By | December 24, 2022

bhabhi ki chudai: हैलो दोस्तो, पिछली कहानी का 3भाग लेके, ओर जिसने भाग 1 or 2 नहीं पढ़ा अभी तक वो प्लीज भाग1-or 2 पढे तभी कहानी समझ मे आएगी भाभी को चोदते हुये माँ ने पकड़ा फिर 2 or अब आगे।एक बार फिर मैं आपके साथ माँ ओर रेशमा की चुदाई की कहानी लेके आया हु अब आगे।


रेशमा मेरी बात मन गयी. और वह अंदर चली गयी. मगर मेरे खयालो में तो माँ ही घूम रही थी. मैंने रात का टाइम उनके लिए छोड़ा था. ताकि अब मैं उनके साथ मज़ा कर सकू दूकान बंद करके मैं अंदर आ गया. मेरा भाई और रेशमा कमरे में थे. माँ और मैं बहार बैठे थे. मेरी और माँ की नज़रे आपस में बाते कर रही थी.

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मैं माँ को अपनी आँखों से नंगा कर रहा था. मेरी नज़र माँ की चूचियों पर थी. और वह इस बात को जानती थी. उनके मुह पर एक लाली आ गयी थी.
माँ – बीटा अब तो बहु आ गयी है. जा उसके साथ टाइम बिता ले.
मैं – माँ मैंने उसे समझा दिया है की हम रात में ये सब नहीं करेंगे. अब मैं रात का टाइम सिर्फ अपनी माँ के साथ रहूँगा.
माँ मेरी तरफ देखने लगी. तभी लाइट चली गयी. और तभी माँ उठके इमरजेंसी लाइट लेने जाने लगी. मैं भी तुरंत खड़ा हो गया. और जैसे ही माँ मेरे कमरे में घुसी.

मैं भी तुरंत अंदर चला गया. और उन्हें पीछे से पकड़ लिया. मैंने इस बार माँ का मुँह बंद नहीं किया. मगर इस बार उन्होंने भी कोई आवाज नहीं की. मैंने माँ की दोनों चूचिया मसल दी.

मैं माँ की चूचिया मसल रहा था. और माँ को भी समझ आ गया था की इस बार मैं सब जानकार कर रहा हु. मेरा लंड माँ की गांड में घुसा जा रहा था. और मेरा एक हाथ उनकी गांड को भी दबा रहा था.तभी लाइट आ गयी. और रोशिनी होते ही माँ मुझसे अलग हो गयी. माँ की नज़र मेरे मेरे खड़े हुए लंड पर गयी. bhabhi ki chudai

जो मैंने बहार निकल लिया था. माँ मेरा लंड आँखें फाड़े देख रही थी.माँ ने जल्दी से अपने कपडे ठीक किये. और वह बहार निकल गयी. मैंने भी अपने कपडे ठीक कर लिए. और फिर मैं बहार आके बैठ गया. फिर हम सबने खाना खाया.और मैं खाना खाके छत पर चला गया. मैं खड़ा हुआ हवा खा रहा था. तभी मेरे खंड पर माँ ने हाथ रखा. मैंने बिना देखे बोला.
मैं – क्या बात है माँ?

माँ – बेटा हमारे बीच जो अभी हुआ. वह ठीक नहीं हुआ.
मैं – माँ जब आपको पता था. तो आपने मुझे रोका क्यों नहीं?

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माँ के पास मेरे इस सवाल का कोई जवाब नहीं था. क्युकी इसका जवाब उनकी चुत में था. जो मेरे छूने से एक बार फिर से जाग गयी थी. और जिसे अब एक लंड चाहिए था.

मैंने माँ से 2-3 बार पूछा. मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. और फिर वह नीचे चली गयी. मैं समझ गया था की लोहा गरम है. आज रात मुझे अपना काम कर लेना चाहिए.और फिर मैं नीचे आ गया. रेशमा अपने कमरे में जा चुकी थी. और माँ लेट चुकी थी. मैं अपने कमरे में आ गया. और लेट के सही टाइम का इंतज़ार करने लगा.

रात 12;30 बजे मैं अपने बेड से उठा. और बहार आ गया. बहार आँगन में जो बल्ब जल रहा था. बस उसी की रोशिनी अंदर आ रही थी. माँ बेड पर लेटी हुई थी. और मैं उनके पास गया.मैं हलके से बेड पर बैठ गया. और माँ को देखने लगा. वह बहुत सेक्सी लग रही थी. मैंने हलके से माँ की जांघो पर हाथ रखा. और हलके हलके उनकी साड़ी को ऊपर करने लगा.

माँ की साड़ी जांघो तक आ गयी थी. और फिर मैं माँ की टांगो के पास चला गया. और तभी किस्मत ने मेरा साथ दिया. माँ ने तभी अपनी टाँगे मोड़ ली. मगर उन्होंने साड़ी फिर से नीचे कर दी.मगर अब मैं कहा रुकने वाला था. इस बार मैंने साड़ी पूरी ऊपर कर दी. माँ की चुत तो नहीं दिखाई दी. मगर इतना अंदाज़ा हो गया था की वह अंदर से नंगी है.

और फिर मैंने हलके से मम्मी दोनों जांघो को पकड़ा. और अपना मुँह सीधा माँ की चुत में लगा दिया.
माँ की चुत पर काफी बाल थे. मगर फिर भी मेरी जीभ माँ की चुत में चलने लगी.और मेरी जीभ का अहसास अपनी चुत पर मिलते ही माँ उठ के बैठ गयी. वह थोड़ा हड़बड़ा गयी.

माँ – कोन है?
मैं – मैं हु माँ बस तुम चुप रहो?
माँ – बेटा ये क्या कर रहा है? ये सही नहीं है.

मैं – बस माँ वही कर रहा हु. जिसकी जरुरत रेशमा को है. और आपको भी उतनी ही है. मगर बस आप कहती नहीं हो.
माँ – बेटा हमारे बीच जो हुआ था. वह गलती से हुआ था. मगर जो तू अब कर रहा है. वह जरूर गलत है.

मैं – माँ अगर वह गलती से हुआ होता. तो आप उसे तभी रोक देती. मगर आप भी उस पल में खो गयी थी. इसका मतलब तो यही है की जरुरत आपको भी है. bhabhi ki chudai

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माँ – ऐसा नहीं बेटा. प्लीज ऐसा मत कर. कोई आ गया तो हमारे बारे में क्या सोचेगा.
मैं – डरो मत माँ छोटा और रेशमा सो चुके है. तभी तो मैं अब आया हु.माँ मुझे रोक रही थी. मगर मैं फिर भी उनकी चुत चाट रहा था. क्युकी मैं जनता था. माँ मुझे रोक तो रही है. मगर अंदर से वह भी इस सुख को भोगना चाहती है.

मैं – माँ चलो मेरे कमरे में चलते है. यहाँ आपको भी डर लगा रहेगा.मैंने माँ को अपनी गोदी में उठा लिया. और उन्हें अपने कमरे में ले गया. कमरे में जाते ही मैंने माँ को बेड पर लिटा दिया.

माँ मेरी आँखों में देख रही थी. और मैं उनका ब्लाउज खोल रहा था.माँ – बेटा ये ठीक नहीं है. तेरा रिश्ता रेशमा के साथ ठीक चल रहा है. तो तू अब मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहा है?

मैं – माँ अपने हमेशा मेरी जरुरत का ख्याल रखा है. मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं आपकी भी जरुरत समझू. मैंने देखा आप मुझे और रेशमा को देखती है. इसका क्या मतलब है?

माँ के पास कोई जवाब नहीं था. क्युकी उन्हें भी अंदर से इसकी ही जरुरत थी.
माँ – बेटा वह सब ठीक है. मगर एक माँ बेटे में ऐसा रिश्ता नहीं बन सकता है. ये सही नहीं है.

मैं – माँ रिश्ता तो बहु और जेठ में भी नहीं होता है. मगर आपने खुद मुझे रेशमा की गर्मी शांत करने की इज़ाज़त दी है. अब अगर हम दोनों भी यही करे. तो इसमें गलत क्या है?माँ के पास मेरे सवालो का जवाब नहीं था. और मैंने तुरंत उनकी चुचि आपने मुँह में भर ली.

मम्मी खुले ब्लाउज के साथ मेरे बेड पर लेटी हुई थी. और मैं उनकी चूचिया चूस रहा था.माँ अब मुझे रोक नहीं रही थी. वह बस आँखे बंद किये मज़ा ले रही थी. और तभी मैंने अपना हाथ माँ की साड़ी के अंदर डाल दिया. और उनकी चुत को सहलाने लगा. माँ ने तुरंत आँखे खोल ली.और वह मेरी तरफ ही देख रही थी. bhabhi ki chudai

मैं माँ की चुत को रगड़ रहा था. और वह मेरा हाथ रोक रही थी. माँ की चूचिया चूसते चूसते मैं उनकी नाभि को चूसने लगा.मेरी जीभ माँ की नाभि में घुसी हुई थी. और मैं माँ की साड़ी भी उतार रहा था. माँ का हाथ मुझे रोक जरूर रहा था. मगर उनकी तरफ से भी पूरी तरह से न नहीं थी.

मैंने माँ की साड़ी निकल दी. अब माँ सिर्फ पेटीकोट में लेती थी. मेरा हाथ माँ की जांघो को सहलाने लगा. और बीच बीच में मैं उनकी जांघो को दबा भी देता था.जिससे माँ के चेरे पर वासना के भाव आ जाते थे. कुछ देर तक मैं सिर्फ जांघो को सहलाता रहा. और फिर मैंने आपने मुँह से माँ के पेटीकोट का नाडा खोल दिया.

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फिर मैंने माँ का पेटीकोट निकाल दिया.और मेरे सामने बालो से भरी चुत थी. माँ को देखकर लग रहा था. जैसे की उन्होंने बहुत टाइम से बाल नहीं बनाये है. मैं माँ की झांटो पर हाथ फेरने लगा. और फिर मैंने उनकी टाँगे फैला दी.
माँ मुझे ही देख रही थी की आज ये सब क्या हो रहा है.

मैं – माँ ये वह सुख है. जिसे रेशमा जो भोगते है. और आप उसकी आवाज सुनती है. उस दिन किचन में भी मैं उसे यही सुख दे रहा था. और आप हम दोनों को देख रही थी. मगर आज से ये सुख में आपको भी दूंगा.माँ समझ तो पहले ही गयी थी की मैं उन्हें देख चूका हु. और बस आज मैं उनकी इच्छा पूरी कर रहा हु.

मैंने तुरंत अपना मुँह चुत पर लगा दिया. और मैं माँ की चुत खोल खोल के चाटने लगा.माँ पहले से ही बहुत गरम हो चुकी थी. उन्होंने चादर को कस के पकड़ लिया. और मैं उनकी चुत को अच्छे से गिला करने लगा. माँ को मज़ा आ रहा था. वह अपनी टाँगे जोड़ रही थी.मगर मेरी जीभ रुकने का नाम नहीं ले रही थी.

और कुछ ही देर में माँ का पानी उनकी चुत से निकल गया. जिसे मैं चाट रहा था. माँ बिलकुल ढीली पड़ चुकी थी. और मैं भी चुत साफ़ करके उठ गया.
मैं अपना कच्छा उतरने लगा. और मेरा लंड कूद के बहार आ गया. जिसे माँ देख रही थी.

मैं माँ के पास खड़ा था. और मेरा लंड उनके बहुत पास था.
मैं – माँ अब इसे आराम से देख लो. वैसे तो आपने बचपन में इसे देखा था. और जब से मैं रेशमा की चुदाई करने लगा हु. आप इसे भी चुप चुप के देख ही लेती है.

माँ की आँखों में शर्म थी. और फिर मैंने माँ का हाथ अपने लंड पर रख दिया. माँ ने भी अपना हाथ नहीं हटाया. और मैं उनका हाथ पकड़ के लंड आगे पीछे करने लगा.उसके बाद माँ खुद मेरा लंड आगे पीछे करने लगी. और मैं उनकी चुत सहलाने लगा. माँ की चुत की गर्मी अभी भी पूरी तरह निकली नहीं थी. और फिर मैं माँ की टांगो के बीच आ गया.माँ मुझे ही देख रही थी. मगर वह मुझे अब रोक नहीं रही थी. मैंने माँ की टाँगे फैला दी. bhabhi ki chudai

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और फिर अपना लंड उनकी चुत पर रगड़ने लगा. माँ को भी अब मज़ा आ रहा था.और फिर मैंने हलके हलके अपना लंड माँ की चुत में उतर दिया. माँ के मुँह से हलके से आहा की आवाज आयी.

मगर ये आवाज दर्द की नहीं मज़े की थी. क्युकी उनकी चुत पहले से खुली हुई थी.मगर सालो बाद एक नए लंड की रगड़ उन्हें मज़ा दे रही थी. मैंने पूरा लंड अंदर घुसा दिया. और कुछ देर ऐसे ही रहने दिया. मैं माँ के ऊपर था. और वह भी मुझे ही देख रही थी.
मैंने अपने होंठ माँ की तरफ बढ़ाये. तो उन्होंने अपनी आँखे बंद कर ली. और अब हम दोनों के होंठों आपस में जुड़ चुके थे. माँ मेरी जीभ का स्वागत खुल के कर रही थी.और मैं भी उनके होंठों को चूस रहा था.

मैंने नीचे से चोदना शुरू कर दिए. और माँ को भी इसमें मज़ा आने लगा. माँ ने अपनी टाँगे मेरी कमर में बांध ली.और अब मैं तेज तेज चोदने लगा. माँ के मुँह अह्ह्ह अह्ह्ह की आवाज आ रही थी.
मैं – माँ आवाज मत करो. कही रेशमा जाग न जाये.माँ ने अपनी आवाज को दबा दिया.

और जब भी उन्हें लगता की आवाज निकलने वाली है. वह आपने मुँह हाथ से बंद कर लेती थी. मैं माँ की चूचिया चूसते हुए चुदाई कर रहा था. जिससे माँ का मज़ा भी दुगना हो गया था.
मैं – माँ अब आपको मुझे और रेशमा को चुपके नहीं देखना पड़ेगा. मैं हर रात आपको ये सुख दूंगा.

माँ ने कुछ नहीं कहा. बस मेरे दोनों हाथो को पकड़ लिया. और मैं धक्के लगता रहा. कुछ ही देर बाद माँ की चुत का लावा निकल पड़ा.और मैंने भी धक्के लगाना बंद कर दिए. मैंने अपना लंड बहार निकल लिया.

और मैं माँ के बगल में लेट गया. मेरा लंड माँ की चुत के पानी से चमक रहा था. और माँ तेज तेज साँसे ले रही थी.अब माँ मेरे ऊपर आ गयी. जैसे की वह समझ गयी थी की मैं क्या चाहता हु. माँ ने खुद मेरा लंड पकड़ के अपनी चुत में ले लिया. और वह मेरे लंड पर बैठ गयी. मेरा पूरा लंड माँ की चुत में था.फिर माँ ने अपना खुला हुआ ब्लाउज भी निकल के साइड में फेक दिया. और मैंने माँ की दोनों चूचिया पकड़ लिया.

जिसे मैं मसलने लगा. और माँ अपनी कमर चलाने लगी.माँ की चूचिया भी उछल रही थी. और फिर वह मेरे ऊपर झुक गयी. और उन्होंने खुद मेरा मुँह अपनी चुचि में लगा दिया. मैं भी मज़े से उनकी चुचि चूस रहा था. फिर मैंने माँ की गांड को पकड़ लिया.और नीचे से तेज तेज धक्के लगाने लगा. जिससे कमरे में फैट फैट की आवाज होने लगी. तब माँ पहली बार बोली.
माँ – बेटा आराम से इससे आवाज बहुत हो रही है. bhabhi ki chudai

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माँ के मुँह से ये शब्द सुनके. मेरा जोश और जयादा बढ़ गया. मैंने माँ को अपने लंड से उतर दिया. और उन्हें घोड़ी बनने के लिया कहा. माँ भी घोड़ी बन गयी. क्या मस्त मोती गांड थी.
मैं माँ की गांड दबाने लगा. और उसे दोनों हाथो से फ़ैलाने लगा. फिर माँ ने खुद अपनी गांड को ऊपर उठा लिया. और एक हाथ से अपनी गांड को फैला लिया. माँ की गांड का छेद देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया.

और मैंने तुरंत अपनी जीभ माँ की गांड में लगा दी. और मैं माँ की गांड चाटने लगा. माँ को मज़ा आ रहा था. क्युकी पहली बार कोई उनकी गांड चाट रहा था.
माँ की गांड चाट चाट के मैंने उनका छेद गिला कर दिया. फिर मैंने अपना लंड माँ की चुत में डाल दिया. और उनकी बड़ी गांड पकड़ के चुदाई करने लगा.मेरा लंड माँ की चुत की गहरायी तक जा रहा था.

और उन्हें भी चुदाई में मज़ा आ रहा था. माँ की गांड का छेद हल्का खुल रहा था. और फिर मैंने अपनी ऊँगली पर थूक लगाया.और उसे माँ की गांड में डाल दिया.
माँ के मुँह आउच करके आवाज निकली. मगर उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा. मैंने माँ की चुदाई करते हुए. उनकी गांड में ऊँगली चला रहा था.

रेशमा तो मुझे गांड में ऊँगली भी नहीं रखने देती थी. और यहाँ माँ ने मेरी पूरी ऊँगली अंदर डाल ली थी. माँ और मेरा पानी निकलने ही वाला था. इसीलिए मैंने धक्के तेज कर दिए.और कुछ ही देर बाद माँ का पानी फिर निकल गया. और फिर मैंने भी अपना सारा पानी माँ की चुत और गांड के छेद पर निकाल दिया.

माँ की गांड और चुत का छेद मेरे पानी से सना पड़ा था. फिर मैंने माँ का पेटीकोट उठाया. और सारा पानी साफ़ कर दिया. अब मैं बीएड पर लेट गया. और माँ को खुद से चिपका लिया. माँ ने भी अपना सर मेरे सीने पर रख दिया.
माँ बिलकुल खामोश थी.

मैं – क्या हुआ माँ आप बिलकुल खामोश हो?
माँ – क्या बोलू बेटा बस यही समझ रही हु. जो हमारे बीच अभी हुआ है. वह सही है या गलत है.
मैं – माँ जब तक ये बात हमारे बीच है. तब तक सब सही है. और बहार ये बात हम किसी को बताएँगे नहीं तो कुछ भी गलत नहीं होगा. bhabhi ki chudai

माँ आप भी एक इंसान है. और आपको भी खुसी मिलने का पूरा है. और मैंने वही किया है.
माँ – बेटा तू कह तो सही रहा है. मगर एक माँ बेटे में जिस्मानी रिश्ता नहीं होता है.
मैं – काश माँ ये रिश्ता पहला शुरू हुआ होता. तो मुझे रेशमा की जरुरत नहीं पड़ती. मैं जनता हु माँ आप बहुत टाइम से अकेली हो. और आप बहार तो किसी के साथ ये सब करोगी नहीं. मगर आप मेरे साथ तो पूरी तरह सुरक्षित है.
माँ ने मेरे सीने को चुम लिया. और इस बार माँ ने खुद मेरा लंड पकड़ लिया.

मैं – माँ एक बात बताऊ. मैंने जितनी बार भी आपको पीछे से पकड़ के आपकी ये चूचिया मसली है. वह सब मैंने जान के किया था.

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माँ – बेटा शक तो मुझे भी था. मगर मैं कहती भी क्या तुझसे सच कहु तो जब भी तू मुझे छूता था.
मेरे शरीर में करंट सा डूअड़ जाता था. और तुझे और बहु को देखकर. तो और भी जयादा मन होता था.
मैं – माँ तभी तो मैं जानकार ये सब करता था. मैं जनता था एक दिन आप भी इसी तरह इस सुख का मज़ा लोगी.
माँ – बेटा बस तू वह पीछे मत देखा कर. वह गन्दी जगह है. और तू उसे भी चाट रहा था. मैं – माँ सच कहु तो मैं आपकी गांड का दीवाना हु. आपकी गांड देखते ही मेरा लंड आपको सलामी देता है. और ये सब आज कल चलता है.
आपने रेशमा को देखा है न कैसे वह मेरा लंड चुस्ती है.
माँ – हा बेटा देखा है. मैं भी वही सोचती हु की बहु कैसे इसे मुँह में ले लेती है.

मैं – बस माँ वैसे ही लेती है. जैसे मैंने अभी अभी आपकी चुत चाट के आपका पानी निकाल दिया था. कहते है इससे एक औरत को परम आनद मिलता है.
आप बताओ आपको कैसा लगा था.
माँ – बेटा सच में मज़ा तो बहुत आया था. ऐसे मेरे साथ आज तक तेरे पापा ने भी नहीं किया था.
मैं – माँ आप कहो तो पूरी रात आपकी चुत चाट सकता हु.

माँ – तो बेटा मैंने कब मना किया है. अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं है. जो करना है कर ले.
मैं उठा और फिर से माँ की चुदाई में लग गया. रात 2 बजे तक मैंने माँ की चुदाई की और फिर माँ कपडे पेहेन के बहार अपने बिस्टेर पर जाके लेट गयी.

सुबह मेरी भी आँख देरी से खुली. मैंने देखा तो मुझे जगाने माँ आयी थी. मैंने माँ को पकड़ लिया. और उनकी चूचिया दबाने लगा.
माँ – क्या कर रहा है बेटा? सुबह सुबह ही शुरू हो गया. तेरा मन अभी नहीं भरा क्या?
मैं – आपसे मन कैसे भरेगा माँ. मैं तो चाहता था. आप पूरी रात मेरे ही साथ रहो. मगर आप ही चली गयी.

माँ – बेटा जो हमारे बीच है. ये बहुत ही अलग रिश्ता है. इसे कोई समझ नहीं पायेगा. और मैं चाहती हु. ये रिश्ता ऐसे ही बना रहे. इस बंद कमरे में तू मेरे साथ कुछ भी कर. मगर बहार मैं तेरी माँ हु.
मैं – मैं समझता हु माँ. आप चिंता मत करो. हमारा रिश्ता ऐसे ही रहेगा. वैसे कल रात नींद कैसी आयी.
माँ – बेटा जो सुख कल रात मुझे मिला था. उसके लिए मैं पता नहीं कब से तड़प रही थी. अब मुझे पता चला की बहु तेरे पास ही क्यों घुसती है. जब ऐसा सुख देना वाला मर्द घर में है. तो वह कैसे खुद को रोक सकती है.

माँ ने मेरा लंड पकड़ लिया. उसे सहलाने लगी.
माँ – जा अब जाके फ्रेश हो जा. वरना ये ऐसे ही खड़ा रहेगा.फिर मैं भी फ्रेश हो गया. और जल्दी से दुकान खोल के बैठ गया. तभी रेशमा मेरे लिए चाय लेके आयी. मैंने उसकी गांड को दबा दिया. रेशमा मुझे देखकर हसने लगी.फिर वह वहा से चली गयी. दुकान पर ग्राहक नहीं थे. तभी माँ अंदर आ गयी. और मैं उन्हें बड़े वाले रैक के पीछे ले गया.
माँ – क्या कर रहा बेटा? वह भी ऐसे दुकान के अंदर कोई देख लेगा तो.

मैं – अरे माँ कोई नहीं देख पायेगा. हम दोनों तो बड़े रैक के पीछे है. माँ बहुत मन कर रहा है.
माँ – बेटा थोड़ा सबर कर ले. रात में जो मर्ज़ी कर लेना. अभी बहु भी यही है bhabhi ki chudai

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मैं – बस माँ थोड़ी देर बहुत मन कर रहा है.माँ मना करती रही. और मैं उनके पीछे आ गया. और फिर मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर दिया. मगर सामने के नज़ारे ने मेरा जोश और बड़ा दिया. माँ की चुत एक दम शीशे जैसे चमक रही थी.माँ की चुत पर बालो का नामोनिशान नहीं था. माँ की चुत से निकला हुआ चमड़ा बहुत अच्छा लग रहा था.

मैं – माँ आपने बाल कब साफ़ कर दिए.
माँ – बस आज सुबह ही नहाते टाइम साफ़ किये है. पहले कभी साफ़ करने की जरुरत नहीं थी. मगर कल रात के बाद मुझे लगा की इन्हे भी साफ़ करना चाहिए.मैं नाक लगा के चुत की महक सूंघने लगा. और फिर मैंने अपनी जीभ चुत में लगा दी. अभी बस 2 मिनट ही हुआ था की तभी एक बच्चा कुछ लेने आ गया.

माँ ने कपडे ठीक कर लिए. और मैं उस बच्चे को सामान देने लगा. बच्चे के जाते ही मैं माँ के पास गया. और उन्हें फिर से पकड़ लिया.
माँ – बेटा अभी ये सब ठीक नहीं है. मन तो मेरा भी है. मगर सबर करना ही ठीक है. तेरे ऐसे छूने से मैं भी अंदर तक गरम हो जाती हु. बस रात तक इंतज़ार कर ले.

फिर माँ वहा से चली गयी. और मैं भी दुकान में बैठ गया. मगर आज मेरा मन नहीं लग रहा था. फिर दोपहर होते ही मैंने दूकान बंद कर दी. और सीधा माँ के पास गया.वैसे हर बार मैं रेशमा के पास जाता था. मगर इस बार मैं माँ के पास गया. माँ मुझे देखते ही स्माइल करने लगी. और मैंने उन्हें इशारा करके कमरे में बुला लिया.

माँ के अंदर आते ही मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया. और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. मैं माँ की चूचिया मसल रहा था. और वह मेरा लंड सहला रही थी.
माँ – जा बेटा थोड़ा टाइम बहु के साथ भी बिता ले. वरना कही शक न करने लगे.

मैं – काश माँ रेशमा की जगह आप ही होती. और हम दोनों टाइम बिताते. वैसे क्या आपको बुरा नहीं लगता है? की मैं आपके साथ भी चुदाई करता हु. और रेशमा के साथ भी. माँ – बेटा मेरा बस चलता. तो उसकी परछाई भी तेरे ऊपर नहीं पड़ने देती. मगर सच कहु आज हम दोनों अगर साथ है. तो वह भी उसकी वजह से है. वैसे भी जरुरत तो उसको भी है.

माँ के साथ कुछ देर चूमा चाटी करके मैं रेशमा के पास चला गया. और जाते ही मैंने अपना लंड बहार निकल लिया. रेशमा ने जैसे ही मुझे देखा. वह मेरे पास आ गयी.और मैंने उसे नीचे बिठा दिया. रेशमा ने भी देर किये बिना मेरा लंड चूसने लगी. मैंने किचन के दरवाजे के पास देखा. तो माँ हम दोनों को देख रही थी.

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रेशमा की पीठ माँ की तरफ थी.इसीलिए वह उन्हें नहीं देख सकती थी. मगर माँ हम दोनों को देख रही थी. कैसा रेशमा मेरा लंड चूस रही है. कुछ देर लंड चुसवाने के बाद रेशमा खड़ी हो गयी.और मैं रेशमा का हाथ पकड़ के उसे बैडरूम में ले गया. हम दोनों माँ के सामने से निकले.माँ – क्या हुआ बहु खाना नहीं निकला अभी. bhabhi ki chudai

रेशमा – बस मम्मी जी अभी निकालती हु.रेशमा मुझसे हाथ छुड़वाने लगी. मगर तभी माँ बोल पड़ी
.माँ – अरे कोई बात नहीं तुम दोनों जाओ. खाना मैं निकाल लेती हु.

बैडरूम में आते ही रेशमा मुझसे चिपक गयी. और हम दोनों एक दूसरे को नंगा करने लगे. रेशमा को नंगा करके मैंने बेड पर लिटा दिया. और फिर उसकी चुत और गांड को चाटने लगा.


तो दोस्तो आपको कैसे लगी ये कहानी आगे क्या हुआ ये मैं आपको अगले भाग मे बतऔगा कैसे माँ ने मेरा लंड मुह मे लिया।
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