By | February 27, 2023

Aunty or Maa ki chudai ki:हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब, आज मैं आपका दोस्त राहुल एक नयी कहानी सुरू करुगा,

पिछले बार आपने देखा कैसे मेरे दिमाग में मेरीआंटी कविता के लिए कामुक विचार बनने लगे सुबह सुबह वह झाड़ू लगा रही थी. तो आइए आगे सुरू करते है।

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पहल तो करनी ही थी वरना बात नहीं बनेगी, मैं किचन जाने के लिए सोचा आंटी की मदत करने के बहाने आगे बढ़ता हूँ की तभी साला घर की घंटी बजी.

अब इस वक़्त कोन होगा? माँ को आने में तो अभी टाइम था और न ही भारती होगी, आंटी ने तो कहा था  की ये दोनों 22 बजे तक नहीं आएंगे.

मैं जल्दी से दरवाज़ा खोला तो लो माँ खड़ी थी यार अब इनको क्या जल्दी थी!.

माँ मुझे देख बोली: तुम क्यों ऐसे मुँह बना रहे हो? 

कविता किधर है? तभी कविता आंटी किचन से बोली: यहाँ हूँ किचन में.

मैं कुछ बोला नहीं दिमाग में गुस्सा भी था की माँ क्यों इतनी जल्दी आयी।

 माँ के हाथ में शॉपिंग का बाग था  वह उसे सोफे पर रख और किचन को चली गयी.

मैं बैग के अंदर झाँकने लगा सोचा की मेरे लिए कुछ हो तो देख लू.

पर ये क्या? अंदर विक्टोरिया’स सीक्रेट की ब्रा पेंटी की 2  सेट थी और कुछ और कपडे तुरंत माँ किचन से आयी और बोली: हे! तुम्हारे काम की चीज़ नहीं है इसमें. Aunty or Maa ki chudai ki

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मैं धीरे से बोला: देख ली मैंने माँ मेरे ही काम की चीज़ है माँ मेरे गाल पर थप थपाती हुई बोली: है पर अभी नहीं.

माँ ने  शॉपिंग बैग उठाया और वापस किचन के दरवाज़े पर जाकर कविता आंटी से बोली: कवी मैं नहाके आती हूँ.

अंदर से कविता आंटी बोली: हाँ ठीक है, चलो अच्छा हुआ माँ नहाने जाएगी और मुझे आंटी के साथ अपनी बात बढाने का मौका मिलेगा.

माँ सीधे अपने कमरे को गयी और जैसे ही उन्होंने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया तो मैं सीधे किचन को गया.

किचन में आंटी सब्जी काट रही थी मैं उनके पास गया और बोला: मैं कुछ मदत करू?

आंटी बोली: आज तुम कुछ ज़्यादा ही पीछे लगे हुए हो मेरे बात क्या है?

मैं: वह… वह कुछ और करने को नहीं है ना बोर मार रहा था।

आंटी: सब समझती हूँ मैं वैसे कुछ नहीं है तुम्हारे लिए करने को.

मैं: सब्ज़ी मैं काट देता हूँ कहते हुए मैंने सामने पड़ा खीरा उठाया तो वह मेरे हाथ से छीनने लगी और बोली: ओफ्फो रखो उसे उधर धो के रखे है गन्दा मत करो.

मैं: मेरे हाथ कहा गंदे है.

आंटी: हाँ हाँ न जाने कहा कहा पकडे होंगे उस हाथ से दो इधर.

मैं: वह तो आप पकड़ रहे थे.

ये मैंने उस मतलब से कहा जब वह क्रीम लगाने के बहाने मेरे लंड को पकड़ रही थी.

वह भी ये जान गयी और मुझे देख मुस्कुराती हुई बोली: चुप रहो सारिका आ गयी है सुन्न सकती है

मैं: अरे आंटी माँ तो अपने कमरे में है कुछ नहीं सुनेगी आप टेंशन मत लो.

आंटी: जो भी हो चुप रहो अभी और वह इधर दो.

वह मेरे हाथ से खीरा छीनने के लिए खिचा पर मैं भी ज़ोर से पकड़ा रहा.

आंटी: चुप चाप जाओ अभी दो तुम्हारा खीरा काट दूंगी चलो भागो।

आंटी अब कुछ ज़्यादा ही घुल मिल कर बाते कर रही थी मैं उनसे और आगे सुनने के लिए बोलै: मेरा खीरा… वह क्या है?।

आंटी मुस्कुराती हुई खीरे को छोड़ दी और बोली: तुम्हारे हाथ में खीरा है ना तो तुम्हारा खीरा बोली आंटी बात पलट रही थी पर मैं ऐसा नहीं चाहता था. Aunty or Maa ki chudai ki

मैं बोला: वैसे खीरा भी मस्त सब्जी है.

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आंटी अपने काम को करती हुई बोली: क्यों?

मैं: सलाद बना सकते हो जब चाहिए और…मैं चुप रहा तो वह मुझे देख बोली: और?

मैं क्यों बताऊँ आप को तो सब समझ आता है न खुद ही जान लो.

आंटी कुछ बोलती इससे पहले एक आवाज़ आयी: किसे सब समझ है?

मैं और आंटी एक साथ पलट कर देखे तो पीछे माँ खड़ी थी और ये क्या! माँ सिर्फ टॉवल ओढ़ के खड़ी थी उन्हें देख मेरे तन बदन में आग लग गयी.

टॉवल उनके आधी जांघ से भी ऊपर थी और ठीक उनके बूब्स पर टिका कर बंधी हुई थी.

कविता आंटी भी उन्हें देख बोली: ये क्या तुम यहाँ? और ऐसे?

माँ: हाँ वह नहाने घुसी तो देखि शैम्पू ख़तम हो गया है

आंटी: हाँ तो मुझे बोल देती मैं लेके दे देती न ऐसे बहार निकल के आने की क्या ज़रूरत थी?

मैं बस चुप रहा एक तो आंटी सुबह ने आग लगा रखी थी और अब माँ टॉवल में आकर आग को और भड़का रही थी.

मेरे शार्ट के अंदर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा।

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माँ: अरे सोचा

 की तुम काम कर रही हो तो क्यों तुम्हे बुलाऊँ वैसे भी घर में ही हूँ और तुम और राहुल ही तो हो. Aunty or Maa ki chudai ki

आंटी: हाहाहा! तो क्या आधी नंगी घूमोगी?

माँ मेरे गाल पर हाथ फेरती हुई बोली: अरे मेरा बेटा ही तो है यहाँ और वैसे भी तुझे पता भी है की नयी वाली शैम्पू है किधर?

कविता आंटी: हाँ वह तो मुझे नहीं पता.

माँ: हाँ तो उसी लिए मैं ही आ गयी, इतना कहती हुई माँ किचन काउंटर के नीचे की शेल्फ खोलने के लिए मेरे तरफ पीठ  दिखा कर झुक गयी है.

हे  भगवान् माँ जैसे ही झुकी उनका टॉवल और ऊपर गया और मुझे अंदर का सारा नज़ारा दिख गया,

माँ जान कर ये कर रही थी या पता नहीं वह ऐसे झुक कर अपनी बिना पेंटी पहने नंगी गांड और पीछे से चूत की दबी होंटो का आकर्षक नज़ारा मुझे दे रही थी.

मैं झट से आंटी को देखा तो वह मुझे देख रही थी मेरी नज़र मेरी माँ की गांड पर थी.

वह तो उन्होंने पकड़ ही लिया आंटी माँ को हटाती हुई बोली: तू रुक मैं निकाल के देती हूँ.

आंटी नीचे कब बोर्ड की तरफ देख रही थी तो माँ पलट कर मुझे देखि और आँख मार दी अब समझा माँ सब जान बूच कर दिखा रही थी.

मुझे बेमतलब उकसाने के लिए मैं भी मौका देख पीछे से उनकी टॉवल को थोड़ा सा उठाया उठाते ही मेरा हाथ उनकी मुलायम गांड की दरार से छू गया.

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माँ हलके से उछल पड़ी और आंटी का ध्यान न आने के लिए झूठी हिचकी की आवाज़ बना ली.

आंटी इतने में एक नयी बोतल शैम्पू निकाल उठ खड़ी हुई और बोली: पानी पीलो ये रहा शैम्पू.

मैंने अपना हाथ माँ के पीछे से जल्दी से निकाल लिया पर बेडा गर्ग टॉवल वैसी ही ऊपर को रहा. Aunty or Maa ki chudai ki

 आंटी भी हमारे तरफ देख रही थी तो मैं हाथ लगा के ठीक भी न कर सका माँ किचन से जाती हुई बोली: हाँ रूम में है पी लूंगी.

माँ तो चली गयी पर आंटी की नज़र ने उनकी उठी हुई टॉवल और उनकी नंगी गांड का निचला हिस्सा देख ली वह यकीनन सोचेगी ही ये कैसे हुआ पर वह वापस अपने काम में लग गयी मानो उन्होंने ना कुछ देखा न उस बारे में बात करना चाहती हो.

जब माँ के कमरे की लॉक होने की आवाज़ आयी तब आंटी ने कहा: तुम्हारी माँ काफी मॉडर्न हो गयी है.

मैं: हाँ वह तो हमेशा से वैसी ही है आप भी बन जाओ.

आंटी: नहीं नहीं कोई ज़रूरत नहीं मुझे नहीं घूमने ऐसे टॉवल में.

मैं: अरे मैं तो मॉडर्न कपड़ो की बात कर रहा था वैसे आप तो टॉवल में माँ से भी ज़्यादा कमाल की लगोगी.

आंटी: तुम फिरसे शुरू हो गए अब चलो जाओ इधर से पागल लड़का अभी देखे कैसे तुम्हारी उटपटांग बाते सारिका सुन लेती.

कुछ भी मत बोला करो ऐसे मैं चुप हो गया बात तो सही थी कही माँ कुछ और सुन लेती तो आंटी के साथ मेरा खेल शुरू होने से पहले ही ख़तम हो जाता.

फिर आंटी ने पूछा: वैसे… सारिका क्या ऐसे घूम लेती है घर पे?

मैं इसे अच्छा मौका समझा और बोलै: अरे उसमे क्या है मैंने तो उन्हें बिना कपड़ो के भी देखा है.

आंटी आँख फाड़ कर मुझे देखने लगी और फिर बोली: कब?

मैं: ऐसे जब कोई न हो घर पे तो गर्मियों में तो अक्सर वह छोटे कपडे ही पहनती है।

आंटी: कोई कुछ बोलता नहीं उसे? तुम्हारे पापा कुछ नहीं बोलते?

मैं: अरे वह जब घर पे नहीं होते तब अक्सर मैंने उन्हें कपडे बदलते भी देखा है.

आंटी: की! वह सब नहीं देखनी चाहिए तुम्हे. Aunty or Maa ki chudai ki

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मैं: अरे मैं और माँ काफी फ्रेंडली है उन्हें कोई शर्म नहीं मेरे सामने मैं तो उनका प्यारा  बेटा हूँ न.

आंटी: जो भी हो गलत तो लगता ही है.

मैं: अच्छा… ये गलत लगा आपको और जब आप मुझे क्रीम लगा रही थी तब?

आंटी: तो उसमे क्या हुआ बस क्रीम ही तो लगायी न.

मैं: आपने भी तो अपनी टांग दिखाई ऊपर तक क्रीम लगायी हो दिखने के लिए.

आंटी: हाँ तो बस…मैं उन्हें टोकता हुआ बोला: तो उतना ही तो माँ ने टॉवल पहनके भी दिखाया तो बात एक ही है ना.

आंटी: अब… अब तुम बहस मत करो जो भी है बस चुप हो जाओ अब.

मैं कैसे चुप होता? मैं तो इस बात को और आगे बढ़ाना चाहता था और फिर बोलै: और फिर आपने तो अब मुझे पूरा नंगा भी देख लिया खुद ही नहलायी और फिर मेरे… उस पर भी… क्रीम लगाए तो अब कैसा शर्म आप करो तो ममता मेरी माँ करे तो घंटा.

आंटी चुप होकर मुझे देखि और फिर अपना काम करने लगी मानो मैंने उनकी नाड़ी पकड़ली हो कुछ सेकंड बाद वह बोली: पागल चुप रहो अब ये बात मत करो फिर से कही सारिका आ गयी और सुन लिया तो.

मैं: आप न खामखा डर रहे हो अब तक तो माँ नंगी होकर नहाना शुरू कर दिया  होगा.

आंटी: राहुल! कुछ भी मत बोलो वह तुम्हारी माँ है.

मैं: आप तो नहीं न इसी लिए तो आपसे इतना अच्छा लगता है बात करने में.

आंटी: पागल तुम मार खाओगे अब.

मैं हाथ में पकडे खीरे से उनके बाज़ू पे धीरे से मार कर बोलै: अच्छा… अच्छा मरोगी… मरोगी हाहाहा!

आंटी: राहुल तुम सच मे पिटोगे मुझसे.

मैं उन्हें और उकसाता हुआ उनकी कमर पर खीरे से मारता हुआ बोला: पीटो पीटो हाहाहा!

आंटी मुड़ी और सचमे मेरे हाथ पर ज़ोर से दे मारी एक थप्पड़ और वापस अपने काम करती हुई बोली: अब इससे भी ज़ोर से पड़ेगी सोच लेना. Aunty or Maa ki chudai ki

दर्द तो हुआ पर आंटी को पटाने के लिए एक मार क्या 1010 भी खाने को तैयार था ।

मैंने खेरा लिया और उनकी गाउन के ऊपर से उनकी गांड पर दे मारा और बोला: मुझे मारोगी हाँ.

आंटी इस पर गुस्सा तो थी पर साथ ही उनके शकल पर हलकी मुस्कान थी वह मेरे हाथ पर ज़ोर की चींटी दे मारी फिर खीरे को पकड़ खींचती हुई बोली: दो इधर उसे इधर दो.

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मैं भी खीरे को अपनी तरफ खींचा वह अपने तरफ फिर से खींचती हुई बोली: ओफ्फो राहुल ज़िद मत करो छोड़ो इसे.

मैं एक आखिरी बार ज़ोर से खींचा अपने तरफ वह मेरे तरफ आने लगी और उसके साथ ही खीरा दो टुकड़े में टूट गया वह लड़खड़ाई और पीछे की और गिरने गयी तो मैंने उनकी बाज़ू पकड़ खींचा.

मैंने कुछ ज़ोर से ही उनकी ब्याह अपने तरफ खींच दी, वह इतना लड़खड़ा गयी की मेरे तरफ घूमती हुई गिरने लगी हड़बड़ी में मैंने हाथ में पकडा खीरा छोड़ा और एक हाथ उनके उनकी नावी पर जा पकड़ा.

यूं तो मैं संभल गया था पर झूठा नाटक करने लगा की मैं संभाल नहीं सका.

फिर उनके गाउन के ऊपर से उनकी बांयी बूब को निचोड़ता हुआ उन्हें अपने पास खींच खुद भी पीछे को जाने लगा वाह क्या मज़ा आया उस छोटे से पल का जितना भी शुक्रिया करू कम ही है.

आंटी अपनी सारा वज़न मुझ पर देती हुई पलट कर मेरे सीने से अपनी पीठ  के बल चिपक गयी.

मैं पीछे जाता हुआ अपने एक हाथ से उनकी बूब को अच्छे से दबा डाला, साथ ही जो दूसरा  हाथ सामने उनकी नावी पर था  उसे गाउन के ऊपर से ही नीचे उनकी जांघो के बीच उनकी चूत की “व्” अकार के हिस्से पर ले गया.

लड़खड़ाती हुई वह पता नहीं क्यों अपनी जंघे खोल गयी गाउन के ऊपर से ही मेरा हाथ और अंदर उनकी गर्म चूत पर जा पहुंचा.

मैं पीछे दिवार से जा टकराया और वह मेरे सीने पर आ गिरी.

मेरा लंड इस अचानक हुए हरकत से तन्न गया और उनके कपडे पर से उनकी गांड को दबा गया, सामने अपने हाथ की ऊँगली थोड़ा अंदर को लिया और उंगलिया उनकी गाउन के साथ उनकी चूत की होंटो को मसल गयी.

वह एहसास ही शायद काफी था की मेरे लंड से मेरा सारा पानी छुड़वा  दिया, मेरी उंगलियों को कपडे के ऊपर से भी उनकी चूत की होंटो की करवट महसूस हो रही थी. Aunty or Maa ki chudai ki

मेरा ऊपर वाला हाथ भी कपडे के ऊपर से उनकी बूब को मसलता हुआ निप्पल को निचोड़ गया.

आंटी: आह्हः!

मैं: आंटी चोट लगी क्या?

मैं जनता था की उनकी ये आह क्यों निकली पर उन्होंने बात बदलते हुए कहा: वह… नहीं… वह पैर मचल गया छोड़ो मुझे.

मैं एक बार ओर उनकी चूत पर कपडे के साथ ऊपर से उंगलियों को दबा कर रगड़ा और इस बार उनकी आह और तेज़ हो गयी।

आंटी: आह! राहुल! छोड़ो मुझे मैं चाहता तो उन्हें ज़बरदस्ती पकडे रख सकता था,  पर अगर उन्होंने रुकने को कहा है तो मानना  ही पड़ेगा क्यों की अगर लड़की कहे नो तो मतलब “नो!”

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मैंने उन्हें छोड़ दिया और वह संभालती हुई खड़ी हो गयी, फिर हल्का गुस्सा और मुस्कान के साथ मेरे छाती पर धड़ा धड़ 3-4  बार अपने दोनों हाथो से मारने लगी.

मैं हस्ता हुआ हाथ आगे बड़ा कर उनकी मार को हाथो में खाता रहा, मारती हुई वह बोली: बदमाश बदमाश बदमाश! 

निकलो इधर से वरना सच मे मार के लाल कर दूंगी.

मैं: अरे… आराम से माँ सुन लेगी, इस बात पर वह चुप हो गयी फिर मेरे शार्ट पर उभार देख और हाथ घुमा कर मेरे लंड पर थप्पड़ दे मारा, दांत चबाती हुई धीरे से बोली: जाओ इधर से.

मैं दर्द के मारे अपने 11 इंच लंड को पकडे ओर बोला: आह्हः!

फिर झुक गया और मुँह छुपा कर काफी ज़्यादा दर्द होने का नाटक करने लगा आंटी बोली: लगा न? अच्छा हुआ बात नहीं सुनोगे तो ऐसा ही होगा.

मैं वैसे ही झुका रहा और लंड पकडे हुआ नाटक करता रहा तब जाकर आंटी को लगा की मुझे सच मे काफी ज़ोर से लग गयी.

वह घबराती हुई बोली: राहुल क्या हुआ ज़ोर से लगा क्या?

मैं कुछ नहीं बोला और नाटक जारी रखा और फिर आंटी की आवाज़ में प्यारआने लगा वह बोली: अरे सॉरी राहुल ज़ोर से लग गयी क्या कुछ तो बोलो बेटा.

मैं सर हिलाकर हामी भरी उनकी शकल को देखना नहीं चाहता था वरना मेरी नौटंकी पकडे जाने का डर था.

आंटी मेरे पीठ को सहलाती हुई बोली: चलो आओ.

वह मेरे हाथ को पकड़ बहार को ले जाने लगी. Aunty or Maa ki chudai ki

मैं भी नाटक मैं उस्ताद लंगड़ा लंगड़ा कर चलने लगा वह मुझे किचन से लिविंग रूम ले गयी और 3 सीटर वाले सोफे पर बीच में बैठाया.

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वह मेरे बाए तरफ आ कर बैठ गयी मैं अपनी आँख बंद किये रखा मानो काफी दर्द हो रहा हो.

बात तो ये थी की मैं उनसे नज़र नहीं मिलाना चाहता था वरना, शायद मैं हस पड़ता और नाटक पकड़ा जाता.

मैं आँखे बंद किये रहा पता नहीं क्या हो रहा था.

तभी एहसास हुआ की मेरी शार्ट में पिछले बार की तरह आंटी सीधे हाथ घुसाकर मेरे लंड को पकड़ लिया.

उनके पकड़ते ही मेरे तन बदन में रोमांच दौड़ गया और मैं हल्का सा उछल पड़ा ओर आह बोलता हुआ उन्हें ये दिखा दिया की मैं तो दर्द के मारे उछला हूँ.

वह मेरे तने सख्त लंड को धीरे धीरे सहलाती हुई बोली: माफ़ कर दो प्लीज मुझे नहीं पता था की ज़ोर से लगेगा.

बेचारी आंटी और कमीना मैं उनकी ममता का कितना गन्दा फायदा उठा रहा था.

मैं बोला: आह बहुत दर्द हो रहा है, मेरे ऐसे कहने पर वह और अच्छे से अपने कोमल हाथो में मेरे लंड को पकड़ ऊपर नीचे सहलाने लगी दर्द का नाटक और अंदर अत्यंत आनंद का अनुभव.

अब मैंने आँखे खोली और सच कहु तो अब डर भी नहीं था.

उनके हाथो में मेरे लंड को इतना मज़ा आ रहा था की अब नाटक करने की ज़रूरत नहीं थी.

मैं मस्ती में मज़ा ले रहा था, आंटी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाई जा रही थी धीरे धीरे.

लंड के चमड़े को ऊपर नीचे रगड़ने लगी, फिर दबाकर बोली: कहा दर्द है बताओ यहाँ?

वह थोड़ा थोड़ा कर मेरे लंड की पूरी लम्बाई को दबाती हुई पूछने लगी: यहाँ? यहाँ? बोलो ना.

मैं बोला: पता नहीं पूरा दर्द हो रहा है अचानक से वह मेरे लंड के मुँह को पकड़ लिया और मेरे लंड ने दो बूँद पानी छोड़ दी.

वह उसे अपने ऊँगली के साथ मलती हुई मेरे लंड के सर को गोल गोल सहलाने लगी वह!  Aunty or Maa ki chudai ki

सच कहु तो आंटी की ममता भरे हाथो में जादू था मैं पूरे मज़े मैं डूबा चला गया आँखे बंद कर मुँह ऐसे ही बना के रखा,

मानो दर्द हो रहा हो की तभी आवाज़ आयी: ये क्या हो रहा है?

आंटी ने झट से मेरी शार्ट से हाथ निकाल लिया है भगवान् ये तो माँ थी! आंख खोलकर देखा तो माँ नहाकर लम्बी गाउन पहनकर आयी हुई थी.

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कमर पर हाथ रख हम दोनो को हैरानी से देख वह दुबारा बोली: क्या कर रहे हो तुम दोनों?

आंटी: वह वह सारिका इसे…

मैं: यह चोट लग गयी माँ.

आंटी को लगा की मैं उन पर इलज़ाम लगाऊंगा बेचारी घबराई आवाज़ में बोलने लगी: वह… वह मैं…मैं उन्हें टोकता हुआ बोला: ये किचन से आवाज़ देने लगी कुछ काम के लिए.

मैं हड़बड़ी मैं उठ कर जाने लगा तो पैर फिसल गया मेरा.

माँ : तो?

मैं: मैं गिर गया सोफे पर और…

माँ: और?

आंटी: वह… वह इसके वहा पे लगा सोफे का पैर.

माँ पहले हस्स पड़ी ज़ोर से और फिर गंभीर होती हुई बोली: ओह गॉड! ऐसे कैसे वहा लगा?

मैंने चैन की सांस ली, की चलो माँ मान गयी बाल बाल बच गए, वरना सारे खेल का खीमा बन जाता.

माँ मेरे बगल में बैठ गयी और बोली: काफी ज़ोर से लगा क्या? डॉक्टर के पास तो नहीं ले जाना होगा?

मैं: नहीं नहीं डॉक्टर के पास नहीं जाना. Aunty or Maa ki chudai ki

माँ मेरे शार्ट के बटन को खोलने को हाथ बढ़ायाऔर बोली: दिखाओ ज़रा.

मैं झट से उन्हें रोका और बोला: अरे नहीं पता नहीं ये अचानक से मेरे अंदर शर्म कैसे आ गयी.

माँ: ओफ्फो दिखाओ कही सूजन तो नहीं आई।

आंटी चुप चाप बैठी रही आंटी के मुँह में मनो शब्द ही नहीं थे कहने को वह बेचारी सच मे सोच रही थी की उनके कारन मुझे चोट लग गयी.

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माँ ज़िद करने लगी और बोली: अच्छा कविता हाथ डालके कुछ कर रही थी मुझे दिखा नहीं सकते हाथ हटाओ अपना.

मैंने अपना हाथ हटा लिया फिर माँ मेरे शार्ट की बटन खोली और फिर मेरे ज़िप को खोल शार्ट को ढीला किया जैसे ही वह ढीला हुआ मेरा तन्ना हुआ लंड तपाक से बहार उछल पड़ा.

दोनों ही महिलाये सहम गयी एक सेकंड के लिए मेरे अकार को देख और फिर माँ बोली: ये… ये ऐसे क्यों?

माँ के तो मानो लब्ज़ ही निकलने बंद हो गए शायद आंटी के सामने थी उसी लिए।

वरना  माँ को अब मुझसे क्या शर्म कल रात तो अपनी गांड भी चुदवाई थी मुझसे, ज़रूर आंटी को दिखाने के लिए माँ ऐसे ढोंग कर रही थी.

मानो पहली बार देखा हो फिर माँ ने हाथ बढ़ाया और मेरे तने हुये लंड का अकार को अपने हाथ में संभालती  और हलके से दबाती हुई बोली: शायद थोड़ी सूजन है.

उनकी आवाज़ में निरिक्षण कम और दोहरा मतलब ज़्यादा सुनाई दे रहा था।

आंटी चुप चाप माँ को देखने लगी कैसे भला कोई माँ अपने बेटे के लंड को ऐसे हाथ में ले रही थी. Aunty or Maa ki chudai ki

इसके बाद माँ अपने हाथ से मेरे लंड के चमड़े को पूरा नीचे उतारी उसके चमकदार सर को ऊपर गोला करती हुई बोली: ऐसे करने पे दर्द हो रहा है क्या?

मैं क्या कहता उनके ऐसे करने पे और साथ ही उन दोनों की मौजूदगी में मेरा तो मज़ा ही मज़ा था.

लेकिन दर्द भरी आवाज़ में बोला: हाँ थोड़ा माँ उठी और बोली: रुको मैं तेल लाती हूँ.

आंटी हैरानी से माँ को देखा और साथ ही मैं भी भला माँ के मन में क्या चल रहा था?

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आंटी: तेल क्यों?

माँ अपने रूम को जाती हुई बोली: मसाज आयल है मेरे पास उससे ठीक हो जाएगा, आंटी ने मुझे देखा और शर्माने लगी.

वह बोली: थैंक यू तुमने सारिका को ऐसा कहा वरना वह मुझे डाटके मार ही देती बेचारी उसके बेटे का ये हाल जो किया मैंने.

आंटी ने सीधे मेरे लंड को पकड़ा, वह भी माँ की तरह उसे सहलाती हुई उसके चमड़े को कभी ऊपर तो कभी नीचे करने लगी वाह्ह्ह! मस्ती की लहर में आहे निकल रही थी.

लेकिन मैंने ऐसा दिखाया मनो दर्द हो रहा है आंटी कर क्या रही थी ममता थी ये उनकी या कुछ और बिना समझे आगे कुछ उनको बोल भी नहीं पा रहा था.

तभी माँ अपनी मसाज आयल की छोटी शीशी लायी और वापस मेरे बगल में बैठ गयी। Aunty or Maa ki chudai ki

माँ को देख आंटी ने तुरंत मेरे लंड से हाथ हटा लिया लेकिन तभी माँ बोली: नहीं नहीं तू पकड़ उसे और सीधा रख.

हे भगवान्! मेरी माँ आंटी को एक दूसरी महिला को मेरे लंड को पकड़ने को कह रही थी ये सच मे हो क्या रहा था.

मैं सोचने लगा की मैं कही सपने में तो नहीं था? सोचने लगा की क्या आंटी ने मेरे लंड पर जब मारा तो मैं बेहोश तो नहीं हो गया?

 और ये सब बस सपने में देख रहा हूँ आंटी ने मेरे  लंड को वापस पकड़ी और सीधा ररखा, 

फिर माँ मेरे लंड के सर पर 4-5  बूँद तेल डाली फिर अपनी उंगलियों से उसे गोल गोल घूमाती हुई मुझे स्वर्ग का मज़ा देने लगी.

आंटी ने अपना हाथ हटा लिया और फिर माँ ने मेरे पूरे लंड पर तेल को मलती हुई धीरे धीरे हिला हिला कर मुझे चरम आनंद देने लगी।

मुझे मज़ा उनके हाथ से तो था ही लेकिन ये सोच कर और उत्तेजना हो रही थी की सामने आंटी भी बैठी हुई थी और माँ को इससे कोई झिझक नहीं थी.

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तेल की एक बूँद बहती हुई नीचे को गयी और मेरे अंडो के ऊपर जा पहुंची.

आंटी ने हाथ बढ़ाया इस बार बिना किसी झिझक के अपना हाथ मेरे खुले ज़िप से धकेल कर अंदर ले गयी और सीधे मेरे अंडो को हलके से सहलाती हुई पकड़ लिया।

मैं: अह्ह्ह!

आंटी: लगता है यहाँ ज़्यादा दर्द है.

माँ: एक काम करो ये शार्ट नीचे कर लो.

आंटी मेरे शार्ट को खींच कर घुटनो से नीचे कर दिया माँ दोनों हाथो से मेरी जांघो को पकड़ फैलाई और आंटी को बोली: 

तुम जो दर्द हुआ दिखाना ज़रा?

है भगवान् माँ सच मे ये सब कह रही थी आंटी को! 

आंटी वापस बैठी और फिर से मेरे अंडो को पकड़ तेल के साथ रगड़ती हुई सहलाने लगी.

आंटी तेल की शीशी लेकर दो बूँद अपने हाथ में ली और फिर से अंडो को सहलाने लगी.

वही माँ भी लग गयी अपने काम पर।

माँ और आंटी दोनों मेरे लंड और अंडो को तेल के साथ सहलाती हुई मुझे मालिश दे रही थी।

इससे ज़्यादा मुझे और क्या चाहिए था! न लंड हिलाया ठीक से न कुछ न चूत चोदा ओर न गांड न किसी ने मेरा लंड चूसा पर उस पल का क्या कहु.

वह दोनों ऐसे मेरे लंड के साथ तेल लगाते हुए बस छूट गयी मेरी पकड़ अपने जिस्म के लगाम से लंड से बड़े लम्बे गोले सफ़ेद और गाड़े मुठ की पिचकारी फूट पड़ी काबू न कर पाया।

मैं उनके हाथ के सहारे सीधे खड़े लंड से ऊपर की और मुठ की लम्बी रेखाएं मारता गया माँ और आंटी हैरानी से देखने लगी.

फिर दोनों मुस्कुरा उठी और माँ बोली: ओह माय गॉड! Aunty or Maa ki chudai ki

आंटी: ये क्या हो गया?मैं शर्मिदगी के साथ अपने अकड़ते बदन को कांपने से रोकने लगा पर मुठ की लम्बी पिचकारियां जब तक ख़तम न हो गयी मैं पड़ा रहा मनो अब मुझमे जान नहीं मुठ की आखिरी पिचकारी निकलने के बाद माँ ने मेरे लंड को हलके से दबा डाला।

मानो निचोड़ के रस निकाल रही हो.

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आंटी अंडो को सहलाती रही 1 मिनट बाद आँख खोला तो आंटी उठ कर बोली: 

मैं हाथ धो कर खाना बनाने जा रही हूँ तब मैंने उनके हाथ को देखा उनके हाथ में कलाई के ऊपर भी मेरी मुठ की बूंदे चमक रही थी वह किचन को गयी तो मैंने माँ को देखा।

माँ: हो गया दर्द ख़तम?

मैं ज़ोर की साँसे छोड़ता हुआ बोलै: हाँ पर ये क्या था?

माँ ने किचन के तरफ देखा की कही आंटी तो नहीं फिर वापस पलट कर अपने हाथ में लगे हुए मेरे मुठ को मुँह के पास ले गयी उससे चाटती हुई बोली: तुम्हारे दर्द का इलाज मज़ा आया?

वह मेरे कान के पास आयी और बोली: मुझसे ये करवाने के लिए क्या क्या नाटक करते हो तुम.

ओह तेरी माँ को पता था?

माँ उठ कर बोली: चलो साफ़ करो सब, वह मुजसे सामने के टेबल को इशारा किया,

तब देखा की मैंने सामने पड़ी सेंटर टेबल की गिलास टॉप पर अपने मुठ की पिचकारियां मार राखी थी माँ मुस्कुराती हुई ख़ुशी से ‘थैंक यू’ बोली और अपने रूम को चली गयी.

मैं सोचने लगा “नाटक तो किया ही था पर मेरी बेवक़ूफ़ माँ ये सोचती है की ये नाटक मैंने उनसे ये करवाने के लिए किया था”

मन ही मन मुस्कुराया की यार ये क्या से क्या हो गया! Aunty or Maa ki chudai ki

तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना ही, अगले भाग मे बतऔगा की कैसे मैंने माँ ओर आंटी को अब एक साथ चोदा॥

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One Reply to “माँ व आंटी ने पिया लंड का माल Aunty or Maa ki chudai”

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