By | March 5, 2023

Bhabhi Ki Chudai Mote land Se : हैलो दोस्तो, मेरा नाम नीतू है, मैं आज एक नयी कहानी लेके आई हु जो की मेरी ननंद और उसके आए कजन भाई की है , तो आए दोस्तो सुरू करते है नयी कहानी, मै जल्दी से उन दोनों  को वही छोड़ अपने रूम को भागी और दरवाज़ा लॉक कर श्रद्धा का कॉल उठायी.

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मैं: हाँ बोलो.

श्रद्धा: यार मैं बताउंगी पर तुझे कसम देनी होगी.

मैं: मन मे सही सोच रही थी न?

श्रद्धा: पहले कसम खा की तू कोई बवंडर नहीं खड़ा करेगी.

मैं: तू पहले बता मैं सही थी या नहीं?

श्रद्धा: देख तू ज़िद की तो नहीं तो मैं कोई हेल्प नहीं करुँगी.

मैं: ओके प्रॉमिस अब बताओ.

श्रद्धा: हम्म्म… ओके बताती हूँ वेज़ एक बात माननी पड़ेगी तेरी छुप कर फोटो निकालने को बोली तो तूने अपने साथ सेल्फी ही ले ली उसकी हाहाहा!

मैं: हाँ हाँ ठीक है तू वह छोड़ और बता ये कोन है जानती है क्या इसे तू?

श्रद्धा: 2 दिन पहले मैं शोभा के यहाँ गयी थी.

मैं: शोभा? अपनी अपार्टमेंट वाली?

श्रद्धा: हाँ वही ये आकाश उसका भाई है.

मैं: शोभा का भाई? Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

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श्रद्धा: अरे नहीं ये उसके हस्बैंड का भाई है उसका देवर. मैं इससे मिली भी थी शोभा के यहाँ. वहां वह आकाश से मिली थी उसी दिन जिस दिन पहली बार आकाश बैंगलोर पहुंचा था.

मैं: कल रात माँ से फ़ोन पे  बात की तो वह बता रही थी की भावना कल रात शोभा के यहाँ थी.

श्रद्धा: हाँ क्या? आज सुबह वह मेरे यहाँ आयी थी किसी काम से. तब बता रही थी की उसका हस्बैंड बहार गया हुआ है आउट ऑफ़ स्टेशन.

मैं: हम्म्म…. साली रंडी मेरे माँ बाप और मेरे भैया को धोका दे कर कल रात वह इसके साथ गुल खिला रही थी शायद. छोड़ूंगी नहीं मैं इन दोनों को.

श्रद्धा: यार देख तूने कसम दी है मुझे. तू ऐसा कुछ नहीं करेगी समझी.

मैं: तो? आँख बंद करके बैठी रहु क्या?

श्रद्धा: यार तू भी तो आज मेरे यहाँ मज़े लेने आयी थी न? देख हम में से कोई भी दूध की धूलि नहीं है.

मैं: देख तू मुझे उस रंडी भावना के साथ मत तोल समझी.

श्रद्धा: मैं किसी को तोल नहीं रही तू सोच अगर तू ऐसे कुछ किया  तो भावना की  लाइफ का क्या होगा? उसकी शादी टूट सकती है.

मैं: हाँ तो टूटने दे न. मुझे क्या?

श्रद्धा: अच्छा और अगर सोच की अमित ने तुम्हारे देवर से तेरी करतूत बता दि फिर  और तेरी शादी टूटी तो? तुझे कैसा लगेगा?

मैं थोड़ी शांत होने लगी श्रद्धा की बात सही तो थी. भले मुझे भावना उतनी पसंद नहीं.पर उसके कारन मैं उसकी ज़िंदगी बर्बाद भी तो नहीं कर सकती थी,  वह भी मेरी तरह एक औरत ही है.

श्रद्धा: हेलो? कहा गयी.

मैं: हाँ सुन रही हूँ. तो तू बता अब मैं क्या करू अब?

श्रद्धा: सच बताऊँ?

मैं: हम्म्म?

श्रद्धा: अगर मैं तेरे जगह होती तो इसका फायदा उठाती.

मैं: क्या क्या फायदा?

श्रद्धा: सोचना तुझे बहार जाने की ज़रूरत ही क्या जब बिरियानी के लिए मुर्गा घर में ही है.

मैं: ना यार.

श्रद्धा: भावना को दिमाग से निकाल और आकाश के लंड पर अपना नाम लिख ले तू.मैं हस्स पड़ी और बोली: हाहाहा पागल है तू हट! Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

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श्रद्धा: क्या पागल हूँ? अगर मैं तेरी जगह होती तो यही करती. वैसे भी तुझे आज अमित का लंड तो तुझे लेना नहीं था. तो फिर इस नई साल पर आकाश के साथ मना और अपनी पार्टी कर.अब मेरे अंदर भी आकाश को लेकर थोड़ी सी इच्छाएं उमड़ने लगी. श्रद्धा की बात गलत नहीं थी. मैं सोच में पड़ गयी जब उधर से श्रद्धा बोली:अब तू इतना सोच मत. सीधे मुँह बोलू तो माहौल का मज़ा उठा.

मैं: देखती हूँ मैं सोचूंगी उस पर.

श्रद्धा: ओके चल मैं थोड़ी देर बाद कॉल करती हूँ अक्षुण के लिए खाना बनाना है.

मैं: हाँ ठीक है यार थैंक्स.

श्रद्धा: ओके डिअर बाई. मैंने फ़ोन काट दिया और श्रद्धा की कही बात और साथ ही भावना की करतूतों के बारे में सोचने लगी. मैं खुद को अपने ड्रेसिंग टेबल के आईने में देख सोचने लगी की भावना वही तो कर रही है जो मैं कर रही हूँ.अपने पति की पीठ पीछे मैं भी तो दूसरे मर्दो के साथ मज़े कर रही हूँ. भावना को अगर मैं रंडी कहूँ तो मैं भी तो वही हूँ. भावना और मेरे पति दोनों ही एक साथ लंदन में काम करते है. अगर मेरे पति दूर है और मुझे वह सुख नहीं दे रहे तो भावना की भी तो वही हालत है.

श्रद्धा की बात सही थी. इसके नाम पर भावना की ज़िन्दगी ख़राब करना सही नहीं. पर मैं अब करती क्या? मुझे आकाश के बारे में पता था. क्या सच मे जैसे श्रद्धा ने कहा क्या मैं इसका फायदा उठाऊं? पर तब भावना क्या सोचेगी मेरे बारे में? मैं अपनी ही सोच में डूबने लगी. अपने ही सवालो के जवाब ढूंढ़ने लगी. क्या करू न करू के बीच फसी पड़ी थी 

जब बहार दरवाज़े पर पापा खट खटाये.

पापा: नीतू बेटा, तब याद आयी की पापा बहार से आये है. मैं सारी बातो को अपने दिमाग से निकाली और फिर दरवाज़ा खोलकर बहार गयी. बहार पापा को गले से लगा कर बोली: पापा मिस्ड यू.

पापा को गले लगाती हुई मैं उनके कंधे से पीछे किचन में खड़े आकाश को देखा. उसकी नज़र मेरे तरफ ही थी. एक पल के लिए मेरे चेहरे पर गुस्सा आया उसे देख. पर फिर खुद को समझाया और उसको अपनी एक मुस्कान दे दी.

पापा हटकर बोले: आ रही थी तो बतायी क्यों नहीं?

मैं: मैंने सोचा की सरप्राइज दूँ सबको.

पापा: चलो अच्छा हुआ तुम भी आ गयी. मुझे तो लगा इस साल की नई ईयर हम बूढ़े बूढी और भावना अकेले हो जायेंगे.

मैं: अब तो आप उसकी चिंता न करो. भावना का भाई जो आ गया है.ये मैं थोड़ा ज़ोर से बोली की आकाश और भावना किचन से सुन ले. वह मुझे सुनते ही इस तरफ देखने लगे और मैं उन्हें देख कर मुस्कुरा दिया. मेरी झूठी मुस्कान को देख उधर से वह दोनों भी मुस्कुरा दिए. Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

पापा: अरे हाँ आकाश से मिली क्या तुम?

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मैं आकाश की तरफ देखती हुई पापा से बोली: हाँ हाँ और बहुत अच्छे से जान पहचान भी करली .

पापा: चलो ये तो बढ़िया हुआ. चिकन लाया हु आज सब साथ में डिनर करेंगे.

मैं: हाँ क्यों नहीं साथ में खाएंगे और बहुत कुछ करेंगे भी.मेरी बात को  सुन दूर किचन में खड़ी भावना और आकाश के तो चेहरे के रंग बदल रहे थे.

पापा अपने कमरे को चले गए. भाड़ में गया कार्ड देखना अभी तो मेरे मन में किचन में खड़े भावना और आकाश पर थी.मैं किचन को गयी और बोली: तो आकाश… और सुनाओ कुछ, आकाश ने एक बार भावना को देखा और फिर मुझे देख बोला: मैं अब मैं क्या बोलू? मैं अपने नाखुनो पे नाखून रगड़ती हुई बोली: हाँ अब रहा ही क्या बोलने को.

आकाश: हाहाहा मतलब?

मैं: नहीं नहीं कुछ नहीं ऐसे ही बोली मज़ाक था यार तुम घबरा क्यों रहे हो? ये कहती हुई मैंने उसके पीठ पर हलके से नार दिया और फिर भावना से बोली: तो भावना कुछ हेल्प चाहिए क्या?

भावना: नहीं नहीं तू जा आराम से बैठ मैं कर लुंगी.

मैं: जो भी करोगी तुम  मुझे भी हाथ बटाने देना अकेले अकेले क्या मज़ा? क्यों आकाश सही बोला  ना?

आकाश: आए मैं समझा नहीं.

मैं: अरे किचन के काम की बात कर रही हूँ यार तुम क्या सोच रहे हो?

आकाश: हा हा कुछ नहीं मैं भी वही बोल रहा था.आकाश पलट कर अपना  काम करने लगा, मानो उसे मुझसे नज़र ही नहीं मिलानी.भावना भी पीठ दिखाए खड़ी थी तो मैंने उससे पूछा: और भावना शोभा का क्या हाल है कैसी है वह? शोभा का नाम सुनते ही भावना के साथ आकाश ने भी पलट कर देखा, दोनों के चेहरे के रंग सफ़ेद पड़ चुके थे. मैं आकाश को देख भवरो से क्या हुआ का इशारा किया तो वह कुछ नहीं का इशारा कर वापस घूम गया. Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

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भावना: आ वह ठीक है क्यों? क्या हुआ क्यों पूछा?

मैं: कल रात माँ का फ़ोन आया था और रात को सोने से पहले तो वह बता रही थी की तू कल उसके यहाँ थी, बस उसी लिए पूछ लिया.

भावना: हाँ हाँ कल वह अकेली थी घर पे तो मुझे बुला लिया था .

मैं: अकेले? वह क्यों? उसका हस्बैंड कहा गया?

भावना: वह… वह मुंबई गया है कुछ काम से. तो शोभा ने मुझे बुला लिया.

मैं: आगे बढ़ कर भावना की गांड पर चींटी काट बोली: हम्म्म… दोनों सहेलिया क्या कर रही थी, कल बोलो बोलो गर्ल्स नाईट पार्टी हाहाहा! मेरी बात को मज़ाक समझ भावना बोली: हाहाहा नहीं नहीं यार वह अकेली थी न तो बस सोचा उसके साथ रहु कल.

पर आकाश की तो बोलती बंद थी, उसकी हालत देख मैं मन ही मन हस्स रही थी. जब सामने वाला झूट बोल रहा हो और हमें सच पता हो तो झूट सुनने का भी अपना ही मज़ा होता है.शायद मेरे सवालो के सामने से भावना कैसे भी निकलना चाहती थी. वह तुरंत बोली: मैं ज़रा रूम जाकर आती हूँ. Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

मैं: हम्म्म… ओके मैं कुछ कर दूँ क्या?

भावना: हम्म्म… हाँ नीचे से वह कढ़ाई निकालके स्टोव पे रख दो. मैं अभी आती हूँ.

मैं: हम्म ठीक है मैं कर दूँगी.

भावना कुछ नहीं  बोली और सीधे किचन से निकल गयी. यहाँ आकाश तो बिलकुल ही चुप था.मैं उसके पीछे से उसके पास गयी और बोली: ज़रा हटना आकाश मुझे नीचे से कढ़ाई निकालनी है.

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वह थोड़ा हटा और मैं झुक कर नीचे की रैक खोलकर उसमे से कढ़ाई निकाली. जैसे मैं उठी वैसे ही दूसरे हाथ से उसके शार्ट के ऊपर उसके लंड को पकड़ लिया. वह पकड़ खींचती हुई मैं उठी और देखा तो वह चौक कर मुझे देख रहा था.मैं उसे छोड़ कर वापस हटी और बोली: क्या हुआ? Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

आकाश: को… कुछ नहीं. मैंने कढ़ाई को काउंटर पर रखा और फिर दुबारा उसके लंड को पकडा और अदाओ भरी आँखों के साथ बोली: मेरा पकड़ना तुम्हे अच्छा नहीं लगता क्या? अगर ऐसे भावना करती तो ज़्यादा पसंद आता क्या तुम्हे?

आकाश: का… का… क्या मतलब? आप क्या कह रही हो? मैं ज़ोर से उसके लंड को दबाती हुई बोली: मुझे सब पता चल गया आकाश सब कुछ.आकाश: अह्ह्ह! क्या क्या कह रहे हो आप,  मुझे कुछ नहीं समझ में नहीं आ रहा.मैं उसके लंड को कपडे के साथ निचोड़कर धीरे धीरे हिलाकर बोली: मुझे पता है की तुम शोभा के कोन हो. मुझे पता है की भावना तुम्हारी दीदी नहीं है. और हाँ मुझे ये भी पता है की कल शाम तुम तुम्हारी भाभी शोभा और भावना क्या कर रहे थे तुम्हारे यहाँ.आकाश के चेहरे पर दर्द कम और डर का रंग ज़्यादा चढ़ गया और वह बोला: पर आप को कैसे पता?

मैं भावना के कमरे पर नज़र दौड़ाई और बोली: शठ! मैं सब जानती हूँ. पता है अगर ये बात मैं पापा मम्मी और मेरे भैया से बता दूँ तो क्या होगा?

आकाश: नहीं प्लीज ऐसा मत करना.

मैं: तुम तो जाओगे ही और साथ में तुम्हारी नकली दीदी भावना भी हमेशा के लिए इस घर से बहार. उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर दूँगी मैं. ये कह कर मैं उससे छोरी और आगे बोली: पर मैं ऐसा फ़िलहाल नहीं करुँगी. Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

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आकाश: क्या चाहिए आपको?

मैं उसके गाल को थप थापती हुई बोली: टाइम आने पर बताउंगी तुमसे क्या चाहिए. और भावना को तुम नहीं बताओगे की मैं सब जानती हूँ समझे?

आकाश: क्या पर क्यों तुम चाहती…उसके तुम बोलते ही मैं उसे आँख उठाकर देख बोली: हम्म्म… तुम?

आकाश: सॉरी सॉरी… आप. आप क्या चाहती हो बताओ तो सही.तभी मैं देखि की भावना अपने कमरे से वापस आने लगी. तोह मैं धीमी आवाज़ में आकाश से बोली: शठ! अब भावना की ज़िन्दगी तुम्हारे हाथ में है आकाश. अब से तुम वही करोगे जैसा मैं तुमसे कहूँगी. वरना सोच लेना. तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना  ही. Bhabhi Ki Chudai Mote land Se

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