By | March 11, 2023

Baap Beti Ki Chudai Ka Maza: हैलो दोस्तो,  मैं स्वाति,  पिछली बार आप उसमे आप लोगो ने देखा की कैसे मैं और पापा हमारी वासना के खेल में एक एक पड़ाव पर करते जा रहे थे और अब शाम ढल कर रात होने की थी मैं इंतज़ार में थी की कब माँ और अमित भैया अपने कमरे में जाकर सो जाये और फिर पापा के साथ रात को दुबारा मिलने का मौका मिले अब आगे,

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Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

करीब 10:45  हो चुके थे और मैं अपने बिस्तर पर लेटी इंतज़ार कर रही थी की कब अमित भैया और माँ सोने चले जाये वैसे तो पापा को बोली थी की लिविंग में ही रहे पर पता नहीं की वह सच मे वही रहेंगे या नहीं कुछ और देर लेटी रही और करीब 11 बजे  अपने बेड से उठ कर में चली, दरवाज़े को धीरे से खोलकर मैंने बहार देखा तो सारी लाइट बंद थी  पर टीवी  ऑन था टीवी के सामने मेरे पापा बैठे हुए थे और मैं पापा मम्मी के कमरे की  तरफ देखा तो उनका कमरा हल्का खुला हुआ था और अंदर लाइट भीऑन थी पता नहीं माँ सोई थी या नहीं,

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मैं दबे पाँव कमरे से बहार निकली और एक बार अमित भैया के कमरे की तरफ देखा तो उनका दरवाज़ा बंद था और नीचे से कोई रौशनी भी नहीं आ रही थी तो मैं समझ गयी की वह शायद सो गए वरना अब तक वह मुझे एक-दो मैसेज ज़रूर करते, खैर उनका तो कुछ और ही चक्कर चल रहा था आज जिसे मैं बाद में पता लगाउंगी.

अब तो  मैं दबे पाँव बिना आवाज़ किये पापा के पीछे गयी और उनके आँखों को पीछे से अपने नरम हाथो से बंद कर दी फिर उनके कान में बोली: बताओ कोन!
पापा हलके आवाज़ में हस्स पड़े मुझे अपनी तरफ खीचते हुए बोले: ओह! भूत! Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

Beti ki chudai ki kahani

मैंने पीछे से उनको अपने बांहो में लपेट कर उनके कान को काट कर बोली: अच्छा तो मैं अब भूत बन गयी, दिन में तो बड़े नन्ही परी बोल रहे थे।
पापा मेरे कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ ऐसे खिचा की मैं ज़मीन से उठ कर सामने की और गिरती हुई उनके गोद में जा गिरी वह मुझे देख बोले:
पापा: तुम हमेशा मेरी नन्ही परी ही हो पागल लड़की, मेरी पीठ के नीचे उनके हलके तने हुये लंड को महसूस किया मैं समझ गयी की वह भी मेरे इंतज़ार में उत्तेजित हुए बैठे थे

मेरे ऐसे गिरने पर मेरी छोटी स्कर्ट गिर कर मेरी कमर तक आ गयी थी टीवी की धुंदली रौशनी में भी वह देख सकते थे, मैं कैसे बिना पैंटी के बेशर्मी के साथ उनके सामने सब दिखा कर पड़ी हुई हूँ वह तुरंत अपने रूम के तरफ देख कर बोले: 

पापा: चलो उठो ऐसे मत रहो पता नहीं तुम्हारी माँ सोइ या नहीं, मैं झट से उठ कर सीधे हो कर उनके बगल बैठ गयी और बोली: हम्म्म क्या देख रही है वैसे? आज भी मैच है?

पापा: नहीं नहीं कल के मैच की हाईलाइट लगा के रखा था, 
मैं मुस्कुराती हुई बोली: ओह तो अब आपको कल के मैच की हाई लाइट भी देखनी है फिर उनके करीब जाकर आँख मारती हुई बोली: वैसे कोनसा मैच? टीवी वाला  या हमारे वाला, पापा मेरे नाक को चुटी काट बोले: 

पापा: शहहह चुप बदमाश रुको मैं रूम जाकर आता हूँ

मैं: क्यों?

पापा: रुकना देख के आता हूँ तुम्हारी माँ ठीक से सो गयी है की नहीं,

मैं: हाँ हाँ जल्दी और लाइट ऑफ कर दीजियेगा अपने रूम की,

पापा: वह क्यों?

स्वाति: अगर माँ बीच में उठी तो वह लाइट ऑन करेगी ना  और हमें पता चल जायेगा।

पापा: इन सबमे बड़ी दिमाग चलता है तुम्हारा , 

मैं: हाहाहा! आखिर बेटी किसकी हूँ पापा!

पापा: अरे शहहह! चुप रुको आता हूँ। पापा जल्दी से उठ कर दबे पाँव अपने रूम को गए फिर कुछ सेकंड बाद वापस निकल कर दरवाज़े को बहार से बंद कर मेरे पास आकर बैठ गए।

मैं उनकी एक बाज़ू को अपनी बाहो में पकड़ बोली: Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

स्वाति: हम्म तो माँ सो गयी? खर्राटे भी दे रही है क्या?

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पापा: हाहाहा! हाँ

मैं: चलो तब तो वह अच्छे नींद में है तो पापा!

पापा: हम्म्म? बोलो।

मै अपने दूसरे हाथ की दो उंगलियों को उनके शर्ट के ऊपर से उनकी  छाती पर ले जाती हुई बोली: 

स्वाति: हम कब सोयेंगे?

पापा: क्यों तुम्हे अभी सोना है क्या?

मैं: सोना तो है… पर!

पापा: पर क्या? मैं अपनी उंगलियां उनके छाती पर चलवाती हु नीचे उनकी नावी से होती हुई उनके पायजामे के ऊपर उनके लंड पर ले जाकर बोली: 

स्वाति: पर… सोने से पहले कुछ ऊँच नीच करने का मन हो रहा है मुझे, पापा के लंड पर मेरी ऊँगली लगते ही पायजामे के अंदर उसने एक हल्का झटका दे मारा फिर पापा बोले: 

पापा: क्या करने का मन है? मैं अपने हाथो में उनके लंड को कपडे के साथ पकड़ धीरे धीरे सहलाती हुई बोली: स्वाति: बदमाशी!

पापा मुस्कुराते हुए बोले: कैसी बदमाशी?

मैं उनकी  बाज़ू पकड़ी और उससे उनके उसी हाथ की उंगलियों को पकड़ अपनी स्कर्ट के अंदर ले गयी मेरी जांघो की गहराई के पास लगा कर बोली: 

स्वाति: हमारी सीक्रेट बदमाशी पापा!

पापा अपने हाथ को धीरे से और अंदर ले गाये और मैं अपनी जांगे थोड़ी सी फैला ली जिससे उनकी उंगलिया मेरी गरम चूत की रेखा के ऊपर जा लगी, उनके ऐसे छूते ही मैं उत्तेजित हो उठी और अपने हाथ में पकडे उनके लंड को कस लिया।

पापा अपनी उंगलियों को और थोड़ा अंदर ले गए और मेरी चूत के दाने पर रख बोले: इस बदमाशी में तुम्हे बहुत मज़ा आता है न? 
मैं उनके लंड को ऊपर नीचे कपड़े के साथ हिलाती हुई बोली: मममम… बहुत आपको? 

पापा: हम्म्म… मुझे भी, इस पर मैं उनके लंड को अच्छे से दबाती हुई सहलाकर बोली: क्या आपने कभी माँ को किश किया है पापा?

पापा मेरी चूत के होंटो को सहलाते हुए बोले:  Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

पापा: हम्म्म… बहुत वक़्त हो गए अब वह सब नहीं होता, मैं: क्या आपको किश करना है?

पापा: अरे नहीं पागल हो क्या वह ये सब नहीं करेगी अब।

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मैं: मैं उनकी बात नहीं कर रही हूँ अपनी कर रही हूँ करोगे आप? टीवी की धुंदली रौशनी में भी पापा के आँखों में एक अलग सी चमक मुझे दिख गयी मैं उसे उनकी हाँ समझ अपनी होंठ उनके पास ले गयी वह भी झुकते हुए अपने होंठ मेरे पास ले आये, एक पल के लिए पापा और मैं एक दूसरे की चमकती आखो में देखने लगे और फिर होंटो से होंठ लगाकर चूमने लगे उनके चूमने के तरीके से समझ गयी की बेचारे पापा किश करके कई साल हो गए है

वह एक आनाड़ी आदमी के तरह मेरी नाज़ुक होंटो को अपने होंटो में दबा दबा कर चूम रहे थे, फिर जब उन्होंने कोई पहल नहीं की तो मैंने ही अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी,

वह मेरी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसते हुए मुझे चूमने लगे चूमने के साथ ही उनकी उंगलिया मेरी चूत को और मेरी हाथ पायजामे के ऊपर से उनके लंड को सहलाते हुए मज़ा देने लगे, हमने करीब 1 मिनट किश किया और फिर अपने होंटो को अलग कर एक दूसरे को देखने लगे मैं झूटी शर्म भरी मुस्कान दिखती हुई अपनी उंगलियों से अपने होंठ सहलाने लगी जैसे की मनो ये मेरी पहली किश हो, 

मेरी शर्म को देख पापा भी हलके शर्माने लगे ।

मैं बोली: क्या मैंने ठीक से किया पापा?

पापा मज़ाक बनाने के तरीके से बोले: हाँ ठीक ही था, मैं उनके हाथ पे चींटी काट बोली: ठीक ही था! हम्म्म बस ठीक?

पापा हस पड़े तो मैंने अपने दूसरे हाथ से पकड़े उनके लंड को ज़ोर से दबाती हुयी  बोली: ठीक ही था? हम्म बोलिये?

पापा: अह्ह्ह नहीं नहीं बहुत अच्छा था सच मे! मैं उनके लंड को राहत देकर सहलाती हुई बोली: तो और करोगे किश मुझे?

री ऐसी मांग पर पापा मेरे चेहरे के पास अपने होंटो को लाने लगी तो मैं उनके होंटो पर ऊँगली रख उन्हें रोक कर बोली: यहाँ नहीं।

पापा: तो?मैं हैट कर उनके तरफ देख कर बैठी और अपनी जांघो को फैलाकर एक हाथ से अपनी छोटी स्कर्ट उठायी और दूसरे से अपनी चूत पर इशारा करती हुई बोली: यहाँ, उनके चेहरे पर उत्तेजना भरी एक नयी ख़ुशी आ गयी जिसे देख मैं बोली: 
मैं चाहती हूँ की आप यहाँ किश करो मुझे! Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

मैं अपनी कमर को पीछे खसकती हुई उनसे और थोड़ी दूर हुई और सोफे के एक छोर  पर पीठ टिका कर अपनी जांगे फैलाकर उन्हें ऊँगली से मेरे पास आने का इशारा किया मेरे इशारे को समझ वह एक बार अपने और अमित भैया के कमरे के तरफ देखे फिर मुझे देख मेरे तरफ बढ़े और झुकते हुए वह अपना मुँह मेरी जांघो के बीच लगाया और देखते ही देखते उनका सर मेरी स्कर्ट के अंदर छुप गया.

मुझे दिख तो नहीं रहा था  लेकिन उनकी गरम सांसे मुझे मेरी चूत के गीले नाज़ुक होंटो पर महसूस हो रही थी, जल्द ही उन्होंने अपने होंटो को मेरी चूत से लगाया और मैं सिहर उठी उनके होंटो के साथ जब उनके सख्त मूंछो के बाल मेरी चूत के दाने से रगड़ी मैं एक पल के लिए अपनी जांघो से उनके सर को दबोच गयी पर जब उन्होंने अपने जीभ को मेरी चूत पर फेरा तो मैं अपनी जांगे पूरी खोल दी और  उन्हें वह मुझे ऐसे करते देख समझ गए की मैं और चाहती हूँ पापा पीछे नहीं हटे और मेरी चूत को अपने सारे तरीके लगाके खाने लगे.

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और अपने होंटो में मेरी चूत के दानो को लेकर चूसते तो कभी अपनी जीभ से उसे टटोलते और अपनी जीभ से मेरी गीली चूत के होंटो को फैलाते तो कभी मेरे अंदर अपनी गरम जीभ को धकेल देते,  मैं आहे निकालती हुई अपने पापा के मुँह का मज़ा लेने लगी फिर मुझसे रहा नहीं गया और अपने कपडो  को पकड़ कर एक ही बार में ऊपर खींचती हुई पूरी नंगी होकर बैठ गयी, जितना मज़ा उनके हरकतों से मिल रहा था  उतना ही मज़ा मुझे उन्हें करते हुये देखने में आ रहा था

मैं धीरे धीरे बेसूद होती हुई अपनी जागे हाथो से पकड़ कर फैलाती गयी और वह बड़े चाव से मेरी चूत को खाने लगे, कुछ ही देर बाद उन्होंने चूत खाने के साथ नीचे से अपनी दो ऊँगली मेरे अंदर घुसानी शुरू कर दी मैं अपने होंटो में अपनी आहे दबायी पड़ी नशे की सागर में डूबने लगी जैसे जैसे हर पल गुजरता गया वैसे वैसे मेरी चूत में उनकी उंगलिया और उनका मुँह और तेज़ी से चलने लगा, अगले 5 से 7 -मिनट वह ऐसे ही करते रहे मैं अपनी कमर को उनके चेहरे के तरफ धकेलती हुई उन्हें और करने को कहती गयी फिर मैंने अपनी आँखे बंद कर अपनी हाथो को कस्ती हुई अपनी सिसकारी  दबा गयी,

मैं काफी ज़ोर से झड़ पड़ी मेरा सारा बदन ढीला  पढ़ गयी और मैं सोफे पर पीछे की और लेटी गयी , मानो बेहोश ही हो गयी मेरी हालत को देख पापा रुक गए और अपने मुँह और उंगलियों को मेरी चूत से अलग कर लिए कुछ देर बाद मैं उठ कर उन्हें देखा  तो वह मुझे देख मुस्कुरा रहे थे। Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

मैं उठ बैठी और उनके पास जाकर उनके लंड को दबोचती हुई बोली: 

स्वाति: तो? कैसा लगा?

पापा: अब क्या कहु अच्छा लगा, मैं उनके लंड को सहलाती हुई बोली: 

स्वाति: मेरा स्वाद कैसा था?

पापा: हाहाहा तुम्हारा स्वाद? हम्म्म बढ़िया था,मैं उनके होंटो को चाटती हुई अपने ही स्वाद का मज़ा लेती हुई उन्हें दिखा और  जिस पर वह काफी मस्त हो उठे और मेरे हाथो में उनका लंड ऊपर नीचे झटके खाने लगा, उनके होंटो को चूमना बंद कर मैं बोली: 

स्वाति: हम्म्म नॉट बेड  हाहाहा! अब मुझे भी चाहिए आपका स्वाद, इतना कहकर मैं पापा के शर्ट को खींच निकाली और फिर उनके पायजामे के नाड़े को खोलती हुई बोली: 

स्वाति: निकालिये न इसे भी,

पापा: ये भी? यहाँ?

स्वाति: मैं: अरे वाह मैं यहाँ पूरी नंगी बैठी हूँ आप ये भी नहीं निकाल सकते क्या?

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पापा: पर यहाँ अगर…

स्वाति: मैं: शठ…मैंने  उन्हें कुछ नहीं बोलने दिया  और सोफे से उतर कर उनकी ढीली पढ़  चुके पायजामे को खींचती हुई उनके टाँगो से निकाल फेकि, अब हम दोनों बाप बेटी अपने लिविंग रूम में पूरे नंगे बैठे हुए थे न कोई शर्म थी हमें न ही किसी के आने का डर वैसे डर तो था  पर वही डर इसे और भी मज़ेदार बना रहा था ,

मैं और पापा पहली बार ऐसे पूरे नंगे हुए थे एक दूसरे के सामने लेकिन कमरे में सिर्फ टीवी की रौशनी थी उन्हें नंगा कर मैं वापस सोफे पर चड़ी  और उनके नंगे तने लंड को अपने हाथो में लेकर सहलाती हुई हिलाने लगी, वह मुझे देख मज़े में बैठे रहे और मैं वक़्त बर्बाद न करती हुई उसे अपने मुँह में लेली मुँह में लेकर अपने पापा के लंड को मैं अपनी जीभ से चाटा और फिर चूसती हुई उन्हें उनके हिस्से का मज़ा देने लगी, पापा के मुँह से हलकी मस्ती की आहे निकल रही थी.

और उसे सुनती हुई मैं उनके लंड को मज़े से चूस कर खा रही थी उनके लंड को अपनी जीब से ऊपर से नीचे तक चाट कर साफ़ किया, और मैंने  उनका पूरे स्वाद का मज़ा लिया , फिर लंड से निकलते नमकीन रस के स्वाद को चखती हुई मैं कभी उनके लंड को अपनी दांतो से काट जाती और वह कमर के झटके खा जाते कुछ देर बाद वह इतने मज़े में आने लगे की वह अपना एक हाथ मेरे पीछे मेरी गांड के पास ले गए, Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

फिर मुझे उनकी ऊँगली की नोक मेरी गांड की छेद पर टटोलती हुई महसूस हुई मैं उसके मज़े में उनके लंड के सर को काट दिया,  वह उसके जवाब में मेरी छेद पर ऊँगली दबाने तो कभी खुजलाने लगे अपने हाथो में उनके लंड को पकड़ हिलाती हुई अपने मुँह में लेती गयी, वह आराम से बैठ कर मज़े में आते हुए मेरी गांड में धीरे धीरे हलकी ऊँगली घुसाने लगे,  उनका लंड पल हर पल मेरे मुँह के अंदर लोहे जैसा सख्त होने लगा.

मैं जान गयी की अगर यही करती रही तो वह जल्द ही झड़ जायेंगे, पर मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहती थी मेरे मन  में तो आज की रात लम्बी बनाने की थी उन्हें कम मज़ा देती हुई मैंने  उनके लंड को हिलाना बंद कर दिया और बस मुँह में लेकर चूसती रही, कुछ देर ऐसे करने के बाद मैं उठ कर बोली: 

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स्वाति: अच्छा लगा आपको?

पापा: हाँ पर हुआ नहीं मेरा तुम रुक क्यों गयी? मैं नादान बनती हुई मासूम सी शकल में मुस्कान लेकर बोली: क्यों न साथ में एक दूसरे को एक साथ मज़ा दे पापा?

पापा: वह कैसे मैं तुम्हे और तुम मुझे?

मैं: हाँ पर अब मुँह में नहीं, पापा को शायद पता था की मैं किश दिशा में जा रही हूँ और वह चौकते हुए बोले: तो? तो कैसे? मैं ऊँगली से उनके लंड को छु कर बोली: 

स्वाति: आपका ये…फिर मैं अपनी चूत को छु कर आगे बोली: 

स्वाति: मेरे इसमें।

पापा: क्या? नहीं नहीं बिलकुल नहीं वह सब बिलकुल नहीं 

मैं: पापा आप घबराओ मत अगर हम इतना सब कर सकते है तो…

पापा: बस बस इतना ही सब वह सब बहुत ज़्यादा गलत हो जायेगा.

मैं: कुछ गलत नहीं होगा अब तक जो किया वह भी नहीं और अब आगे भी नहीं.
पापा: बस बोल दिया ना नहीं,

मैं: प्लीज पापा!

पापा: नहीं मतलब नहीं।

स्वाति: मैं ज़िद्दी होती हुई हद बढाती हुई उनकी गोद में चढ़ गयी और अपने घुटनो को उनके कमर के बगल में रख उनके लंड पर अपनी चूत सटा कर बैठी।

मैं: नहीं आपको करना होगा। Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

पापा: स्वाति बेटा वह बहुत गलत हो जायेगा ऊपर से तुम…

मैं अपनी चूत के होंटो को उनके सख्त लंड पर रगड़ती हुई बोली: 

स्वाति: ऊपर से क्या?

पापा: आ… को कुछ नहीं।

स्वाति: मैं अपनी चूत की दरार में उनके लंड को फसा कर कमर हिलाकर उसे आगे पीछे करने लगी।

मैं: आपको लगता है की मैं वर्जिन हूँ? पापा मेरी आँखों में देखने लगे मानो पूछ रहे हो की क्या मैं नहीं हूँ?

मैं उनकी आँखों में देख मुस्कुराती हुई बोली: 

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स्वाति: पता है आपको की कई बार मैं किचन से खीरा क्यों ले जाती थी अपने रूम?

पापा: है… हाँ वह तुम अपने आखो पर काट कर लगाती होना? मैं हस्स पड़ी और बोली: 

स्वाति: पर उस खीरे को काटने से पहले मैं उससे कुछ और भी किया करती हूँ। पापा समझ गए थे की मैं क्या कहना चाहती हूँ

नका लंड मेरी बातो पर मेरी चूत पर धक् धक् धड़क रहा था पर फिर भी उन्होने पूछा: क्या?

पापा:  क्या करती हो? मैंने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपना  एक हाथ नीचे ले गयी और फिर उनके सख्त लंड को पकड़ अपनी चूत के होंटो के बीच लगा कर बोली:

स्वाति:  उस खीरे को मैं…कमर को धीरे से नीचे करती हुई मैं उनके लंड को अपनी चूत में धीरे धीरे अंदर लेने लगी, मैं बोली: ऐसे अपने अंदर घुसाती हूँ पापा अह्ह्ह! उनके घुसे हुए लंड को धीरे से बहार निकालती हुई फिर से आगे बोली: 

स्वाति: आह और ऐसे बहार निकालती हूँ ओह पापा! Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

पापा: अहह! पर क्यों? मैं फिर धीरे से अपनी चूत को उनके लंड से धीरे धीरे चुदवाती  हुई बोली: क्की मुझे कोई नहीं चोदता था इसलिए।

 पापा! अह्ह्ह! बहुत अच्छा लगता है मुझे वह ऐसे करने में अह्ह्ह!

पापा: शठ! धीरे बोलो।

स्वाति: मैं: अगर आपने  नहीं किया तो मैं चुप नहीं रहूंगी।

पापा: ओके ओके चुप रहो कर रहे है ना अब बस यही तो सुनना था मुझे मैं मुस्कुराती हुई अपनी कमर को थोड़ी तेज़ी के साथ हिलाने लगी अब मुझे और पापा को कोई नहीं रोक सकता था ना ही वह खुद!

मैं मज़े लेती हुई अपने पापा के लंड को अंदर बहार लेती हुई पागल बनकर उछलने लगी कब से ऐसे किसी मर्द से मैं चुदवाना चाहती थी और ये मर्द मेरे अपने ही पापा थे वह मुझे और ज़्यादा पागल बना रहे थे अगले 2 से 3 -मिनट पापा ऐसे ही पड़े रहे और मुझे अपने ऊपर उछलते हुए देखते रहे फिर उन्हें मज़ा तो आ ही रहा था पर वह ये भी देख रहे थे की क्या उनकी बेटी सच मे ऐसे सब कर सकती थी Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

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उनकी आँखों में मस्ती के साथ वह सवाल चमक रहा था वह पूछ रहे थे की क्या उनकी बेटी जिन्हे वह मासूम समझते है वह इतनी चुड़क्कड़ लड़की है? मैं उनके हाथो को दोनों उछलते बूब्स पर रखे ताकि वह इन बातो को भूल कर मेरे साथ आ जाये मेरी हर उछाल पर चोदते हुए वह मज़े लेने के साथ मेरी बूब्स को दबाते और निप्पल को हलके से निचोड़ने लगे, इससे मज़े में आती हुई मैं और तेज़ी के साथ उछलने लगी कुछ ही देर में मेरी कमर थकने लगी तो मैं बोली:

स्वाति” आप कुछ नहीं करेंगे क्या? पापा समझ गए और अपने कमर को ऊपर की और मारने लगे उनकी मार से पागल होती हुई मैं उनके एक हाथ को पकड़ा और उसकी उंगलियों को मुँह में डाल चाट कर उसे अपने पीछे ले गयी, फिर पीछे उनकी गीली उंगलियों को पकड़ मैं अपनी गांड की छेद पर लगा के छोड़ दी और पापा समझ गए.

वह मुझे अपने लंड से मार मार कर चोदने के साथ ही साथ अपनी गीली ऊँगली मेरी गांड में धकेलने लगे, मुझे काफी मज़ा आने लगा इस बात को सोच कर की पापा कितने समझदार और साथ ही मेरे ही तरह वासना प्रिय है नीचे से अपना लंड घुसाने के साथ वह मेरी गांड भी अपनी ऊँगली से चोदने लगे, मैं अपनी आहे दबाने की जी, जान कोशिश के साथ मज़ा ले रही थी फिर उनके सीने पर हाथ टिकाये नीचे से चढ़ती रही तभी माँ की कमरे से उनकी खांसने की आवाज़ आयी.

अचानक से आयी आवाज़ के साथ मैं और पापा वही के वही रुक गए, पापा की नज़र उनके कमरे के दरवाज़े के नीचे थी वह ये देख रहे थे की कही माँ लाइट ऑन तो नहीं की अगले एक मिनट हम दोनों ऐसे ही बिना आवाज़ किये और बिना हिले ही दरवाज़े के तरफ देखते रहे, उनका लंड मेरी चूत में झटके मार रहा था

और साथ ही उनकी ऊँगली मेरी गांड में ही थी जब लगा की माँ बस अपनी नींद में ख़ास रही थी तो मैं वापस पापा को देख बोली:

स्वाति: मेरे रूम चलिये ना। Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

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पापा: पर…इससे पहले की पापा कुछ बोलते मैं अपने अंदर से उनकी ऊँगली और लंड को निकाली और उठकर खड़ी हो गयी मेरी चूत के रस से सणे उनके गीले लंड को पकड़ मैं खींचती हुई बोली: चुप रहिये और उठिये चलिये ना मेरे रूम मे फिर पापा कुछ नहीं बोले और मेरे खींचने पर उठ खड़े हुए .

मैं उनके लंड को सहलाती और हिलाती हुई अपने पीछे चलवाकर अपने कमरे मे ले गयी और कमरे में घुसते ही मैं नंगी भगति हुई अपनी बेड पर खुद पड़ी और घुटनो पर बैठ घोड़ी बन गयी, अब जाकर मेरे कमरे की रौशनी में वह पहली बार मुझे पूरी नंगी देख रहे थे जब मैं ये बात समझी तो मैं अपनी गांड को दांयी बांयी हिलाती हुई उन्हें और उकसाने लगी जिसे देख नीचे उनका लंड मुझे सलामी देकर सीधे मेरे तरफ उछल रहे थे ..

मैं उन्हें ऊँगली से बुलाती हुई बोली:

स्वाति: आईना पापा क्या वही खड़े देखोगे हाहाहा! उन्होने मुस्कुराते हुए पलट कर दरवाज़े को बंद किया और फिर मेरे पास आने लगे मेरे पास आते ही मैं अपनी जांघो को फैलाकर अपनी प्यासी चूत उन्हें दिखा कर बोली:

स्वाति:चलिए अब अपने काम पर ध्यान दीजिये, पापा मेरे पीछे आये और मेरी गांड को पकड़ पहले सहलाये और फिर अपने लंड को पकड़ मेरी चूत की होंटो पर रगड़ने लगे, मैं मस्ती के साथ चढ़ती हुई बोली:

स्वाति: मममम! अंदर डालो ना पापा!

पापा: शठ! धीरे बगल कमरे में अमित कही उठकर सुन्न न ले

मैं: ओके पर घुसाइये आप वरना मैं चीख कर सारे अपार्टमेंट को जगा दूंगी हाहाहा!

पापा मेरी बात पर मेरी गांड पर एक प्यारी सी थपड मारे और फिर अपनी कमर आगे की और बढ़ाते हुए मेरे अंदर अपने लंड को डाल दिए, मैं: मममम! लव यू पापा!वह मेरे कमर को पकडे और कुछ देर फर्श पर खड़े ही मुझे चोदने लगे मैं अपनी आहों को दबाती हुई अपने पापा से चुदने का मज़ा लेकर पड़ी रही, कुछ देर बाद वह अजीब सी हरकते करने लगे कभी रुक जाते तो कभी चोदते,

मैंने पलट कर उनसे पूछा: क्या हुआ पापा? Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

पापा: अरे वह फर्श बहुत ठंडा है,

मैं: ओफ्फो पापा बेड पर आवा नीचे क्यों खड़े हो? मैं थोड़ी आगे बढ़ गयी और बिस्तर पर वह मेरे बेड पर घुटने टेक कर मेरे पीछे आ गए, मुझे कुछ आगे कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी और वह मेरी चूत में अपने लंड को घुसाकर तेज़ी से अपनी कमर मारने लगे, उनका लंड मेरी चूत में काफी बढ़िया और अंदर तक चोदने लगा और मैं भी मज़े में आती हुई अपनी गांड उनकी आती कमर के तरफ मारने लगी मानो मैं खुद अपनी गांड उनके तरफ मारती हुई चढ़ रही हूँ।

Hindi mai baap beti ki chudai

इसे देख वह भी पूरे जोश में आने लगे फिर मेरी कमर को अपने हाथो में पकड़ वह मेरी गांड को अपने तरफ खींचने लगे और मेरी चूत को अपने लंड पर मारने लगे।

मैं: आह्हः! पापा! ओह!पापा: चुप शठ! धीरे!मैं उन्हें उकसाने के लिए बोली: और तेज़ पापा मुझे और तेज़ चाहिए पापा और!पापा चोदते हुए मेरी गांड पर मारकर बोले: शठ! चुप रहो स्वाति!

मैं: नहीं अगर आप ने अच्छे से नहीं किया तो मैं चुप नहीं रहूंगी, इसपर पापा सच मे आक्रामकता के साथ मेरी चूत से अपने लंड को निकाल बिस्तर पर खड़े हो गए और मैंने पलट कर देखा की वह क्या कर रहे है

मैं: क्या हुआ पापा?

पापा: अभी करता हूँ तुम्हे चुप, ये कहते हुए वह खड़े खड़े ही अपने टैंगो को मोड़ कर नीचे आये अपने लंड को मेरी चूत से सटाकर मेरी कमर को पकड़ लिए और इसके बाद जो उन्होंने किया मेरी साँसे अटक गयी.

वह अपने पूरे वज़न की ताकत के साथ अपने लंड को ऊपर से नीचे मेरी चूत के अंदर ज़ोर से किसी तलवार के तरह उतार दिया ।

मैं: अहह!मैं जान गयी की मैं अपनी आहे अब रोक नहीं पाऊँगी तो अपनी तकिये पर मुँह दबा लिया और पापा पूरे ताकत के साथ नीचे की और मारते हुए मेरी चूत में अपने लंड को घुसाते गए मुझे इतना मज़ा आज तक नहीं मिला था ,

भी मैं पूरी मज़े में अपनी गांड ऊपर की और कर देती हुई उनके लंड को लेने लगी और वह घाचा घच नीचे मेरी चूत में देते गए।
मैं तकिये में दबी आवाज़ में बोल पड़ी: मममम! पापा!पापा: हाँ बोलो! Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

मैं: ममममम मममम मैं…मेरी…होने – है!मेरी इस दबी आवाज़ को समझ कर पापा और ज़ोर ज़ोर से नीचे की और दबाते हुए मारने लगे उनका लंड मेरी चूत को पूरी गहराई तक चूत को खोल के चोद रहा था.

मैं ये सोच की पापा कितने आक्रामक होकर मुझे चोद रहे है, इस बात से और भी ज़्यादा मस्त होती जा रही थी उनकी ऐसी ताकत और बेरहमी उनकी बेटी के ऊपर मुझे बस सारी रात उनसे चुदने की इच्छा हो रही थी पर मेरा जिस्म मेरा साथ छोड़ रहा था

स्वाति: : ममममम! मममम! पापा!उनके लंड के ज़ालिम चुदाई पर मेरी चूत आखिरकार हार मान गयी मैं दबी सिसकारियों के साथ झड़ पड़ी पर वह ना ही मुझे सुने और ना ही वह रुके वह बस मुझे चोदते ही चले गए,

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मेरी झड़ती और सुन्न पड़ती चूत में वह अपने लंड को और ज़ोर से मारते गए मुझसे अब बरदास्त नहीं हो रहा था और मैं किसी मछली के तरह छटपटाती हुई उनके लंड को खुदसे अलग कर अपने हाथो से अपनी चूत छुपाती हुई बिस्तर पर गिर्र गयी, अगले करीब 4-5 मिनट मुझे ना कुछ सुनाई दिया और ना ही कुछ पता चला की मैं हूँ कहा या क्या हो रहा है हिम्मत करके आँखे खोली तो सामने पापा खड़े थे वह मेरे सर को सहला रहे थे इतने देर पर मुझे अब जाकर एहसास हुई।Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

पापा: चलो तुम आराम करो बेटा मैं चलता हूँ अब मैं आँखे बंद कर एक पल ही हुई की तभी मैं झट से उठ गयी और बोली:

पापा! आपका?

पापा: मेरा क्या?तब मेरी नज़र ऊके लंड पर गयी वह अब भी खड़ा था पूरे लोहे के तरह जिसे देख मैं समझ गयी की उनका अभी हुआ नहीं मैं उन्हें निराश नहीं करना चाहती थी.

वह भी मेरी इतनी अच्छी चुदाई करने के बाद तो कभी नहीं, मैंने हिमायत जुटाती हुई उठी फिर सीधे नीचे फर्श पर अपने घुटनो पर बैठ उनके लंड को अपने हाथ में लेकर बोली: अब आपकी बारी पापा!वह कुछ बोलते इससे पहले ही मैंने अपने मुँह में उनके लंड को ले लिया और उनके लंड से सिर्फ मेरी चूत की महक और उस पर लगे मेरी रस का नमकीन स्वाद आ रहा था.

अब मैं अपने सर को आगे पीछे हिलाती हुई उनके लंड को कुछ ही देर अपने मुँह में चोदती रही फिर वह बोल पड़े: रुको निकलने वाला है वह अपने लंड को मेरे मुँह से खींच निकालने की कोशिश केआर रहे थे पर मैंने नहीं निकलने दिया और निकला तो सिर्फ उनका गर्मा गर्म रस उनका लंड मेरी मुँह में रस के गुब्बारे के तरह फूट पड़ा, इतना सारा मुठ की मैं उसे मुँह में संभाल नहीं पायी और उनके लंड को मुँह से निकालना पड़ा.

और मुझे उनके रस को आधा मैंने अपने गले से उतार केआर पी लिया और फिर मेरे मुँह से बहार निकल कर बहने लगा, फिर पापा उनके मुठ से साणे मेरी शकल को देख बोले: उफ्फ्फ ओह्ह्ह! यह क्या हाल कर दिया मैंने तुम्हारे चेहरे का? सॉरी बेटा !मैं उनके निकले सफ़ेद रस को अपनी जीब से अपने होंटो के अगल बगल लगाती हुई उन्हें दिखने लगी मैं बोली: सॉरी क्यों पापा मुझे तो बहुत पसंद आया ये। Baap Beti Ki Chudai Ka Maza

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मैं अपने मुँह में उनके रस का झाग बनाकर मुँह खोल कर उन्हें दिखाया और फिर एक साथ घूँट कर बोली: मममम युम्मी पापा!

पापा मेरे सर को सहलाते हुए बोले: पागल हो तुम चलो मुँह धोलो।

मैं: बिलकुल नहीं मुझे नहीं धोना।

पापा: ऐसा क्या? तुम्हे ऐसे रहना पसंद है?

मैं: हाँ और अब तो आप भी इसकी आदत डाल लो क्यों की अब से रोज़ आप मेरी यही हालत करने वाले हो आप! पापा अपनी परी की चूत के मज़े लेना है ।

तो दोस्तो इस कहानी मे बस इतना ही आगे की आहुवा ये मैंने आपको अगले भाग मे बतऔगा,

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