By | February 14, 2023

Bhai Bahan ki Chudai Huyi: हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब, आज मैं आपका दोस्त अमित एक बार फिर से आया हु पिछली कहानी का नया भाग लेके, रास्ते मे मिली नयी भाभी की चुदाई 2

अमित शाम को मैं श्रद्धा के घर से निकल कर वापस अपने अंकल आंटी के घर यानि के स्वाति के घर पहुंचा, घंटी बजायी तो दरवाज़ा खुला और सामने आंटी खड़ी थी.

Bhai Bahan ki Chudai Huyi

आंटी: आ गए बेटा कल से गायब थे मुझे तो चिंता होने लगी थी.

मैं: सॉरी आंटी वह मुझे जॉब के चक्कर में अपने दोस्त के यहाँ रहना पड़ा मैंने स्वाति को बताया था, आंटी मुझे अंदर जाने देती हुई बोली: हाँ वह बताई पर उसकी बाते तो वह ही जाने कुछ भी सीधे तरीके से जवाब देती नहीं, मैं अंदर लिविंग में जाकर बैठा,

आंटी: कुछ खाये थे?

मैं: हाँ आंटी खाया था.

आंटी भी मेरे सामने आकर बैठी और बात करने लगी.

आंटी: बेटा अपना नंबर तुम मेरे भी फ़ोन में सेव करके दे दो चिंता लगी रहती है शहर में नए होना तुम.

मैं: हाँ ठीक है आंटी दे दूंगा.

आंटी: चाय पियोगे? Bhai Bahan ki Chudai Huyi

Bhai bahan ki chudai hindi mein

मैं: अगर आप बना रहे हो तो पियूँगा, आंटी उठी और किचन को जाने लगी तो मैंने पुछा: स्वाति नहीं है क्या?आंटी: है ना मैडम साहिबा अपने रूम में विराज मान होगी अपने कान में माइक लगा कर,

मैं मन में हसने लगा की आंटी का मतलब है की स्वाति कान में ईरफ़ोन लगाकर फ़ोन पे होगी तभी स्वाति का डोर ओपन हुआ और ये निकली मेरी कजिन बहिन.

स्वाति: आ गए सर,

मैं हस्ता हुआ बोला: थोड़ा लेट हो गया स्वाति मेरे पीछे से किचन को जाती हुई मेरे बालो को खींच गयी मानो उसे कोई गुस्सा हो,
मैं मन मे सोचने लगा शायद हो भी बेचारी कैसे मेरे लिए अंकल आंटी से झूट बोल रही है, थोड़ी देर बाद स्वाति एक गिलास में गर्म पानी पीती हुई मेरे बगल आकर बैठी, वह बोली: कैसा रहा दोस्तों के साथ? उसके बात में सवाल से ज़्यादा ताना लग रहा था.
मैं: कुछ ख़ास नहीं मेरे पुराने स्कूल के दोस्त थे स्वाति दोनों हाथो से गिलास पकडे पानी पी रही थी मानो छोटी बच्ची हो,
मैं: ये गरम पानी क्यों पी रही हो?

स्वाति: गले में दर्द है थोड़ा ये सुन किचन से आंटी बोली: कल रात को ठूस ठूस के आइस क्रीम खा रही थी तभी समझाया था उसे अब भुक्तो मेरी सुनती कहा है कल से माँ बेटी की किट किट नहीं सुनी थी अब जाकर सुना तो घर जैसा माहौल फिर से लगने लगा.

स्वाति: और बताओ?

मैं: पूछो स्वाति: क्या नाम है फ्रेंड का?

मैं: सा… साहिल नाम है.

स्वाति: हम्म्म… क्या करता है वह? इतने में आंटी एक कप चाय लेकर मुझे दी और बोली: देख बेटा तुम्हारा कोई अच्छा दोस्त हो जिसकी जॉब हो और अच्छा लड़का हो तो इससे पकड़ के सोप दे उसे कम्बख्त से पीछा छूटे, स्वाति अपनी गिलास को ज़ोर से टेबल पर रख उठी और अपने रूम को गुस्से में चली गयी और डोर को ज़ोर से बंद कर दी धड़ाम!

आंटी: हाँ हाँ तोड़ सब तो तेरे पापा का है तोड़ पूरा घर तोड़ अंदर से स्वाति भी चिल्लाती हुई बोली: हाँ थोडुंगी सब मेरे पापा का है और उसके रूम में कुछ टूटने की आवाज़ आयी मैं चुप रहा ये सोच की आखिर हुआ क्या कुछ तो हुआ है जब मैं यहाँ नहीं था, जिसके कारन इन दोनों में कुछ झगड़ा हुआ पर क्या? Bhai Bahan ki Chudai Huyi

मैं: इसको क्या हुआ आंटी?

आंटी: जाने दो बेटा कुछ ख़ास नहीं.

मैं: ओके अगर आपको बताना हो तो बताये, तो मैं उसे समझाता हूँ.

आंटी: क्या समझाओगे तुम? उसके न समझने की उम्र ख़त्म हो चुकी है अब वह बड़ी है उसे भी अपनी समझ होनी चाहिए.
मैं सोचने लगा कुछ तो दाल में काला है जो आंटी मुझे नहीं बता रही ऐसी क्या बात होगी तभी आंटी बात बदलती हुई बोली: अच्छा बेटा दोस्त से मिले तो जॉब का कुछ हुआ?

मैं: हाँ हुआ थोड़ा बहुत जान पहचान हुआ.

Bhai bahan ki chudai ki kahani

आंटी: चलो अच्छी बात है तुम अच्छी जगह जॉब पकड़ लो तो तुम्हारी माँ को ख़ुशी मिले इस जैसी नालायक संतान हुई तो मत पूछ आंटी का इशारा स्वाति पर था आंटी ने अपनी चाय ख़त्म की और उठ कर बोली: चलो बेटा मैं रात के लिए कुछ बना देती हूँ.

मैं: इतनी जल्दी?

आंटी: हाँ आज मिश्रा जी के यहाँ सत्संग चालु हो रही है वहा ज़रा जाउंगी, इतना कहती हुई वह मेरे चाय का भी कप ली और किचन को चली गयी उनके जाते ही मैं अपने रूम को गया अंदर से लॉक किया और सीधा बालकनी का दरवाज़ा खोलकर दूसरी तरफ छलांग मारकर सीधे स्वाति के कमरे के बालकनी में जा पहुंचा, बालकनी खुला हुआ था और देखा तो स्वाति पेट के बल तकिये में मुँह दबायी लेटी हुई थी,

उसे मेरे आने का पता नहीं चला था मैं धीरे से उसके रूम घुसा और उसकी पाँव पर ऊँगली हलके से फेरते हुए गुदगुदी मार दी वह एक झटके के साथ डरी हुई उठी मुझे देख मुँह फुलाती हुई तकिया लेकर मुझ पर फेकि और धीमी आवाज़ में बोली: इडियट! डरा दिए मुझे चोर!

मैं हस्ता हुआ बोला: चोर? मैंने क्या चोरी की?

स्वाति: तो और क्यू आता है ऐसे?मैं उसके तकिये को बगल में रख बोला: क्या हुआ? इतना गुस्सा क्यों कर रही हो?
हम दोनों ही धीमे आवाज़ में बात कर रहे थे ताकि बहार आंटी को पता न चले की मैं स्वाति के कमरे में हूँ

स्वाति: कुछ नहीं.

मैं: ऐसे तो नहीं थी जब आखिरी बार तुम्हे देखा था पूरी ख़ुशी ख़ुशी घर से उछलती हुई गयी थी कल सुबह.

स्वाति: हम्म्म वह कल थी

मैं: तो आज क्या हो गया?

स्वाति: बोली न कुछ नहीं

मैं दुबारा पूछने नहीं गया थोड़ी देर हम दोनों ही चुप रहे फिर उसने चुप्पी थोड़ी और बोली: तो बताओ क्या क्या किये कल से अब तक.

मैं: कुछ ख़ास नहीं स्वाति मुझे चिढ़ाती हुई बोली: लगता है तुम कुछ छुपा रहे हो अमित भैया!

मैं: तुम मुझे भैया मत बुलाया करना यार स्वाति: क्यों? Bhai Bahan ki Chudai Huyi

मैं: अब देखो हम तो भाई बहन जैसे है नहीं तो फिर अकेले तो नाम बोल सकते है ना स्वाति: नहीं मुझे तो भैया बोलने में ही मज़ा

आता है बहन चोद भैया है है है!

उसके मुँह से ये सुन मुझे बुरा भी लगा और कुछ रूप से मज़ेदार भी.

मैं: तुम कौन सी सुधरी हुई हो भाई चुदनी स्वाति: भाई चुदनी? है है है! ये क्या होता है?

मैं: जैसे बहन चोद वैसे भाई चुदनी स्वाति: कुछ भी बस खुद ही बना लो.

मैं: वैसे मैंने तो अभी कुछ किया नहीं तुम्हारे साथ जो तुम मुझे बहन चोद बुलाओ ऐसे.

स्वाति: अच्छा वह ज़रूरी तो नहीं बस नियत देख के भी बुला सकती हूँ

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मैं: वैसे चलो मैं चलता हूँ.

स्वाति: कहा?

मैं: मेरे रूम.

स्वाति: क्यों?

मैं: कुछ पुछा तो तुम बताती नहीं हो तो बात करने के लिए तो कुछ है नहीं.

स्वाति: क्या पूछो?

मैं: यही की क्या हुआ जो आंटी इतने गुस्से में है तुमसे.

स्वाति: ओफ्फो तुम उसी पे अटके हुए हो?

मैं: हाँ बताओगे नहीं तो चला मैं.

स्वाति: तो जाओ!धत यार मुझे लगा वह मान जाएगी और बता देगी पर मेरी दाल गली नहीं इस बीच में बेड पर अपने हाथ पीछे टिका कर बैठा था और बात करने के बीच मेरे हाथ अनजाने में उसके तकिये के नीचे चली गयी और पता नहीं कुछ अजीब सा रबर जैसे दाबते चीज़ को पकड़ा, बिना कुछ सोचे समझे उसे बहार निकाल कर देखने की अच्छे से मेरे हाथ ने उसे बहार खींच लाया.

तो देखा तो वह करीब 7 से 8 इंच लम्बा काला रंग का डिलडो था.

मैं उसे देखा और फिर स्वाति को तब जाकर स्वाति मेरे तरफ देखि और एक ही बार में मेरे हाथ से उसे झपट कर छिन लिया.

मैं धीरे से हस्ते हुए बोला: ये… ये क्या है?

स्वाति: ओफ्फो तमीज नहीं है क्या? लड़की के कमरे में आओ तो अपने हाथ अपने पास रखो.

मैं: तमीज तो ये है जिसके कारन तुम हमेशा रूम में बंद रखती हो.

स्वाति: शट उप ऐसा कुछ नहीं है

मैं: पर थोड़ा ज़्यादा बड़ा नहीं हो गया?

स्वाति मुस्कुराने लगी मेरी बात सुनकर और बोली: बड़ा या छोटा तुम्हे क्या?

मैं: हम्म्म… मतलब तुम्हे बड़ा पसंद है Bhai Bahan ki Chudai Huyi

स्वाति: हाँ है है है!

मैं: ओहो! तो मतलब अब तुम वर्जिन नहीं हो, स्वाति अपने हाथ में डिलडो पकड़ कर हिलाती हुई बोली: वैसे भी इसके आने से पहले भी नहीं थी.

मैं: हम्म्म… क्या कहा अभी ?

स्वाति: तुम्हे क्यों बताऊँ!मैं: ओफ्फो बताओ तो.

स्वाति: है कोई!मैं: अच्छा तो अभी भी है,

स्वाति: नहीं मतलब… था कोई मैं: पकड़ी गयी तेरा झूठ मुझसे क्या छुपाना बतावा कोन है.

स्वाति: अभी नहीं बाद में कभी.

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मैं: कॉलेज फ्रेंड?

स्वाति: नहीं.

मैं: स्कूल फ्रेंड?

स्वाति: नोआह!

मैं: हम्म्म… इस अपार्टमेंट में कोई?

स्वाति: हम्म्म…हाँ

मैं: हम्म्म… मुझसे छोटा है या बड़ा?

स्वाति: बड़ा है और बस अब आगे और कुछ नहीं बताउंगी.

मैं: अच्छा एक आखिरी सवाल.

स्वाति: क्या?

मैं: अगर इसी अपार्टमेंट में है तो रोज़ मिलती हो क्या उससे?

स्वाति: हाँ.

मैं: तो कल सुबह इतनी उछलती हुई उसी के पास गयी थी हम्म्म वैसे तो मेरे मन में थोड़ी जलन हो रही थी की साला कोन हरामी स्वाति को चोदता है पर उसके सामने हसी का मुखौटा पहन बात कर रहा था,

स्वाति: नहीं नहीं कल उससे मिलने सब नहीं गयी थी.

मैं: तो क्या आंटी को भी पता चल गया उसके बारे में जिस कारन वह इतनी गुस्से में है तुमसे

स्वाति: नहीं यार वह खामखा

मैं: हम्म्म… ठीक है बताना है तो कभी भी अपना दोस्त समझ के बता देना खामखा मैं पूछ कर परेशान नहीं करूँगा.

स्वाति: हम्म्म गुड भैया

मैं: ओफ्फो फिरसे भैया अच्छा चलो ये बताओ इसका करते क्या हो तुम?

मैं ये उसके हाथ में पकडे डिलडो को देख बोला.

स्वाति: और क्या करुँगी वही जो इससे करते है

मैं: है है है! कहा घुसाती हो?

स्वाति मुझे देख शरारती हसी के साथ बोली: जहा मन किया. Bhai Bahan ki Chudai Huyi

ये सुन्न मैं सोचने लगा जहा मन किया मतलब इसने उस डिलडो से सिर्फ अपनी छूट में तो नहीं डाली होगी.

मैं: कहा कहा मन करता है तुम्हारा?

स्वाति: वह तो मूड के उपर करता है अच्छा छोड़ो आप मुझे अपनी बारे मे बताओ कुछ.

मैं: गर्लफ्रेंड?

स्वाति: हाँ गर्लफ्रेंड.

मेरी इंग्लिश इतनी अछि नहीं की फंतासी क्या है मैं समझू तो पुछा: वह क्या होता है?

स्वाति: ओहो! सेक्स इडियट.

मैं: सेक्स समझा मतलब क्या वह पुछा स्वाति: फंतासी मतलब अब कैसे समझों मतलब कुछ ऐसा जो आप करना चाहते हो सेक्स में, मैं अपना माथा खुजलाते हुए बोला: यार क्या पूछ रही हो ठीक से नहीं समझा सकती क्या,अब भी स्वाति: ओके चलो मैं बताती हूँ अपनी एक तब तुम्हे शायद समझ आये.

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मैं: ठीक है बताओ.

स्वाति: सेक्स इन ओपन बीच.

मैं: मतलब तुम खुले समुन्दर के बीच में सेक्स करना चाहती हो?

स्वाति: हाँ वह मेरी एक दोस्त है वैसा कुछ?

मैं: है है है! अजीब फंतासी है तेरी स्वाति: क्यों? क्या अजीब है?

मैं: सब ये बंद कमरे में करते है और तुम्हे खुले बीच में करने की इच्छा है.

स्वाति: सबके अलग अलग मैं होते है ओके ओके अब अपनी बताओ.

मैं एक मिनट सोचने के बाद बोला: मेरे स्कूल में एक लड़की थी किरण नाम की मुझे वह काफी पसंद थी.
स्वाति: ओहूहः! तो?

मैं: तो! तो क्या?

स्वाति: इसमें फंतासी क्या है?

मैं: पता नहीं पर तुमने पुछा तो बता दिया बस.

स्वाति: डफर सेक्स फंतासी पूछी ओके रहने दो वैसे बताओ ये किरण कोन थी?

मैं: है है है! अब तुम उसकी पूछो मत पकड़ो मुझे खुद नहीं पता की वह अब किधर है.

स्वाति: हम्म्म… क्रश या गर्लफ्रेंड थी?

मैं: अरे यार तुम ये इंग्लिश के इतने खतरनाक शब्द न बोलो. Bhai Bahan ki Chudai Huyi

स्वाति: ओके क्रश मतलब जिसे तुम पसंद करते थे और गर्लफ्रेंड तो जानते ही हो.

मैं: ओह अच्छा हाँ क्रश थी पर गर्लफ्रेंड नहीं.

स्वाति: देखने में कैसी थी? मेरे जैसी थी या मुझसे ज़्यादा खूबसूरत.

मैं: नहीं नहीं वह तुम्हारे जितनी गोरी नहीं थी बस पसंद थी मुझे जैसी.

स्वाति: हम्म्म… कभी बताये उसको की आप उसको पसंद करते है?

मैं: नहीं नहीं… कभी नहीं .

स्वाति: क्यों?

मैं: नाह… दर लगता था .

स्वाति: बोल देते न डरने की क्या बात थी.

मैं: नहीं नहीं वह मुझसे जूनियर थी मैं तो कभी उससे बात तक नहीं कि.

स्वाति: ओह गॉड सच मे है है है! तुम तो बड़े फत्तू हो.

मैं: देखो आज ज़माने में तो फ़ोन व्हाट्सप्प सब है लेकिन उस वक़्त वह सब नहीं था जो भी हो मुँह पर बोलना पड़ता था तुम क्या जानो यार हालत ख़राब हो जाती थी.

स्वाति: ओके ओके तो उसमे क्या अच्छी लगता था आपको?

मैं तब अपने पुराने स्कूल के टाइम को याद करने लगा ये तो आप लोग भी जानते है की स्कूल के वक़्त की उसे एक लड़की जिसके लिए हमारा दिल धड़कता था उसे जब भी याद करो तो चेहरे पे एक हलकी मुस्कान आ ही जाती है;

उसे याद करते हुए मैं बोला: उसकी स्माइल काफी प्यारी थी शार्ट बॉय कट हेयर और स्कूल यूनिफार्म में वह काफी प्यारी लगती थी.

स्वाति: क्या था आप स्कूल के यूनिफार्म मे ?

मैं: शर्ट और पैंट.

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स्वाति: ओफ्फो आपकी नहीं लड़को का तो वही होता है उसकी पूछी आपके स्कूल की गर्ल्स यूनिफार्म.
मैं: क्लास 10 तक शर्ट और स्कर्ट 11 और 12 सलवार सूट.

स्वाति: ओहो! तो उसकी चूंनरी में फस गयी आपकी आँखे है है है! Bhai Bahan ki Chudai Huyi

मैं: अरे नहीं वह 6 तक ही हमारे स्कूल में थी फिर पता नहीं उसके शायद पापा का ट्रांसफर हो गया और फिर मुझे पता नहीं.
स्वाति: क्लास 6! तो क्या आप उसको उससे पहले से ही…मैं मुस्कुराता हुआ बोला: हाँ शायद तब वह क्लास 5 में थी जब मैं उसे पहली बार देखा था एक अजीब सा सुकून मिलता था उसे देख के तब पता नहीं था की वह प्यार था या क्या.

स्वाति अपने हाथ में पकडे डिलडो को नीचे रख दिया और मेरी बात को सुनने लगी मानो उसे भी मेरे छोटी सी लवस्टोरी सुनने में अच्छा लग रहा हो.

स्वाति: हम्म्म… तब आप किश क्लास में थे?

मैं: तब मैं 10 मे था।

स्वाति: है है है! छोटी बची के साथ लवस्टोरी।

मैं: जब मैं फर्स्ट ईयर में था तब भी उसे देखने के लिए अपने स्कूल के पास जाया करता था पर उस साल के बाद वह मुझे कभी नहीं दिखी बाद में पता चला की वह हमारे शहर से कही और चली गयी, जब मैंने ये कहा तो मेरे आँखों में एक हलकी सी नमी आ गयी थी कहावत है की मर्द को दर्द नहीं होता पर कुछ यादे ज़िंदगी की ऐसी होती है जिनके सामने हमारी मर्दानगी भी टूट जाती है.

ये स्वाति ने भी देखा और बोली: अरे आप उदास हो गए क्या?

मैं: नहीं मैं कोई उदास नहीं हूँ पागल हो क्या।

स्वाति: है है है! साफ़ दिख रहा है ओके चलो आप मुझे उसका पूरा नाम बताओ.

मैं: पूरा पता नहीं मुझे किरण उतना ही पता है मुझे पर क्यों?

स्वाति: अरे भैया! आप टेंशन मत लो आज के ज़माने में किसी को खोजना उतना मुश्किल नहीं, वह तुरंत अपनी फ़ोन उठायी और कुछ करने लगी थोड़ी देर बाद बोली: देखते है नाम किरण अपने शहर का और स्कूल का नाम बताओ,
में: ओहो तुम कर क्या रही हो!

स्वाति: बतावा जो पूछा.

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मैं फिर उसे अपने शहर और स्कूल का नाम बता कर दिया कुछ 2 मिनट ऐसे ही अपने काम में लगी रही फ़ोन पे उसके बाद बोली: हम्म्म देखते है आपके प्यार की किरण मिलती है या नहीं.

मैं: क्या किया तुमने वह तो बताओ?

स्वाति: बस ऐसे ही अपने सोशल मीडिया के दोस्तों को मैसेज डाली वह शायद ढून्ढ निकले उसे फिर तो आपको मुझे कुछ बड़ा गिफ्ट देना पड़ेगा.

मैं: है है है! वह सब होने वाला नहीं मुझे खुद नहीं पता वह कहा किधर है तुम्हारे दोस्तों को कैसे,
स्वाति: बस बस वह सब मुझे नहीं पता देखते है,

मैं: चलो अब तुम मुझे ये बताओ की क्या हुआ जो आंटी गुस्से में है.

स्वाति: ओफ्फो फिर से वही पहुँच गए?

मैं: हाँ मैंने देखो ये बताई तुम्हे जो मैं किसी को नहीं बताता तो अब तुम्हे भी बताना होगा.

स्वाति ज़ोर की सांस छोड़ती हुई मुझे देखा और बोली: ओके मैंने माँ के थोड़े पैसे चुरा लिए, मैं: है है है! कितने?स्वाति: एक 25000,

मैं चौकता हुआ पुछा: क्या? 25000? पर क्यों.

स्वाति: मुझे ज़रूरत थी बस, मैं: यार 25000 में मेरा 4महीना काट जायेगा तुमने चुरा लिया?

स्वाति: अरे भैया 25000 इस शहर में उतनी बड़ी नहीं जल्दी ही कथं हो जाते है.

मैं: क्या किया तुमने उसका?

स्वाति: वह तुम्हे जानने की ज़रूरत नहीं बस चुरा लिए.

मैं: चलो अच्छा हुआ मेरे पास पैसे नहीं वरना चोर मेरे पैसे भी चुरा लेती है है है! Bhai Bahan ki Chudai Huyi

स्वाति मेरे कंधे को मारती हुई बोली: मैं चिन्दी लोगो के पैसे नहीं चुराती हँ!

मैं: मेरे तो कुछ है नहीं ऐसे स्वाति: पोर्न देखते हो?

मैं: पोर्न नहीं नहीं वह सब नहीं स्वाति: है है है! इंग्लिश नहीं आती पर पोर्न का मतलब जानते हो!

मैं: अरे यार वह तो सबको पता है आजकल पर मैं नहीं देखता वह सब,

स्वाति: हो ही नहीं सकता,

मैं: अरे मैं हनुमान भक्त हूँ वह सब मेरे लिए बिलकुल गलत है ये बोलते वक़्त मैं कल से आज शाम तक श्रद्धा के घर हुई कारनामो को सोच हनुमान जी से मन ही मन माफ़ी मांगने लगा,

स्वाति: ओहो बड़े आये हनुमान भक्त कल सुबह देखा था इसी कमरे मैं आपकी भक्ति है है है!वह कल सुबह की बात कर रही थी जब मैं ऐसे ही इसके कमरे में था

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वह तो आप लोगो ने पढ़ा ही होगा.

मैं: वह तो बस तुम्हारे कारन हुआ वैसे तुम देखती हो क्या?

स्वाति: क्या पोर्न? हाँ बहुत बार देखि हूँ मेरे अंदर एक हलकी करंट दौड़ी ये देख की वह कितने खुले आम मुझसे ये बात बोली

मैं: हम्म्म…मैं बस हम्म्म बोलो आगे बोलना चाहता था की वह कितनी बिगड़ गयी है पर फिर श्रद्धा और पायल मेरे आँखों में आ गयी और मैं सोचा की मैं अब कौन सा दूध में धुला हूँ दो शादी शुदा औरतो के साथ सेक्स सिर्फ सेक्स नहीं उनकी गांड को भी चोदा, क्या से क्या हो गया इन 2 दिनों में इस शहर में आकर ये सोच ही रहा था की तभी आंटी की आवाज़ आयी,

आंटी: अमित!

मैं अनजाने में अपना मुँह खोल कर हाँ बोलने गया तो स्वाति मेरे मुँह को दाबती और बोली: बेवक़ूफ़ फिर से तुम वही करने जा रहे हो ये मेरा रूम है अपने रूम जाकर चिल्लाओ इडियट!मैं फिर झट से भागा और अपने कमरे को निकल गया आंटी को जवाब देने के लिए. Bhai Bahan ki Chudai Huyi
तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना ही आगे क्या हुव अकसी मैंने अपनी बहन स्वाति को कैसे चोदा, ये मैं आपको अगली कहानी मे बतौगा.
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