By | January 29, 2023

Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai:-हैलो दोस्तो, सबको मेरा बहुत थैंक्स मेरे स्टोरी को पढ़ने के लिए, अब से पिछले एपिसोड में अपने देखा की किस तरह से शोभा राकेश के आँखों में पट्टी बांध कर अपना खेल खेलती है. पर ठीक उसी वक़्त श्रद्धा के घर अमित के साथ क्या हुआ वह आप आज पढ़ेंगे. अगर आपने अभी तक इस कहानी का भाग 1 नहीं पढ़ा तो आप यहा क्लिक करके पढ़ सकते है।

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आप अपनी ओपिनियन मुझे मेरे कमेंट पे दे सकते है कहानी पढ़ने के बाद.:

अमित खाना खाने के बाद मैं और श्रद्धा वापस लिविंग में आकर बैठे. तुरंत उसने एक सिगरेट जलाई और मुझे एक सिगरेट दिया. हम दोनों टीवी को धीमी आवाज़ में देख रहे थे और सिगरेट पी रहे थे तो श्रद्धा ने बात छेड़ी .श्रद्धा: तो अब?मैं उसे देख पुछा: अब हम्म वैसे तुम कुछ बोल रही थी उस वक़्त.श्रद्धा: हाँ याद आया. मैं: यस!श्रद्धा उठी और अपने कमरे में जाकर एक छोटी सी टेबलेट ले आयी. देखने में नीले रंग की.मैं: ये क्या? ये किस बीमारी के लिए है?श्रद्धा हस्ती हुई बोली: अरे ये कोई बीमारी की नहीं स्पेशल पावर की है. नाम नहीं बताउंगी और हाँ न ही तुम इसका ज़िकर किसी से करोगे.

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मैं: पर ये है क्या मुझे तो बताओ. कोई साइड इफेक्ट्स तो नहीं होगा?श्रद्धा: नहीं बाबा ये एक तरह की उत्तेजना बढ़ाने वाली गोली है.मैं: विआगरा?श्रद्धा: अरे नहीं वह क्यों दूंगी? पर ये तुम्हे ताकत देगी. भरोसा नहीं तो मत लो दो वापस करो.मैं: नहीं नहीं एक बार कोसिस  कर लेता हूँ.श्रद्धा: लो पानी पियो.मैं: पानी की ज़रुरत नहीं है  बोलते हुए मैं टेबल पर रखी व्हिस्की की बोतल से एक पेग बनाया और गोली खाकर पीने लगा.श्रद्धा: इसके साथ व्हिस्की!मैं: हाँ शायद पावर बढ़ जाए.श्रद्धा: ओके ओके! पियो पियो पर कम पियो.

मैं: ऐसा क्यों?श्रद्धा: तुम्हे ज़्यादा पीला दिया तो तुम कही सो गए तो है है है!मैं: अरे चिंता मत करो तुम आज तो जब तक तुम कहोगी मैं जगा रहूँगा?इसपर श्रद्धा उठ खड़ी हुई. मुझे देख एक ही बार में अपनी गाउन को खोल कर मेरे तरफ फेकि. और पूरी की पूरी नंगी खड़ी हो गयी. अब जाकर मैं पहली बार श्रद्धा को पूरी नंगी अवस्था में देख रहा था. कितनी खूबसूरत और सेक्सी दिख रही थी.मेरे आँखों में अब टेबलेट का नशा चढ़ रहा था धीरे धीरे. वह मुझे देख मुस्कुरायी और बोली: बस बस रखो गिलास वापस. थोड़ी देर बाद पीना. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

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वह मेरे पास आयी और मेरे हाथ से गिलास लेकर टेबल पर रख दी. फिर अपनी नंगी टाँगो से मेरे जांघो पर मार कर इधर उधर की. और बाद में मेरी जांघो के बीच आ बैठी. पता नहीं क्यों उसे नंगे देखने के बाद भी मेरा लंड खड़ा नहीं हुआ था.वह मेरी आँखों में आंखे दाल मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाने लगी.फिर अंडरवियर को थोड़ा नीचे खींच मेरा बच्चा बना हुआ लंड बहार निकला .श्रद्धा: अगर ऐसे रहेगा ये तो मेरे किश काम का.

इतना कहते हुए उसने मेरी सिकुड़ी हुई छोटा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. मुझे मज़ा आ रहा था पर कम्बख्त मेरा लंड पहले जैसा जल्दी उठ खड़ा नहीं हो रहा था. कुछ 5 मिनट मेरे लंड को एक लोल्लिपोप के तरह चूस चूस के खाने के बाद उस में हल्का मोटापा आने लगा.श्रद्धा: ये उस टेबलेट का असर है.मैं: क्या?श्रद्धा: तुम्हारा लंड धीरे खड़ा होगा पर जब खड़ा होगा तो देखना काफी सख्त और बहुत देर तक रहेगा.

उसकी बात सच थी जैसे जैसे वह मेरे लंड को और खा रही थी वैसे वैसे मेरे लंड में ताकत आ रही थी. थोड़ी ही देर बाद वह उठ खड़ीहुई और बोली: 69 पता है?मैं: 69 पोजीशन?श्रद्धा: हाँ चलो करते है मैं तुम्हारी चूसूंगी और तुम मेरी है है है!मैं उठकर अपना टी शर्ट और अंडरवियर खोल फेका जैसे ही मैं वापस सोफे पर बैठा तो वह बोली नहीं वहा नहीं.मैं: तो?हाथ का इशारा नीचे फ्लोर पर कर के बोली: यहाँ नीचे फ्लोर पर लेटो तुम.

मैं उठा और नीचे फ्लोर पर लेटते हुआ बोला: इतना अच्छा सोफे है तो फ्लोर क्यों?श्रद्धा मेरे ठीक सर के ऊपर आ कर खड़ी हो गयी और बोली: डर्टी सेक्स का मज़ा तो फ्लोर पे ही आता है.इतना कहते हुए वह मेरे सर के बगल में अपनी घुटने टिका कर मेरी मुँह पे अपना चूत रख कर बैठ गयी. उसकी चूत मेरे मुँह से टकराते ही मेरी जीब बहार निकल आयी और चाटने लगा.श्रद्धा: आह ममममम और चाटो.फिर वह मेरे ऊपर लेट गयी और मेरा खड़ा लंड लेकर एक ही बार में अपने मुँह में घुसा ली. कभी मुँह में डाल चुस्ती तो फिर बहार निकाल कर चाट रही थी.

मेरा लंड सच मे इस बार पहले से ज़्यादा कड़क था. और उस पर फूलती नसे भी महसूस हो रही थी मुझे.मैं भी मज़े में उसकी चूत को कभी चाटा और कभी जीभ अंदर डालकर घूमता. जिसपर शायद मज़े में आकर वह मेरे लंड को हलके से काट देती. हम दोनों एक दूसरे को मज़ा देते हुए आह भर रहे थे. पता नहीं अंदर अक्षुण को आवाज़ जा रहा हो या नहीं. पर हमे होश ही नहीं था.मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर बहार जा रहा था. उसकी हर रस को पिए जा रहा था.

श्रद्धा मेरे लंड को मुँह में घुसा कर अंदर बहार का खेल खेलती हुई मेरी अंडो के साथ गुड़ गुड़ी करती हुई खेल रही थी. करीब 15 मिनट हम यूं ही एक दूसरे की चूत और लंड कहते हुए मज़ा देते रहे. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

तभी श्रद्धा की झाटे जो मेरे सर के आजु बाजू थी वह मुझे दबाने लगी. तो समझ गया की वह अपनी चरम सीमा पर पहुंच गयी. तो मैंने और तेज़ी से उसकी चूत को चाटने और चूसने लगा. और कुछ ही पल में मेरे लंड को मुँह में दबाये हुए दबी सिसकारियां देती.

उसकी चूत से गरम छीटे मेरे मुँह पर पड़ने लगे. उसने अपनी चूत से मेरी मुँह दबा दी. जिससे सारा रस मेरे मुँह के ठीक अंदर बाह निकला. कुछ 2 मिनट मेरे लंड को मुँह में रखे वह मेरे ऊपर पड़ी रही. मैं कोशिस में थी साँस लेने की.क्यों की उसकी झांघो ने मेरी मुँह को कस कर पकड़ रखी थी. मैंने उसे अपने चेहरे से हटाया और फिर धीरे अपना लंड उसके मुँह से निकल कर उठ खड़ा हुआ. वह अब भी फर्श पर पेट के बल लेटी हुई थी तो मैंने उसे हाथ पकड़ कर उठाया और बोला:

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बस इतने में ही थक गए क्या?श्रद्धा: ओहो देखो तो अब बोल रहा है. है है है!वह धीरे से उठी और फर्श पर ही घुटनो पर कुतिया बनकर बैठ गयी. और फिर सर घुमा कर मुझे देख बोली: चलो आओ और अपनी इस प्यारी पप्पी को चोदो.

मैं: पप्पी बहुत क्यूट शब्द है मज़ा नहीं आता.श्रद्धा: अच्छा तो क्या ऐसा बोलू की चलो आओ और अपनी इस चुड़क्कड़ कुतिया को एक कुत्ते की तरह चोदो .उसकी ये बात सुन मेरा लंड ऐसे तना की दर्द होने लगा. मनो अभी नसे फट  जाये. झट से उसके पीछे घुटनो पर बैठा और बोला: तुम्हारी गन्दी बातो में सच मे  बहुत मज़ा आता है.श्रद्धा: है है है! सब को सेक्स करते हुए गन्दी बाते और गाली देना पसंद है. कोई कहता नहीं शर्माके पर मैं वैसी नहीं हूँ.

चलो बाते कम काम ज़्यादा.मैंने अपने कड़क लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया. उसकी कमर पकड़ सारी नरमी भूल कर ज़ोर से अपना लंड उसकी चूत के गहराई तक घुसा डाला.श्रद्धा: आठ यस अमित!मैं: मज़ा आया?श्रद्धा: हाँ बहुत..उसकी गाली का असर था शायद जो मैंने अपना लंड निकाला और दुबारा चूत को चीरते हुए अंदर दे मारा.

श्रद्धा: आह यस. अगेन फिरसे मारो.और इसी तरह कुछ 10से 15 बार उसकी चीखो के साथ मैं अपना लोहे जैसा खड़ा लंड उसकी चूत की जड़ के अंदर मारता गया.श्रद्धा: अब बस करो और चोदो मुझे.इसके बाद मैं उसे डोगग्य स्टाइल में चोदना शुरू किया. भले आज रात मुझे स्वाति नहीं मिली पर सचमे जैसा उसने कहा था सुबह की आज की रात मैं कभी नहीं भूलूंगा बिलकुल सही था.

मैं पूरी तेज़ी से श्रद्धा को चोद रहा था.करीब 10 मिनट उसे इसी तरह चोदने पर भी मुझे ऐसा नहीं लग रहा था की मैं झड़ने वाला हूँ. शायद टेबलेट का सही असर था ये. पर घुटनो में दर्द होना शुरू हो गया था. तो तुरंत मैंने श्रद्धा को फर्श से टैंगो को पकड़ उठा कर सोफे पर कुतिया बना कर बैठा दिया.इस तरह उसकी टैंगो को पकड़ उसे एक खिलौने के तरह सोफे पर फेकना उसे भी अच्छा लगा. मैंने अपना लंड वापस उसकी चूत में घुसा कर खड़ा होकर चोदने लगा.

खड़ा होकर चोदने पर और भी ताकत और तेज़ी के साथ में उसकी चूत चोद रहा था.उसकी मुँह से आह की आवाज़ की लम्बी कतार पुरे घर में सुनाई दे रही थी. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

पर न मुझे न उसे कुछ होश था. मैं बस चोद रहा था और वह बस चुदयाए जा रही थी. चिलाती हुई और साथ ही कई गालिया और गन्दी बाते भी बोल देति. जिससे मैं उसे और पागल होकर चोदने लगा.अगले 20 मिनट मैं उसे ऐसे ही चोदते रहा. तभी लगा अब जाकर मैं झड़ने वाला हूँ. तभी श्रद्धा चिलाती हुई बोली: यस! यस! फ़क फ़क फ़क में मोरे अमित चोदते रहो अपनी कुतिया को!ये सुन मुझे अंदर ही अंदर एक ख़ुशी का एहसास हुआ.

और पूरी ताकत के सात अपने कमर को आगे पीछे हिलाते हुए उसे चोदा. फिर वह घडी आयी जब सारा घर हमारी आहे और गन्दी गलियों से भर गयी. मेरे लंड ने मुठ का एक फौवारा छोड़ा उसकी चूत के अंदर.और साथ ही उसकी चूत ने भी अपना रस अंदर ही अंदर भर डाला.

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आज से पहले शायद मैं कभी भी इतना नहीं झड़ा था जितना अब. उसकी चूत इतनी भर गयी थी की मेरे लंड को बहार निकाल फेका. मेरे बदन सोफे और फर्श पर हम दोना का रस अलग अलग जगहों पर जा गिरा.मैंने ऐसा आज से पहले सिर्फ पोर्न में देखा था. लेकिन आज सच मे देख लिया. श्रद्धा सहमी हुई उसी तरह अपने घुटनो पर बैठी रही. मुझे साफ़ दिख रहा था पीछे से उसकी चूत से मेरा और उसका घुला हुआ रस निकलकर सोफे पर गिरा जा रहा था.

 उसकी मुँह से कोई आवाज़ ही नहीं आ रही थी.मनो बेहोश हो गयी हो.पर मुझे इस बात की ख़ुशी थी की मैंने एक बार में उसे दो बार मज़ा दे दिया.वह फिर सीधी होकर सोफे पर अपनी चूत से गिरी हुई रस पर ही बैठते हुए बोली: देखा पूरा सोफे गन्दा कर दिया तुमने.और फिर वह मेरे लंड को देख बोली: तो अब क्या?तब जाकर मैंने अपना लंड देखा और देख कर हैरान ही रह गया. मेरा लंड इतना मुठ छोड़ने  के बाद भी एकदम सख्त खड़ा था. मनो उसमे से कुछ निकला ही नहीं और अभी और चोदना हो.मैं: एक और राउंड हो जाये?श्रद्धा: एक क्यों?

अभी तो बहुत टाइम है हमारे पास. सिर्फ 11  ही तो बजे है.मैंने टाइम देखा तो सही में 11 बज रहे थे पर मुझे ऐसा लगा मानो हमने कई घंटे चोदा हो.मैं: तुम्हारी दी हुई टेबलेट कमाल की चीज़ है.श्रद्धा: है है है! चाहो तो एक और दे दूंगी बाद में. पर अभी रुको बहुत ज़ोर की सुसु लगी है. मैं ज़रा हो कर आती हूँ.मैं: मुझे भी लगी है.श्रद्धा: तो तुम भी आ जाओ साथ में करते है.ये सुन मैं ख़ुशी से उसके साथ बाथरूम गया. बाथरूम में उसका वेस्टर्न कोड था जिस पर वह बैठ गयी तो मैंने कहा: वाह मज़ा नहीं आएगा.श्रद्धा: तो फिर कहा.मैं: यहाँ फ्लोर पर करना मुझे देखना है.श्रद्धा: फ्लोर पर? है है है! यू अरे सो डर्टी. लेकिन  मुझे डर्टी बॉयज ही पसंद है. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

श्रद्धा ठीक मेरे सामने बैठकर फर्श पर मूतने लगी. मुझे उसकी चूत से निकलती पानी की धार देख बड़ा मज़ा आ रहा था. आज से पहले मैंने कभी किसी लड़की को मुत्ते हुए नहीं देखा था. इसके बाद मेरी बारी थी.श्रद्धा ने कहा: चलो अब तुम करो.मैं मूड कर अपना लंड पकड़ कर कोड को निशाना किया तो श्रद्धा बोली: रुको!वह मेरे सामने आ खड़ी हुई और मेरे लंड को अपनी झंगो के बीच दबती हुई ठीक अपनी चूत से सत्ता कर खड़ी हो गयी और बोली: चलो अब करो.

मैं मूतने लगा और मेरे लंड से निकलता गर्म पानी उसकी चूत को धोने लगी. और झाटों से नीचे बहता हुआ फर्श पर गिरने लगा. मज़ेदार नज़ारा था और साथ ही एक नया एहसास. इसके बाद हमने साफ़ पानी से एक दूसरे की चूत लंड और झांघो को धोया और फिर रूम को चले गए.हम एक दुसरे को छेड़ते चिढ़ाते हुए बाथरूम से निकल उसकी रूम को चलने लगे. हम इतने बेशरम थे की पुरे घर में नंगे ही चल रहे थे. इसके बाद वह मुझे अपने रूम ले गयी.

अंदर जाते ही वह अपने बेड पर बैठती हुई पूछी: तो कुछ है तुम्हारे पास नया करने को?मैं: मुझसे ज़्यादा तो तुम माहिर हो तुम ही बतादो. तुम ही बता दो अब मुझे क्या करना है.श्रद्धा: हम्म्म तो मैं जो बोलूंगी वह करोगे?मैं: हाँ.श्रद्धा: है है है! ओके आओ इधर.इतना कहती हुई वह फिरसे मुझे अपना गांड दिखाती हुई पलट कर बेड पर कुतिया बन कर बैठ गयी. फिर मेरी तरफ पलट कर ऊँगली के इशारे से बुलाती हुई अपनी चूत के तरह दिखाई.

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मैं समझ गया और तुरंत उसके पास जाकर उसकी चूत को चाटने लगा तो वह बोली: रुको!मैं: क्या हुआ?श्रद्धा: वह नहीं.मैं: तो?श्रद्धा: थोड़ा ऊपर.मैं फिर थोड़ा ऊपर देखा तो उसकी गांड की छेद थी सामने. फिर मैंने उसे देखा तो वह बोली: हाँ मेरी गांड चाटो अच्छे से.मैं: तो अब तुम्हे अपनी गांड चटवाने है मुझसे?श्रद्धा मुझे आँख मरती हुई बोली: अगर चाटके रेडी नहीं करोगे तो तुम्हारा लंड कैसे जायेगा अंदर?मैं तो बस ये सुन कर की आज वह मुझे अपनी गांड भी चोदने देगी बस पागल सा हो गया.कुछ नहीं सोचा और उसकी गांड में अपना मुँह डालकर छेद को अच्छी से चाटने लगा.

श्रद्धा: जीभ को अंदर भी डालना.मैंने अपना जीभ अंदर घुसाने की कोशिश की. पर उसकी गांड की छेद इतनी टाइट थी की मेरा जीभ अंदर ही नहीं जा रहा था. इस पर मैं अच्छे से छत्ता हुआ उसकी गांड को अपने लंड के लिए तैयार कर रहा था.कुछ पांच मिनट चाटने के बाद गांड की छेद नरम और चिकनी होने पर श्रद्धा बोली -अब बहुत हुआ चाटना चलो मेरी कासी हुई गांड का उद्धघाटन करो.

मैं: उद्धघाटन?श्रद्धा: हाँ मुझे आज तुमसे अपनी गांड चुदवानी है.मैं ख़ुशी से उठा और उसकी गांड के मुँह में अपना लंड लगाकर रगड़ने लगा.श्रद्धा: पिछली बार के तरह मत करना गांड में पहले धीरे से डालना होगा.मैं धीरे से अपना लंड उसकी गांड में धकेला. पर उसकी गांड इतनी कासी हुई थी की मेरे लंड कई बार धकेलने के बाद भी फिसल जा रहा था.

तो इसपर श्रद्धा ने बेड के साइड टेबल पर रखी वेसिलीन का डब्बा दिखती हुई बोली – वह लो उसे अच्छे से लेकर लगाओ.मैं तुरंत डब्बे से वेसिलीन लेकर उसकी गांड की छेद पर मलने लगा.श्रद्धा: आह बहुत अच्छा लग रहा है अच्छे से मालो. और एक के बाद एक एक ऊँगली अंदर भी घुसाओ.मुझे यकीन नहीं हो रहा था की आज की रात मेरे लिए इतना ख़ास होगा.

 एक तो चूत चोदने को मिला और अब गांड चोदने को भी मिलने वाला था. मैं अचे से वेसिलीन को उसकी गांड की छेद पर मलने के बाद एक ऊँगली धीरे से घुसाई.श्रद्धा: यह रुको उसे अंदर रहने दो थोड़ी देर. फिर धीरे धीरे अंदर बहार करो.जैसा वह बोली मैं करता गया. फिर 5 मिनट एक ऊँगली अंदर बहार करने पर उसने कहा:

अब 2 ऊँगली डालो.मैं दो ऊँगली डालकर उसकी गांड में अंदर बहार करने लगा तो वह बोली -अंदर ही रख कर ऊँगली को गोल गोल घुमाओ.मैं जान गया की ये पूरी सीखी हुई खिलाडी है और इससे पहले भी गांड मरवा चुकी है. अपने उंगलियों को कभी अंदर बहार करता तो कभी गोल गोल घूमता उसकी गांड में. फिर उसके बिना बोले ही तीन ऊँगली गांड में घुसकर चोदने लगा.श्रद्धा: आअह! दूसरे हाथ से चूत को भी मज़ा दोना. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

अब मैं उसकी गांड में 3 ऊँगली से चोद रहा था और साथ ही दूसरे हाथ से उसकी चूत की होंटो को मसल रहा था. उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी. कुछ पांच मिनट बाद वह बोली: चलो मेरी गांड तैयार है अपना लंड घुसाओ उसमे.मैं सीधा खड़ा हो गया. फिर उसकी गांड के मुँह पर लंड लगाकर धीरे से घुसाया. सच मे उसकी गांड कितनी कसी हुई थी 3  ऊँगली जाने के बाद भी.श्रद्धा: आआआआआह हां आआआह धीरे दर्द हो रहा है धीरे से अंदर रहने दो थोड़ा देर.मैंने अपना पूरा लंड धीरे से उसकी गांड में घुसाई और थोड़ी देर वही रहने दिया. कासी हुई उसकी गांड में कितनी गर्मी थी की मेरा लंड मनो अंदर जल रहा हो. फिर वह बोली: अब धीरे धीरे अपना लंड अंदर बहार करो.

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मैं फिर उसकी गांड चोदना शुरू किया और काफी धीरे धीरे कर रहा था. क्यों की एक तो ये मेरा पहली बार था.और साथ ही मैं उसे निराश नहीं करना चाहता था. फिर 2 मिनट ऐसे धीरे धीरे चोदने के बाद वह बोली: अब थोड़ी स्पीड बढ़ाओ और ऐसे ही धीरे धीरे स्पीड बढ़ाकर चोदो .उसके कहे अनुसार मैं उसकी गांड को धीरे धीरे चोदने के बाद अपनी स्पीड बढ़ाता गया. उसकी गांड धीरे धीरे ढीली होकर मेरी लंड को आराम से अंदर लेने लगी.

श्रद्धा: ओह या फ़क फ़क यस बहुत अच्छा लग रहा है.मैं उसकी हर बात पर अपनी स्पीड बड़ा रहा था. मनो अब हम दोनों मैं एक ताल मेल था की जब वह कुछ बोले तो मतलब मैं और ज़ोर से चोदू उसे. और इसी तरह चोदने के बाद मैंने उसके गांड से लंड निकल कर उसे पलट दिया और बेड पर पीठ के बल लेटा दिया.

श्रद्धा: क्या हुआ क्यों रुक गए?मैं: मैंने भी बहुत पोर्न मूवी देखि है ये स्टाइल कैसा है बोलो.मैंने श्रद्धा को पीठ के बल लेटाया. उसकी टैंगो को पकड़ ऊपर उठा कर फैलते हुआ मेरा सीधा तना लंड उसकी गांड की मुँह पर लगा कर धकेल दिया.श्रद्धा: आआआआआह! वाओ अच्छा है पर अब चोदो मुझे कमीने.उसकी गाली सुन मैं उसकी गांड को तेज़ी से चोदने लगा. उसकी गांड भले ढीली हो चुकी थी पर मेरे लंड के लिए अब भी टाइट थी. मैं उसकी टाँगो को पकड़ उसकी गांड के अंदर मारने लगा.वह आँखे बंद कर लेती आहे भर्ती हुई मज़ा लेती रही.

और साथ ही कभी कभी मेरे हाथो को पकड़ अपने नाखून गदा कर करोक्ति. मुझे भी लग गया की श्रद्धा को काफी मज़ा आ रहा है. जिसके कारन वह मेरे ऊपर खरोच रही है. पर मुझे उसकी हर खरोच पर बिना बोले ये सुनाई दे रहा था.मनो वह कह रही हो की और ज़ोर से उसकी गांड को चोदू . अब उसकी चूत भी मेरे सामने थी तो मैंने अपने एक हाथ से उसकी चूत को मसलने लगा.

आज तक कभी किया नहीं था पर ये सब पोर्न मूवी देखने की बदौलत सीखा था.श्रद्धा: बहुत मज़ा आ रहा है अमित. और मसलो रगड़ो मेरी चूत को और साथ ही गांड मैं और ज़ोर से मारो. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

मैं उसकी गांड चोदते हुए साथ ही उसकी चूत रगड़ता गया. उसकी चूत से रस की बुँदे निकलती जा रही थी.श्रद्धा: मेरी चूत को भी चोदना अमित.इस बात पर मैंने उसकी चूत मैं अपना 3 ऊँगली घुसा डाला और अंदर बहार पूरी तेज़ी से चोदने लगा.साथ ही कमर हिला हिला कर गांड में लंड घुसा कर चोदता गया.श्रद्धा: आआह! आआआह!! यस फ़क माय बोथ होल्स. यस यस यस!और कुछ पांच मिनट भी नहीं हुए की उसने मेरी उस हाथ को अपने हाथो से पकड़ रोक ली. और चूत रस की अगली फुवार मेरे सीने और पेट पर चीत्कार दी.

श्रद्धा: आठ.अमित. स्टॉप. स्टोपोसकी ऐसे कहे हुए स्टॉप पर में रुक गया और कई झटके मरती हुई वह कई बार झड़ पड़ी. फिर सहम सी गयी. कुछ 2 मिनट बाद उठ कर बोली – चलो लेटो बेड पर.मैं बेड पर अपना खड़ा लंड आस्मां की तरफ दिखता हुआ लेट गया. वह मेरे ऊपर आ गयी. अपने पेअर मेरे कमर के अगल बगल रख मेरे लंड को पकड़ अपनी गांड के मुँह पर रख धीरे से बैठ गयी. जिससे मेरा लंड उसकी गांड में पूरा समां गया.इसके बाद वह मेरे कंधे पर अपना हाथ रख कर सहारा लेती हुई अपनी गांड को ऊपर निचे करने लगी.

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मेरे लंड से अपनी गांड चुदवाने लगी. हम अब आँखों से आंखे मिलते हुए चोद रहे थे. और बीच बीच में चढ़ते वक़्त वह जब हस्ती थी तो बहुत मज़ा आता था उसे देखने में.वह अपनी गांड उछाल उछाल कर मुझसे अपनी गांड चढ़ते जा रही थी. और मेरा लंड था की झड़ने के बारे में सोच भी नहीं रहा था. 5 मिनट ऐसे ही श्रद्धा मेरे पर उछाल के चढ़ने के बाद थकने लगी. तो मैंने उसकी कमर पकड़ी और अपने कमर को ऊपर उछलते हुए उसकी गांड में लंड चोदने लगा.श्रद्धा: हाँ और चोदो फाड़ दो मेरी गांड आज. बहुत मज़ा आ रहा है.करीब 10 मिनट ऐसे चोदने पर लगा की अब मेरा होने वाला है.

साथ ही श्रद्धा ने भी कहा की वह झड़ने वाली है. तो मैं पुरे ज़ोर से उसे चोदने लगा. और बस वह पल दुबारा आ गया जब हम दोनों साथ मैं झड़े.उसकी चूत से रस की फुवार मेरे नाभि पर गिरी और मैंने अपना पूरा गरम मरदाना रस उसकी गांड में भर दिया. कुछ पांच मिनट हम ऐसे ही रहे बेहाल होकर.

उसके बाद जब वह मुझसे अलग हुई तो मेरा लंड उसकी गांड से बहार निकला. और साथ ही गांड से मेरी मुट्ठ की लम्बी धार भी निकलकर नीचे को टपकने लगी.श्रद्धा: मज़ा आ गया आज तो.मैं: मुझे भी. पूरी ज़िन्दगी का मज़ा आया.श्रद्धा: अच्छा अभी इतने में ही?मैं: नहीं अभी तो और बाकि है.श्रद्धा: हाँ अभी तो और चोदना है तुम्हे. मेरी चूत और गांड दोनों. टेबलेट चाहिए क्या?मैं: मिल जाये तो अच्छा है.श्रद्धा: तो फिर रेडी रहो अभी लाती हूँ. Apne Ghar Par Sagi Bhabhi Ki Chudai

खाओ और पूरी रात मुझे चोदो। .मैं: इस बार गांड या चूत?श्रद्धा: चलो मुझे आराम देते हुए तुम एक बार मेरी चूत चोदना  फिर गांड.मैं: ये अच्छा आईडिया है. तो फिर लाओ टेबलेट शुरू करते तुम्हारी चूत और गांड की चुदाई.उस रात श्रद्धा को मैंने उसके दिए टेबलेट खाकर 4 बार और चोदा और उसका सारा कमरा हमारे काम रस से महक रहा था.

उस रात हम एक दूसरे को अचे से चोदने के बाद करीब 3 बजे गले लगते हुए नंगे ही सो गए.

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