By | January 23, 2023

Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:-हैलो दोस्तो, ये पिछली कहानी का भाग 4 है , मुझे उम्मीद है आपको ये कहानी पसंद आई होगी और अगर आपने अभी तक इस कहानी का भाग 3 नहीं पढ़ा तो आप यहा क्लिक करके पढ़ सकते है.
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भाभी पर मेरी नज़र थी की जो मुझसे हैट ही नहीं रही थी. फिर मैंने उससे नज़र मिलायी तो समझ गयी और मुस्कुराते हुए बोली: क्या तुम इतने शर्मा रहे हो. मैं यहाँ तुम्हारे लिए इतनी छोटे कपडे में खड़ी हूँ और तुम ऐसे कर रहे हो जैसे कुछ पहने नहीं चलो उठो और जाओ.

मैंने ये सुनकर अपने गोद में रखी और लो एक ही बार में खड़ा हो गया. खड़ा होते ही मेरा लंड शार्ट में मनो टेंट बनाकर खड़ा था. जिसे देख शोभा ज़ोर से हस्ते हुए बोली: है है है!नॉट बाद हम्म्म. तुम्हरे भैया जैसे ही अच्छे साइज का है. फिर मेरे बैठने के बाद शोभा सोफे के दूसरे कोने पर बैठ गयी. फिर एक कुशिओं उठा कर अपने गोद में रखी. और फिर मेरे तरफ वाली बया पैर उठा कर मेरे तरफ रखा और दूसरा नीचे ही रहने दिया.

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कुशिओं जो उनके गोद में था वह अब उनके दोनों पैरो के बीच मे दबा था.अब भी मैं ये नहीं पता लगा पाया की शोभा ने अंदर पैंटी पहनी है या नहीं.सोफे इतना ही लम्बा था की उनका पेअर ठीक मेरे दये पैर के जांग पर आ गयी पर उससे आगे नहीं की मेरे लंड के ऊपर आये.

अब मेरी हालत ऐसी हो रही थी की दूर से जो भाभी की टाँगे इतनी सेक्सी लग रही थी मेरे इतने करीब थी.और मैं उन्हें हाथ लगाने वाला था की तभी शोभा ने टोकते हुए कहा: बस देखते ही रहोगे क्या?मैं हकलाता हुआ बोला: ओह हाँ हाँ करता हूँ.इतना कहते हुए मैंने लोशन का डब्बा खोल कर उसमे से थोड़ा लोशन अपने हाथ में लिया और उसके पाँव पर लगाना स्टार्ट किया.
शोभा आराम से बैठ कर मुझे देख रही थी. पर मैं उनसे नज़र नहीं मिला रहा था. फिर धीरे धीरे पाँव की एक एक उंगलियों को लोशन लगाकर मसाज करने लगा. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

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इसी बीच कभी कभी उन्हें गुदगुदी लगती तो वह हसने लग जाती थी. मेरे शार्ट के अंदर तो भूचाल मचा हुआ था. उसके बाद मैंने पाव से थोड़ा ऊपर उनके घुटने के नीचे के हिस्से पर लोशन लगाना शुरू किया. और फिर घुटनो पर लगाया. और अब बारी थी उनकी जांघ को लगाने की.पर मेरा हाथ उनके पूरे जांघ तक पहुँच नहीं रहा था तो उन्होंने कुशिओं हटाया और मेरे थोड़ा पास आगयी.

अब जाकर हुआ दर्शन उनके छोटे कपडे के अंदर जिसे उन्होंने कुशिओं से धक् रखा था. वह भी जानती थी की मैं उतावला था अंदर देखने के लिए. और वह उनके होठो में दबाई हुई मुस्कान में साफ़ दिख रहा था.शोभा: हो गयी तसल्ली?मैं बिलकुल शर्मा गया. शोभा ने अंदर गुलाबी रंग की मैचिंग पेंटी भी पहन रखी थी.

जब वह बाद कर मेरे करीब बैठी थो उनके पेअर का निचला हिस्सा ठीक मेरे लंड के ऊपर आ गया. और ये साफ़ था की मेरे लंड का सख्तपन उन्हें साफ़ पता लग रहा था. अब मेरा हाथ उनके ठीक पैंटी को भी छू सकता था पर मैंने जल्द बाज़ी नहीं की.आराम से टाइम लेकर उनके जांगों का मज़ा लेते हुए उनको मसाज दिया.

वह भी कभी कभी आँख बंद कर लेती थी जिससे लग रहा था की उसे भी मज़ा आ रहा है. उसके बाद उन्होंने अपना दूसरा पैर जो नीचे था वह भी उठाकर मेरे गोद पर राखी और बोली: अब इसकी बारी.उसके बाद आराम से टाइम लेते हुए दूसरे पेअर की भी अचे से लोशन लगाकर मसाज किया.
इन सबके बीच वह बस मुझे देख रही थी और ये मुझे पता था इसी लिए मैं उसके तरफ देख ही नहीं रहा था. बस चुप चाप उसको मसाज दे रहा था और रूम में सन्नाटा था.
तभी सन्नाटे को तोड़ते हुए शोभा बोली: यार तुम तो लगते हो मेरे टाँगो में खो गए.तब जाकर उनसे नज़र मिलायी और कहा: नहीं भाभी ऐसा नहीं कुछ. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

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शोभा: तो कैसा है बोलो?मैं: वह बस इतना देर जिसे निहार रहा था वह मेरे हाथ में आ गया तो बस.शोभा हस्ते हुए बोली: पहली बार राकेश भी ऐसा ही था पर उसके बाद तो पूछो मत.मैं: चलिए पूछ लिया. अब बताइये.शोभा: क्या?मैं: वही उसके बाद? क्या हुआ?शोभा: उसके बाद न ओके खुल कर बोलती हूँ. उसके बाद जब भी मौका मिले वह मुझे चोदे बिना नहीं छोड़ते.
मैं: अच्छा भाभी आपको सेक्स में सबसे ज़ादा क्या पसंद है? शोभा: मुझे जब वह रोमांटिक होके करते है तो वह पसंद है.मैं: नहीं नहीं मतलब सेक्स में क्या पसंद है.शोभा: यू मैं की…मैं: मतलब की पोसिशन्स तरीका. चूसना चेतना वगैरा वगैरा.शोभा: ओह्ह! ऐसा. मुझे तो सब पसंद है. (इतना बोलते हुए वह हस पड़ी.)मैं: आप हसी क्यों?

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शोभा: अब क्या बोलू मुझे तो सब पसंद है. कैसा सवाल था ये?मैं: फेवरेट पोजीशन.शोभा: हम्म्म डोगग्य तो सबका फवरोट है उसके बाद यार अब एक्सप्लेन कैसे करू?मैं मज़ाक में बोला: टाइम है ना हमारे पास करके बता दीजिये.शोभा इस पर अपने टाँगो को फैलते हुए एक पैर उठा कर मेरे कंधे पर एक हल्का सा लाथ मार कर बोली:

कहा चालू. इतनी क्या जल्दी है आज ही तो आये हो. चलो देर हो रही है. खाना बनाना है ना.उनके इस तरह पैर फैलाकर मुझे अपनी खुली जांघो का और पैंटी में छुपी चूत का प्रदर्शन करते देखा. मैं सोचने लगा की भाभी कितनी बेशर्म है. और साथ ही कभी न प्यास बुझने वाली सेक्स की आग भी बिखेरती है.

मैं: भैया आएंगे क्या लंच पर?शोभा मेरे गोद से पैर उठाकर नीचे रखी. जैसे ही उसने पैर उठाया झट से मेरे शार्ट में फिर से टेंट खड़ा हो गया. पर इस बार मैंने उसे वैसे ही रहने दिया कुछ छुपाने नहीं गया.उसे देख शोभा हलके से मुस्कुरायी और बोली: नहीं वह नहीं आते वह डायरेक्ट शाम को 7 या 8 बजे आएंगे.

मैंने देखा की भाभी को मेरे शार्ट में खड़े लंड को देख कोई असर नहीं. तो फिर लगा की अब भाभी को ये सब उतनी बड़ी बात नहीं लगती. तो मैं भी पूरा चोड़ा होकर वैसे ही दिखते हुए बोला: तो फिर हम बहार से मंगवा लेते है ना.शोभाबा: क्यों? फिर हम क्या करेंगे?मैं: जो आप चाहो.
शोभा अंगड़ाई लेते हुए अपनी चिकनी कांक मुझे दिखाते हुए बोली: मैं तो सोना चाहती हूँ पैर की अछि मसाज की तुमने.मैं: क्या भाभी सोना नहीं है आपने क्या? जो सोया वह खोया. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

शोभाबा: यहाँ तो ऐसा लग रहा है की पाने वाले सिर्फ तुम हो.मैं: मौका तो दो भाभी. फिर देखना.शोभा तुरंत उठी. मेरे गोद में रखी हुई अपनी लोशन का डब्बा उठाई. और साथ ही उस डब्बे से मेरे खड़े टेंट पे मारा. फिर मेरे सर पर अपने दूसरे हाथ से हलके से दो बार मारते हुए बोली: चलो बहार से ही मंगवाते है. पर कोई ज़्यादा ख्वाब मत देखना.मैं अपने शार्ट पर बानी टेंट को दबाते हुए बोला: क्या भाभी आप खुद ही ख्वाब दो और खुद ही थोड़ो भी.

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शोभा मेरे सामने खाइड बोली: अगर ख्वाब दिया है तो पूरा भी करुँगी पर अभी टाइम दो थोड़ा. आज ही तो आये हो अभी तो बहुत टाइम पड़ा है. ऊपर से कल राकेश भी आउट ऑफ़ स्टेशन जा रहा है.ये सुनते ही मानो और एक दिन इंतज़ार करने का जोश आ गया. इतने में शोभा ने आंख मारते हुए कहा: और हाँ मुझे न बहुत सारी पोसिशन्स और बहुत कुछ करना पसंद है थोड़ा वक़्त और सब्र करो सब बताउंगी.

ओके.इस बात से लगा की ऐसा नहीं की वह चांस नहीं देगी. पर देगी ज़रूर लेकिन थोड़ा टाइम दूँ और इसकी ख़ुशी थी मेरे चेहरे पे. जब वह पलट कर अपने कमरे को जाने लगी तो मेरी नज़र उससे हैट ही नहीं रही थी. उसकी वह छोटी ड्रेस उसका वह खुला पित्त जो ये बताती की कोई ब्रा नहीं अंदर.फिर वह खुली चिकनी गोरी जंघे जिसे मैंने ही अभी अभी लोशन लगा कर चिकना बनाया.

बस शार्ट के ऊपर से अपने लंड को सहला रहा था. अब तक तो एक छोटी बूँद गलीलेपन का दाग भी मेरे शार्ट पर बन गया था. मन तो कर रहा था की बस पीछे से झपट लून उसे. इतने में वह मूड कर देखी और देखते ही उसने देखा की मैं कैसे घूर कर उसे पीछे से देख रहा हूँ. और साथ ही अपने लंड को सहला रहा हूँ. मैंने झट से सहलाना बंद कर लिया. वह हस्ते हुए अपने बालो के साथ खेलते हुए पीछे मुझे देखते हुए बोली: जाओ जाकर हो आओ है है है! तुम्हारी हालत तो देखो. मनो आंख में कोई नशा भर गया हो. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

मैं: सच भाभी नशा तो हो ही गया है पर आपकी.शोभा: इस नशे को बढ़ने दो फिर देखना मज़ा भी ज़्यादा आएगा.इतना कहते हुए वह अपने रूम को गयी पर देखा तो डोर पूरा लॉक नहीं किया. मन में एक हलकी हलचल हुई की तभी एक पांच सेकंड के बाद भाभी ने कहा: इधर आओ ज़रा कुछ देना है.पता नहीं किश उम्मीद में उछाल कर मैं उठा और गया. तभी भाभी ने डोर हलके ओपन किया और कहा: तुमने इतना अच्छा मसाज किया. उस के लिए कुछ तो देना होगा न.
ये लो तुम्हारी प्राइज आज के लिए. पर वापस कर देना मुझे लेने के बाद.इतना कहते हुए शोभा ने मेरे हाथ में एक छोटी सी कपडे का टुकड़ा दिया और जब मैंने वह खोल कर देखा तो बस मेरा लंड थांन के नस्से फूटने वाली हालत की हो गयी. उसने मुझे वही गुलाबी पेंटी दे दी जो वह अब तक पहनी हुई थी.

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इसके बाद उसने कहा: अब जाओ अपने रूम और इसके साथ मज़ा लो. ओके.इतना कहते हुए उसने डोर पूरा लॉक कर दिया और मैं वही डोर के पास उसकी पैंटी को देख मुस्कुराता रहा.और फिर उसे सुंघा और बस ये एहसास ही काफी था की वह धीमी हलकी पसीने सी महक उसकी चूत और गांड की है. बस मैं बाथरूम गया और उसे सूंघते सूंघते चूमते हुए दो बार मुठ मार डाला.कुछ आधा घंटा आराम से मैंने उसकी खुशबू का मज़ा लेते हुए मुठ मारा. और फिर बहार निकला अपने कमरे में की तभी डोर की घंटी बजी. मैंने झट से सोचा की कही भैया तो नहीं आ गए आज लंच के लिए.

शोभा की पैंटी को अपने पिलो के नीचे छुपा दिया और फिर बहार जाने लगा. जैसे ही मैंने डोर ओपन किया उसी वक़्त भाभी भी अपने रूम से वही पहली वाली लम्बी नाइटी पहनकर.तब उन्होंने मुझे इशारा किया की रुको और बोली: मैं देखती हूँ कोन है.इतना कहते हुए उन्होंने जाकर डोर ओपन किया तो एक नायब खूब सूरत शकल के साथ एक और लम्बी औरत खड़ी थी. देखने में थोड़ी उम्र की थी पर तब भी माल लग रही थी. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

शोभा: हेलो श्रद्धा कैसे आना हुआ आज कई दिनों बाद.श्रद्धा: बस ऐसे ही बहार से जा रही थी पर थोड़ा टाइम मिला तो सोची तू अकेली होगी कुछ बाते करके निकलू.शोभा: आओ अंदर आओ.इसके बाद उसने मुझे मेरे रूम के डोर के पास देखा और पुछा: वह कोन है?शोभा: अगर बताउंगी तो तू भी बाकियो के तरह बोलोगी.श्रद्धा: बाकियो के तरह मतलब?शोभा: वह न राकेश का भाई है आकाश मेरा देवर. तुझसे पहले भावना स्वेता और सिमरन मिल के गयी. और साथ ही दुनिया भर की कहानिया भी सुझा के गयी.

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अब तू मत शुरू हो जाना.श्रद्धा हस्ते हुए बोली: है है है! ओके ओके देवर है. ठीक है मैं कुछ नहीं बोलूंगी. कल स्वाति का मैसेज देखा था क्या?शोभा उसे बैठने को बोलते हुए बोली: हाँ तुम बैठो देखा मैंने. फ़िलहाल तुम तो देख ही रही हो टाइम नहीं मेरे पास. सो टाल दिया. और तुम बताओ.तब मुझे याद आया की इससे पहले जो तीन लड़किया आयी थी वह भी स्वाति के मैसेज की बात किये थे.श्रद्धा: कुछ ख़ास नहीं. बस ऐसे ही किसी से मिलने जा रही थी.शोभा: ओहो! किस्से?इतना कहते ही शोभा मुझे देखि और बोली: आकाश शी’स माय फ्रेंड श्रद्धा चाहो तो यहाँ आकर बैठो.श्रद्धा: काफी शर्मीला है शायद.

इतने में मैंने कहा: नहीं आप लोग बात करलो मैं अपना थोड़ा काम कर लेता हूँ.शोभा: हाँ ठीक है वैसे उसका काम हो गया हो तो वापस रख देना मेरे रूम में.श्रद्धा: वह क्या?शोभा: मेरा लैपटॉप किसी काम के लिए चाहिए था उसे.

मैं समझ गया की शोभा अपनी पैंटी की बात कर रही है और ओके बोलकर मैं अपने रूम में आ गया.इसके बाद एक और बार उसकी पैंटी निकाल कर मैंने मुठ मारा और थोड़ी देर के लिए सो गया. Badi Bhabhi Ki Chudai ki Story:

तो दोस्तो आज इस कहनी मे बस इतना ही आगे बतऔगा की भाभी के साथ क्या हुआ ।
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