By | January 22, 2023

Do Bhai bahan ki chudai ki story:-हैलो दोस्तो, कैसे हो आप, सब ये पिछली कहानी का भाग 3 है स्वाति के साथ गुड मॉर्निंग:-अमित:रूम से निकलते ही झट से किचन को गया जहा आंटी काम कर रही थी. मुझे देखते ही वह बोली.आंटी – क्या मेरे कहने पे इतना जल्दी आ गए? पूजा पाठ पूरी कर लेते.

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मैं – अरे नहीं आंटी हो गया.आंटी – तुम्हारे बाल अब भी गीले है मतलब नहाकर ज़्यादा देर नहीं हुई. माफ़ करना बेटा तुम्हे तुम्हारी हिसाब से पूजा पाठ करने टाइम नहीं दिया मुझे लगा.इतने में मैं टोकते हुए बोला – अरे सॉरी मत बोलो. उठने में मैंने देर की कल की थकान थी थोड़ी. सो पूजा पाठ में खुद ही नहीं कर पाया.

Do Bhai bahan ki chudai

आंटी – ठीक है बेटा वह देखो आ रही है आलसी देश की महारानी.ये आंटी ने इशारा करते हुए कहा और उस इशारे के तरफ देखा तो वह स्वाति के कमरे के तरफ थी. मैंने देखा तो स्वाति अपने कमरे से निकल कर आने लगी. हाय तौबा क्या लग रही थी. बिगड़े बाल और उसी टॉप और छोटी सी शार्ट में गोरी चिकनी टाँगे दिखते हुए आकर दिवार के साथ कर खड़ी हो गयी.आंटी – न शर्म न लाज देखो तो कैसे छोटी सी निक्कर पहन कर आ गयी. नालायक तू छोटी नहीं रही अब थोड़ी तो शर्म रखो अमित के सामने.

इस पर में बोलता भी क्या चुप चाप खड़ा रहा कभी आंटी को देखता तो कभी स्वाति को.स्वाति – क्या माँ आप भी? अमित तो मेरे भैया है उनसे क्या शर्माना?ये सुन मैंने आंटी को देखा तो वह स्टोव के तरफ पलटी हुई थी और फिर स्वाति को देखा तो उसने मुझे देख शरारती अदाओ से अपने होंठ को कटी और फिर आंख मारी.मैं फिर से पलट कर आंटी को देखा और फिर स्वाति को देख कर इशारो में पुछा की तू क्या कर रही हो? Do Bhai bahan ki chudai ki story

Bhai bahan ki chudai ki story

आंटी – हाँ तेरे भैया है पर इसका मतलब तू नंगी तो नहीं घूमेगी न इसके सामने.स्वाति – ओफ्फो तुम बात को कितना खींच रही हो? भली में नंगी तो नहीं हूँ. बोलो अमित भैया देखिये मुझे और बताये क्या में नंगी हूँ?मुझे पता था ये वह मुझे उसे माँ के सामने देखने के लिए बोल रही थी.अमित – मैं आप लोगो के बीच नहीं आना . न तुम बिना कपड़ो के हो और न ही आंटी गलत बोल रही है. बस…आंटी – बिलकुल अमित बताओ उसे वह कितनी गलत है.स्वाति – बोला न उन्होंने में बिना कपडे की नहीं हूँ तो मतलब में भी सही हूँ. चलिए अमित भैया माँ की खिटपिट कभी ख़तम नहीं होगी.

हम चलकर टीवी देखते है.आंटी – हाँ हाँ टीवी. कम से कम अब तो नाहा लो.इतने में स्वाति ने मेरे बाज़ुओ में अपना हाथ डाली और मुझे खींच कर ले जाने लगी. मैं कभी स्वाति को नहीं नहीं का इशारा करता तो कभी आंटी के तरफ देखता. आखिर कार उसने मुझे खींच कर लिविंग रूम में ले गयी.

वहां उसने मुझे ढके मार कर टीवी के ठीक सामने वाली सोफे पर बैठा दिया.और फिर आगे चलकर टीवी का स्विच ऑन किया और फिर झुक कर टीवी यूनिट के रिमोट उठाने लगी हाय रब्बाअ.. जब वह मेरे तरफ अपनी गांड को दिखते हुए झुकी उसकी छोटी सी शार्ट में भी उसकी गांड का उभार कितनी आकर्षक थी.

उसी झुके हालत में वह मुझे पलट कर देखि और स्माइल देते हुए सीधी हो गयी.फिर वह वापस आकर मेरे ठीक बगल में चिपक कर बैठ गयी. अपने गोरे नंगे पैरो को उठा कर सामने वाले सेंटर टेबल पर रख कर आराम से बैठ कर टीवी ऑन किया. टीवी में कुछ कुछ तो चल रहा था और वह चैनल पे चैनल बदले जा रही थी.स्वाति – तो बोलिये क्या देखोगे मेरे अमित भैयाआआआ!हम दोनों जिस दिशा में बैठे थे उसके बाए तरफ ही किचन था अगर आंटी थोड़ी सी भी झाक के देखे तो हम दोनों को पीछे से देख सकती थी. इसी लिए में थोड़ा घबरा रहा था स्वाति से इस तरह चिपक कर बैठने में.

पर स्वाति को तो मानो ऐसे चुप चुप कर चिपकना मज़ा दे रह थी.फिर उसने पलट कर किचन के तरफ देखा और फिर मुझे और फिर मेरे गाल पर एक चुम्मी लगा दी. मैं तो बस घबराकर पलट कर किचन को देखा और फिर स्वाति से पुछा की क्या कर रही हो?स्वाति – वही जो मुझे अच्छा लगा. क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लगा?टीवी की साउंड के कारन उसे और मुझे पता था की हमारी बाते आंटी नहीं सुन सकती पर फिर भी डर था की कही वह देख न ले.मैं – अच्छा लगा पर आंटी….उसने मुझे इतना ही बोलने दिया और फिर मेरे होंटो पर होंठ लगा कर एक और छोटी सी किश दे डाली. मैं समझ गया इससे बात करना बेकार है और मुँह बंद कर के टीवी की तरफ देखने लगा. Do Bhai bahan ki chudai ki story

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स्वाति खिल खिला कर हस रही थी मानो उसे मुझे इस तरह छेड़ने में बहुत मज़ा आ रहा हो.इतने में उसने अपना मोबाइल जो उसके बगल में उसने रखा था वह उठाया और उसका कैमरा ऑन करके बोली – चलिए एक सेल्फी हो जाये.वह मेरे करीब आयी और हम दोनों का साथ में एक सेल्फी पिक्चर क्लिक कर डाली. वह मेरे सच मे इतने करीब थी. क्या बोलू में. मुझे इन सबसे मज़ा भी आ रहा था और साथ ही डर भी. सचमे दोस्तों वह फीलिंग जो हम चुप छुपा कर करते है उसमे खुले आम करने से भी काफी ज़ादा मज़ा आता है.और इसका असर मेरे ३\४ शॉर्ट्स के अंदर होने लग गया था.

मेरा लंड अब अपने आधे आकार में आ चूका था स्वाति को अपने इतने करीब ऐसी हरकते करते हुए और ये उसे भी शायद लग गया था. झट से उसने मेरे हाथ को लिया और अपने खुली गोरी झंगो पर रख दिया. मैं अपने हाथ को देखा और फिर उसे.स्वाति – कब से देख के मन

भर रहे हो हाथ लगा के देख लो.अमित – सचमे तुम पागल हो और मुझे भी पागल बनाओगी. यार आंटी यही और तुम.जैसे ही मैंने ये बोलकर ख़तम किया तभी..आंटी – लो बेटा तुम्हारी चाय इस आवाज़ से हम दोनों जान गए की आंटी ठीक हमारे पीछे है और हमारे तरफ आ रही है. पर शायद उन्हें मेरा हाथ स्वाति के जांघो के ऊपर नहीं दिखा सोफे के बैकरेस्ट के कारन. पर जब तक वह ज़्यादा पास आती मेरे हाथ को स्वाति ने अपने जांघो पर पकड़ रखा और झट से उसके ऊपर बगल में पड़ी सोफे के कुशन को रख दिया.कुशन ज़रुरत के हिसाब से बड़ी थी तो आंटी को दिख नहीं रहा था मेरा हाथ जब वह आकर मुझे और स्वाति को चाय दिया. क्यों की मेरा राइट हैंड उसके जांघो पर था मुझे अपने लेफ्ट हैंड से चाय लेना पड़ा.

पता नहीं इस बात पर आंटी का ध्यान गया या नहीं पर हम दोनों टीवी को देखते रहे मनो हम कुछ छुपा नहीं रहे और टीवी देखने में व्यस्त हो.हमें चाय देने के बाद आंटी भी मेरे बगल में रखे सोफे पर बैठ गयी. मुझे लगा अब तो बुरे फसे. पर स्वाति को तो कोई डर ही नहीं था पर मेरी फट भी रही थी साथ ही उसके चिकने जांघो का स्पर्श मेरे शॉर्ट्स में गर्मी बना रही थी.वह कुशन के नीचे मेरे हाथो के उंगलियों में उंगलिया फसा कर दबा रही थी और क्यों की आंटी थी

बगल में ही तो अब में कुछ बोल भी नहीं सकता था. टीवी में उसने कोई तो सीरियल लगा दिया जो आंटी भी देखा करती थी तो आंटी का ध्यान पूरा टीवी में लग गया.और तभी कुशिओं के नीचे स्वाति ने मेरे उंगलियों को अपने शॉर्ट्स के एकदम करीब लेजा कर रख दी Do Bhai bahan ki chudai ki story

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फिर धीरे से अपना हाथ निकल लिया कुशिओं के अंदर से. मेरा हाथ अब भी अंदर था. आप लोगो में जिन्होंने ने भी किसी लड़की की जांघो के गहराई पे हाथ लगाया हो जहा जांघ ख़तम होती है तो पता ही होगा वह कितनी गर्माहट होती है.उस गर्माहट से मुझे पता चल गया की मेरा हाथ उसके मादकता के कितने करीब थी. मैंने थोड़ी सी ऊँगली हिलायी तो मुझे वह एहसास हुआ की मेरा हाथ उसके चूत के और जांघो के बीच पहुंच गया था.

और जब में ऊँगली को थोड़ा हिलता.मैंने देखा की स्वाति जिसने अपने पैर सामने रखे सेंटर टेबल पर रखी थी पाँव की उंगलिया मचल रही थी. समझ गया में की मेरी उंगलिया भी उसे मज़ा दे रही थी. मेरी उंगलिया धीरे धीरे और बोले तो धीरे शब्द से भी धीरे उसके शार्ट के ओपनिंग से और अंदर जा रही थी.और जितना भी अंदर जा रही थी अब तक ऐसा नहीं लगा की कोई और भी कपडा अंदर हो. और कुछ देर बाद मैंने कुछ ऐसा छुआ मनो कोई हलकी नमी वाली होंठ हो. और समझ गया की उसने अंदर कुछ नहीं पहना है और मेरी ऊँगली उसके चूत को छू रही है.

मैंने आंटी को देखा जो टीवी देखने में लगी हुई थी और फिर स्वाति को देखा जिसकी आँखे आधी बंद हो रही थी मानो कोई नशा हो रहा हो उसे. झट से मेरे अरमानो को चूर करते हुए स्वाति उठी और अपने चाय के कप को लेकर किचन को चली कई.

मैंने सोचा भला उसने ऐसा क्यों किया और पलट कर देखा तो

स्वाति किचन से मुझे उंगलियों के इशारे से बुलाने लगी. Do Bhai bahan ki chudai ki story

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मेरी चाय ख़तम नहीं हुई थी पर दूसरा चारा नहीं था. झट से मैंने अपना चाय पिया और उठ कर किचन को चला गया पर आंटी सीरियल में डूबी हुई थी.शायद उन्हें पता भी न चला हो की कब हम दोनों उठ कर वह से चले गए. जब में किचन पहुंचा तो स्वाति ने बिलकुल भी देर न की और मेरे टी-शर्ट को पकड़ कर खींचा और मेरे होंठ पर ज़ोर का किश लगा डाला. तो दोस्तो आज यहा तक ही अगले भाग मे बतऔगा की कैसे मैंने फिर स्वाति के साथ चुदाई की।

उम्मीद करता हूँ आपको अच्छा लगा और आगे पढ़ने की इच्छा हो तो मुझे कमेंट करे और अपनी राय भी दे
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