआ बोला : तुम सोच रही हो की तुम मुझे ब्लैकमेल करोगी हाँ? हाहाहा!

भारती: हँ झूटी बाते मत बना मुझे पता है अगर ये बात मेरी माँ को पता चली  तो वह कबका मुझे लेकर यहाँ से जा चुकी होती, 

राहुल: अगर ऐसा है तो एक और बात बताऊँ?भारती: क्या? बोलो!

राहुल: आज दोपहर को ही मैंने कविता आंटी के साथ भी वही किया जो कल तुमने देखा और उसी सोफे पर, भारती गुस्से में बोली: खींच के एक मरूंगी तुम्हे कुछ भी उल्टा सीधा मत बोलो!

राहुल: हाहाहा अगर यकीन ना आये तो जाओ जाकर बताओ आंटी को और देखो क्या होता है।

भारती: व्हाट थे फ़क राहुल! कुछ भी मत बोलते जाओ बचने के लिए।

राहुल: ओके यकीन नहीं आ रहा?

भारती: कभी करुँगी भी नहीं।

राहुल: तो एक काम करो… आज रात मैं मेरी माँ और तुम्हारी माँ साथ में सेक्स करने वाला हु, 

भारती: व्हाट!

राहुल: हाँ थ्रीसम सेक्स! देखोगी वैसे भी छुप कर देखने का बहुत शोक है ना तुम्हे!

भारती के पैरो के नीचे से मानो ज़मीन ही निकल गयी जब उसे राहुल को इतने आत्मविश्वास के साथ बोलते देखा।

भारती: अरे यू सीरियस?

राहुल हस्स पड़ा और बोला : हाहाहा कुछ देर पहले मैं ये पूछ रहा था और अब देखो!

भारती: तुम बस बाते बना रहे हो और कुछ नहीं!

राहुल: ठीक है फ़िलहाल सोच लो बाते बना रहा हूँ पर रात तक रुक जाओ फिर खुद देख लेना सब कुछ, जब राहुल इतने भरोसे के साथ बोला तो भारती के पास सोचने के लिए न वक़्त था न ही कोई और चारा साथ ही उसकी सहेली दिव्या ने जो कहा उसे की “जो लड़का अपनी माँ के उम्र की औरत को मज़ा दे सकता है उसमे कुछ तो बात होगी”इस बात पर भारती को भी हलकी संदेह हुई क्या सच मे राहुल उसकी माँ कविता को भी अपने चंगुल में फसा लिया था? Aunty Ki Chudai Story

भारती बोली: यू रात तक रुकूंगी अगर ऐसा कुछ नहीं हुआ तो फिर सोच लेना।

राहुल: सोच लिया समझो,

भारती: नाउ गेट आउट।

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राहुल समझ गया की भारती भी अब उसके वासना के दायरे में आ चुकी है तो फिर हड़बड़ी की ज़रूरत नहीं वह बिस्तर से उठा और बहार जाने लगा भारती चुप चाप उसे बहार जाते देख रही थी, दरवाज़े पर वह पलटा और बोला : वैसे अगर तुम्हे मज़ा ही चाहिए तो बता दोना ब्लैकमेल करने की ज़रूरत नहीं है तुम्हे, इतना कहता हुआ वह दरवाज़े से बहार निकला और अपने रास्ते चला गया,  अंदर खड़ी भारती इन सबको सोच खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी.

राहुल बस बचने के लिए बाते बना रहा है और कुछ नहीं, वक़्त गुज़रता गया और राहुल लिविंग में बैठा टाइम कटा पर भारती अपने कमरे से नहीं निकली वह समझ ही नहीं प् रही थी की क्या सच मे राहुल की बात में सच्चाई थी? क्या सच मे उसकी अपनी माँ भी जो उसे हमेशा सराफत कापाठ पढ़ाती  है वह भी राहुल के साथ…? भारती के पास कोई और रास्ता भी नहीं था  सिवाए रात के इंतज़ार के जल्द ही शाम ढलने लगी और सारिका और कविता खाना बनाकर सबको खाने के लिए बुलाये खाने के टेबल पर खाना खाते वक़्त भी भारती कुछ न बोली नाही उसने  कुछ ठीक से खाया,

सारिका और कविता यहाँ वहा की बाते करती रही और राहुल की नज़र छुप छुप कर भारती को देखती रही, खाने के बाद भारती बिना किसी से कुछ बोले अपने यानि के राहुल के कमरे में चली गयी, सारिका और कविता किचन में बचे हुए काम ख़त्म कर रही  थी ,

जब मौका सही देख कर भारती को मैसेज किया, 

राहुल: हेलो सो गयी?भारती तुरंत उसे रिप्लाई की: नहीं क्यों?

राहुल: लाइट जल्दी बंद कर लेना ताकि माँ और आंटी को लगे की तुम सो गयी।

भारती: क्यों? उससे क्या होगा?

राहुल: समझना यार तुम्हारे जगे होने पर हम कुछ नहीं करेंगे।

भारती: ओके।

राहुल: तुम्हारे सोने के बाद ही माँ मुझे बुलाएगी वरना नहीं।

भारती: हम्म्म और फिर?

राहुल: जब माँ मुझे बुलाएगी तो मैं तुम्हे मैसेज करूँगा और माँ के रूम में जाकर गेट  लॉक नहीं करूँगा बस सत्ता के रखूँगा।

भारती: ओके ।

राहुल: वैसे अभी क्या पहनी हो?

भारती: शट उप,जब जाओगे तब मैसेज करना।

राहुल जानता था की भारती चिड़ी हुई है और अब भी वह उस पर यकीन नहीं कर रही पर उसे भी पता था की आज रात के बाद भारती का नजरिया बदलने वाला है उसने आगे कुछ नहीं  लिखा लिविंग के सोफे पर लेट गया, थोड़ी देर बाद सारिका और कविता भी उनके कमरे में चली गयी,  राहुल लाइट बंद कर इंतज़ार करने लगा की अब कब उसकी माँ का बुलावा आएगा वक़्त गुज़रा और ठीक 1130  बजे सारिका ने राहुल को कॉल किया । Aunty Ki Chudai Story

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राहुल: हेलो माँ!

सारिका: देखो ज़रा भारती सो गयी या नहीं।

राहुल कुछ सेकंड बिना कुछ बोले रहा और फिर बोला: हाँ लाइट कबका उसने बंद कर दी थी सो गयी है।

सारिका: तो फिर गेट खुला है आ जाओ। राहुल उठा और भारती को मैसेज किया।

राहुल: हेलो उठी हुई हो या सो गयी, भारती तुरंत मैसेज किया  मानो वह इंतज़ार में थी की कब राहुल मैसेज करेगा: हाँ उठी हुई हूँ।

राहुल: टाइम हो गया माँ ने रूम में बुलाया है तो मैं जाता हूँ गेट बस सत्ता रहेगा अंदर जाकर लाइट ऑन  रखूँगा अब से कुछ 2 से 3 -मिनट बाद ही आना, 

भारती: ओके। राहुल ने चैन भरी सांस चोरी और फिर उठकर अपनी मंज़िल की और चल पड़ा सारिका के कमरे की लाइट ऑफ थी दरवाज़ा खोल कर जब वह अंदर घुसा तो लाइट ऑन हुई उसकी माँ और कविता आंटी को देख उसके लंड ने झटका देने लगा  सारिका और कविता दोनों ही पूरी नंगी अवस्था में एक दूसरे से गले लगे  हुए बेड पर लेती हुयी थी , राहुल को अदाओ के साथ देख रही थी और राहुल उन दोनों को देख मुस्कुराया, सारिका ऊँगली के इशारे से उसे बुलाती हुई बोली: 

सारिका: गेट बंद कर के लॉक कर दो राहुल और फिर आओ इधर, राहुल पलटा और दरवाज़े को बंद किया लॉक किया और तुरंत लॉक खोल भी दिया ताकि सारिका और कविता को पता न चले की उसने गेट  लॉक नहीं किया, दूसरे कमरे में भारती कुछ देर लेती रही ये सोच कर की क्या सच मे राहुल सच कह रहा था? क्या सच मे उसकी अपनी माँ भी बगल वाले कमरे में राहुल का इंतज़ार कर रही है? क्या सचमे उसकी आदर्शवादी माँ ये सब भी करेगी?

इन सवालो का जवाब एक ही था उसके पास और वह उठ कर दबे पाँव अपने दरवाज़े तक पहुंची धीरे से दरवाज़ा खोल कर पहले बहार का माहौल देखा और काफी अँधेरा था बस था  तो नाईट लैंप की हलकी लाल रौशनी, कमरे से बहार निकलते ही उसे सारिका के कमरे से हलकी आवाज़े सुनाई दी और तब देखा की कमरे के दरवाज़े के नीचे से रौशनी आ रही थी भारती दरवाज़े के पास गयी, पहले अंदर से आती आवाज़ सुनने की कोशिश की और फिर उसे यकीन हो गया की उसकी माँ सारिका और राहुल के साथ अंदर ही है कुछ पलो के लिए वह चुप चाप खड़ी रही फिर राहत की एक सांस लेकर अपने हाथ बढ़ाकर दरवाज़े के नोबे को पकड़ा और काफी धीरे से उसे घुमाया क्यों की दरवाज़ा लॉक नहीं था

वह बिना आवाज़ के खुल गया अब भारती धीरे से दरवाजे को  धकेला  और बस इतना खोला की वह अंदर कमरे की एक झलक देख सके और जैसे ही उसने अंदर देखा तो उसे उसके सरे सवालो का जवाब मिल गया , उसे ये भी पता चल गयी की राहुल सब सच कह रहा था बिस्तर पर राहुल अपनी  पीठ  के बल लेटा हुआ था। Aunty Ki Chudai Story

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उसके दोनों तरफ पूरी  नंगी होकर सारिका और कविता अपने घुटनो पे बैठ  उसके लंड को एक साथ खा रही थी , सारिका राहुल के लंड को पकड़ के अपने मुँह में ले कर चाव से उसे चूस रही थी कुछ देर बाद कविता उसके लंड को पकड़ सारिका के मुँह से निकालती हुई बोली: 

कविता: बस बस सरु अब मुझे भी तो दे, कविता ये कहती हुई थूक से साणे हुए लंड को अपने मुँह में ले कर चूसने लगी बहार भारती को ये देख अपनी माँ से घृणा हो गयी की उसकी माँ क्या सच मे इतनी गिर सकती है उसकी माँ क्या सच मे किसी गैर मर्द के लंड के साथ ऐसे बेशर्मी के साथ खेल सकती थी? वह भी वह मर्द जो की उसके बेटे जैसा है भारती के मन में गुस्से की ज्वाला मुखी फूट रही थी एक पल वह ये भी सोची की अभी अंदर जाये और अपनी माँ को रंगे हाथ पकड़े लेकिन न जाने क्यों भारती के मन  में कही ये भी था  की और आगे देखे, उधर सारिका और कविता इन सबसे अनजान राहुल के लंड को किसी खिलौने के तरह चूस कर खेल रही थी  कविता के मुँह से कभी सारिका अपने मुँह में लेती,

तो सारिका के मुँह से वापस कविता अपने मुँह में ले लेती, कुछ देर बाद सारिका अपना हाथ नीचे ले गयी और राहुल के अंडो को पकड़ सहलाने लगी कविता को लंड चूसने देकर सारिका राहुल के अंडो को चाटने और चूसने लगी, चूसते हुए कभी एक अंडे को अपने मुँह में बाहर लेती और जीभ से रगड़ती हुई उसे सहला जाती राहुल को इतना मज़ा शायद कभी नहीं आया था उसकी ज़िंदगी में जहा दो औरत उसके लंड और अंडो को इतने मज़े के साथ खा रही  हो, कुछ देर में कविता उसके लंड को अपने मुँह से निकाल बोली:

कविता: सरु मुझे भी दे न, सारिका अपने मुँह से निकाल बोली: लेना आ नीचे, कविता अपना सर नीचे ले गयी सारिका अपने हाथो से राहुल के अंडो को पकड़ कविता के मुँह में देने लगी कविता पहले उसे चाटी और फिर अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ से गोल गोल घूमती हुई चूसने लगी, कविता को उसके काम पर छोड़ सारिका अपने मुँह में लंड घुसा कर चूसने लगी और इन दोनों के हरकतों से मज़ा लेता हुआ राहुल मस्ती के मारे कमर के हलके झटके मारने लगा, बहार खड़ी हुयी भारती हलके खुले दरवाज़े से सारिका और ख़ास कर अपनी माँ की ऐसे अश्लील भरी हरकते देख खड़ी थी पर जितना उसे ये अश्लील लग रहा था  उतनी ही लुभावना भी, Aunty Ki Chudai Story

पिछली रात सारिका और राहुल को देख जिस तरह उसे पहले सब गंदा लगा लेकिन बाद में मज़ेदार उसी तरह अब भी ऐसा ही हो रहा था , सारिका और कविता के हरकतों को देख भारती में हलकी उत्तेजना आने लग चुकी थी फरक सिर्फ इतना था की कल सारिका थी और आज उसकी अपनी माँ भी थी अंदर सारिका चाव से राहुल के लंड को अपने मुँह में दबाकर कभी चूसती तो कभी दांतो से हलके दबाके खींचती हुई अपने बेटे को पागल करने लगी वही कविता एक के बाद एक कर राहुल के दोनों अंडो को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी, कुछ देर के बाद सारिका उठी और अपने बालो को पीछे बांधती हुई राहुल को बोली:

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सारिका: मज़ा आ रहा है? राहुल मज़े से उभरता हुआ बोलै: 

राहुल: हाँ माँ बहुत तब जाकर राहुल की नज़र दरवाज़े पर पड़ी जो हलके से खुली हुई थी अब बहार अँधेरा था तो उसे कुछ दिखा नहीं पर उसे यकीन था की दरवाज़े के उस तरफ भारती खड़ी है फिर अगले दिन सब लोग बाहर कही घूमने चले जाते है फिर राहुल ओर भारती अब अकेले थे

राहुल और भारती आपस में चिढ़ाने,लड़ने  और झगड़ने में लगे हुए थे राहुल रह रह कर भारती को परेसान कर रहा था कभी उस पर पानी फेकता तो कभी उसके  बाल खींचता और वही भारती भी उसे गालिया दे देती, पर धीरे धीरे राहुल के साथ होती बहस में भारती को भी मज़ा आने लगा, 

राहुल: अरे पानी ही तो है पागल कुत्ते ने काटा है क्या जो इतनी चीड़ रही हो पानी से है-है-है!

भारती: जहा तक मुझे याद है तुमने तो नहीं काटा मुझे।

राहुल: हाँ मैं तो तुम्हारी माँ को काट रहा था कल रात है-है-है!

भारती: शट उप!

राहुल: तो कल रात कैसा लगा?

भारती पहले तो चिड़ी पर फिर हलकी मुस्कान आ गयी उसकी शकल पर तो राहुल ने पुछा: मज़ा आया देखने में?

भारती: मुझे उस बारे में बात नहीं करनी!

राहुल: सुबह तुम्हारे हाव-भाव देख के तो ऐसा नहीं लग रहा था,

भारती: क्या मतलब?

राहुल तैरता हुआ भारती के पास जाकर बोला : सुबह तो माँ की पीठ पीछे काफी दिखा रही थी अब क्या हुआ? अकेले हो तो दम नहीं,

भारती: हँ जैसे के तुम कुछ कर लोगे।

राहुल: अगर कर दिया तो!

भारती: क्या करोगे!

राहुल: तुम्हारी वर्जनीटी छिन लूंगा है-है-है!

भारती: है-है-है! तुमसे किसने कहा की मैं वर्जिन हूँ अब भी?

राहुल: ओह्ह! अच्छा मैं नहीं मानता ! तू और… नाह!

भारती: तुमने अभी मुझे जाना कहा है बच्चू!

राहुल: तो बताओ किसके साथ?

भारती: जिसके साथ भी तुम्हे क्या! ये कहती हुई भारती पानी में पलटी और पूल के किनारे तैर कर जाने लगी, उधर दूसरी तरफ कविता अब भी घबरा रही थी लेकिन सारिका ठान चुकी थी की आज कविता को बेशर्मी  करवा ही मानेगी,  Aunty Ki Chudai Story

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सारिका: कवी तू ऐसे घबरा मत मुझे पता है न अपार्टमेंट में इस वक़्त इधर कोई नहीं आता गयम का भी वक़्त ख़त्म हो चूका है तू खामखा डर मत, इतना कहती हुई सारिका झुकी और अविनाश के लंड को अपने होंटो से चूम लिया और अविनाश एक टक देखता रह गया क्यों की कभी वह सारिका की बेटी टीना को लाइन मारा करता था और आज उस लड़की की माँ उसके लंड को खुले आम चूम रही थी, देखते ही देखते सारिका उसके लंड को अपने मुँह में लेती हुई चूसकर कविता को दिखने लगी,

कविता ये देख उत्तेजित हो उठी साथ ही उसके अंदर एक जलन भी होने लगी उसके सामने सारिका अविनाश को नहीं ले सकती जो उसके लिए यहाँ आया, एक औरत की इस जलन को सारिका भी जानती थी और वह कविता को और उकसाती हुई उसे दिखाकर अविनाश के लंड को खाने लगी अविनाश भी जान गया था की कविता के अंदर वासना रंग ला रही थी वह अपना हाथ बढाकर कविता के बूब्स को दबाने लगा पर कविता उसे रोकने नहीं गयी कुछ ही पालो में अविनाश कविता के बिकिनी और  ब्रा को खींच उसके बड़े बूब्स बहार निकाल लिये, Aunty Ki Chudai Story

इस तरह अपार्टमेंट के खुले स्विमिंग पूल में अपने आप को नंगी होती देख कविता के अंदर उत्तेजना तीव्र गति से आग की तरह भड़कने लगी, पूल के दूसरी और राहुल भारती को किसी भी तरह से अपने बातो में फसा कर अपनी मंज़िल पाना चाहता था तैरती हुई जब भारती पूल के एक कोने में जा पहुंची तो राहुल भी उसके पीछे जाता हुआ उसे उस कोने में घेर लिया, भारती चाहती तो पानी के अंदर से तैर कर निकल सकती थी पर शायद भारती भी यही चाहती थी की राहुल उसे अपने घेरे में फसा ले।

राहुल: अब कहा जाओगी?

भारती: हटना!

राहुल: क्यों डर लग रहा है?

भारती: मुझे कोई डर -वर नहीं हटो तुम।

राहुल उसके और करीब गया पर भारती उसे रोकने की कोशिश नहीं  की।

राहुल: अब भी नहीं बताओगी क्या?

राहुल भारती के काफी करीब था इतना करीब की उसकी सांसे जब तेज़ होती हुई फूलती तो उसकी बूब्स राहुल के छाती से छु जाते  राहुल के होंठ इतने करीब थे की अगर एक इंच भी वह आगे बढ़ती तो होंटो से होंठ टकरा जाते, भारती तेज़ सांसे लेती हुई बोली: क्या बताना है?

राहुल पानी के अंदर उसकी कमर पर हाथ रख गया उसके चूते ही भारती के बदन में मस्ती की गुड़गुड़ाहट दोड़ गयी।

राहुल: कल देखने में मज़ा आया?

भारती: हाँ! भारती ने एक बार उस दिशा में देखा जिस दिशा में उसकी माँ और सारिका गयी थी फिर तुरंत पलट कर राहुल को देख बोली: बहुत!

राहुल ने अपना मुँह हल्का सा आगे बढ़ाया जिस पर भारती खुद को रोक न पायी अपने होंठ उसके होंटो से टकरा कर चूमने लग गयी ,अपनी माँ के ही तरह उसे भी ऐसे खुले आम किसी को चूमने की बात सोच काफी उत्तेजना हो रही थी, राहुल और भारती पानी में आधे डूबे एक दूसरे को बांहो में लेकर चूमने लगे राहुल को इस बात का रोमांच ज़्यादा था जिस लड़की को वह बचपन से अब तक अपनी बहन मानता था अब वह उसे अपनी वासना के चंगुल में फास चुक्का था,

पानी के अंदर राहुल अपनी उंगलियों को भारती की कमर से रगड़ता हुआ उसकी नाभि से होता हुआ बिकिनी की पेंटी के अंदर ले जाने लगा भारती उसे नहीं रोका बल्कि  और आतुर होती हुई चूमने लगी, राहुल इस समर्थन का फायदा उठता हुआ अपने हाथ सीधा अंदर उसकी चूत पर ले गया धीरे धीरे पानी के साथ चूत को मसलता हुआ भारती को पागल बनाने लगा, ना ही राहुल को ना ही भारती को कोई फ़िक्र थी की इतने खुले में कोई भी आ सकता है, वहा  दूसरी और कविता सारिका की हरकतों को देख अब खुद को संभाल नहीं पा  रही थी सारिका जान बूच कर कविता को दिखाती हुई कभी अविनाश के तने मोठे लंड को हिलती, Aunty Ki Chudai Story

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तो कभी मुँह में लेकर चूस जाती, अविनाश भी कविता के बेबसी का फायदा उठाते हुए कविता के बूब्स और निप्पल को बेरहमी के साथ निचोड़ रहा था अनंत में कविता हार मानती हुई सारिका के साथ मिल ही गयी, सारिका के हाथ से अविनाश के लंड को लेकर वह अपने मुँह में लेकर चूसने लगी बेटी के तरह ही अब यहाँ माँ को भी कोई फ़िक्र नहीं था  की इस सौजनिक स्थान पर कोई भी आ सकता था और इनकी हरकतों को रंगे  हाथो पकड़ सकता था, कविता मदमस्त होती हुई सारिका के साथ मिलकर अविनाश के लंड और अंडो को चूसने और चाटने लगी, 

सारिका: क्यों खुले में करने का अपना ही मज़ा है है न कवी?

कविता अपने मुँह से लंड निकाल बोली: चुप तुम मुझे शर्मिंदा मत कर अब सारिका उठ कर अपनी ब्रा पैंटी निकाल कर खुली आसमान के नीचे नंगी खड़ी बोली: कवी ये देख तुझे उससे शर्म आ रही है तो मुझे क्या बोलोगी, कविता इधर उधर देखने लगी तो अविनाश बोला : घबराओ मत यहाँ सच मे अभी कोई नहीं आता और आएगा तो सामने से गेट खोल कर आना होगा जो आवाज़ करता है।

सारिका बोली: कवी तू भी निकाल फेक और होजा मेरी जैसी और देख कितना मज़ा आता है ऐसे! कविता करना तो चाहती थी लेकिन शर्मा रही थी जिसे देख अविनाश ने उसकी  बिकिनी और  ब्रा के नाड़े को खोल कर खींच निकला, 

सारिका: पेंटी भी निकाल न ऐसे न शर्मा अब, 

कविता: सरु अगर बच्चे यहाँ…सारिका: ओफ्फो बोलना वह नहीं आएंगे भरोसा रख मुझ पर, ये सारिका इस लिए इतने भरोसे के साथ कह रही थी उसे अपने बेटे राहुल पर पूरा भरोसा था की वह भारती के साथ उलझा रहेगा, वह उस और भारती और राहुल अपनी ही दुनिया में खोये हुए थे राहुल भारती को चूमता हुआ अपनी उंगलियों से उसकी चूत को सहला रहा था इन सबमे मज़े में आती हुई भारती राहुल के शार्ट में हाथ डालकर उसके लंड को बहार निकाल लिया,

पानी के अंदर ही अंदर अब दोनों ही एक दुसरो को अपने हाथ का मज़ा दे रहे थे राहुल धीरे धीरे भारती की चूत में ऊँगली घुसाने लगा अंदर जाती उंगलियों की मस्ती में भारती अपने हाथ के गोले में राहुल के लंड को अंदर बहार घुसती, मज़े में आते हुए दोनों के हाथ की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़ती गयी राहुल अपनी आँखों में वासना लिए भारती की नशे में घुलती आँखों में देख रहा था भारती अपने होंटो को काटती हुई अपने हाथो में उसके लंड को कसती हुई हिलाने लगी, पानी के अंदर होते हलचल भारती के जिस्म में वासना को छेद छेद कर उसे सारी हदे पार करने पर मजबूर करने लगी, Aunty Ki Chudai Story

वहा दूसरी और भारती की माँ कविता भी अब अपनी सारी शर्म खो चुकी थी सारिका पूल के एक और अपनी टाँगे फैला कर बैठी हुई थी अविनाश सारिका की चूत को चूस रहा था उसके नीचे कविता घुटनो पर बैठ अविनाश के लंड को खा रही थी, तीनो ही पूरी बेशर्मी के साथ नंगे थे कविता ने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं सोचा था  की वह ऐसा कुछ करेगी

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ये खतरनाक था यहाँ कभी भी राहुल और भारती आ सकते थे और कविता सारिका को इस अवस्था में रंगे हाथ पकड़ सकते थे, लेकिन कविता को इस खतरे का ही एहसास उसे और मज़ा दे रही थी ऐसा खतरा अपनी ज़िन्दगी में पहली बार वह ले रही थी उसके रगो में डर के साथ रोमांच तैर रहा था  और अब वह इस मज़े का पूरा लुप्त उठाना चाहता था  उस तरफ राहुल अपनी जीत की ओर बढ़ चुक्का था उसकी उंगलियों ने भारती के अंदर की हवस को अप्सरा को उठा दिया था भारती अपने जिस्म में घुलती मज़े के सामने हार रही थी पर तभी खुद को संभालती हुई वह बोल पड़ी: राहुल! Aunty Ki Chudai Story

राहुल: हम्म्म… बोलो!

भारती: मुझे घर जाना है।

राहुल: क्यों? क्या हुआ?

भारती सर झुका कर शर्म के साथ बोली: प्लीज मुझे जाना है।

राहुल ने उसे अपनी बहो से छोड़ दिया और वह पूल से बहार निकल अपनी रोबे पहनने लगी राहुल को ऐसे लगा मानो वह जीत कर भी हार गया उसके चेहरे पर निराशा छा गयी और वह पानी में आँखों में निराशा लिए देखता रहा, भारती पलट कर बोली: घर की चाबी है तुम्हारे पास?

राहुल: हाँ है।

भारती: तो चलोगे नहीं मेरे साथ।

राहुल: कहा!!?

भारती: घर पता है न घर में कोई नहीं है अभी राहुल पानी से बहार उछल पड़ा उसकी ख़ुशी की कोई सीमा नहीं रही भारती मुस्कुराती हुई उसे आँख मारी और आगे आगे चल दी।

 राहुल उसके पीछे किसी दम हिलाते कुत्ते की तरह निकल पड़ा, दूसरी और जब सारिका जान गयी की कविता अब पीछे नहीं हटने वाली तो वह अविनाश को अपनी चूत से हटाकर बोली: अविनाश क्या यहाँ कोई और प्राइवेट जगह है?

अविनाश: मममम… नहीं क्यों?

सारिका: अगर है तो तुम और कविता वह चले जाओ।

अविनाश: मेरे घर चलते है न खाली है। Aunty Ki Chudai Story

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सारिका: नहीं नहीं तुम्हारे घर नहीं कही और कविता उनकी बाते सुन्न तो रही थी पर अपने मुँह से लंड निकाले बिना खा ही रही थी कविता के मैं में भी अब पीछे नहीं था।

अविनाश थोड़ा सोच कर बोलै: हाँ वह गयम का पीछे का रास्ता है गयम के रेस्ट-रूम का वह अभी कोई नहीं है मैं इतने देर वही था।

सारिका: तो ठीक है तुम और कविता वहा चले जाओ, कविता तुरंत उठ कर बोली: और तुम?

सारिका: मैं जाकर बच्चो को देख आती हूँ कही वो यहाँ न आ जाये और भारती अपनी माँ को ऐसे न देख ले है-है-है!

कविता: पर तुम नहीं…सारिका: घबराओ मत मैं यही रहूंगी चिंता मत कर तू जा।

अविनाश: मैं हु ना टेंशन मत लो अंदर बिना किसी डर के कर सकते है सब कुछ, सारिका उठ खड़ी हुई और अपनी बिकिनी वापस पहन कर कविता को उसकी बिकिनी के ब्रा-पंतय देती हुई बोली: अब जल्दी जा टाइम बर्बाद न कर, कविता कपडे पहनती हुई बोली: पक्का न… तू जाना मत कही प्लीज, 

सारिका: अविनाश इससे ले जाकर मज़े देकर चुप कराओ है-है-है!

कविता: चल हट! Aunty Ki Chudai Story

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सारिका अपने रस्ते चल पड़ी अविनाश कविता के हाथ पकड़ उसे स्विमिंग पूल के पीछे से लगे एक दरवाज़े के अंदर ले गया ये अपार्टमेंट के गयम का रेस्ट-रूम का पिछले दरवाज़ा था अविनाश अंदर पहुँच दरवाज़ा बंद कर कविता को अपनी बांहो में खींच लिया और चूमने लगा कुछ देर चूमने के बाद कविता बोली: पक्का यहाँ गयम में कोई नहीं आएगा न?

अविनाश अपने शार्ट से लंड निकाल कर बोला : कोई नहीं एक परिंदा भी पर नहीं मारता यहाँ, कविता के कंधो को पकड़ वह उसे नीचे बैठाया और अपने लंड को उसके मुँह में ठोसकर अंदर बहार करने लगा कविता के सर को पकड़ अविनाश अपने लंड को पूरी बेरहमी के साथ उसके हलक तक उतारता हुआ चोदने लगा कुछ ही पलो बाद कविता साँसे न ले पाती हुई उसके लंड को निकाल कर ज़ोर से ख़ास पड़ी, दोनों कुछ पल शांत रहे पर तभी इन दोनों को चौकते हुए बहार गयम से एक औरत की आवाज़ आयी: हेलो! कोई है वहा? 

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