By | February 8, 2023

Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story: हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब , अगर आपने अभी तक इस कहानी के पिछले भाग अभी तक नहीं पढे तो यहा क्लिक करके  पढ़ सकते है .

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राहुल: करीब  4 बजे जैसे ही दरवाज़े की घंटी बजी मैं बेड से उछल उठा, यक़ीनन ये भारती ही थी, मन  में लड्डू फूटने लगे मानो मेरी कजिन बहन नहीं मेरी गर्लफ्रेंड आ रही हो,

पर मैं ऐसा भी नहीं दिखाना चाहता था की मैं उसके आने से काफी उतावला हूँ.

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अपनी इमेज थोड़ा बनाये रखना चाहता था, धीरे से दरवाज़ा ओपन किया और बहार देखा कोई दरवाज़े का जवाब देने गया ही नहीं, फिर एक बार ओर घंटी बजी तो माँ के कमरे का दरवाज़ा खुला और वह बाहर निकल कर दरवाज़ा खोलने चली गयी.

आंटी दिख नहीं रही थी, शायद दोनों सो रहे थे तब बहार से आवाज़ आयी।

माँ: अरे भारती ! तुम भी आ गयी, अंदर आओ।

भारती : हेलो आंटी.

माँ: कैसे हो बेटा तुम ?

भारती: अच्छी हूँ आप कैसे है?

माँ: एकदम बढ़िया.

भारती: माँ कहा है?

माँ: वह सो रही थी, हम दोनों सो ही रहे थे लंच के बाद, वह भी उठ ही रही थी.

भारती: ओके राहुल वह कहा है?

माँ: दिखा नहीं शायद वह भी सो ही रहा है वरना वह बेल्ल सुनकर दरवाज़ा ज़रूर खोलने आता.

मैं तब झूट मूट की ज्भाई लेता हुआ रूम से निकला और बोला कौन है माँ?

माँ ने पलट कर मेरे रूम के तरफ देखा और बोली देखो तो भारती आयी है.

मैं लिविंग को उन दोनों  के पास जाता हुआ बोला हैलो भारती.

भारती: हेलो! हमेशा सोते ही रहते हो क्या? Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

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मैं: नहीं बस पढ़ते पढ़ते आँख लग गयी थी.

भारती: पढ़ाई? ये वह मुझे चिढ़ाती हुई बोली ज़रूर उसने मेरे गर्लफ्रेंड वाली बात सच मान लिया था.

माँ: चाय पियोगी बेटा?

भारती: हाँ अगर आप लोग पी रहे हो तो बनाइये वरना बाद में भी चलेगा.

माँ: ठीक है चलो तुम अपना बैग टीना के रूम रख दो और फ्रेश हो जाओ.

अब आना था खेल का मज़ा टीना का रूम था लॉक और चाबी मैंने छुपा दी थी.

भारती मुझे मुँह बनाती हुई टीना के रूम के तरफ गयी और मैं माँ के साथ किचन में चला गया, नहीं चाहता था की जब भारती को ये पता चले की दरवाज़ा लॉक है और वह मुझे देख मेरी चोर शकल पकड़ी जाये.

मैं माँ से बोला: आंटी उठी नहीं?

माँ फ्रिज से दूध निकालती हुई झुकती हुई बोली: हाँ उठ तो गयी है शायद फ्रेश हो रही है, उन्हें मेरे तरफ झुकी देख मैंने अपने हाथ उनकी गांड पर रखा और कहा माँ ऐसे सब आप मेरे सामने मत करना.

माँ झट से सीधी हुई और मेरे हाथ को मार कर हटाती हुई धीमी आवाज़ में बोली पागल ऐसे सब मत करो, कविता और भारती दोनों है घर पे.

तभी अचानक से भारती किचन में आयी और बोली आंटी!

माँ:हा बेटा ।

भारती: वह टीना दीदी का कमरा लॉक है..

माँ: लॉक है?

तो चाबी उसने कहा रखी होगी, एक मिनट रुको मैं टीना को कॉल करती हूँ फिर माँ अपने रूम को चली गयी अपना फ़ोन लेने और मैं किचन में खड़ा भारती के साथ, भारती मेरे तरफ आती हुई बोली चलो हटो.

बस खड़े रहना जानते हो वह चाय की पतीले में दूध और पानी मिलकर डालने लगी और मैं उसे पीछे से देख निहारता रहा पतला दुबला फिगर है उसका जैसे एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर का और हाइट भी उसके ही जितनी.

हल्का सावली सी, पर उतनी ज़्यादा गोरी नहीं जितनी टीना दीदी है एक मिनट ऐसे ही हुआ की तभी माँ आयी किचन में और बोली बेटा ऍम सॉरी.

मैं: क्यों क्या हुआ माँ. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

माँ: उफ़ तुमसे नहीं बोली मैं, भारती से बोली.

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ये देख भारती है हस पड़ी और क्या खूबसूरत चंचल हसी थी उसकी.

भारती: क्या हुआ आंटी?

माँ: बेटा वह टीना से बात हुई उसने अपने रूम की चाबी गलती से अपने साथ ले गयी.

भारती: ओह नो तो अब मैं…

माँ: कोई बात नहीं बेटा एक काम करते है न राहुल को उसके रूम से निकाल देते है और तुम वहा रह लेना है है है!

भारती मुस्कुराती हुई बोली नो नो आंटी मुझे नहीं रहना राहुल के रूम में.

माँ: ठीक है रुको कुछ सोचते है.

अभी तुम मेरे रूम जाकर फ्रेश होना है तो हो जाओ और अपना सामान भी वही रख दो.

भारती: ओके आंटी, भारती अपनी बैग लेकर माँ के रूम को गयी, फिर माँ मुझे देख गुस्सा करती हुई बोली इडियट बाल बाल बचे, अगर वह देख लेती की तुम्हारा हाथ किधर है तो.

मैं खड़ा हसने लगा और फिर माँ चाय बनाने लगी तभी कविता आंटी किचन को आयी और बोली क्या चल रहा है माँ बेटे के बीच?

मैं: कुछ नहीं आंटी बस ऐसे ही खड़ा था.

कविता आंटी भारती कब आयी?

मैं: अभी अभी आयी बस.

कविता आंटी: वह भी हमारे साथ ही रहेगी क्या सरु?

माँ: अरे पता नहीं कव,. वह टीना का रूम लॉक है और चाबी उसने गलती से अपने साथ ले गयी.

कविता आंटी: तो फिर उसे राहुल के कमरे में रहने दो न.

बस कविता आंटी ने तो मेरे मुँह की बात छीन ली.

माँ: हाँ वह तो है पर भारती मना कर रही थी.

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तभी अपनी माँ को टोकती हुई भारती बोली नो मैं नहीं रहने वाली राहुल के साथ.

कविता आंटी अरे बेटा इसमें क्या है?

भारती: माँ! आप न चुप रहो.

माँ: ओके ओके! वह बाद में देखते है अभी बहस मत करो सब, भारती मुझे एक अजीब सी गुस्से के साथ घूरने लगी और फिर लिविंग रूम को चली गयी. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

शायद वह इस लिए गुस्सा कर रही थी क्यों की मेरे कहने के हिसाब से उसे टीना का कमरा नहीं मिल रहा था, भारती और आंटी के लिविंग में जाने के बाद मैं और माँ चाय और कुछ स्नैक्स लेकर लिविंग को गए.

भारती आंटी के बगल में ही लम्बे वाले सोफे पे बैठी थी और मैं और माँ उसके ठीक दाए बाए रखे सिंगल सोफे पर.

माँ: तो भारती बेटा कैसी चल रही है पढ़ाई?

भारती: बढ़िया आंटी, बस ये एंट्रेंस का एग्जाम दिमाग ख़राब कर देती है, बस वह निकल जाए.

कविता आंटी: हाँ तो पढ़ाई पे ध्यान रहे तो न,आजकल तो नए फ्रेंड्स नए ट्रेंड्स.

माँ: हाँ क्या करे वह देखो सामने एक है पढ़ाई करने बोलो तो ऐसे लगता है जैसे मजदूरी करने को कह रहे हो, माँ मुझे इशारा करते हुए बोल रही थी जिसे देख भारती चाय की चुस्की लेती हुई हसने लगी.

कविता आंटी: राहुल तो ठीक ही है ना पढ़ाई में.

माँ: हाँ अगर उसके पीछे भागे तो वरना पूछ ज़रा इसके पापा के जाने के बाद कितनी बार बुक हाथ से लगाया?

कविता आंटी: अरे मैं जब आयी तो ये अपने रूम पढ़ ही तो रहा था. क्यों बेटा ?

मैं: हा…हाँ आंटी माँ बस ऐसे ही बात बनाने के लिए.

माँ मुझे देख सर हिलाती हुई इशारा दे रही थी, मानो उन्हें सब पता है की अब मैं क्या करता हूँ बंद कमरे के अंदर.

कविता आंटी: क्यों? ऐसे न कहो. वह अंदर पढ़ ही रहा था, राहुल के तो मार्क्स भी अच्छे आये थे न बोर्ड में.

माँ: हाँ हाँ जब देखो अपना लैपटॉप पे ही पढ़ाई करता रहता है.

मैं माँ के कहने का मतलब खूब समझ रहा था और सिर्फ में और माँ ही समझ रहे थे.

कविता आंटी: अरे आज कल तो सभी बच्चे लैपटॉप और फ़ोन में ही सारी पढ़ाई करते है.

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इसे देखो जब देखो मोबाइल लेकर बैठी रहती है पूछो तो कहती है नोट्स है इसके कोचिंग क्लासेज की ग्रुप में आती है पर मुझे आज तक दिखाई नहीं.

भारती: ओहो माँ आप को तो जैसे दिखाऊं और आपको समझ आ जाये.

कविता आंटी: क्यों मुझे क्या पढ़ना लिखना नहीं आता? मैं भी कॉलेज गयी हूँ.

भारती: हाँ हाँ और 15 बैक पेपर भी थी आपके, है है है!

कविता आंटी के अलावा हम तीनो हसने लगे जिस पर कविता आंटी मुँह बनाने लगी.

माँ ने कहा: अब तुम माँ बेटी लड़ना बंद करो हम चारो यूं ही फिर आस पास की बाते करते रहे भारती ने फिर से कुछ देर बाद वही बात दुबारा छेड़ी.

भारती: कहा जाओ ?

मैं कविता आंटी को देख रहा था की वह बोले की मेरे रूम में जाये तभी माँ बोली: मेरे रूम चले जाओ. अगर नहाना हो तो गीजर ऑन  करके 5 मिनट रुको.

भारती उठी और अपना कप टेबल से उठाने लगी. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

माँ ने कहा: रहने दो उसे वही, फिर भारती अपना बैग उठाया और माँ के कमरे मे जाने लगी, पता नहीं क्यों जाते वक़्त एक तिरछी नज़र से मुझे देख गयी पर चेहरे पर न हसी थी न कुछ बिलकुल एक्सप्रेशनलेस.

उसके जाते ही माँ और आंटी उठी और किचन को चली गयी, तब मैंने अपना फ़ोन निकाला और भारती को मैसेज करने लगा.

मैं: हेलो ऐसे क्यों मुझसे नाराज़ हो? तुरंत एक आधे मिनट में उसका रिप्लाई आया.

भारती: मैं क्यों नाराज़ होउंगी तुमसे?

मैं: तो फिर मुझे ऐसे गुस्से से क्यों देख के गयी?

भारती: गुस्सा नहीं तो और क्या? टीना का रूम लॉक था तो मुझसे झूट क्यों बोले?

मैं: अरे मुझे पता नहीं था की वह लॉक करके चाबी ले गयी है, वह कभी ऐसे लॉक करके नहीं जाती.

जब तुम ने बताया तब मुझे पता चला सच्ची.

भारती: प्रॉमिस तुझे नहीं पता था? मैं भारती से कोई पंगा नहीं लेना चाहता था लेकिन भारती के साथ बात भी तो बनानी थी तो भारती से सॉरी बोलते हुए मैंने रिप्लाई कर दी: हाँ प्रॉमिस..

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भारती: हम्म ओके.

चलो बाई. मैं नहाने जा रही हूँ.

मैं: अरे पानी तो गरम कर लो.

भारती: ऑन किया है कुछ देर बाद नहाउंगी बाई.

मैं: तब तक टेक्स्ट करना.

भारती: क्यों?

मैं: ऐसे ही!भारती: ऐसे ही क्यों करू तुम्हे टेक्स्ट?

मैं: बस ऐसे ही करते रहना.

भारती: क्यों?मैं: अच्छा लगता है. ये मैंने अँधेरे में तीर मार दी शायद निशाने के करीब लग जाए.

भारती: थोड़ा नहीं तुम्हारा पूरा स्क्रू ढीला है.

मैं: तो टाइट कर दो तुम मेडिकल स्टूडेंट होना.

भारती: तुम्हारा स्क्रू टाइट करके नहीं है मार से मार के टाइट करना होगा.

मैं: तो मारना.

भारती: अरे अजीब हो.

मैं: क्यों?

भारती: कुछ बोलना है तो टेक्स्ट करो वरना चलो बाई. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

मैं: क्या बोलू? तुम बोलो कुछ.

भारती: मुझे नहीं करना कोई टेक्स्ट तुम्हे तुम ही कर रहे हो तो तुम बोलो.

मैंने अपने दिमाग में एक आईडिया चलाया अगर पास तो पास वरना फ़ैल हुआ तो भी जवाब रेडी था.

मैं: बोलू क्या?

भारती: बोलो.

मैं: आई लव यू.

भारती: व्हाट? गॉन माध? (गुस्से का स्माइली) इससे बात बनी नहीं तो मैंने रिप्लाई दिया.

मैं: क्यों? आई लव यू अस माय सिस्टर. है है है! तुम्हे क्या लगा?

भारती: तू न पागल है बाई.

मैं: अरे रुको तो हेलो! चली गयी? इसके बाद उसका कोई रिप्लाई नहीं आया तो मैं समझ गया की वह शायद नहाने गयी या फिर सच मे मुझ पर गुस्सा है.

मैं उठ कर किचन को गया और वहा आंटी और माँ कुछ बाते काफी धीमी आवाज़ में कर रही थी, जैसे दो महिलाये आपस में किसी की राज़ की बाते बोलती है, मेरी आहत सुनते ही आंटी ने बात करना बंद कर दिया और पलट कर मुझे देख बोली: हाँ तो राहुल आज क्लास नहीं थी? कितने दिन और नहीं है?

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तभी एक साथ माँ और मैं बोल पड़े: और 2 दिन.

मैं: और 4 दिन पर हम दोनों ने अलग बोला और मेरा जवाब सुन माँ ने मुझे अचानक से देखा और उनके कुछ पूछने से पहले मैंने कहा 4 दिन  वाह सर ने पहले 3 दिन छुट्टी दिया था.

लेकिन दोपहर को कॉल किया और कहा की अब क्लास अगले मंडे से ही होगी. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

कविता आंटी मुझे देख रही थी उनकी नज़र माँ को नहीं देख पा रही थी जिसका फायदा उठा कर माँ मुझे घूरती हुई इशारा कर रही थी मानो पूछ रही हो की मेरे दिमाग में क्या चल रहा है और मैं झूट तो नहीं बोल रहा?,

कविता आंटी: ओहो तो बड़ी लम्बी छुट्टी मिली है तुम्हे मतलब तुम्हारे पापा और टीना जब तक नहीं आएंगे तुम भी घर पर ही हो?

मैं: हाँ आंटी, माँ मूड कर अपना काम करती हुई कुछ धुले हुए कप ड्रावर में सेट करने लगी, तो आंटी बोली: तब तो पूरे मज़े है तुम्हारे.

मैं आंटी को देखने लगा की इनका मतलब क्या है तो उन्होंने फिर कहा तुम्हारी माँ को मैं जानती हूँ तुम्हारे पापा जैसे स्ट्रिक्ट नहीं, तो पूरा फायदा उठाओगे इसका.

मैं खामखा घबरा गया वह तो पढ़ाई की बात कर रही थी, तभी माँ सिंक में पड़े बाकी थोड़े प्लेट धोने लगी, तो आंटी माँ की नाइटी के ऊपर से उनकी गांड पर हलके से मारती हुई बोली: चल हैट तू अब मैं करती हूँ.

सिर्फ खाने पीने आयी हूँ क्या यहाँ.

माँ: नहीं कोई ज़रूरत नहीं तू आराम से जाकर कही बैठ मैं आती हूँ, आंटी को ऐसे माँ की गांड पर मारते देख अजीब सी लहर दौड़ गयी मेरे अंदर.

ये दोनों काफी दोस्ताना रहे है जब से मैं इन दोनों को जनता हूँ ऐसा नहीं था की ये दोनों भाभी और नातून हो ये दोनों हमेशा से ही अच्छे दोस्त रहे है.

मैं इन दोनों को छोड़ अपने रूम जाने लगा, ये सोचते हुए की अब माँ पर हाथ मारने का मौका शायद ही मिले जब तक आंटी और भारती यहाँ है

तो फिर पूरा ध्यान भारती पर लगाया जाये, अपने रूम जाकर मैं अपने सवेरे साफ़ सुत्रे बेड पर लेटा, फिर सोचने लगा की कब भारती के साथ इस बिस्तर पर होने का मौका मिले मुझे और अगर मिले तो कैसे.

 कुछ 20-25 मिनट बाद माँ के कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी तो मैं समझ गया की भारती नहाकर निकली, मैं चालू हो गया फ़ोन लेकर उसे टेक्स्ट करने.

मैं: निकल गए? थोड़ा भी टाइम नहीं लगा की उसका रिप्लाई आया शायद हाथ में ही फ़ोन था उसके.

भारती: क्या?मैं: नाहा के निकल गयी पुछा. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

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भारती: नहीं अभी भी बाथरूम में ही हूँ और तुम्हे टेक्स्ट कर रही हूँ डफर, ये उसने मुझे चिढ़ाने के लिए कहा क्यों की मुझे उसकी और आंटी और माँ की मिली जुली आवाज़े बहार से आ रही थी, मैंने सोचा की उसके मज़ाक को आगे लेके जाए .

मैं: अरे वाह लेकिन क्यू भारती: क्यों?

मैं: तुम्हारे साथ बाथरूम में नाहा जो रहा हु (ज़ोर से हसने की समिली)

भारती: शट उप इडियट.

मैं: अरे हर बात पर तुम इतनी चिढ़ती क्यों हो?

भारती: तुम इतने भोंदू वाले बात करो तो और क्या नाचू?

मैं: हाँ नाचना मैं गाना गाता हूँ.

भारती: नहीं नहीं लोग पत्थर मारेगे तुम्हारी खिड़की पर. (ज़ोर से हसने की समिली)

मैं: तब मैं ये गाना गाऊंगा ‘कोई पत्थर से न मरे तेरे दीवाने को और तुम उस पर नाचो.

भारती: उफ्फ्फ!

मैं: क्या हुआ?

भारती: कुछ नहीं. तुम बहार क्यों नहीं आ रहे.

मैं: क्यों बहार आऊंगा तो नाचोगी?

भारती: यू अरे सो इर्रिटेटिंग मत आओ बाई.

मैं: अरे गुस्सा हो गया बच्चा उसका कोई रिप्लाई नहीं आया, मैं उठा और रूम से बहार निकलते ही देखा तो तीनो किचन में ही थी. किचन के दरवाज़े पर ही भारती अंदर देखती हुई खड़ी थी.

मेरे पास जाने की आवाज़ से वह पलट कर पीछे देखि और मुँह चिढ़ाती हुई वापस पलट गयी, भारती एक नीले रंग की लेग्गिंग और जांघो तक लम्बी नेवी कलर की शर्ट पहनी हुई थी.

पूरा ढाका हुआ की कुछ नहीं दिखा ना क्लीवेज ओर ना कुछ होर , वैसे उसके बूब्स भी नीम्बू जैसे छोटे ही थे उतने बड़े नहीं.

मैं किचन के दरवाज़े के पास उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया. Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

माँ और आंटी साथ में कुछ बना रहे थे, इन दोनों की पुरानी आदत थी की जब साथ हो तो कुछ न कुछ खाने के लिए बनाते थे. जैसे की केक या कुछ और मीठा.

माँ और आंटी मुझे और भारती को पीठ दिखा कर खड़े थे, तो उन्हें पता नहीं था की मैं आया हूँ जिसका फायदा उठा कर अपना फ़ोन लेकर भारती जो ठीक मेरे सामने खड़ी है, उसे मैसेज किया.

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मैं: लुकिंग ब्यूटीफुल, भारती के हाथ में फ़ोन विबरते हुआ तो उसने पलट कर मुझे देखा, फिर वापस मूड कर अपने फ़ोन पर मैसेज चेक किया,मैं उसे थोड़ा तिरछा हो कर देख रहा था, तो दिखा की मेरे मैसेज को पढ़ कर पहले एक सेकंड के लिए वह हल्का सा मुस्कुरायी और फिर नार्मल हो कर मुझे पलट कर देखा और फिर अपना फ़ोन बंद कर वापस मूड गयी.

उसे अच्छा तो लगा ही होगा जब मैंने ब्यूटीफुल कहा तो तभी तो मुस्कुरायी भले एक सेकंड के लिए ही किश लड़की को पसंद नहीं की कोई उसे ब्यूटीफुल बोले, फिर मैंने दुबारा मैसेज किया.

मैं: यहाँ क्या कर रही हो? जब फ़ोन विबरते हुआ तो उसने फिर से मुझे देखा,आँख बंद करते हुए छिड़ने के तरह चेहरा बनती हुई अपना फ़ोन देखा.

फिर मैसेज टाइप करने लगी, मैं तुरंत फ़ोन लेकर देखा और तभी रिप्लाई आया.

भारती: क्या है तेरा प्रॉब्लम?

मैं: तुम.भारती: मैं?

मैं: हाँ तुम, कुछ तो काम कर नहीं रही बस दिखाने के लिए किचन में आकर खड़ी है.

भारती: ओह तो तुम्हे पता चल गया (जीभ दिखाते हुए समिली).

मैं: बिलकुल.

भारती: तुम किश लिए आये हो तुम भी तो वही कर रहे हो.

मैं: मैं तो तुम्हे देखने आया हूँ.

भारती: क्यों?

मैं: इतनी ब्यूटीफुल जो हो.

भारती: ज़्यादा मत देखो वरना थप्पड़ पड़ सकता है.

मैं: ओहो एग्रेसिव? Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

भारती: गेट लॉस्ट, उस पर मैंने उसे रिप्लाई नहीं दिया पर बदले में एक ऊँगली से उसके कमर पर हलकी सी गुड़गुड़ी दे मारी.

जिस पर वह एकदम से झटके खाती हुई, अपना एक हाथ पीछे कर मेरे हाथ पर ज़ोर के चींटी काट दी काफी बड़े सवार हुए नेलपॉलिश से चमकाए हुए नाखून है उसके वह मेरी चमड़ी में अच्छी खासी दाग बना डाली.

मैं फिर से अपना हाथ उसे गुदगुदाने ले गया तो वह फिर से हाथ पीछे लायी पर इस बार मैंने उसके हाथ पकड़ लिए और पकड़ा रहा, क्या मुलायम पतले दुबले हाथ है उसके हाथ को पकड़ उसकी मचलती उंगलियों को अपने हाथ में पकड़ हलके से मरोड़ने लगा.

तो उसके मुँह से हलकी सी इस्सस की आवाज़ आयी मैंने उसे छोड़ दिया और वह तुरंत अपना हाथ वापस लाती हुई मुड़ी, मेरे कंधे को धक्का मारती हुई बिना मुझे देखे चलती बनी और जाकर लिविंग रूम में सिंगल सीटर सोफे पर बैठ गयी, उसके जाने के हलचल से आंटी पीछे मुड़ी और मुझे देख बोली अरे तुम कब आये?

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मैं: बस अभी आया.

कविता आंटी: मैं और सुरू शाम को बहार जा रहे है, तुम आओगे ना?

मैं: हाँ क्यों नहीं कहा जाओगे?

कविता आंटी: बस यूं ही थोड़ी शॉपिंग वगैरा चलो चारो चलते है बहार से ही डिनर भी कर लेंगे इतने में लिविंग से भारती बोली मैं नहीं आ रही कही, आप लोग जाओ.

कविता आंटी: तू अकेली फिर क्या करेगी यहाँ तभी मौका हाथ से न जाने दे कर मैंने बोला नहीं तो आप दोनों चले जाओ मुझे एक ऑनलाइन मैथ्स की क्लास है शाम को.

वह हफ्ते में एक ही बार होता है माँ ने तुरंत मुझे पलट कर देखा और सक की नज़र से देखने लगी.

कविता आंटी: अरे तब ठीक है तुम मत आओ कविता आंटी पलट कर माँ के साथ कुछ करने लगी.

तो मैं थोड़ा झांक कर लिविंग में देखा.भारती मुझे देख गुस्से वाली शकल बना रही थी. फिर वह अपने फ़ोन पर कुछ करने लगी और मुझे एक मैसेज आया.

भारती: पहले तो जाने को रेडी हो गए थे? Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

मैं: हाँ पर तुम नहीं आ रही हो तो सोचा कही अकेले तुम्हे डर न लगे.

भारती: हाँ तुम्हारे घर तो भूत है ना.

मैं: हाँ बहुत बड़ा वाला भूत है.

भारती: हाँ जानती हूँ अभी वह मुझे टेक्स्ट भी कर रहा है.

मैं: हाँ मैं ही भूत नहीं ड्रैकुला हूँ.

भारती: बकवास बंद करो और अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताओ.

क्या प्रॉब्लम थी जो मुझे बताना चाहते हो?

मैं: वह मैं बाद में बताऊंगा माँ आंटी के जाने के बाद.

भारती: ओके तो फिर तब बात करना अभी मैसेज मत करो फिर.

मैं फिर किचन से लिविंग को जाकर भारती के ठीक सामने वाली सोफे पर बैठा और उसे देख देख के मैसेज करने लगा.

मैं: कोई बात नहीं अभी कुछ और बात करते है ना, भारती मुझे देखती हुई मैसेज करने लगी.

भारती: क्या बात करना है. बोलो.

मैं: तुम बोलो कुछ तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?

भारती: तुम्हे क्यों बताऊँ.

मैं: बता दे मैं कौन सा आंटी को बताऊंगा?

भारती: हाँ है. बहुत सारे. (ज़ोर की हसी वाली समिली)

मैं: ओहो! तो एक से मन नहीं भरता. (आँख मरने वाली समिली)

भारती: हैट इडियट.उसके शकल पर हलकी मुस्कान और शर्म थी और साथ ही बनावटी गुस्सा भी.

मैं: सच बतावा कोई बॉयफ्रेंड है तुम्हारा? Bua Ki Ladki ki Chudai ki Story:

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भारती: आईटी’स पर्सनल अभी नहीं बताना चाहती.

मैं: इसका मतलब है.

भारती: ओफ्फो कुछ और बात करो.

मैं: तुम तो कुछ बोल नहीं रही और मैं कुछ पूछू तो उसका जवाब नहीं देती.

भारती: पूछो तुम भी तो बाद में बोलोगे बोलो.

मैं: अरे वह बाद में सीधे सीधे बताऊंगा.

भारती: हम्म्म ओके! भारती से टेक्स्ट में बात करते और शायद मैं में उसे चोदने का मन लेने मेरे लंड पर मेरे शॉर्ट्स के अंदर असर करने लगी.

मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा अंदर ही अंदर तो मैंने कुछ उट पटांग करने की सोची.

बस दोस्तो आज इस कहनी मे इतना ही बाकी अगले भाग मे.

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