By | March 15, 2023

Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help : हेलो दोस्तों,  मैं आपका दोस्त राहुल, पिछले भाग मे आपने पढ़ा था कैसे  स्विमिंग पूल में मैं और भारती लड़ते झगड़ते एक दूसरे के करीब होते गए शायद सिर्फ मैं ही नहीं था जिसे सेक्स की प्यास थी शायद अब भारती को भी थी शायद कल रात मेरे और माँ के साथ अपनी माँ को चुदते देख उसके मन में भी उम्मीदे पनप रही थी।

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Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

स्विमिंग पूल से निकल वह मुझे अपने साथ घर वापस जाने के लिए बात बोली तो मेरे अंदर ख़ुशी और उत्तेजना की ज्वाला मुखी फूट पड़ी, दोनों ही जानते थे की घर में उस वक़्त कोई नहीं होगा, क्योंकी उसी वक़्त माँ और आंटी स्विमिंग पूल के दूसरी तरफ थी, भारती मुझसे घर की चाबी ले गयी और जाती हुये बोली: 

भारती: तुम कुछ देर यही रुको मेरे साथ मत आओ कोई देख लेगा, मैंने भी ये सही समझा और कुछ 1-2 -मिनट बाद अपने घर को पहुंचा दरवाज़ा अंदर से लॉक नहीं था मैं सीधा अंदर घुसा दरवाज़े को बंद करके लॉक किया भारती को देखा पहले किचन में, पर वह वहा भी नहीं थी, फिर मेरे कमरे में जहा वह ठहरी थी वहा से कुछ आवाज़ आयी उसके पास जाने की बात से ही मेरे तन्न बदन में आग लगी हुई थी, रूम का दरवाज़ा हल्का खुला हुआ था . Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

जब अंदर देखा तो भारती पिछले बार के तरह सिर्फ एक टी-शर्ट पहनी आईने के सामने अपने गीले बाल साफ कर रही थी, वह आईने में देख चुकी थी की मैं पीछे खड़ा हूँ कुछ बोली नहीं बस हलके से मुस्कुरा दी, उसकी वह मुस्कान इतनी सेक्सी थी मानो पूछ रही हो की मैं वही क्यों खड़ा हूँ, मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसे पीछे से जाकर अपने बांहो में ले लिया, 

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भारती बोली: गेट  लॉक किये?

मैं: नहीं नहीं किया? क्यों डर लगता है क्या तुम्हे? भारती अपनी होंटो को काट बोली: 

भारती: डर तो तुम्हे लगना चाहिए… मुझसे! मैं उसके टी-शर्ट के ऊपर से हाथ ऊपर लेकर बूब्स को पकड़ के बोला: क्यों मुझे क्यों डर लगे तुमसे? मेरे सवाल पर भारती ने जवाब नहीं दिया, लेकिन मेरे बाज़ुओ को धकेल कर खुद को मुजसे छुड़ाई और पलट कर मेरे सीने पर ज़ोर का धक्का मारा फिर मैं पीछे की और जाता हुआ बिस्तर से टकराया और पीठ के बल बिस्तर पर गिर पड़ा, वह मेरे पास आयी और अपना  एक पाँव उठाकर सीधे मेरी खुली जांघो के बीच दे मारा और मेरे लंड से इतने करीब दे मारा की एक पल के लिए मैं सच मे डर गया, मेरे घबरायी शकल को देख भारती खिलखिला कर हस्स पड़ी और बोली: 

भारती: है-है-है! बास इतने में ही डर गए, मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और उसकी टी-शर्ट को पकड़ कर अपनी तरफ खींच डाला और वह सामने की और गिरती हुई मेरे सीने पर आ गिरी उसका चेहरे ठीक मेरे सामने और काफी करीब था  इतने करीब की हम दोनो की साँसे एक दूसरे से टकरा रही थी,

हम दोनों एक दूसरे की आँखों में घूर रहे थे जो आग मेरी आँखों में थी मुझे वह उसकी आँखों में भी दिख रही थी मानो जैसे मैं उसे पागलो की तरह चोदना चाहता हूँ शायद वह भी मुझसे पागलो की तरह चुदवाना चाहती हो। कुछ पल हम दोनों आँखों में एक दूसरे की छुपे अरमानो को जाने उसके होंठ मेरी  तरफ बढ़े और हम एक दूसरे को चूमने लगे होंटो से होंटो की मस्ती भरी लड़ाई होने लगी,

कभी उसके होंठ मेरे ऊपर तो कभी मेरे होंठ उसके होंटो के ऊपर चूमते चूमते मेरे हाथ उसके पीठ से होते हुये नीचे जाने लगे और सीधे उसकी गांड पर जा बैठा अपने दोनों हाथो में उसके सुडौल गांड को दबाया, उसे अपने करीब खींचने लगा और वह इसका जवाब मेरे होंटो पर दांतो को गदा कर देने लगी, और ज़ोर ज़ोर  चूमती हुई वह अपने एक हाथ मेरे पीछे ले गयी और मेरे हाथो को अपनी गांड से हटा दिया और  मुझे लगा शायद वह उसे पसंद नहीं आया और पर फिर वह अपनी कमर को हिलाने लगी और कुछ देर बाद वह मेरे हाथ को पकड़ वापस अपनी गांड पर लगा दिये.

इस बार मेरे हाथ उसकी गांड पर लगते ही मेरे अंदर जोश की बाँध फूट पड़ी  और मेरे हाथ पहली बार भारती के नंगी गांड पर थे  और मुलायम गांड को दबाता हुआ मैं और पागल होता हुआ उसे चूमने लगा कुछ ही पालो बाद मैंने अपनी उंगलिया उसकी गांड की दरार के बीच लगायी और पूल के पानी से गीली उसकी गांड की छेद पर ऊँगली रगड़ने लगा, वह उत्तेजित होती हुई अपनी गांड को कसने लगी पर मेरी उंगलिया हार न मानते हुए उसे उसी जगह पर रगड़ती रही हम दोनों के चुम्बन से ओर जायदा  आक्रामक हो रहे थे, Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

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कभी वह मेरे होंटो को काटती तो कभी मेरी जीभ को काट कर अपने मुँह में खींच कर चूसने लगती कुछ ही पलो में भारती अपनी गांड की मासपेशियो को ढील देने लगी मैं समझ गया की उसे अच्छा लगने लगा हैऔर फिर वह अपनी जांघो को किसी मेढक के तरफ खोल कर फैलाती हुई मेरे कमर पर अपनी जांगे लपेटने लगी फिर वह शायद मेरे हाथ को और अंदर जाने की अनुमति दे रही थी, मैंने  एक पल न बर्बाद किया और अपना एक हाथ उसकी गांड के बीच ले जाता गया और अपने अंघूठे को उसकी गांड पर सहलाता हुआ दो ऊँगली नीचे से उसकी गीली चूत में धीरे से उतार दी फिर वह चूमती हुई मेरे मुँह में ही सिसकार दे गयी, फिर अपनी कमर को काफी धीरे धीरे आगे पीछे हिलाने लगी.

जब वह आगे आती तो उसकी चूत मेरी ऊँगली को अपने से बहार निकालती और फिर वह पीछे जाती हुई ऊँगली को वापस अपने अंदर ले लेती और हिलाती हुई हर बार मेरे ऊँगली के अंदर जाते ही वह आहे छोड़ जाती अब उसकी चूत सच मे काफी गरम और नयी नवेली चूत के तरफ कसी हुई थी पर मेरी दो ऊँगली भी उसकी चूत में कस रही थी नीचे मेरे शार्ट में इन सबसे उत्पात मचा हुआ था और मेरा लंड काफी ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था, लोहे जैसे तना लंड शार्ट के अंदर खड़ा था फिर अगले 1 मिनट भारती ऐसे ही मेरे ऊपर पड़ी रही फिर अपनी कमर को हिलाती हुई मेरी उंगलियों का मज़ा लेती रही फिर चूत में मेरी दो उंगलियों का और गांड के छेद पर मेरे सहलाते हुये अंघूठे का और  फिर वह मेरे होंटो से अलग होकर मेरी आँखों में देख बोली:  Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

भारती: एक सीक्रेट बताऊँ अपनी? उसकी तीखी जवान आँखे वासना की तेज़ धार से चमक रही थी उसकी आँखों में नशे का अलग रंग था मैं हर पल मानो उसकी आँखों में डूब रहा था मानो वह किसी नागिन के तरह मुझे मोह माया में कस्ती हुई झंझोर रही थी,

मैं: क्या बतावा! वह नीचे अपनी कमर को और दबाती हुई मेरे लंड को दबाकर बोली: 

भारती : मैं वैसी नहीं जैसे तुम मेरे बारे में सोचते हो उसके हर लैब्स पर उसकी गरम साँसे मेरे होंटो से टकरा रही थी मेरी भी साँसे तेज़ होने लगी और मैंने पुछा:

मैं:  क्यों तो तुम कैसी हो बताऔ, वह मेरे चेहरे के और करीब आयी और धीमे आवाज़ में दांतो को दबाती हुई बोली: मैं बड़ी चुड़कड़ लड़की हु ,उसके  मुँह से ऐसे सुनते ही मेरा लंड ज़ोर के धक्के उसके कमर के नीचे मारने लगा, ये जानकर वह हलके से मुस्कुरायी और आगे बोली: 

भारती: यस राहुल वैरी डर्टी गर्ल तुम नहीं जानते, मैं उसकी बातो से सच मे बहुत उत्तेजित हो रहा था मैं उससे और सुनने के लिए बोल: नो मैं नहीं मानता, पर भारती इस बार कुछ न बोली लेकिन मेरी आँखों में आँखे डाल कर अपने एक हाथ को पीछे ले गयी मेरे हाथ को पकड़ अपनी चूत से उंगलियों को निकलवाती हुई उस हाथ को सामने हमारे चेहरे के पास ले आयी, और मेरे उंगलियों पर लगी चमकती नमी और उसकी खुशबू मुझे सूंघती हुई मेरे होंटो के पास ले आयी इससे पहले की मैं जीभ निकाल कर उसे चाट जाता वह मेरी उंगलियों को अपने मुँह में डाल कर सारा माल चाट गयी, वह अपने ही रस का स्वाद लेती हुई मुझे दिखने लगी फिर मुस्कुराकर बोली: 

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भर्ती: अब भी यकीन नहीं हुआ? वह अपने मुँह में उस अंघूठे को ले जाती हुयी फिर जो मैं उसके गांड पर अपना हाथ  रगड़ रहा था उसकी ऐसी हरकत देख मेरे रग-रग में पागलपन उतरने लगा जिस भारती को मैं जानता था वह एक बहुत ही पढ़ाकू सीधी साधी लड़की थी, लेकिन ये जो थी वह भारती की एक छुपा हुआ रूप था।  Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

इसे शायद मैं अब तक अपने दिमाग के गहरे कोने में भी नहीं सोचा था कभी ये बात ही इस पल को और ज़्यादा उत्तेजनात्मक बना रही थी मेरे अंघूठे को चूसने के बाद वह फिर से बोली: वांनै टास्ते में? बोलो चखना चाहोगे? मैं धीरे धीरे सर हिलता हुआ बोला : यस!

भारती: रियली?

मैं: हाँ प्लीज,

भारती: तो फिर एक शर्त पे तुम्हे हमेशा मिलेगा ये, 

मैं: प्लीज कुछ भी मंज़ूर है।

भारती: कुछ भी? तो अब से मैं जो भी बोलूंगी तुम्हे मानना होगा।

मैं: मानूंगा सब मानूंगा, भारती मुस्कुराती हुई मेरे पेट पर उठ बैठी और फिर मुझे नीचे देखती हुई बोली: क्या चाहिए पहले? उसने अपनी टी-शर्ट उठायी और अपनी चूत को सहलाती हुई बोली: ये फिर अपने दूसरे हाथ को पीछे ले गयी और अपने पीछे कुछ करती हुई बोली: या… ये?

मैं: दोनों… प्लीज दोनों चाहिए मुझे! वह हस्ती हुई मेरे ऊपर से सरकती हुई बिस्तर से नीचे उतर गयी उसके उतरते ही मेरा लंड खड़ा हो गया उसे देख भारती बोली: 

भारती: है-है-है काफी मज़े में हो! मैं: अभी कहा यार…भारती रूम से जाने लगी और मैं सोचने लगा की ये कहा जा रही है अब मुझे टी-शर्ट के नीचे से अपनी नंगी गांड दिखाती हुई वह रूम से निकल गयी मैं उठ खड़ा हुआ और उसके पीछे पीछे जाने लगा, वह चलती हुई मुझे देखती और फिर आगे चलती रही क्यूकी वह जानती थी की मैं अब उसके पीछे कोई लार टपकाते हुये कुत्ते जैसा पड़ा हूँ इसका फायदा उठाती हुई वह किचन को चली गयी, Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

मैं किचन पहुंचा तो वह गिलास में पानी ले रही थी मैं उसके पीछे खड़ा उसके अधनंगे बदन को देख रहा था इस बात को सोच उत्तेजित हो रहा था की कैसे मेरे सामने वह इतनी बेशर्मी के साथ खुले आम घर के किचन में खड़ी थी, गिलास में पानी लेकर वह मुड़ी और किचन के काउंटर पर पीठ टिका कर खड़ी हुयी मुझे देख पानी पीने लगी।

मैं: बड़ी प्यास लगी थी तुम्हे? भारती काफी धीरे धीरे गिलास से मुस्कुराती हुई मुझे तीखी नज़रो से देख रही थी फिर वह बोली: 

भर्ती: क्यों तुम भी पियोगे? ये कहती हुई वह गिलास से पानी पीती हुई अपनी ऊँगली से मुझे पास आने का इशारा किया और मेरे पास जाते ही वह मेरी टी-शर्ट के को पकड़ कर अपने पास खींचा अब  मेरे होंटो से होंठ लगाकर चूमती हुई उसने अपने मुँह से पानी मेरे मुँह में दाल दिया  और चूमना सुरू करते हुये बोली: पियो! मैं उसे गले से उतार बोला : ममम ये तरीका मस्त था.

Bhai bahan ki chudai ki kahani

भारती: अच्छा! वह मेरे कंधे पर दूसरा हाथ रख मुझे नीचे दबाती हुई बोली: 

भर्ती: बैठो एक और तरीका दिखाती हूँ, वह ग्लास को सामने लायी और अपने घुटनो पर धीरे से पानी की पतली धार गिराने लगी पानी नीचे को बहता  हुआ आया तो वह पाँव हलके से उठाकर उसकी उंगलियों को मेरे होंटो के पास लेकर बोली: 

भारती: पियो! मैं उसकी हरकतों से उत्तेजित होता हुआ उसका गुलाम बन चुक्का था कुछ न सोचा उसके पाँव की ऊँगली को अपने मुँह में लेकर पानी को चूसता हुआ पीने लगा, और पानी  पीते हुए मैं ऊपर उसे देख रहा था तो वह मुस्कुराती हुई बोली: 

भारती: और पियोगे? मैं हाँ में सर हिलाया तो इस बार उसने पानी अपनी जांघ पर पानी  डाला और मैं फिर से आते हुए पानी को पीने लगा और उस सादे पानी में भी अजीब सा नशा मेरे तन्न बदन में घुल रहा था आधा गिलास पानी ख़त्म होने पर उसने अपने पाँव मेरे मुँह से खींच निकला और सीधी खड़ी होकर बोली: पसंद आया?

मैं: हाँ!

भारती: अब… एक और तरीका दिखाऊं? भारती मेरे सामने अपनी टाँगो को थोड़ा फैला कर खड़ी हुई थी फिर मेरी आँखों में देख कर अपने दूसरे हाथ से टी-शर्ट उठायी फिर अपनी नाभि के ऊपर गिलास से पानी की धार गिराने लगी, मैं ऊपर देखता रहा और पानी उसकी नाभि से नीचे होते हुए उसकी चूत पर गिरने लगा फिर चूत के होंटो को गिला करती हुई नीचे फर्श पर गिराने लगी।

भारती: पियोना अब! मैं इतना उत्तेजित और पागल आज से पहले कभी नहीं हुआ था मेरा लंड उसकी हरकतों से तन्न कर सख्त होकर दुखने लग गया था अब मैंने  सीधे उसकी फैली टाँगो के बीच गया और उपर से गिरते पानी की धार के नीचे मुँह खोल कर उसे पीने लगा, वह भी मेरी हरकत से उत्तेजित होकर मेरे सर के बालो को पकड़ कर अपनी चूत से सटाकर बाकि बचा पानी अपने चूत पर गिराती हुई मुझे देने लगी. Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

मैं पानी पीता हुआ उसे देखने लगा, उसकी आँखों में मस्ती और नशा उतर रहा था मेरे बालो में उसके कस्ती उगलिया मुझे इस बात का एहसास दे रही थी की धीरे धीरे उसकी जांगे और फैलती गयी मैं उसकी चूत की होंटो को अपने होंटो से चूम कर चूसने लगा, उसकी सिसकार पर मैंने अपनी जीभ उसके अंदर धकेली एक पल के लिए मेरे चेहरे को अपनी जांघो के बीच दबाती हुयी फिर मस्ती मैं आती हुई और ज़्यादा फैलाती हुई मुझे अपनी चूत खाने को देने लगी, कुछ देर चूत को चाटने ओर चूसने के बाद जब भारती अपने मज़े में पूरी तरह से खोयी हुई थी मैं अपने  एक हाथ को नीचे से ले गया और 2 ऊँगली चूत में धीरे धीरे घुसाने लगा, नीचे से ऊपर समाती उंगलियों की मस्ती में वह आहे भरने लगी,

Bhai aur bahan ki chudai

उसकी आहे सुनते हुए मेरी उंगलिया पल हर पल तेज़ी पकड़ने लगी उसकी चूत मस्ती में गीली होकर रस उगल रही थी और उंगलिया फिसलती हुई अंदर बहार हो रही थी, भारती एक हाथ से टी-शर्ट को बूब्स के ऊपर टिका कर अपनी निप्पल निचोड़ रही थी दूसरी हाथ से मेरे सर के बालो को पागलो की तरह अपनी तरफ खींच रही थी बालो के खींचने से होते दर्द का बदला मैं अपनी उंगलियों को उसके अंदर मारता हुआ ले रहा था, जब मुझे लगा की वह झड़ने को पहुँच गयी है तो मैंने  अपनी उंगलियों को खींच निकाला और वापस उसके निकलते रस को चाटने लगा।

भारती: करना… ऊँगली से करो प्लीज… रुको मत, मैं उसकी चूत चाटकर उठा और बोला : सिर्फ खुद मज़ा लोगी? 

भारती चिढ़ती हुई बोली: इडियट… रुके क्यों? मैं शार्ट का नाडा खोला और अपने शार्ट को ढीला कर नीचे को गिरने को छोड़ दिया और उसके नीचे गिरते ही मेरा लंड उसके सामने उछल कर सीधा लोहे के तरह खड़ा था।

मैं बोला: तुम भी इसका कुछ ख्याल रखना तो ऊँगली के जगह इससे मज़ा दूंगा, वह आगे बड़ी और मेरे लंड को पहले एक थप्पड़ मारा फिर अपने हाथो में लेकर मेरे सामने बैठ ऊपर देख बोली: ये कितना सख्त और मोटा है? मैं नीचे उसे देख बोला: तुम बोली थी की तुम वर्जिन नहीं हो तो क्या इससे पहले वाला इतना बड़ा नहीं था?

भारती आगे बढ़ी और मेरे लंड के मुँह पर लेकर जाभ फेरती हुई बोली:  Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

भर्ती: शायद नहीं, ये कहती हुई वह अपने होंटो को गोल बनाया और ऊपर मेरी आँखों में देखती हुई मेरे लंड को अंदर निगल गयी, उसके छोटे से मुँह में मेरे लंबे लंड को गायब होते देख मैं और पागल होने लगा और  मुँह में लेकर जिस तरह से वह मेरे लंड को चूसने लगी इससे पता चल गया की वह झूठ नहीं कह रही थी,

वह किसी लंड को पहली बार नहीं चूस रही थी पर मुझे क्या मुझे जो चाहिए था वह अब मुझे मिल रहा था  एक हाथ से मेरे लंड को पकडे मेरे सामने बैठ वह मेरे लंड को चूसती हुई अपने मुँह में लेती और बाहर निकालती, यकीन नहीं हो रहा था की जिस लड़की को बचपन से अब तक बहन की नज़र से देखता था

Sagi bahan ki chudai

उसके साथ आज ये सब कर रहा हूँ कविता आंटी के आने से मुझे पहले ये निराशा थी की माँ के साथ खुल कर मज़े नहीं कर पाउँगा, लेकिन बाद में जब कविता आंटी भी मिल गयी तो ये निराशा थी की भारती के सामने उन दोनों के साथ कुछ नहीं कर पाउँगा पर अब जो हो रहा था वह खुशियों का बवंडर तूफ़ान बना मेरे सर पर नाच रहा था, अगले 5-मिनट भारती किसी लोल्लिपोप के तरह मेरे लंड के सर को चूस कर खाती तो कभी लंड को पूरा मुँह में भर कर चुस्ती फिर तुरंत भारती उठ खड़ी हुई और मेरे होंटो को चूम गयी, उसे ऐसे चूमता हुआ मुझे ये नहीं लगा की मैं अपने ही स्वाद को चख रहा हूँ उल्टा उसकी इस हरकत से मैं और उत्तेजित हो उठा चूमने के बाद वह बोली: 

भारती; अब देखती हूँ की इससे पहले वाले से बड़ा है या नहीं तुम्हारा, मैं दांतो को मींचता हुआ मुस्कुराया और हाथ में लंड पकड़ आगे बड़ा उसके पीछे खड़ा हुआ और पीछे से अपना लंड उसकी चूत की मुलायम होंटो पर रगड़ता हुआ बोला : डालु क्या?

भारती: घुसा इडियट पूरा दिन मत लगाओ अब, उसकी बात पर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह में सही से लगाया और एक हाथ उसके कंधे पर रख धीरे से कमर को आगे बढ़ा डाला और मेरा लंड उसकी कसी हुई जवान चूत की दीवारों को खोलता हुआ अंदर चला गया। Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

भारती: अह्ह्ह्ह! कमर वापस खींची और फिर से अंदर मार दिया एक बार और कमर आराम से वापस खींची और इस बार ज़ोर से दे मारा मेरे पूरे लंड की लम्बाई उसकी गर्म कसी चूत के अंदर चली गयी अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में ही रख कर बोल : बड़ा है या छोटा!

भारती: फ़क में! मैं: पहले बताओ!

भारती: चोदो ना प्लीज! मैं: बताओ वरना नहीं! भारती: हाँ… तुम्हारा बड़ा है… अब चोदो मुझे! इतने दिन का इंतज़ार और भारती को चोदने की प्यास की अघोष में, मैंने  उसके कंधे को ज़ोर से पकड़ा और नीचे कमर को ताबड़तोड़ तेज़ी से आगे मारने लगा उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा लंड तेज़ी से अंदर बहार निकलने लगा,

Bahan ki chudai ki kahani

उसकी जवान चूत की गर्मी से मेरा लंड पिघल रहा था और इतनी कसी चूत थी की जो शायद मुझे माँ और आंटी की चूत चोद कर भी नहीं महसूस हुआ था अब मैं जोश में आता हुआ भारती को चोदता गया और उसकी आहे मेरी हर मार के साथ ऊँची होने लगी, एक पल उसकी आह इतनी तेज़ हो गयी की मुझे अपने दूसरे हाथ को आगे ले जाकर उसके मुँह को बंद करना पड़ा उसके मुँह को दबाये रख मैं और तेज़ी से उसकी चूत में लंड घुसेड़ने लगा.

उसकी कसी चूत मेरे लंड के आकर के ढील होने  लगी और लंड सत्ता-सट उसके अंदर घुसता गया, अगले 5 से 7 -मिनट उसे ऐसे लगातार चोदता रहा और फिर रुक गया लंड बहार खींच निकाला और उसके कंधे को पकड़ अपने तरफ पलट लिया वह मुझे देखि और फिर मेरे गाल पर एक थप्पड़ दे मारी और बोली: रुके क्यों? उसकी इस आक्रामकता पर मैंने  उसकी कमर को पकड़ उसे उठाकर किचन के काउंटर पर बैठा दिया और उसकी जांघो को पकड़ फैलाया और अपना लंड को उसकी चूत पर लगा कर बोलै: मरोगी मुझे? Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

भारती: हाँ! मैं कमर आगे मारता हुआ लंड उसके अंदर घुसता हुआ बोला : मरोगी हम्म्म मरोगी?

भारती: अह्ह्ह! यस! मैंने लंड खींचा और ज़ोर से मारता हुआ बोल : हैं! इतनी हिम्मत मुझे मरोगी! वह अपने होंटो को काट नशीली आँखों में गुस्से के साथ मेरे गाल पर एक और थप्पड़ मर कर बोली: हाँ मरूंगी… क्या कर लोगे, कोई शक नहीं था की वह चाहती थी की मैं और ज़ोर से उसके अंदर अपना लंड दूँ अब मैंने  उसके दोनों हाथो को पकडा और उसके पीछे से जकड़ा और सामने से कमर को आगे मारता हुआ उसे चोदता हुआ बोल : तुम्हे वाइल्ड होना पसंद है?

भारती: मममम हाँ! मैं चोदता गया और धीरे धीरे वह उसने अपने  पेअर मेरे कमर पर लप्पेट लिए और उसके छोटे पतले हाथ मेरे कंधो पर थे और जितना ज़ोर से मैं उसे चोद रहा था उतनी ही ज़ोर से वह मेरे टी-शर्ट के ऊपर से मेरे कंधो पर अपनी नाखून उतार रही थी, धीरे धीरे उसकी आँख बंद होने लगी और मैं समझ गया की वह झड़ने वाली है उसकी ये दशा देख मैं और जोश में आने लगा वह आँखे बंद कर अपना सर मेरे कंधो पर गिरा कर आहे भर रही थी नीचे से में लगातार उसकी चूत की चुदाई कर रहा था, चढ़ती हुई वह बोली: यह राहुल! मैं चोदता हुआ पुछा: बोलो!

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भारती: मैं… अह्ह्ह्ह… होने वाला… है! मैं: मेरा भी…भारती: नहीं… अह्ह्ह… अंदर नहीं प्लीज…वह मुझे रुकने के लिए लब्ज़ो से बोल रही थी लेकिन मेरे कमर पर लपेटी उसकी टाँगे मुझे छोड़े बिना अपने तरफ खींच भी रही थी वह एक तरफ मुझे रुकने को कह भी रही थी पर दूसरी तरफ चुदाई को बिना रुके चलते रहने का इशारा भी दे रही थी . Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

मैं झड़ने के कगार पर पहुँच चुका था और उस मज़े के जोश में बिना रुके उसकी चूत में तीव्र गति के साथ मारने लगा कुछ ही पल लगे जब उसके नाखून मेरे कंधो पर काफी ज़ोर से गड गए, फिर उतरी उसकी जागे अकड़ती हुई मेरे कमर को दबोच गयी और वह सिसस्कारती हुई झड़ पड़ी मैं तब भी रुक नहीं रहा था मुझे रोकने के लिए वह जांघो से मुझे काफी ज़ोर से डाब लिया  और अपने सर से मेरे कंधे को पीछे धकेलने लगी, झड़ती हुई वह बेशुद होती गयी और मेरे लंड को अपने चूत से नहर निकालने लगी फिर चूत से लंड निकलते ही मैं काबू न कर पाया मेरे लंड से नीचे मुठ की लम्बी मोटी कतार फूट पड़ी,

मेरे भी पेअर थरथरा गए और हम एक दूसरे के कंधो पर सर रख कुछ देर के लिए शांत हो गए कुछ देर बाद मैंने अपने सर को उठाकर देखा तो उसका चेहरा मेरे कंधे पर था उसकी हारी आँखे बंद और आधा चेहरा जो उसके बिगड़े बालो से ढका हुआ था आज से पहले इतनी खूबसूरत वह मुझे कभी नहीं लगी थी वह आँख खोल कर मुझे देखि हलकी सी मुस्कान देकर उठी और बोली: 

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भारती: हफ़… बहनचोद…मैं उसकी गाली सुन्न हस्स पड़ा और बोल: 

मैं: तू भी तो… भाई चोदहै-है-है! वह शर्म भरी मुस्कान के साथ मुझे पीछे धकेल कर  किचन काउंटर से उतर कर अपने बालो को ठीक करती हुई बोली: 

भारती: मैं नहाने जा रही हूँ बाई, मैंने  उसे रोका नहीं और फिर जल्द ही वह अपने कमरे में चली गयी, मैंने  किचन में अपने शार्ट को पहना पॉकेट से फ़ोन निकाला और माँ को मैसेज किया: अब आप आ सकते हो सब हो गया, क्यूकी भारती को ऐसे चोदने मे माँ भी मेरे साथ थी ,  Bhai Bahan Ki Chudai Ma ki Help

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