By | March 7, 2023

Holi Par Maa Ki Chudai: हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राहुल, आज फिर पिछली कहानी का अगला भाग बहग लेके आया हु , आप लोगो ने पढ़ा कैसे राहुल अपनी कविता आंटी को अपनी वासना के जाल में फसा ही लिया और फिर चुदाई की और चुदाई करते करते पीछे से माँ ने हमको देख लिया था। अब आगे बताता हु क्या हुआ फिर। राहुल आज अपने दोस्तो के साथ बाहर से होली खेलके आया था और पूरा रंगो मे भीगा हुआ था. अब आगे .

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Holi Par Maa Ki Chudai

सारिका: मममम… अंदर डालो राहुल जीभ को अंदर डाल के चाटो प्लीज

राहुल अपनी माँ की चूत को उंगलियों से दबाकर फैलाया और अंदर की चिकनी चमकदार गुलाबी चूत की परत को चाटने लगा सारिका की आँखे बंद हो गयी और सर पीछे की और उठ गया और वह बोल पड़ी: 

सारिका: अह्ह्ह्ह! ऐसे ही अह्ह्ह! सारिका की ऐसी आह और उसके शब्दों को सुन कविता के तन बदन में बिजली की लहर झिलमिला उठी कुछ ही पालो में राहुल अब अपनी माँ की चूत में अपनी जीभ धकेल रहा था और नीचे से अपने दूसरे हाथ की ऊँगली की नोक से उसकी गांड की छेद को नरमी के साथ सहला रहा था।

सारिका कविता को बिना देखे बोली: कविता कब तक तू खड़ी रहेगी यहाँ मेरे पास आकर बैठ जा और देख कविता कुछ न बोली और चुप चाप दबे पाँव बेड पर सारिका के बगल जा बैठी और नीचे राहुल को देखती तो कभी सारिका के मज़े में विभोर चेहरे को सारिका कविता की नज़रो में नज़रे डाल कभी आहे भर्ती तो कभी मुस्कुरा देती, नीचे राहुल भी समझ गया था अब की उसकी माँ क्या खेल खेल रही है वह समझ गया था की उसकी माँ ने उनके राज़ को कविता के सामने क्यों खोला वह समझ गया था की उसकी माँ कविता को उनके वासना के खेल में भागिदार बनाना चाहती थी और इसका साथ देते हुए वह अपनी आंटी  को दिखते हुए अपनी माँ को और मज़ा देने लगा। Holi Par Maa Ki Chudai:

Maa ki chudai kahani

राहुल अपनी जीभ को चूत में रगड़ता हुआ चाटने लगा अब नीचे से अपनी एक ऊँगली भी सारिका के गांड में धीरे धीरे घुसाने लगा, इसे जानकार सारिका अपनी गांड को दोनों तरफ से पकड़ फैला कर देने लगी राहुल अपनी ऊँगली को और अंदर धकेलता गया और वह लेती गयी।

सारिका: आह्हः! हैं पूरा घुसाओ राहुल, कविता को सामने से यही दिख रहा था  की राहुल अपनी जीभ को सारिका की चूत में डाल रहा है पर वह नीचे की हरकत नहीं जान रही थी इस बात का अंदाजा सारिका को होते ही वह आगे बोल पड़ी: 

सारिका: अपनी ऊँगली को अच्छे से और अंदर गुसाओ राहुल गुसाओ मेरी गांड में राहुल… अह्ह्ह! तब जाकर सारिका समझी की क्या कहा घुसाने की बात सारिका कह रही थी कविता के चेहरे पर अब रोमांच का रंग चढ़ने लगा वह देख तो नहीं पा रही थी पर इस बात को जान कर की राहुल अपनी माँ की गांड में ऊँगली भी दे रहा है, इस बात से उसके अंदर आग सी उमड़ने लगी रह रह कर कविता माँ बेटे के इस नंगे खेल को देखने लगी अब सारिका चाहती थी की कविता और अच्छे से देखे पर इस अवस्था में उसे नीचे की हरकत नहीं दिखा सकती थी ।

Holi Par Maa Ki Chudai

सारिका राहुल से बोली: राहुल हटो राहुल तुरंत अपनी माँ की जांघो के बीच से हैट कर बोल:

राहुल:  हाँ माँ! सारिका उठ गयी और पलट कर कविता के तरफ अपनी गांड दिखाती हुई घोड़ी बन बैठी।

सारिका: मेरे पीछे आओ, राहुल को लगा की शायद उसकी माँ अब उसे चोदने के लिए बुला रही है वह कुछ ही देर पहले कविता को छोड़ कर थका हारा बैठा था उसे संदेह था की वह ये कर पायेगा या नहीं,  राहुल ये सोच झिझकता हुआ उठ रहा था उसकी शकल पर आई निराशा को देख उसकी माँ तुरंत पहचान गयी, 

सारिका: घबराओ मत राहुल पीछे आओ तुमको चोदने को  नहीं बोलूंगी अभी।

राहुल के मन में हलकी ख़ुशी आ गयी वह तुरंत बेड पर चढ़ता हुआ अपनी माँ के पीछे जा बैठा।

सारिका: मुझे पता है तुमसे अभी नहीं होगा और ऐसे मत बैठो ऐसे बैठोगे तो आंटी को कैसे दिखेगी बोलो एक तरफ हो जाओ, राहुल सारिका के कहे अनुसार अपनी माँ के बांये तरफ आ बैठा अपने अगले हुकम का इंतज़ार करना लगा,

सारिका पूरी बेशर्मी के साथ राहुल को बोली: 

सारिका: आंटी को दिखाओ राहुल तुम नीचे से क्या कर रहे थे, राहुल अपने हाथ को बढ़ा कर सारिका के गांड को पकड़ने जा ही रहा था की सारिका टोकती हुई बोली: आ आ आए… पहले चाटो वह, राहुल ये सुनते ही कविता के बूब्स ऊपर उठ गए वह सोचने लगी की क्या सच मे राहुल ऐसे करेगा?  Holi Par Maa Ki Chudai:

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राहुल अपनी माँ को मुस्कान देकर  फिर उसकी गांड को पकड़ दो तरफ से फैलाता हुआ कविता को सारिका की कसी हुये छेद का दर्शन देने लगा और फिर धीरे से अपना मुँह उसके पास ले गया कविता को और उत्तेजित करने के लिए राहुल सारिका की कसे छेद के पास जाकर ऐसे लम्बी सांस लि, मानो वह अपनी माँ की खुशबू अपने अंदर भर रहा हो, राहुल अपने हाथो को नीचे ले गया सारिका की गांड के ठीक छेद पर अपने होठो को रख प्यार से चूमने लगा चूमने के बाद उसी जगह को धीरे धीरे चाटने लगा,

सारिका: अह्ह्ह मममम गुड बॉय राहुल, राहुल की हरकत देख कविता के अंदर पागलपन सी उमड़ पड़ी अगर ये कोई और लड़का होता जो सारिका के साथ ये कर रहा होता तो बात अलग थी पर राहुल को ऐसे करते देख ही इस नज़ारे को उसके लिए और उत्तेजनात्मक बनाने लगा, कविता न चाहती हुई भी उसके बूब्स को उसकी नाइटी के ऊपर से सहलाने लगी राहुल कुछ देर अच्छे से चाट कर अपनी माँ के  छेद को चिकना किया और फिर अपनी ऊँगली की नोक से छेद के पास कुछ देर सहलाते हुए खेला, फिर सारिका बोली: 

सारिका: डालो अंदर राहुल, राहुल धीरे से अपनी एक ऊँगली छेद में धकेलता हुआ घुसा गया उसकी घुसती ऊँगली को देख कविता की आँखों में वासना का कीड़ा उतर गया,

सारिका: अह्ह्ह! कविता को दिख रहा है ना सब?

राहुल: हाँ माँ।

सारिका: शट उप राहुल अपना काम करो मैं तुमसे नहीं पूछी, कविता समझ गयी की सारिका उससे पूछ रही है राहुल तुरंत कविता के तरफ देखा कविता अपनी बूब्स को नाइटी के ऊपर से दबा रही थी राहुल मुस्कुराता हुआ बोला:

राहुल:: आंटी… आपसे पूछ रही है माँ, कविता चुप रही उसके अंदर शर्म थी जो उसे चुप किये हुए थी सारिका सर पलट कर कविता को देखि उसके शर्म भरे चेहरे को देख बोली: 

सारिका: ओफ्फो कविता तुम्हारी शर्म देख कर तो मैं भी शर्मा जाउंगी, कविता के होंटो पर मुस्कान आ गयी इस बात को सुन राहुल उसकी मुस्कान देख उत्तेजना में अपनी माँ के अंदर ऊँगली ज़ोर से दे मारा।

सारिका: अह्ह्ह! पागल तुझे क्या हुआ? धीरे करो, राहुल मुस्कुराता हुआ बोला: Holi Par Maa Ki Chudai:

राहुल:: सॉरी माँ सारिका वापस घूम गयी और सर नीचे कर अपने अंदर ऊँगली का मज़ा लेने लगी राहुल अपनी आंटी को दिखते हुए और अच्छे से अपनी माँ को मज़ा देने लगा, कुछ देर ऐसे ही करने के बाद सारिका बोली: 

सारिका: अब नीचे घुसाओ राहुल, राहुल अपनी ऊँगली निकाल और दो ऊँगली का जोड़ा बनाकर अपनी माँ की चूत पर पीछे से रगड़ ने लगा  और फिर धीरे धीरे अंदर बहार घुसाने लगा कविता ये देख और उत्तेजित होने लगी उसके मन में उमड़ने लगा की सारी शर्म हाय को भूल कर इन माँ बेटे के साथ मिल जा और अब भी वह स्थम्ब बनी इन दोनों को देखती ही रही और बस अपने एक हाथ से अपने कपडे के ऊपर से बूब्स को  निचोड़कर खुद को खुश रख रही थी  धीरे धीरे राहुल की उंगलियों ने तेज़ी पकड़ी और साथ ही सारिका की सिसकारियों ने ऊँची आवाज़ पकड़ी, 

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सारिका: अहह  बहुत मज़ा आ रहा है राहुल, राहुल अपनी माँ की आहे और शब्दों के आग़ोश में चूत में 2 उंगलियों से चोदता गया ये देख कविता अपने निप्पल को और ज़ोर से निचोड़ती हुई खुद को मज़ा देती ग, 

सारिका: तीन राहुल… तीन ऊँगली डालो प्लीज अह्ह्ह! राहुल अपनी दो उंगलिया बहार निकाल और फिर 3  उंगलिया इखट्टा कर अपनी माँ की चूत में उतार डाली चूत से निकलती नमी और रस के फिसलन से उंगलिया तेज़ी से चलने लगी, राहुल एक हाथ को सारिका की कमर पर टीका कर अपने घुटनो पर खड़ा हुआ फिर तेज़ी के साथ अपनी पूरी ताकत लगाकर उंगलियों को अंदर बहार मारने लगा, 

सारिका: ओह्ह्ह! येअहहह ओह्ह्ह एस राहुल यस… अह्ह्ह्ह! बहुत अच्छे… अह्ह्ह!अपनी माँ की हर पल ऊँची होती आहे सुनकर राहुल जोश में आने लगा वह समझ गया की उसकी माँ झड़ने वाली है वह अपने हाथो को लगातार अंदर बहार हिलाता हुआ उंगलियों को चूत की अंदरूनी दीवारों से रगड़ता गया सारिका वैसे ही अपने चरम सीमा पर पहुँचती गयी,

सारिका: अहह! रहललललल! मैं झड़ने वाली हूँ! रुकना मत अह्ह्ह! और तेज़… और !राहुल अपने हाथो की हरकत को बिना रोके लगातार मारता गया और उसकी माँ आहे निकालती हुई उसके उंगलियों से चुदती  गयी और फिर एक ज़ोर की सिसकार के साथ कापती  हुई झड़ उठी, खचा खच होती हुयी  उंगलियों पर सारिका की चूत ने सर-सरती हुई चूत रस की छीटे  बिखेर दिया, कविता को ये नज़ारा काफी उत्तेजनात्मक लगा कैसे एक बेटा अपनी माँ को सिर्फ अपने उंगलियों के खेल से इस कदर झड़वा गया, Holi Par Maa Ki Chudai:

सारिका हिम्मत करती हुई अपनी कमर को आगे बढ़ा गयी झड़ने के बाद भी राहुल उत्तेजना के मारे अपनी उंगलियों को रोका नहीं सका, उसकी  उंगलियों से अपनी चूत चुदवा कर सारिका गिर पड़ी और साँसे समेटने लगी, कुछ देर बाद सारिका होश संभालती हुई उठी और लम्बी सांस छोड़ बोली: हफ्फ्फ्फ़… वाओ मज़ा आ गया राहुल कविता को देखने लगा की उसकी आंटी पर इसका क्या असर हुआ कविता कुछ नहीं  बोली पर उन दोनों  को उसे देखते देख हलकी सी मुस्कान होंटो पर ले आयी, सारिका अपने बिगड़े बालो को एक तरफ सवारती हुई कविता से बोली: 

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सारिका: तो क्या सोचा तुमने?

कविता: क्या? किश बारे में?

सारिका: तुम वापस घर जाने की बात कर रही थी न उस बारे में क्या सोची?

कविता एक टक राहुल और सारिका को देखने लगी और फिर शर्माती हुई मुस्कुराने लगी कविता की मुस्कान देख राहुल खुश हुआ कविता के पीछे गया और उसके कंधो पर बांहे डालता हुआ बोला: ओफ्फो आंटी अब क्या शर्माना अब तो माँ भी हमारे साथ हैसारिका राहुल की हरकत देख बोली: 

सारिका::अरे अरे? राहुल मैं यही हूँ!

राहुल: ओफ्फो माँ… काफी हुआ आपका बॉस बनना,

सारिका: हाहाहा मारूंगी मैं तुझे बदमाश चलो हटो आंटी के ऊपर से,राहुल सारिका की बात पर हैट गया तो कविता बोली: 

कविता: चलो मैं जाती हूँ, इतना कह कर वह बेड से उठी तो सारिका पूछी: 

सारिका: कहा? अपने घर?

कविता: नहीं बाबा टाइम हो गया है भारती आ जाएगी कभी भी,

राहुल: तो मतलब आंटी ने हाँ कर दी माँ!

कविता: हम्म्म हाँ ओके, सारिका बेड से उतरती हुई कविता को गले लगा लिया  और फिर दोनों राहुल के तरफ देखने लगी, 

कविता: पर सुनो भारती भी है इस घर में याद रखना पता नहीं कल वह मेरे पीछे पीछे क्यों आ गयी यहाँ,

सारिका: तो क्या तुमने उसे नहीं बुलाया था यहाँ? Holi Par Maa Ki Chudai:

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कविता: नहीं मुझे लगा तुमने बुलाया  होगा, उन्दोनो को ऐसे एक दूसरे से सवाल करते देख राहुल इस तरफ अपना सर झुका कर अपनी की हुई बेवकूफी पर सोचने लगा सारिका और कविता दोनों को ही नहीं पता था की भारती यहाँ राहुल के बुलाने पर आयी थी।

सारिका: हम्म्म कोई बात नहीं रात को भारती तो उस कमरे में सोती है तो आज रात राहुल को सोफे पर नहीं हम अपने कमरे में रहने देंगे, राहुल सर उठाकर ख़ुशी ख़ुशी मुस्कुराता हुआ बोल:

राहुल:  ओह यस माँ आज तो मैं यहाँ आप लोगो के साथ ही सोऊंगा।

सारिका: यहाँ सोओगे तुम? कविता सारिका को देख पहले आशंकित हुई पर फिर सारिका की होंटो पर मुस्कान देख कविता हस्स पड़ी और राहुल को देख बोली: 

कविता: हाहाहा हाँ तुम यहाँ कैसे सो सकते हो? राहुल ना समझ होता हुआ बोला:

राहुल:  हाँ क्यों? यहाँ नहीं सोने दोगे क्या मुझे आज भी? Holi Par Maa Ki Chudai:

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सारिका अदाओ के साथ कविता को अपनी बांहो में भर कर राहुल को देख बोली: 

सारिका: तुम्हे सोने कोन देगा आज रात? आज तो तुम्हे फुल नाईट काम करना पड़ेगा बेटा।

कविता: आज रात हम दोनों को जो खुश करना है तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना ही , अगले भाग मे बतऔगा की कैसे भारती ने हम तीनों को कैसे चुदाई करते हुये पकड़ा था और फिर मैंने उसकी भी चुदाई की। Holi Par Maa Ki Chudai:

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