By | March 16, 2023

Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne: हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राहुल आज एक बार फिर एक नयी कहानी के साथ, पिछले भाग मे आप सभी ने पढ़ा था कैसे मैंने भारती को घर पर जम के चोदा था, फिर अपना काम ख़तम करने के बाद भारती अपने रूम चली गयी मैंने माँ को एक मैसेज भेजा: अब आप आ सकते हो सब हो गया, अब आगे की कहानी सुरू करता हु।

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Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

दरअसल आज जो भी हुआ वह सब मेरी माँ का ही प्लान था सुबह का उनका औरतो के छोटे कपड़ो पर बाते स्विमिंग पूल में स्विम सूट में जाने की बात फिर कविता आंटी को कही और व्यस्त रखा मेरे और भारती के लिए रास्ता साफ़ करके देना सब माँ के खेल की संचारिका थी 

मेरी माँ ही थी फ़्लैश बैक पिछली रात माँ और आंटी के साथ माँ के कमरे में सेक्स करते वक़्त मैंने भारती को मौका दिया था हमें देखने का, लेकिन उस रात कुछ और भी हुआ चुदाई करने के बाद जब कविता आंटी वाशरूम गयी तो माँ मेरे पास आ कर बोली: तो राहुल! Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

Maa Ki Chudai Kahani

राहुल: यस माँ बोलिये!

माँ: दरवाज़ा क्यों खुला रखा तुमने! माँ के ऐसे पूछते ही मैं हक्का बक्का रह गया।

मैं बोला : अरे वह शायद मैंने ठीक से बंद नहीं किया था , माँ मुझे घूरती हुई बोली: 

माँ: अच्छा! या किसी को फ्री शो का वादा करके आये थे तुम?

मैं: आ… क्या… माँ आप क्या कह रही हो? मैं उनकी बात को मज़ाक बनाता हुआ हसने लगा वह मेरे निप्पल को पकड़ निचोड़ती हुई बोली: 

माँ: अपनी माँ को टोपी पहनाओगे तुम? मैं: आह नहीं ऐसा कुछ नहीं है।

माँ: कैसा? कैसा कुछ नहीं है? वह और ज़ोर से मेरे निप्पल को निचोड़ बोली: 

माँ: अगर तुम्हे मज़ा दिला सकती हूँ तो सारा मज़ा हमेशा के लिए ख़त्म भी कर सकती हूँ भारती को क्यों बताया हमारे बारे में? मैं समझ गया था की मैं माँ से कुछ छुपा नहीं सकता वह काफी होशियार औरत है पता नहीं कैसे चोदने के बीच में भी उनका ध्यान दरवाज़े पर गया।

मैं: वह… मैंने अहह… मैंने नहीं बताया उसे, माँ बोली: 

माँ: तो फिर अब क्या तुम कविता पर इलज़ाम लगाओगे? 

मैं: नहीं माँ भारती को सब पता है कविता आंटी से भी पहले से ही।

माँ: वह कैसे?

मैं: हु उसने हमें कल रात लिविंग में सोफे पर सेक्स करते देख लिया था ।

माँ: हम्म्म शायद।

मैं: शायद? तो क्या आपको पता था?

माँ: कल रात जब हम लिविंग में थे तो पता नहीं मुझे लग रहा था की कोई और भी हमारे आस-पास है।

मैं: माँ! आप डराओ मत ऐसे सब बोलके!

माँ: वह तुम नहीं समझोगे मैं एक हाउस-वाइफ भी हूँ अकेले घर में रहकर आदत है मुझे घर में किसी और की साँसे भी मुझे बहुत अच्छे से पता चल जाती है वह छोड़ो अब ये बताओ की वह क्यों हमें देखना चाहती थी? कविता को देख वह अंदर आकर अपनी माँ को कुछ बोली क्यों नहीं? इसके बाद मैं माँ को मेरे और भारती के बीच हुई बातो को बता दिया फिर कविता आंटी के वाशरूम से बहार आने की आवाज़ सुन्न माँ बोली:  Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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माँ: अब इस बारे में बात मत करो कल मैं तुम्हे बताउंगी की क्या कैसे करना है

मैं: पर आपके दिमाग में क्या है?

माँ: भारती जान ही गयी है और वह इस बात का कोई बतंगड़ नहीं बना रही है मतलब शायद उसे भी हमारे साथ आने का मन होगा, पर कविता पर मुझे संदेह है की वह अपनी बेटी को हमारे साथ आने देगी या नहीं।

मैं: तो?

माँ: श! इसके बाद कविता आंटी वाशरूम से बहार आयी और फिर हम तीनो ने सेक्स का एक और राउंड खेला, अब अभी की बात मैं लिविंग रूम में था और भारती अपने कमरे में शायद वह मुझसे चुदने के बाद नाहा रही थी कुछ 10-मिनट बाद घंटी बजी।

मैंने  तुरंत जाकर गेट खोला तो माँ थी पर आंटी साथ में नहीं थी,माँ मुस्कुराती हुई धीमी आवाज़ में बोली: 

माँ: भारती किधर?

मैं: अपने रूम में आंटी किधर है?

माँ: वह पूल में ही है कुछ देर धुप खाकर आएगी बोली कुछ किया?

मैं शर्माता हुआ मुस्कुराकर बोला:

मैं:  ममम थैंक्स माँ! यू अरे थे बेस्ट माँ इन थे वर्ल्ड!

माँ हस्ती हुई बोली: हम्म्म हम्म्म पर इन सबकी कीमत लुंगी तुमसे राहुल टाइम आने पर,

मैं: अरे ले लेना माँ! मैं दरवाज़ा बंद कर उन्हें पीछे से गले लगा लिया और बोला : आप जो मांगोगी मैं करूँगा।

माँ: माँगना तो पड़ेगा ही कुछ ख़ास आखिर तुम्हे 3 का सुख जो दे रही हूँ।

मैं: वह तो है माँ! माँ सोफे पर आराम से बैठ चैन की साँसे लेने लगी मैं भी उनके पास जाकर बोला :

मैं:  तो माँ कविता आंटी को पूल में जाने का मन नहीं था अब गयी तो वापस आने का नहीं? इतना पसंद आ गया क्या उन्हें पूल?

माँ: आए है-है-है हाँ कविता है ही ऐसी कुछ चीज़ो से काफी शर्माती है पर उसे वह करने की भी काफी इच्छा होती है, 

मैं मुस्कुराता हुआ बोलै: हाँ जैसे की मैं,

माँ बोली: है-है-है काफी खुश हो तुम तो।

मैं: हाँ बिलकुल माँ! सच मे माँ आप जैसी माँ किसी के पास नहीं होगी, माँ मेरे गाल पे हाथ रख बोली: 

माँ: और हम जैसे माँ बेटे भी कही नहीं होंगे।

मैं: तो अब आगे क्या?

माँ: हम्म्म अब पता नहीं भारती जानती है हम सबके बारे में पर कविता को भारती की बात का पता नहीं।

मैं: आंटी को बता देते है ना और भारती और आंटी और आप और मैं सब मिलकर मज़े करेंगे।

माँ: है-है-है लालच मत करो कविता उसकी माँ है अगर जान गयी तो वह मेरी जान ले लेगी।

मैं: अरे नहीं माँ अगर आंटी हमारे साथ आ सकती है तो भारती के आने पर क्यों ऐतराज़ करेगी?

माँ: क्यों की भारती उसकी बेटी है जैसे मैं खुद अपनी बेटी टीना को इन सबमे नहीं देख सकती वैसे ही कविता भी नहीं देखना पसंद करेगी। Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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मैं: तो आपके हिसाब से अब क्या?

माँ: हम्म्म पता नहीं पर भारती को हम अपने साथ शामिल नहीं कर सकते, तभी हमें चौकाती हुई भारती की आवाज़ आयी: तो ये सब आपके हिसाब से हो रहा था हमारी बाते सुन्न कर हमारे पीछे भारती खड़ी थी वह अब उतनी शर्मा हाय के साथ रहने वाली लड़की नहीं रही उसकी बातो से ज़्यादा मैं उसे देख उत्तेजित था, वह नीले रंग की चमकदार जांघो तक लम्बी नाइटी में थी, माँ ने उसे देखने के बाद मुझे देखा फिर आँखों से ऐसा इशारा किया जैसे की हमारी सारी बाते वह जान चुकी है।

माँ बोली: अहह भारती आओ बेटा इधर बैठो, भारती सोफे पर बैठ गयी तो माँ ने आगे पूछा: तुम कब आयी यहाँ, 

भारती बोली: बस तब जब आप और राहुल ये कह रहे थे की अगर मेरी माँ ये सब जान गयी तो वह आपकी जान ले लेगी।

माँ हस्ती हुई बोली: है-है-है सॉरी बेटा वह कल रात राहुल ने जब तुम्हारी बात बताई तो, भारती: कोई बात नहीं।

माँ: क्या तुम्हे इस बात से सच मे बुरा नहीं लगा?

भारती बोली: बुरा लगा था तो मुझे कल रात अपनी माँ की हरकतों को देख कर ही हो जाता।

माँ: हाँ या शायद परसो रात मुझे और राहुल को देखा था तुमने।

भारती: हम्म्म वह भी है माँ ने मुझे देखा और फिर भारती से बोली: 

माँ: तो क्या ख्याल है तुम्हारा?

भारती: किश बारे में आंटी?

माँ बोली: मेरे और राहुल के साथ मज़े करने पर? माँ के ऐसे सीधे पूछने पर भारती से  जवाब नहीं मिल रहा था ।

माँ: घबराओ मत ऐसा नहीं लगता की तुमसे अब कुछ छुपाने की ज़रूरत है तुम्हे कविता से ज़्यादा पता है अब और रही बात तुम्हारी तो भरोसा रखो कविता को कभी पता नहीं चलेगा।

माँ भारती को बोली: और मुझे ये भी पता है की तुम्हे भी ये सब करने में काफी मज़ा आता है, भारती हलकी मुस्कान के साथ हम दोनों को देखने लगी माँ बोली: 

माँ: राहुल ने बताया मुझे की तुम बता रही थी की यू वैरी डर्टी गर्ल है-है-है! भारती के चेहरे पर एक शर्म आ गयी और वह मुझे देखने लगी मानो गाली दे रही हो की मैंने सब कुछ बता दिया उसकी शर्म को देख माँ उससे बोली: 

माँ: शर्माओ मत वे आल अरे डर्टीटिंग टोंग! इतने में दरवाज़े की घंटी बजी तो माँ बोली: शायद कविता होगी, माँ उठने लगी तो मैं बोला : मैं देखता हूँ माँ तब भारती को देख मुस्कुराकर बोली:  Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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माँ: देखो देखो राहुल को तुम्हारी माँ का नाम सुनते ही उछल पड़ा, भारती मुँह पर हाथ रख हसने लगी तो मैं बोला: अरे माँ आप भी ना, मैंने जल्दी से जाकर दरवाज़ा खोला सामने कविता आंटी तो थी लेकिन उनके शकल पर किसी तरह की नाराज़गी थी वह सीधे अंदर आ गयी और पहले भारती को देखा की वह क्या पहनी है, पर कुछ नहीं  बोली और वह से बिना कुछ बोले सीधे माँ के कमरे मे  चली गयी हम तीनो एक दूसरे को देख रहे थे की आंटी को आखिर हुआ क्या?माँ बोली: एक मिनट मैं ज़रा देख के आती हूँ उसे क्या हुआ, माँ हम दोनों को देख बोली: कविता आ गयी है अब कुछ करने मत लग जाना तुम दोनों है-है-है! माँ अपने कमरे में चली गयी मैं भारती को देखता हुआ वापस अपने जगह बैठा और बोला : 

राहुल: अब क्या इरादा है?

भारती: कुछ नहीं माँ आ गयी मेरी तो अब कुछ नहीं है ।

मैं: तो क्या हुआ? छुप छुप  कर करने का मज़ा ही अलग होता है, 

भारती मुस्कुराती हुई बोली: अच्छा! पर तुम छुप छुप  कर करने के लायक नहीं हो ।

मैं: वह क्यों?

भारती: है-है-है तभी तो परसो रात को मैंने देख लिया था तुम्हें अपनी माँ के साथ, बात तो उसकी सही थी मैं बोलै: अब चलो वह अच्छा ही हुआ वरना यहाँ तक हम नहीं पहुँचते।

भारती: हम्म वह भी है तभी माँ के कमरे का दरवाज़ा खुला और माँ लिविंग रूम को आती हुई बोली: 

माँ: कविता की तबियत थोड़ी ठीक नहीं शायद पूल का पानी उसे जच्चा नहीं, मैं तो हक्का बक्का था ही साथ ही भारती भी माँ अब काफी सेक्सी लगने वाले काले रंग की और काफी पारदर्शी बेबीडॉल में थी,  माँ को ऐसे कपडे में देख समझ गया था की आज अभी बहुत कुछ और होने वाला है माँ भी मेरे नज़र में आयी चमक देख मेरी हालत जान चुकी थी और वह मुस्कुराने लगी।

मैं: वाओ माँ लुकिंग रियली हॉट, भारती उन्हें देख रही थी पर कुछ बोल नहीं रही थी।

मैं: क्या हुआ आंटी को मैं बात करू क्या उनसे।

माँ तुरंत बोली: नहीं नहीं उसे थोड़ी देर आराम करने दो।

मैं: शायद किसी की नज़र लग गयी होगी उन्हें इतनी सेक्सी जो लग रही थी आंटी बिकनी में।

माँ: किसी और की क्यों तुमने ही लगाए होगी, देख रही थी कैसे घूर रहे थे कविता को, भारती मौके का फायदा देख बोली: 

भारती: हाँ आंटी किसी को भी नहीं छोड़ा हम सबको घूर रहा था ये,

माँ हस्ती हुई बोली: है-है-है अब चलो मैं ही कुछ खाने के लिए बना देती हूँ लंच भी तो करना है,

भारती बोली: हाँ आंटी मैं भी आती हूँ आपकी हेल्प कर दूँगी।

माँ: नहीं बीटा रहने दो तुम यही रहो मैं कर लूंगी, 

भारती मुझे देख बोली: नहीं आंटी यहाँ रहने से बढ़िया मैं आपके साथ ही रहु।

माँ: है-है-है राहुल इतना परेशान कर रहा है क्या?

भारती माँ के पास जाने लगी और बोली: हाँ बहुत! Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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माँ मुझे देख बोली: है-है-है तो राहुल तुम बैठो यहाँ हम चले कुछ खाने के लिए बनाने,माँ किचन को गयी और उनके पीछे भारती मुझे जीभ दिखाती हुई चल पड़ी कुछ देर मैं लिविंग रूम में अपने फ़ोन के साथ बैठा रहा फिर किचन में माँ और भारती को हसी मज़ाक करते सुन्न उठ कर उनके पास गया, किचन में जाकर मैं दरवाज़े के पास उन्हें देख खड़ा रहा, सच कहु तो भले माँ और अब भारती को भी चोद चुका था पर हवस की भूख यारो कभी नहीं मिटती , अब मैं पीछे खड़ा उन्दोनो को मैं बस निहार रहा था, भारती की जांघो को दिखने वाली उसकी साटन की चमकदार नाइटी में उसके पतले सुडौल गांड का आकर और वही माँ की पारदर्शी काली  नाइटी में उनकी पेंटी में कसी गांड गोल आकर को देख मैं मदमस्त होने लगा , करीब एक मिनट में उन दोनों को ऊपर से नीचे घूरता रहा, अचानक से भारती बोली: 

भारती: आंटी! लगता है हमें भी नज़र लगने वाली है, माँ भारती को देख बोली: 

माँ: क्या? और फिर पलट कर पीछे मुझे देख बोली: है-है-है तुम कब आये यहाँ?मैं: बस 2  मिनट पहले शायद।

माँ: हम्म्म आये तो ये नहीं की कुछ मददत कर दो काम-चोर जैसे खड़े घूरो बस, मैं आगे बढ़ा और पीछे से जाकर माँ की नाइटी के ऊपर से उनकी गांड को पकड़ कर बोला

मैं::: कैसी मदत चाहिए माँ? सच कहु तो भारती को दिखते हुए माँ को ऐसे हाथ लगाने में मुझे काफी मज़ा आया, मानो मन  ही मन  उसे दिखा कर कह रहा हूँ की देख कैसे मैं अपनी माँ की गांड पर हाथ मारता हूँ।

माँ: ओह ओह्ह! राहुल! क्या कर रहे हो? मैंने  एक हाथ से उनकी नाइटी को उठाया और सीधे हाथ अंदर डाल कर उनकी गांड को पकड़ कर बोला: 

मैं: मदत आपकी! माँ सर घुमा कर मुझे देख कर और बोली: 

माँ: ये कैसी मदत है? भारती मुझे और माँ को देख रही थी मैं अपना एक हाथ माँ के सीने पर कपडे के साथ उनके बूब को दबा रहा था और भारती को देखता हुआ बोलै: 

मैं: मैं सोचा आप खाना बनाते हुये बोर हो रहे होंगे तो आपको थोड़ी मस्ती दूँ।

माँ: नहीं राहुल अभी नहीं कविता कमरे में है कभी भी आ सकती है और यहाँ भारती भी है।

मैं कुछ बोलता इससे पहले भारती बोली: इतस ओके आंटी मैं जाकर उनका रूम लॉक करके आती हूँ उसकी बात सुन हम दोनों पहले हैरान हुए पर फिर समझ गए की उसे हम दोनो को देख मज़ा आ रही है।

माँ: भारती अब तुम भी इसके साथ मत मिल जाओ है-है-है! भारती ने कोई जवाब नहीं दिया और एक मुस्कान के साथ किचन से निकल गयी उसके जाते ही मैंने माँ के पेंटी में उनकी गांड की दरार में हाथ घुसता हुआ बोला : माँ लगता है भारती को देखने में काफी मज़ा आता है। Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

माँ: ममम तो क्या दिखाना चाहते हो उसे? मेरा लंड तन्न चुक्का था और अपने शार्ट पर बने उभर को उनकी गांड पर रगड़ता हुआ बोला :

मैं:  शायद, तभी भारती वापस आयी और हमारे बगल मे खड़ी  हो गयी वह मेरे हाथ को माँ की पेंटी के अंदर जाते हुये डेक रही थी  और होंटो को काट मुस्कुराने लगी, मैं तब भारती को देख कर बोला : माँ कह रही थी की तुम्हे देखना बहुत पसंद है।

माँ: हेलो! मैंने कब कहा ये?

मैं: आपने नहीं कहा तो क्या हुआ भारती मैं से कह रहा हु ये, 

भारती: या तो आंटी पर लगाओ इल्जाम नहीं तो मुझ पर लगाओ इलज़ाम,  सच बात तो ये है आंटी की राहुल का लंड  हो रहा है बड़ा।

 माँ: हाँ और वैसे भी राहुल भारती तो कल रात सब देख ही चुकी है, 

मैं: हाँ पर परसो रात जो अँधेरे में हुआ वह इतने ठीक से नहीं देखा ना।

माँ: वह क्या? मैंने अपनी ऊँगली से माँ की गांड के मुँह पर पहले रगड़ी और फिर धीरे से अंदर धकेलते हुए बोल : ये! 

माँ: अह्ह्ह… राहुल! भारती माँ की सिसकारी को देख नीचे देखने लगी तो वह समझ गयी की मैंने क्या किया, मैंने  माँ के अंदर अपनी ऊँगली को हलके से हिलाता हुआ बोला:

राहुल: क्यों न भारती को दिन के उजाले में दिखाया जाये की मैं आपके साथ उस रात अँधेरे में क्या कर रहा था।

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माँ: राहुल मैं खाना बना रही हूँ न? मैं सीधे नीचे बैठ गया और पीछे से उनकी पेंटी को खींच कर नीचे कर दिया फिर उनके पाँव तक लाया और बोला : तो बनाओ खाना माँ किसने रोका है आप खाना बनाओ और मैं खाता हूँ, ये कह कर मैंने अपने मुँह को उनकी गांड के बीच समां लिया, भारती को मदमस्त करने वाला नज़ारा दिखने लगा मैंने अपनी जीभ निकाल कर पहले उनकी छेद पर टटोला और फिर चाट कर अच्छे से तैयार करने लगा, माँ आहे भरती हुई भारती को देखने लगी, अगले पांच मिनट मैं माँ की गांड को अच्छे से चाट कर गीला करने लगा और फिर उठ खड़ा हुआ भारती को देखते हुए मैंने अपने शार्ट को खोला और नीचे गिराकर अपने तने हुये लंड को बेशर्मी के साथ दिखाते हुए बोला:  Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

राहुल: देखोगी? 

भारती: भारती कुछ न बोली वह कभी मुझे तो कभी माँ को देखती रही फिर मैंने अपने लंड को हिलाता हुआ बोल : 

राहुल: बोलो भारती देखोगी बोलो? वह होंटो को काट पैरो की उंगलिया मचलती हुई खड़ी रही जब माँ बोली: 

माँ: बोलो भारती क्या तुम देखोगी की ये मेरी गांड कैसे चोदता है? मेरे पूछने की बात अलग थी पर माँ के ऐसे पूछने पर भारती उन्हें आँखे फाड़कर देखने लगी तब माँ दुबारा बोली: बताओ भारती क्या तुम्हे सिर्फ छुप कर देखने में मज़ा आता है या? भारती के होंटो पर एक मुस्कान आयी मैं बोला: 

राहुल: चलो अगर बोलने में इतना शर्म आ रही है तुम्हे तो हाँ की  जगह वह कुकिंग आयल मेरे लंड पर डाल दो, भारती ने अपना एक हाथ बढ़ाया और कुकिंग आयल की बोतल लेकर मेरे लंड के ऊपर लायी और तेल की 5-6  बूंदे मेरे लंड पर गिरा दी, 

माँ भारती से बोली: ममम वैरी गुड! भारती वापस अपने जगह पर खड़ी हो गयी और माँ काउंटर पर थोड़ी सी झुक कर बोली: देखना मेरे कपडे पर तेल न लगा हो, मैंने  नाइटी  को पकड़ उनकी कमर पर रखा दिया और अपने लंड को पकड़ उनकी गांड की मुँह पर सटाकर बोला : 

राहुल: आप रेडी हो माँ , क्या मैं अपना लंड आपकी मे डाल दु तो ?

माँ: हाँ पर धीरे से  घुसना, मैं अपने कमर को आगे ढलता हुआ अपने लंड को उनकी कसी हुई गांड के अंदर घुसाने लगा भारती की नज़रे नीचे थी और वह देख रही थी की कैसे मेरा लम्बा मोटा लंड माँ के अंदर गायब हो रहा था ।

माँ: मममम बस बस रुको अब, 

भारती: आपको दर्द नहीं होता?

माँ उसे देख बोली: आराम से शुरुवात करनी पड़ती है,  Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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माँ मुझे देख बोली: रुको कुछ देर मेरी गांड को तुम्हारे अकार को भांपने दो, मैं कुछ देर अपने लंड को उनके अंदर रखा रहा और फिर माँ बोली:

माँ:  ममम अब ठीक लग रहा है अब धीरे धीरे करो, मैंने  भारती को देखा और फिर माँ के कंधे को पकड़ अपने लंड को धीरे से बहार निकाला और फिर अंदर ले गया और फिर बहार भारती के होंटो पर मुस्कान थी और आँखों में जिग्ग्यासा कैसे मेरी माँ अपनी इतनी छोटी सी छेद में मेरे मोठे लंड को ले रही थी।

माँ: राहुल अब थोड़ा तेज़ करो अच्छा लग रहा है, मैं अपने कमर की तेज़ी बढ़ाता हुआ उनके अंदर देने लगा।

माँ: अहह पागल एकदम से तेज़ नहीं धीरे-धीरे बढ़ाओ, माँ ऐसे कह रही थी मानो वह मुझसे नहीं पर भारती को सिखाती हुई बोल रही हो, मैं उनके कहे अनुसार थोड़ा-थोड़ा करके अपने कमर की तेज़ी से बढ़ाता गया और माँ सिसकारियां भरने लगी कुछ 2 -मिनट बाद माँ की और मेरी नज़र भारती पर गयी वह अब मस्ती में आती हुई अपने कपडे के ऊपर अपनी निप्पल को निचोड़ रही थी।

माँ: बिलकुल अपनी माँ पर गयी हो शर्माओ मत मज़ा आ रहा है तुम्हे तो अच्छे से मज़े लो।

भारती समझ गयी माँ क्या कहना चाहती है वह अपने दूसरे हाथ नीचे ले गयी और अपनी नाइटी को उठाकर अपनी चूत को सहलाने लगी तब जाकर माँ और मुझे पता चला की वह अंदर पेंटी नहीं पहनी थी, उसे देख मैं बोल: 

राहुल: माँ वह पेंटी नहीं पहनी है

माँ: ममम वह पहले से ही मज़े के लिए तैयार थी शायद क्यों भारती? भारती मुस्कुराती हुई अपने हाथ से  अपनी चूत को अच्छे से सहलाने लगी और मैं अपनी रफ़्तार धीरे से और बढ़ाने लगा  और माँ आहे भरती हुई बोली: 

माँ: अब तुम तेज़ कर सकते हो मेरी छेद तैयार है, मैं बस यही सुनना चाहता था फिर धना-धन माँ की गांड चोदने लगा माँ और झुकती हुई अपनी गांड मुझे देने लगी और मैं उनके कमर को पकड़ अपने लंड के प्रहार को बढ़ाता गया, तेल की चिकनाहट से मेरा लंड चमक रहा था भारती मेरे चमकते लंड को माँ की गांड में घुसते और निकलते देख मज़ा ले रही थी माँ की सिसकारी और शब्दों को सुन भारती काफी मस्त होने लगी, देखते ही देखते पता ही नहीं चला की कब वह अपनी चूत में ऊँगली घुसाने लगी. Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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मुझे अपनी माँ की गांड मरते देख उसे जितना मज़ा आ रहा था उतना ही मज़ा मुझे उसे दिखते हुए करने में आ रहा था मस्ती में आता हुआ अपने लंड को और तेज़ी से मारने लगा, अब मेरे हर मार की रफ्तार के साथ माँ की सिसकारियां भी तेज़ होने लगी और उसी के साथ भारती की चूत में घुसती उंगलियों की भी हम तीनो ही वासना में इतने खो चुके थे की किसी को भी ये फ़िक्र नहीं थी की कही कविता आंटी कुछ सुनना ले मैं जोश में आता हुआ फटा-फट माँ की गांड में लंड घुसेड़ता गया और वह ढील देती हुई मेरे लंड को लेती गयी करीब 10 मिनट्स ऐसे ही चुदने पर माँ बोली:

माँ: अह्ह्ह! राहुल तेज़ और तेज़ बहुत मज़ा आ रहा है, मैंने भारती को इशारा किया की मुझे तेल की बोतल दे भारती अपनी चूत में ऊँगली डाले हुई ही दूसरे हाथ से बोतल को लेकर मेरे पास आकर माँ की चुदती हुई गांड के मुँह पर तेल की कई बूंदे गिराने लगी, तेल की फिसलन के साथ मैं अपने लंड को और तेज़ी से माँ के अंदर मारने लगा तेल की चाप-चपाहट और मेरे कमर से  गांड पर मार से निकलती फटा फटा  की आवाज़ तेज़ होने लगी, 

माँ: बेटा अब झड़ने वाली हु ! मैं झड़ने वाली हूँ और तेज़ करो!उनको उनकी शिखर पर पहुँचते देख मैं अपनी पूरी ताकत लगाकर चोदने लगा,

माँ भारती को अपनी नशीली आँखों से देखती हुई बोली: 

मा: भारती तुम भी झड़ो मेरे साथ भारती की उंगलिया भी उसकी चूत में तेज़ी से चलने लगी उसकी चूत भी गीले-पन की फ़च फ़च  की आवाज़ निकालने लगी इन् दोनों को देख मैं आक्रामक होता हुआ माँ को लगातार किसी यन्त्र के तरह चोदता गया,फिर माँ सब कुछ भूल चुकी थी और दम से पड़ी: अह्ह्ह्ह! मैं झड़ रही हूँ! उधर देखा तो भारती भी अपनी आँखे बंद कर चुकी थी और उसके हाथ अकड़ते हुए हिलाना बंद कर चुकी थी साफ़ था की ये दोनों एक साथ ही झड़ गयी, माँ बेसूद हो कर झुकी हुई अपने हाथो को किचन के काउंटर पर रख खड़ी रही और मैं उन्हें पीछे से चोदता हुआ धीरे-धीरे रुक गया, कुछ देर बाद माँ होश संभालती हुई सीधी हुई और भारती को देख कर और फिर मेरे लंड को अपनी गांड से निकाल कर मेरे गाल पर एक हल्का थप्पड़ देकर बोली:  Maa Ki Chudai Bahan Ke Samne

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माँ: मा को चोदने  वाला बेटा !

भारती ये देख मुस्कुरायी तो माँ उससे बोली: लगता है कविता सच मे सो चुकी है वरना अब तक दरवाज़े पर आवाज़ देती। मैं अब भी झड़ा नहीं था माँ मेरे सामने बैठकर अपने गांड से निकले हुये लंड को पकड़ अपने मुँह में लेकर चूसती हुई भारती को दिखाने लगी फिर लंड को मुँह से निकाल कर हिलाने लगी.।

मा: फिर  मुझे देख बोली: इसे बचा कर रखो अभी झड़ना मत।

मैं: क्यों?

माँ भारती को देख बोली: क्या तुम जानना चाहोगी की पीछे लेने में मज़ा आता है या नहीं?

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