By | February 28, 2023

Baap Beti Ki Chudai Story: हैलो दोस्तो, मैं  स्वाति काफी दिन हो गए आप लोगो को अपनी कहानी सुनाये, पिछले मैंने अपनी ज़ुबानी बताया था  की पिछली रात में कैसे अपने पापा के साथ कामुकता भरा खेल खेलकर उनका दिमाग ख़राब कर रही थी। तो चलिए अब आगे बताती  हूँ की अगले दिन क्या हुआ..

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अगले दिन लेट से उठी करीब 12 बजे के आस पास टाइम देखा और फिर  सोचा की भला माँ ने उठाया कैसे नहीं मुझे हर दिन तो 10  बजे से ही दरवाज़ा खटखटाके तोड़ना शुरू कर देती है. तो आगे क्या हुआ? उठ कर बहार निकल कर देखा तो पूरे घर में शांति थी.पहले किचन गयी फिर माँ को कमरे में और फिर अमित भैया के कमरे में भी देखा कोई था ही नहीं, पापा तो चलो ऑफिस गए होंगे पर माँ और अमित भैया कहा गए. मैं अपने रूम गयी और फिर अमित को मैसेज में पूछा की वो है कहा उससे कोई जवाब नहीं आया फिर किचन को गयी और अपने लिए चाय बना कर टीवी देखती हुई चाय पी,

इसके बाद एक घंटे अपना नहाने वगैरा सारे काम कर के और एक काले रंग की टी शर्ट और लूज़ पायजामा पहनकर निकली. माँ ने खाना बना रखा था तो उसमे से थोड़ा खाकर टीना के साथ वापस  में चाट कर रही थी टीना को तो आप लोग जानते ही होंगे मेरी गर्लफ्रेंड  राहुल की दीदी, देखते देखते 2 बज गए और न अमित भैया का कोई मैसेज आया और न ही माँ का कोई अता पता था. कुछ 5 मिनट बाद मेरी फ़ोन बजा  पापा का कॉल आ रहा था। Baap Beti Ki Chudai Story

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मैं: हेलो पापा.

पापा: बेटा तुम्हारी माँ घर पे है क्या?

मैं: नहीं क्यों?

पापा: वो में उसे फ़ोन लगाया पर उठाया नहीं.

मैं: होगी किसी काम पे आप को कुछ काम था क्या?

पापा: नहीं में वापस आ रहा था घर तो सोचा उसे फ़ोन कर लु घर के लिए कुछ सामान लाना हो तो.

मैं: अभी? इतनी जल्दी?

पापा: हाँ कल से नई ईयर की छुट्टी है ना तो आज कुछ ज़्यादा काम नहीं था तो निकल गए तुम घर पे होना?

में: हाँ हाँ घर पे ही हूँ.

पापा: अच्छा ठीक है में रखता हूँ ड्राइव कर रहा हूँ.

मैं: पापा! आप कही रोक के बात नहीं कर सकते क्या?

पापा: नहीं बेटा सिग्नल पे था जब काल किया अभी सिग्नल चुत गया.

मैं: ओके तो रखिये फ़ोन अब.

पापा: तुम्हे कुछ चाहिए क्या?

मैं: मममम… एक बड़ा वाला डैरीमिल्क.

पापा: है है है! ठीक है बेटा लाता हूँ.

मैं: ओके अब फ़ोन काटिये और गाड़ी चलाइये बाई.

पापा: ओके आता हूँ बाई.

पापा ने कॉल कट कर दी लापरवाह है कितने 100 बार डाट चुकी हूँ उनको ड्राइव करते वक़्त कॉल करने के लिए तभी मैं सोचने लगी की पापा वापस आ रहे है घर और मम्मी भी नहीं हम्म्म्म…में मुस्कुराती हुई उठी और अपने रूम जाकर आईने में देख सोची की पापा के साथ अकेले हो तो टॉप और पायजामा कुछ ज़्यादा ही कपडे है मेरे ऊपर.अपना वार्डरॉब खोली और मस्त सी एक मिनी ड्रेस निकाली जो पुरानी थी. तो अब घर पे भी पहन सकती थी अपने टॉप और पायजामा जल्दी से निकाली क्यों की में अंदर कुछ पहनी नहीं थी तो पूरी नंगी होकर आईने में खुद को देख मुस्कुरायी और फिर काली रंग की पैंटी  पहनकर छोटी वाली ड्रेस पहनी. Baap Beti Ki Chudai Story

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ब्राउन कलर की मिनी ड्रेस जो ढीली तो है पर इतनी छोटी की मेरी आधे जांघ से भी काफी ऊपर तक ही थी यकीनन पापा मुझे देख अपनी आँख नहीं हटा पाएंगे आज. वापस लीविंग रूम में जाकर बैठी और पापा का इंतज़ार करने लगी कुछ 20-25  मिनट बाद दरवाज़े की घंटी बजी झट से उठी और मुस्कुराती हुई तो गेट के की होल से देखा तो सामने पापा थे. अपने होठो को काट मैंने अपने ड्रेस को थोड़ी और ठीक कर के ऊपर को खींची ताकि मेरी टाँगे अअच्छे से दिखे फिर दरवाज़ा खोला.

तो सामने सिर्फ पापा नहीं साथ में माँ भी थी सारे सोचे इरादों पे पानी फिर गया पापा मुझे ऊपर से नीचे मेरे कपड़ो को देखा और फिर नज़र अंदाज़ कर अंदर आने लगे और साथ ही माँ भी अंदर आती हुई बोली: ये क्या पहनी हो?

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मैं: क्या हुआ? कपडे ही तो है वैसे आप पापा के साथ कैसे?

पापा अपने रूम को जाते हुए बोले: तुम्हे फ़ोन करने के बाद तुम्हारी माँ का भी फ़ोन आया वापस ये मार्किट में ही थी. तो पिक उप कर लिया जाके मैं दरवाज़ा बंद कर लिविंग में जाकर बैठी और माँ पापा अपने कमरे मे चले गए.

मैं सोचने लगी की माँ अभी क्यों आ गयी इनके साथ अब तो माँ के सामने कुछ नहीं कर पाऊँगी. मेरे मन में हलकी सी निराशा छा गयी, कुछ 10 मिनट बाद पापा घर में पहनने वाले शर्ट और पायजामे में बहार आते हुए मेरे पास आये. मेरे बगल में बैठे और मुझे बड़ी वाली डेरी मिल्क दे कर बोले:

पापा: ये लो!  तुम्हारा डेरी मिल्क मैं ख़ुशी से हस्ती हुई उसे लेकर बोली.

मैं: थैंक यू पापा! पापा कुछ बोलने आ ही रहे थे की तभी माँ कमरे से आने लगी उनके आते ही पापा शांत हो गए और मैंने सोचा की ये क्या कहने आये थे. जो माँ को देख चुप हो गए, माँ मुझे पापा के बगल में हाथ में डेरी मिल्क लिए देख मुँह बनाती हुई बोली.

माँ: हाँ हाँ खरीद के दो सब अब बिगड़ने को तो बचा भी नहीं कुछ.

मैं चिढ़ती हुई माँ से बोली: हम्म… अब आप शुरू हो जाओ आपको क्या मुझे देखते ही कुछ न कुछ बोलने का मन कर जाता है क्या?

माँ: हाँ तुम्हे देखते ही होता है तुम दिखती भी तो वही हो की कुछ मुँह से निकल ही आये?

मैं डेरी मिल्क का एक बाईट खाती हुई बोली: क्यों? मैंने क्या किया?

माँ : मेरी टांगो के तरफ हाथ से इशारा कर बोली: देखो खुद को देखो क्या तरीके है तुम्हारे कपडे पहनने के.

इस पर पापा नीचे मेरी जांघो के तरफ देखते हुये और फिर वापस माँ को देखने लगे. तब माँ पापा को देख बोली.

माँ: आप कुछ बोलते क्यों नहीं इसे?

पापा हम दोनों को एक एक बार देखा और फिर माँ को देख बोले.

पाप : अरे अब में क्या कहु?

मैं ऊँगली से चोकोलेट थोड़ी और पापा के मुँह में देती हुई बोली: 

मैं: आप कुछ मत बोलिये चॉकलेट खाइये है है है!

माँ: हाँ हाँ खिला कर चुप कर दो आपने ही बिगाड़ा है इसे. Baap Beti Ki Chudai Story

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पापा: मैंने क्या किया?

माँ: आप कुछ कहते क्यों नहीं इसे? ये कोई तरीका है कपडे पहनने का?

मैं: क्या कपडे? इसमें बुराई ही क्या है?माँ ताना मारती हुई किचन को जाने लगी और बोली.

माँ: हाँ हाँ कोई बुराई नहीं किसी दिन नंगी भी घूमना घर मे उसमे भी कोई बुराई नहीं.

पापा: उफ़! तुम दोनों थोड़ा भी चैन नहीं देते मुझे टीवी का रिमोट देना ज़रा, टीवी की रिमोट मेरे बाए तरफ था और पापा मेरे दाए तरफ बैठे हुए थे. मैंने टीवी की रिमोट लिया और अपनी दोनों जांघो के ऊपर रख बोली.

मैं: ये रहा, पापा ने पहले मेरी शकल को देखा और फिर किचन की तरफ और फिर अपना हाथ बढ़ाकर जैसे ही रिमोट लेने आये तो मैंने जांगे खोल दी. जिससे रिमोट जांघो के बीच चली गयी पापा ने अपना हाथ रोक लिया और धीरे से बोले.

पापा: अरे दोना रिमोट.

मैं: मैंने अपने होठो पे लगे चॉकलेट को जीभ से चाटती हुई बोली: ले लीजिये न हाथ नहीं है क्या? मेरे हाथ में चॉकलेट लगा हुआ है. पापा अपने हाथ बढ़ाये और मेरी जांघो के बीच रिमोट लेने के लिए ले आये की तभी मैंने अपनी जाँघे मे उनके हाथ को बीच दबा लिया.

पापा: पापा धीमे आवाज़ में बोले: अरे छोड़ो.

मैं: ममम हम्म्म नहीं छोड़ूंगी है है है!

पापा: पागल मत बनो छोड़ो बदमाश. पापा ने ज़ोर लगाए और रिमोट के साथ अपने हाथ को जल्दी से छुड़ा लिया और फिर रिमोट से मेरी जांघ पर मार धीमे आवाज़ में बोले.

पापा: पागल लड़की, फिर वो टीवी में अपना न्यूज़ चैनल लगाने लगे तो मैंने पूछा.

मैं: वैसे पापा आप आज इतनी जल्दी कैसे आ गए?

पापा: हम्म्म वो काम नहीं था ना बताया तो तुम्हे.

मैं: हाँ वो तो पता है पर अगर ऑफिस में काम नहीं हो तो आप तो कभी जल्दी आते नहीं अपने दोस्तों के सात ड्रिंक्स करने चले जाते हो है है है!

पापा: अरे बेटा वो आज मूड नहीं था और दोपहर मे कोन  पियेगा शाम होता तो…में उन्हें टोकती हुई बोली: अच्छा दोपहर में कभी फ्री हो तो आप क्लब तो जाते ही थे पहले ताश खेलने आज तो नहीं गए.

पापा: मूड नहीं था बेटा कल रात नींद भी ठीक नहीं हुई थी मेरी.

मैं  किचन के तरफ देख और फिर वापस उन्हें तीखी नज़रो से देख पूछा: अच्छा ममम… क्यों मैंने आपकी नींद उडा दी कल रात को है है है!

पापा: झट से किचन की तरफ देखे और धीमे आवाज़ में बोले: शठ! चुप बदमाश कल रात मुझे… याद नहीं कुछ चुप रहो.

मैं ऊँगली पे लगी चॉकलेट चाटती हुई बोली: अच्छा कुछ याद नहीं आपको… Baap Beti Ki Chudai Story

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पापा: क्या कुछ भी .

मैं: किचन की तरफ दुबारा देखा की माँ कही देख तो नहीं रही और फिर पापा के और फिर पास होकर धीमे आवाज़ में बोली.

मैं: वैसे माँ ने जो कहा वो अगर में करू तो आपको प्रॉब्लम तो नहीं?

पापा: पापा मेरे तरफ देख बोले: क्या?

मैं आँखे बड़ी कर होठो को काट उनसे बोली: अगर में नंगी घुमु घर में तो है है है!

पापा: मार खाओगी अब तुम चुप हो जाओ सुन लिया, अगर वो तो फिर से शुरू हो जाएगी.

मैं: अच्छा तो मतलब माँ नहीं होती अभी घर पे तो में बोल सकती हूँ ये सब.

पापा: अरे! वो मतलब नहीं है मेरा.

मैं:: उनके होठो पर अपनी ऊँगली से चॉकलेट लगाकर बोली: तो क्या मतलब है बताइये है है है! वो अचानक से अपना मुँह मेरे उंगलियों से हटाकर बोले.

पापा: हैट पागल क्या कर रही हो? चैन से बैठो में थोड़ी सेकंड चुप रही और पापा न्यूज़ देखने लगे. तभी एक आईडिया आया और मैंने चॉकलेट को हाथ में धीरे धीरे उछाल कर कैच करके खेलने लगी और कुछ ही सेकंड बाद जान कर उसे नीचे फ्लोर पर गिरा कर बोली:

मैं: पापा ने पहले नीचे देखा और फिर मुझे तब में नौटंकी करती हुई बोली: … नीचे गिर गयी।

पापा: तुमने गिरायी है गिरी नहीं.

मैं: नहीं गिर गयी हाथ से.

पापा: कल रात को भी यही हुआ था बोतल की ढक्कन के साथ.

मैं उनकी बात पर मुस्कुराती हुई उठी और उनके सामने पीठ दिखाकर झुकती हुई चोकते हुये उठाने लगी. इससे मेरी छोटी ड्रेस का पीछे का हिस्सा ऊपर उठने लगा और इतना ज़्यादा उठा की उन्हें मेरी काली रंग की पैंटी दिख गयी. तभी पापा हाथ बढ़ाकर पीछे से मेरी उठी हुई ड्रेस को पकडे और मुझे वापस खींच कर सोफे पर बैठा कर बोले. Baap Beti Ki Chudai Story

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पापा: पता था यही करोगी बदमाश.

मैं मुस्कुराने लगी तो वो सामने को झुक कर चॉकलेट उठाकर मुझे देते हुए बोले।

पापा: कल से देख रहा हूँ क्या प्रॉब्लम है तुम्हारा?

मैं: अपना हाथ उनके पायजामे पर उनकी जांघ पर रख बोली: मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है और फिर हाथ धीरे से उनकी जांघ पर सहलाकर आगे बोली: शायद आपको ही मुझसे कुछ प्रॉब्लम है. पापा अपनी जांघ से मेरे हाथ को उठाकर उस पर चॉकलेट थमा कर बोले.

पापा: लो खाओ और चुप रहो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है चॉकलेट पकड़ने से उनकी ऊँगली पर थोड़ी लग गयी थी जिसे वो अपने मुँह के पास ले जा ही रहे थे, तो मैं उनके हाथ को पकड़ बोली.

मैं: चोर चॉकलेट चोर इतना कहकर उनके हाथ को पकड़ अपने मुँह के पास लायी और उनकी ऊँगली चाट गयी. वो एक टक किचन और मुझे देखते और फिर अपनी ऊँगली वापस खींच बोले.

पापा: अच्छा तो अब में चोर?

मैं: और नहीं तो क्या?

पापा: मैंने ही खरीद के दी और में ही चोर हम्म्म?

मैं: है है है हाँ नहीं देने वाली आपको थोड़ी भी नहीं चाहे कही भी लग जाये.

पापा: कही भी का क्या मतलब?

मैं: कही भी मतलब चॉकलेट आप कही भी लगा लो में चाट खाउंगी.

पापा: क्या कुछ भी उल्टा सीधा मत बोलो.

मैं मुस्कुराती हुई बोली: में क्या बोली? में तो आपकी उंगलियों की बात कर रही थी आप ही उल्टा सीधा सोच रहे है है है है! तभी माँ किचन से बोली.

माँ: स्वाति इधर आना ज़रा में चिढ़ती हुई बोली: क्यों?

माँ: आओ तो

मैं: पहले बोलो क्या है

माँ: ओफ्फो तू रहने ही दे मत आ आप आइये ज़रा इधर, पापा अपने जगह के पास हाथ रख उठे और बोले: मैं चला वही अच्छा है वरना दिमाग ख़राब कर दोगी. Baap Beti Ki Chudai Story

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मैं हस्ती हुई चॉकलेट खाती हुई देखा की वो अपनी जांघ के पास हाथ नहीं रखे थे उनके पायजामे में एक हलका सा उभार था शायद मेरी बातो का असर हो रहा था उन पर. पापा किचन को चले गए और में थोड़ी देर लिविंग में ही बैठी रही किचन में माँ भी थी, वरना  पापा को परेशान करने वहा भी चली जाती कुछ मिनट बाद माँ किचन से अपने रूम को गयी.

वो अपने रूम जाकर सीधे अपने वाशरूम को गयी जिस्का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ से में जान गयी और उठ कर तुरंत किचन को गयी पापा कढ़ाई में दाल के लिए तड़का बना रहे थे. वो मुझे किचन में आते देख बोले.

पापा: देखो तुम्हारा काम में कर रहा हूँ, नहीं तो तुम्हारी माँ सुनाती तुम्हे.

मैं उनके कंधे पर शाबाशी देते हुए बोली: आह उनको तो बस कुछ न कुछ कहने का बहाना चाहिए आप अब उनके तरह मत बोलो.

पापा: सही तो कहती है अभी वो बुलाई तो तुम आयी नहीं ना.

मैं: ओहो अब आप उनकी साइड मत लेना शुरू करो वरना में आपसे बात नहीं करुँगी.

पापा हस्ते हुए बोले: है है है! जैसे के मुझे कोई फरक पड़ेगा.

मैं झूठा गुस्सा दिखाती हुई उनके पीठ पर धीरे से मारी और बोली: अच्छा नहीं पड़ेगा अगर में आपसे बात न करू तो फरक नहीं पड़ेगा?

पापा भी ताव में बोले: हाँ हाँ कोई फरक नहीं पड़ेगा है है है!

मैं मुँह फूलाती हुई किचन से पाँव पटक पटक के चलती हुई अपने रूम को जाने लगी.

पापा पीछे से बोले: अरे अरे है है है! रुको तो.

मैं वापस पलटकर उनके पास गयी और बची हुई आधी चॉकलेट उनके हाथ में पकड़ा कर बोली: ये लो मुझे नहीं चाहिए आपका चॉकलेटऔर फिर में सीधे अपने रूम को चली गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया. एक उम्मीद थी की पापा हर बार की तरह मुझे मानाने ज़रूर आएंगे पर इस बार तो उनके मानाने वाले खेल का और भी मज़ा लेने वाली थी,मैं अपने रूम में अपने मोबाइल में कुछ करती रही और फिर दरवाज़े पर हलकी सी खत खटाहट हुई.

मैं: गुस्से वाले आवाज़ में बोली: कोन है? कोई कुछ न बोला तो समझ गयी पापा ही होंगे और फिर वो दुबारा खत खटाये.

मैं: कौन है मुँह नहीं है क्या? दरवाज़े पर इस बार थोड़े ताल में खत खटाहट हुई तब उठ कर में गयी और दरवाज़ा खोला वो सामने मुस्कुराते हुए चॉकलेट पकडे हुए थे और बोले. Baap Beti Ki Chudai Story

पापा: गुस्सा हो गयी मेरी नन्ही परी.

मैं पहले मुस्कुरायी जब वो प्यार से मुझे नन्ही पारी बोले और फिर गुस्सा दिखाती हुई बोली: मुझे नहीं चाहिए.

पापा: है है है! पापा से क्या गुस्सा?

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मैं नखरे करती हुई बोली: क्यों क्यों आये अभी मुझसे बात न करे तो आपको कोई फरक नहीं पडेगा ना जाओ आप मुझे भी नहीं करनी आपसे बात, इतना कहकर मैंने दरवाज़ा पूरा खोल दिया पर उनसे बोली नहीं की अंदर आये पर वो समझ गए और रूम के अंदर आ गए.

तब में बोली: अंदर आने किसने कहा?

पापा: ओहो अब क्या में तुम्हारे रूम में भी नहीं आ सकता?

मैं दरवाज़ा वापस बंद लिया और ऊपर लॉक कर दिया. पापा देखने लगे की मैंने दरवाज़ा लॉक क्यों किया पर में कुछ नहीं बोले और उनके सामने से चलती हुई जाकर बेड पर चढ़ने लगी पीछे से वो मुझे देख रहे थे. तो में पहले बेड पर एक घुटना रखा और फिर दूसरी और फिर एक हाथ और घुटनो पे चलती हुई उन्हें पीछे से अपनी जांघो और थोड़ी बहुत गांड का हिस्सा दिखाती हुई बेड के कोने में गयी और पलट कर बैठ गयी. मैं अब अपने हाथो में हाथ मोड़कर मुँह पे झूठा गुस्सा लिए बैठी रही तब पापा मेरे पास आये और मुझे चॉकलेट देते हुए बोले।

पापा’ अच्छा चलो सॉरी अब गुस्सा मत करो.

मैं: हँ मुझे नहीं चाहिए.

पापा: ओफ्फो छोटी सी बात पर रुट गयी मेरी परी.

मैं फिर से मुस्कुराने लगी पर तुरंत मुस्कान को हटाकर गुस्से वाली शकल बनाली तो पापा बोले: अच्छा तो झूठा गुस्सा है हसोगी नहीं हां? इतना कहते हुए पापा थोड़े झुके और झट से मेरे कमर पकड़ मुझे गुड़ गुदने लगे. मैं मचलती हुई खिलखिलाकर हसने लगी इस हरकत से में अपनी टाँगे लहलहाती फिर जिससे मेरी ड्रेस गिरती हुई मेरे कमर पर आ गयी और मैं उन्हें खुले आम अपनी काली पैंटी दिखती हुई हसने लगी काश की वो थोड़ा और गुदगुदाते तो में उनसे लिपट जाती पर वो रुक गए और वापस सीधे होकर बोले.

पापा: चलो अब बहार चलो.

मैं  वैसी ही रही अपने ड्रेस को ठीक करने नहीं गयी और बेझिझक उनके सामने मेरी चुत से चिपकी मेरी पैंटी  का नज़ारा देती हुई मुस्कुराने लगी और बोली: क्यों? बहार क्या करना है आपको.

पापा कभी मेरी शकल तो कभी पैंटी पर नज़र डालते हुए बोले: मतलब?

मैं नादान बनती हुई अपनी एक टांग मोड़ी और उसके पाँव को दूसरे टांग के घुटनो तक मोड़ उन्हें और अच्छे से मेरी जांघो के बीच का हिस्सा दिखती हुई बोली: मतलब बहार टीवी में तो कुछ है नहीं न देखने को.

पापा मुझे मेरी इस हरकत से परेशान होते हुए माथे पर हाथ रगड़ते हुए बोले: अच्छा वो बात नहीं है फिर कही तुम्हारी माँ इधर न आ जाये? Baap Beti Ki Chudai Story

मैं अपने होठो को काट बोली: क्यों? ऐसा क्या करेंगे हम लोग जो माँ आ गयी तो प्रॉब्लम हो जाये?

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पापा: तुम्हारा पता नहीं कल रात की तरह कुछ मन मे अपनी मुड़ी हुई टांग की जांघ पर हाथ रख सहलाकर बोली: क्या?  कल रात मैंने क्या किया? पापा अपने पॉकेट में हाथ डाल और फिर मुझे कुछ देते हुए बोले.

पापा; ये लो तुम्हारा ही है.

तब देखा की ये तो मेरी कल रात पहनी हुई पैंटी थी जो मैंने कल रात हड़बड़ी के बहाने उनके पास छोड़ आयी थी.

मैं: ये आप मेरी पिछली एपिसोड में पड़े थे मैं  पैंटी  को लेकर अपने दोनों हाथ में पकड़ खींचती हुई बोली।

मैं: कल से आप इसे अपने पास ही रखे हो? पापा मेरे बगल में बेड पर बैठ गए और बोले.

पापा: नहीं नहीं कल वो जल्दी में अपने पॉकेट में रख लिया था चलो चलो अब बहार चलते है.

मैं पैंटी को अपने हाथ में घूमाती हुई बोली: ममम हम्म्म पापा बात को मत पलटिये सब जान रही हूँ में.

पापा हाथ बढ़ाकर मेरे कान को पकड़े और बोले: चुप चाप चलो बहार बहुत शैतान बन गयी हो तुम.

मैं हस्ती हुई अपनी पैंटी बेड पर फेकि और फिर उठकर पापा का हाथ पकड़ कर रूम से बहार जाने लगी रूम से बहार निकलते ही माँ की नज़र हम दोनों पर पड़ी वो लिविंग रूम में बैठी हुई थी.

माँ हमें देख पूछी: आप उसके कमरे में थे क्या?

पापा: हाँ क्यों क्या हुआ?

माँ: मुझे लगा की आप वाशरूम गए होंगे.

पापा: नहीं नहीं मानाने गया था इसे रूठ गयी थी मुझसे.

मैं माँ को घमंड के साथ मुस्कुराकर दिखाई तो माँ बोली.

माँ: हाँ हाँ मनाइये आपके इसी लाड प्यार ने इससे ऐसा बनाया है।

पापा मेरे साथ सोफे पे बैठते हुए बोले: अब अपनी बेटी को लाड न करू तो और किसे करूँगा?

मैं पापा के बाज़ू को पकड़ लिपटकर सोफे पर बैठ गयी और बोली: पापा आप समझ नहीं रहे माँ को जलन हो रही है है है है!

माँ: हाँ हाँ जल के भुन्न गयी हूँ. Baap Beti Ki Chudai Story

पापा: है है है! तुम दोनों कितना किट पिट करते हो?

मैं माँ को जवाब देती हुई बोली: हाँ तो माँ अपनी शकल देखो तो जल के भुन्न ही रही हो, इतना कहती हुई में अपने पैर सोफे पर उठाकर मोड़ कर ऐसे बैठी की पापा का हाथ जिसे में पकड़ी हुई थी वो मेरी नंगी जांघो के पास आ गयी. लेकिन माँ की तरफ से वो नहीं दिख पा रही थी,पापा थोड़े से अपना हाथ वापस लेने के लिए खींचे पर में छोड़ी नहीं और पकड़ी रही उनके बाज़ुओ को जकड में अपना सर उनके कंधे पर रख और थोड़ी पास हो कर बैठी.

बेटी ने बाप का माल पिया

तो अब नीचे उनकी हथेली मेरी जांघो से धीरे धीरे छूने लगी वो चुप हो गए थे शायद टेंशन हो रही थी उन्हें, पापा अपने दूसरे हाथ से बगल में पड़ी टीवी की रिमोट उठाया और चैनल बदलने लगे. माँ भी टीवी के तरफ देख रही थी और मेरे दिमाग में ये था की अब और कैसे पापा के साथ मस्ती करू कुछ देर बाद अपना बायीं हाथ उनके पेट पर रख लिया, मानो अपने पापा को गले लगाके बैठ रही हूँ। शायद मेरे इतने करीब होने से उन्हें कुछ होने लगा था पेट पर हाथ रख मुझे उनकी धीरे धीरे बढ़ती दिल की धडकनों की एहसास होने लग गया था, धीरे से में अपने हाथ को थोड़ा नीचे की और उनके नावी पर जा रुकी वो कुछ नहीं बोले,

तो 1 मिनट रुकने के बाद मैंने अपना हाथ और नीचे ले गयी अब मेरा हाथ उनके पायजामे के नाड़े के ऊपर के हिस्से पर था. इतने में उनका हाथ जो नीचे था उसकी उंगलिया धीरे से मचलती हुई मेरी जांघो को हलके से सहलाने लगी. मैंने अपना हाथ उनके नावी से उठाया और अपनी जांघ के ऊपर खुजलाने लगी और खुजलाती हुई अपने कपडे को और थोड़ा ऊपर कर दिया.

इतना ऊपर की वो मेरी काली पैंटी के निचले हिस्से को देख सकते थे साथ ही हमारे इस तरफ से माँ को उस तरफ से कुछ भी दिख नहीं रहा था. मैं और अच्छे से उनके बाज़ू को लिपट और चिपक कर बैठ गयी की इस बार उनकी हथेली मेरी जांघो के और अंदर छू गयी. मैंने दुबारा अपना बाया हाथ उनके पायजामे के नाड़े के ऊपर के हिस्से पर वापस रख दिया। वो धीरे से किशक्ने लगे, मानो मुझसे कहना चाहते हो की मैं ना करू. Baap Beti Ki Chudai Story

माँ है सामने पर में कहा सुनने वाली इस माहौल की मस्ती कुछ और ही थी, हम तीनो ही टीवी देख रहे थे लेकिन मुझे और पापा को ही पता था की सच मे टीवी पर सिर्फ माँ का ध्यान है. मैं अपने हाथ और नीचे ले गयी और अब उनके लंड के ऊपर के हिस्से पर जहा पैंट की ज़िप होती है उस हिस्से पर रख दिया. पापा इस पर अचानक से हलके उछल पड़े मैं मुस्कुरा गयी और नीचे उनके हाथ ने मेरी जांग को थोड़ी ज़ोर से दबा दिया अब उनके पायजामे पे रखा  हाथ की कोहनी ऊँगली को और नीचे की तो एक सख्त चीज़ का एहसास हुआ. मुझे मेरे मन में मस्ती की एक लहर उठ गयी. मैं  माँ को देख रही थी की कही वो इधर न देखे और धीरे कहो तो एक दम धीरे से अपनी उंगलिया और नीचे पापा के लंड के करीब ले जाने लगी.

तभी अचानक से माँ पलट कर पूछी.

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माँ: खाना लगा दूँ क्या?

मैं तुरंत अपना हाथ ऊपर कर लिया, पापा हकलाते हुए घबराहट के साथ बोले.

पापा: बा… बाद… बाद में थोड़ी देर बाद.

मैं : हाँ में भी थोड़ी देर बाद ही खाउंगी पापा के साथ.

माँ मुझे देख बोली: तुमसे पूछ भी कोन रहा है तुम्हे तो जब तुम्हारा मन  किया खाओ. तुममें कुछ न बोली और वो वापस पलट गयी.

मैंने और पापा ने एक साथ चैन की सास ली इसके बाद पापा अपने बगल में रखे सोफे की कुशन ली और अपने गोद में रख उस पर टीवी का रिमोट रख आराम से बैठ गए. तो ये पापा ने अपने पायजामे में बढ़ते उभार को छुपाने के लिए किया था या फिर… क्या ये मेरे लिए कोई ग्रीन सिग्नल था  मैंने दुबारा अपने हाथ को धीरे धीरे नीचे और कुशन के अंदर ले जाने लगी, वही मेरे नीचे उनकी बायीं हाथ की उंगलिया दुबारा मेरी जांघो की मुलायम सतह पर सहलाने लगी.

कुछ ही देर बाद मेरा हाथ दुबारा उनके लंड से थोड़ा ऊपर जा टीका और इस बार कुशन के कारन माँ को देखने का भी कोई डर नहीं था, मैंने बेझिझक अपना हाथ धीरे से और नीचे ले गयी और फिर एहसास हुआ की मेरे हाथ की आखिरी के दो उंगलिया उनके कड़क हो चुके लंड के ऊपर थी. उनके लंड के आकर से समझ गयी की वो भी उत्तेजित हो रहे है उनका सीना थोड़ा तेज़ ऊपर नीचे होने लगा, वो अब तेज़ साँसे ले रहे थे उन्हें उत्तेजित करने में मुझे काफी मज़ा आने लगा.

वो बिलकुल किसी मूरत के तरह बिना हिले बैठे रहे और फिर मैंने धीरे से उनके लंड को पायजामे के ऊपर से अपनी उन दो उंगलियों के नाख़ून से हलके से रगड़ दिया. उनके लंड ने मेरे उंगलियों के तरफ झटका दे मारा पापा तुरंत रिमोट छोड़कर अपना हाथ कुशन के अंदर डाले और मेरे हाथ को पकड़ अपने लंड के ऊपर से हटा दिए. फिर वापस अपना हाथ निकाल लिए.

मैं सर उठाकर उन्हें देखा और उन्होने मुझे देखा फिर मैंने उन्हें अपनी भवरो को उठा कर “क्या हुआ” पूछने का इशारा किया तो वो आँख मींचते हुए- कुछ नहीं” का इशारा कर दिए. हम दोनों वापस टीवी की और देखने लगे और फिर मैंने झटसे अपना हाथ कुशन के अंदर ही अंदर वापस उनके लंड पर पहले की अवस्था में ही अनजान बनती हुई रख दिया. उनका बाय हाथ जो मेरी जांघो के पास था  उसे वो मुठी बनाये बैठ गए मानो जैसे उनसे काबू न हो रहा हो. Baap Beti Ki Chudai Story

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माँ अचानक से पलटी और पूछा: आज क्यों किसी को भूख नहीं लग रही.

पापा: हाँ हाँ लगता है तुम्हे भूख लग रही है चलो खाना खाते है तुम लगा दो.

मैं समझ गयी की पापा शायद मेरी इस बदमाशी से पीछा छुड़ाना चाहते थे.मैंने थोड़ी कस कर उनके लंड को पायजामे के साथ दबा दिया और फिर अपना हाथ कुशन से बहार निकाल लिया. माँ उठ कर किचन को गयी तो पापा तुरंत मेरे कान को पकडे और धीमे आवाज़ में बोले.

पापा: चैन से बैठा नहीं जाता तुमसे क्या?

मैं नादान बनती हुई पूछा: क्यों मैंने क्या किया पापा? क्या हुआ?

पापा: जैसे के तुम्हे पता नहीं बदमाश.

मैं  धीमे आवाज़ में मुस्कुराती हुई बोली: है है है नहीं बिलकुल नहीं पता मुझे बताइयेना.

पापा: चलो उठो अब खाना खा लेते है.

मैं: नहीं पहले आप उठिये.

पापा: नहीं न तुम जाओ प्लेट वगैरा लगाओ डाइनिंग टेबल पर में आता हूँ.

मैं जानती थी वो क्यों नहीं उठना चाहते उनका लंड अच्छा खासा तना हुआ जो था.

मैं: न्यू चलिए साथ में उठते है.

पापा: ओफ्फो क्यों ज़िद कर रही हो?

माँ खाना लेके डाइनिंग रूम को जाती हुई हमारी बात सुन पूछी: क्या हुआ? क्या ज़िद्द कर रही है अब आपकी लाड़ली?

पापा: वो में कह रहा था की तुम्हारी मदत कर दे खाना लगाने में.

माँ ताना मारती हुई: रहने दीजिये कही उसके हाथो की चुडिया न टूट जाए

मैं सर घुमा कर पापा को देख बोली: आपने बस मुझे सुनवाने के लिए कुछ भी बोल्दो. Baap Beti Ki Chudai Story

पापा हसने लगे तो में उठ कर किचन को चली गयी और पापा अपने पायजामे की उभर छुपाते हुए डाइनिंग टेबल की तरफ जाने लगे। मैं किचन से प्लेट लेती हुई उनकी हालत देख मुस्कुराने लगी और तभी वो भी मेरी तरफ देख मुस्कुराकर तुरंत मुँह फेर लिए. अब तो पापा की मुस्कराहट ने बता दिया मुझे की इन हरकतों से उन्हें गुस्सा तो नहीं आया लेकिन उन्हें भी थोड़ी बहुत मज़ा तो आया ही ये मेरे लिए किसी ग्रीन सिग्नल से काम भी नहीं था.

तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना अगले भाग मे बाकी॥

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