By | March 1, 2023

Maa ki Chudai Bete Se:हैलो दोस्तों,  मेरा नाम राहुल है, पिछली बार एपिसोड में आप लोगो ने पढ़ा की कैसे मेरा ही खेल मुझ पर हावी हो गया.ऐसा हावी हुआ की मेरे होश ही उड़ गए मैं कविता आंटी के साथ खेल खेलने की सोच रहा था पर अंत में माँ और आंटी दोनों ने मिलकर मेरी गेम बजा दी, यकीन ही नहीं हो रहा था की सब सच में हो गया माँ और आंटी मिलकर मेरे लंड को तेल लगा के मालिश की और फिर मुझे झड़वा दिया। अब आगे सुरू करता हु कहानी।

भाग 1 > माँ व आंटी ने पिया लंड का माल 

ये भी पढे-> बाप बाहर बेटे का लण्ड माँ की चूत में अंदर 

Maa ki Chudai Bete Se

माँ के बारे में तो पता था मुझे लेकिन आंटी की बात अब तक समझ नहीं आयी थी क्या वह सच मे अपने मन से वह कर थी या सिर्फ उनकी ममता थी माँ और आंटी के लिविंग रूम से जाने के बाद मैं अपना लंड धोने माँ के कमरे में चला गया क्यों की मेरे कमरे को भारती लॉक करके गयी हुई थी.

माँ के कमरे में गया तो माँ वाशरूम में ही थी अंदर घुस कर देखा तो वह अपने हाथ धो रही थी मुझे पीछे देख माँ मुस्कुराती हुई बोली:

माँ: क्या हुआ अब भी दर्द ख़त्म नहीं हुआ तुम्हारा?

मैं: शर्माता हुआ खड़ा रहा ये बता भी नहीं सकता था उन्हें की मैं आंटी के साथ खेल खेल रहा था और सब नाटक था

मैं: नहीं वह मैं हाथ धोने के लिए आया था माँ हाथ धोकर पलट कर बोली:

माँ: धोने की ज़रूरत नहीं है तेल से मालिश की है ना कुछ देर रहने दो। फिर माँ ने मुझसे पूछा:

माँ: वैसे कही तुम नाटक तो नहीं कर रहे थे न?

मैं: नहीं सच मे लगी थी माँ मेरे पास आयी और तीखी नज़रो के साथ मुझे देख बोली:

माँ: मुझे ऐसा कुछ तो लग रहा है की तुम कुछ छुपा रहे हो मुझसे.

मैं उनसे नज़र न मिलते हुए वाश बेसिन के पास गया और हाथ धोता हुआ बोला: Maa ki Chudai Bete Se

Maa ki chudai kahani

मैं: आप क्या कह रही हो मैं अब भला क्यों कुछ छुपाऊंगा आपसे? माँ मेरे कंधे पर हाथ रख बोली:

माँ: जब कविता तुम्हारे लंड सहला रही थी तो ऐसा नहीं लग रहा था मुझे की वह पहली बार कर रही हो.तुम्हे देख ऐसा लगा की कुछ नया हुआ हो तुम्हारे साथ वह मुझे तीखे नज़र से देख रही थी मानो उन्हें पूरा यकीन हो की ऐसा ही कुछ है. मेरे पसीने छूटने लगे पता नहीं चला की अब कहना क्या था शायद मैं पकड़ा जा चूका था माँ मेरी आँखों में ही देखे जा रही थी।

मेरे दिमाग में कुछ आ ही नहीं रहा था तभी लाख शुक्र हो भगवान् का की कविता आंटी रूम मे आई ओर दरवाज़ा खोल अंदर आने लगी उनकी आहाट सुन्न माँ मुझसे थोड़ी दूर हो गयी, वाशरूम के दरवाज़े से कविता आंटी ने झाँक कर पूछा:

आंटी: तुम दोनों क्या कर रहे हो अंदर?

माँ: हाथ धो रही थी ये तो बस ऐसे ही आया क्यों क्या हुआ?

कविता आंटी बोली: खाना तैयार है भूख लगे तो बता देना.

माँ: अरे वाह चलो तुम मैं आती हूँ फिर कविता आंटी मेरे तरफ देख बोली: अब कैसा लग रहा है दर्द कम हुआ?

मैं हकबकाते हुए बोला: हाँ… हाँ कम हो गया माँ हाथो पे हाथ बांधती हुई बोली:

माँ: कैसे न हो इतनी अच्छी मालिश जो मिल गयी इसे, कविता आंटी मुस्कुरायी और बोली:

आंटी: अच्छा ठीक है मैं जाती हूँ खाना लगाना हो तो बता देना मैं कोसने लगा आंटी को की ना जाये वरना माँ फिर से अपने सवाल करने शुरू कर देगी फिर सोचकर मैंने तुरंत कहा: रुकिए आंटी मैं भी आता हूँ, माँ जान गयी की मैं उनसे भाग रहा हूँ वह तुरंत मेरे टी-शर्ट की कोलर पकड़ बोली: तुम रुको यही भाग कहा रहे हो?

मैं: में… मेरा काम हो गया,

आंटी बोली: क्या हुआ ये कहा भाग रहा है?

माँ: अरे नहीं कही नहीं कुछ ख़ास नहीं

कविता आंटी: अच्छा ठीक है मैं किचन में हूँ

मैं सोचने लगा की मैं क्या बुरा फसा फिर से माँ अपने सवाल करेगी और मैं क्या जवाब दूँ उनको आंटी के जाते ही माँ ने दरवाज़ा बंद कर दिया, माँ मुझे फिरसे तीखी नज़रो से देखा और फिर अचानक से हस्स पड़ी और बोली:

माँ: हाहाहा! घबरा गए? मैं तो बास तुम्हारी टांग खींच रही थी आज कल बड़े नटखट जो हो गए हो

मैं मुस्कुराने की शकल बनाने लगा क्या पता ये भी माँ की कोई चाल हो मुझसे सच उगलवाने की वह मेरे करीब आकर बोली:

माँ: वैसे आज इसी हादसे के बहाने तुम मेरे साथ मेरे कमरे में ही सोना ठीक है न Maa ki Chudai Bete Se

Maa ki chudai story

मैं: हाँ हाँ ओके जैसा आप कहो पर…पर आंटी का क्या होगा?

माँ थोड़ी सेकंड सोच कर बोली: हम्म्म वह तब देख लेंगे जो भी हो कल रात के तरह सोफे पर उतनी कम जगह पर तो नहीं करना होगा कुछ. मैं अब धीरे धीरे खुश होने लगा पर पता नहीं माँ के मन में था क्या माँ मुस्कुराती हुई मेरे शार्ट पर मेरे लंड को हाथो से थप थापा कर बोली:

माँ: वैसे ये ठीक तो हो जायेगा न रात तक?

मैं भी मुस्कुराता हुआ बोला: आप जब भी कहो माँ ये हर वक़्त रेडी रहेगा।

माँ बोली: चलो अब चलते है कही कविता दुबारा हमे खोजने ना आ जाए अगर उसने  हमारी बाते सुन ली न तो बवाल हो जायेगा

मैं दरवाज़ा खोल कर जल्दी से वाशरूम से निकलने लगा अब भी मुझे माँ पर थोड़ा शक था इससे पहले की वह दुबारा पूछे फिलहाल वहा से निकलना ही ठीक था, तभी माँ मुझे पीछे से बोली: और सुनो मैं पलट कर माँ को देखा तो वह बोली: मैं पूछना भूल गयी कल रात तुमने… यू क्नोव

मैं: क्या? बोलना माँ।

माँ धीरे से बोली: तुमने मुझे वह किया तो… मज़ा आया था की नहीं? मेरी सारी टेंशन दूर हो गयी और मैं मुस्कुराता हुआ बोला:

मैं: बहुत सच में बहुत मज़ा आया आपके जाने के बाद वह सोचकर मैंने एक और बार मज़े भी लिए

माँ हस्स पड़ी और फिर बोली: आज भी करेंगे और बेड पर अच्छे से करेंगे ओके. उनकी बात सुन मेरा लंड पर हरकत होने लगी और मैं बोला:

मैं: ओह यस माँ आज बहुत जायदा देर करेंगे। माँ मेरे सर पर हाथ फेरती हुई बोली:

माँ: हाँ हाँ ज़ादा देर भी और एक से ज़्यादा बार भी पर अभी चलो निकलते है इधर से. माँ मेरे सामने से चलने लगी उनकी बाते और उनकी चाल देख मुझसे रहा नहीं गया मैं उन्हें उनके पीछे से गले लगा लिया.

माँ: अरे राहुल क्या कर रहे हो?

मैं: क्या करू माँ काश आंटी न होती, मैं अपना एक हाथ उनकी गाउन के ऊपर से सहलाता हुआ नीचे चूत के ऊपर ले गया इससे पहले की मैं कुछ बोलता मैंने ध्यान दिया की माँ ने गाउन के अंदर पेंटी नहीं पहनी थी. Maa ki Chudai Bete Se

मैं: नो?

माँ: हाहाहा! नहीं क्यों?

मैं: अभी से तैयारी रात की?

माँ आँख मारती हुई बोली: हाँ शायद, मैं अपने हाथ से उनकी जांघो के बीच चूत की रेखा पर गाउन के ऊपर से सहलाते हुए बोला: अभी थोड़ी ट्रायल कर ले क्या?

Maa ki chudai ki kahani

माँ मेरी उंगलियों का मज़ा लेती हुई बोली: मममम… मन तो है पर कविता का क्या, पता नहीं कब आ जाये.

मैं: दरवाज़ा बंद कर लेते है ना मुझसे तो सबर नहीं हो रहा माँ.

माँ मेरे हाथ को अपनी चूत के ऊपर से हटा कर बोली: अभी रुको खाना खा कर कुछ सोचते है

फिर मैं माँ के साथ बहार निकल कर लिविंग रूम में जा बैठा वहा कविता आंटी भी बैठी हुई थी और हमे देख बोली: अगर किसी को भूख लगे तो बता देना.

माँ: हाँ पर भारती  किधर है?

कविता आंटी: वह अपने क्लास के लिए गयी है बोली थी लंच तक आ जाएगी.

माँ: फ़ोन करके पूछ ज़रा,मैं सोचने लगा उस मुसीबत को क्यों बुलाना अब वैसे गलती तो मेरी ही थी बेकार में अपना फालतू दिमाग लगाकर उसे यहाँ बुला लिया ये सोचकर की उसके साथ कुछ बात बनेगी पर कम्बख्त मुझे क्या पता था की उससे पहले शायद उसकी माँ से मेरी बात बनने वाली थी.

जो भी हो अब माँ के सामने आंटी के बारे में तो मुझे भूलना ही था एक तो माँ को शक होते होते बचा इसी लिए अब बच कर ही खेलना था मुझे.

आंटी अपना फ़ोन लेने के लिए माँ के कमरे में गयी मैं आंटी को जाते हुए पीछे से देख रहा था अचानक से माँ मेरे कान के पास आकर बोली: ऐसे क्या घूर के देख रहे हो?

मैं चौक उठा और बोला: वह… वह देख रहा था की वह गयी या नहीं, माँ शक भरी नज़रो से दुबारा मुझे देखने लगी और बोली: मममम… क्यों?

माँ कुछ आगे बोले इससे पहले ही मैंने सोचा की उन्हें चुप करवाना सही रहेगा मैं आगे बड़ा और उनकी होठो से होंठ मिलाकर चूमने लग गया.

वह पहले रुकी पर फिर मेरे साथ मिलकर हमारी किश को आगे बढ़ाने लगी,करीब 10 सेकंड के किश के बाद दरवाज़े की आवाज़ से हम दोनों रुक गए और सीधे होकर बैठ गए, आंटी वापस आकर फ़ोन लगाने लगी मैं और माँ कभी कभी एक दूसरे को देख मुस्कुराते मानो चोरी पकडे जाने से बचे हो. Maa ki Chudai Bete Se

कविता आंटी: हेलो! किधर हो? आंटी शायद भारती से बात करने लगी इतने में माँ उठी और किचन को चली गयी आंटी भारती से बात करने में लगी हुई थी तो मैं भी उठ कर किचन को चला गया.

वहा माँ काउंटर की तरफ मूड कर कुछ कर रही थी मैं धीरे से उनके पीछे गया और उनकी गांड पर हाथ सहला दिया.

वह अचानक से डरी और बोली: उफ़ डरा दिए क्या हुआ… मम्मी के बिना मन नहीं लग रहा क्या?

मैं अपने हाथ से उनकी गाउन पर उनकी मुलायम गांड के अकार को गोल करता हुआ

मैं बोलै: हम्म्म… काश आंटी नहीं होती.

माँ: हम्म्म… चलो अच्छा ही है मैं उनकी गांड पर चींटी काट बोला: क्यों? अच्छा कैसे है?

Sagi maa ki chudai story

माँ: सोच! अच्छा है वरना तुम तो मुझसे हमेशा चिपके रहते थे।

मैं उन्हें पीछे से अपनी बाहा में लिया और कान में बोला: चिपका नहीं माँ आपके गांड में घुसा रहता.

वह सर घुमाकर मुझे देख बोली: अपनी माँ से ऐसे बात करोगे अब तुम?

मेरे हाथ उनकी बूब पर रख गाउन के ऊपर से सहलाता हुआ बोला: ओफ्फो माँ अब आप मेरी गर्लफ्रेंड होना.

माँ अपने एक हाथ से मेरे हाथ को अपने बूब से हटाती हुई बोली: ऐसे मत करो अभी कविता आ गयी तो.

तभी पीछे से कविता आंटी बोली: वो अभी नहीं आ रही…वह रुक गयी तो हम पलट कर देखे वह हमे देख बोलना बंद कर दिया था.

मैं वैसे ही माँ से पीछे से लिपटा हुआ था पर मैं अब उनके सामने अचानक से हैट जाता तो शायद उन्हें कुछ गलत होने का एहसास होता इसीलिए मैं वैसे ही लिपटा रहा.

कविता आंटी: माँ बेटे में बड़ा प्यार दिख रहा है आज तो

माँ हस्ती हुई बोली: हाहाहा! नहीं नहीं ये तो ऐसे ही करता रहता है Maa ki Chudai Bete Se

कविता आंटी: हम्म्म… अच्छा भारती बोली की वह शाम को ही आएगी वह क्लास के बाद दिव्या के यहाँ गयी है उसकी फ्रेंड है

माँ: तो हम खाना खाले?

कविता आंटी: हाँ अगर राहुल तुम्हे छोड़ दे तो हम खाना खा सकते है हाहाहा!

माँ भी हसने लगी तो, मैंने माँ को छोड़ हैट के थोड़ा पीछे खड़ा हो गया इतने में आंटी माँ के पास आकर खड़ी हो गयी.

मैं उन दोनों को पीछे से देख रहा था आंटी माँ की पीठ पर हाथ फेरती हुई बोली: चल तू हैट मैं कर देती हूँ सब.

ये कह कर आंटी माँ के गाउन को सहलाती हुई बोली: ये कहा से लिया था तुमने अच्छा कपडा है

माँ: हाँ कल टाइम नहीं था शाम को वरना तुझे वह शोरूम भी ले जाती जहा से ये लिया था।

आंटी अपना हाथ माँ  के गाउन पर सहलाती हुई नीचे उनके कमर पर गयी और बोली: अच्छा है लेकिन इसका कपडा… अरे तुम…आंटी मेरे वह रहते हुए भी माँ की गांड पर गाउन के ऊपर हाथ फेरती हुई आगे बोली: तुमने अंदर कुछ नहीं पहना हाहाहामुझे एक पल के लिए यकीन नहीं हुआ की आंटी ने वैसा ही कहा जो मैंने सुना.

माँ हस्ती हुई बोली: हाहाहा मैं घर पे नॉर्मली नहीं पहनती.

मैं सोचने लगा की मुझे लगा नहीं आंटी ने सच मे वही पुछा आंटी माँ की गांड पर हलके से मारती हुई बोली: नॉटी है तू बड़ी और इतना कह कर आंटी ने अपने हाथो से माँ की गांड को हलके से दबा दिया.

ये हो क्या रहा था आंटी जानती है की मैं पीछे ही खड़ा हूँ फिर भी माँ  हस्ती हुई बोली: हाहाहा अच्छा जैसे की तूने पहनी है और मुझे कह रही है बड़ी आयी.

Maa ki chudai dekhi

आंटी हस्ती हुई पलट कर मुझे देखा और फिर बोली: हाहाहा ज़रा इसे देख कैसे देख रहा है.

माँ भी पलट कर मुझे देख बोली: हाहाहा अब हम अगर ऐसे बाते करेंगे तो ये तो ऐसे ही देखेगा ना.

माँ फिर मुझे देख बोली: राहुल जाकर डाइनिंग टेबल पर प्लेट लगाओ वरना तुम हमारी बहुत बाते सुनोगे ऐसे.

मैं शर्माहट के साथ मुस्कुराता हुआ बोला: चलेगा ना मैं कौनसा कोई पराया हूँ.

कविता आंटी: अच्छा तो मतलब तुम्हारे सामने हम लोग सारी  शर्म भूल जाये क्या?

मैं: ओफ्फो जैसे की मेरी कोई शर्म बची अब. Maa ki Chudai Bete Se

माँ और आंटी जान गयी मैंने किश बारे में बोल रह हु  तो माँ बोली: हाँ सही कह रहा है राहुल, उसका तो सब कुछ दिख गया हमे हाहाहावह दोनों मेरे ऊपर हस्स रही थी पर उनकी बातो से मुझे शर्मसार कम और मज़ा ज़्यादा आने लगा.

मैं: हाँ अब बचा ही क्या अब तो मैं मानो नंगा भी रह सकता हूँ आप दोनों के सामने.

कविता आंटी: हाहाहा नहीं बाबा तुम वैसे मत करना.

माँ: हाहाहा हाँ भारती  के सामने तो बिलकुल भी नहीं.

मैं: अरे मैं तो आप दोनों की बात कर रहा हूँ.

माँ: ठीक है ठीक है अभी तुम जाओ और प्लेट लगाओ.

मैं वहा से निकला और जाकर डाइनिंग टेबल पर  प्लेट लगा दी।

फिर माँ और आंटी खाना लायी और हम तीनो खाने के लिए बैठे कुछ देर के लिए काफी शांति थी

फिर हम तीनो खाना खाने में लगे हुए थे पता नहीं चल रहा था की बात क्या करे ये दोनों भी कुछ बोल नहीं रही थी, मैं इन बातो को सोच पानी की गिलास उठाया और फिर जानकर गिलास अपने गोद में गिरा दिया, मैं अपने नीचे गोद में देख बोला: अरे यार…

माँ: क्या कर रहे हो? एक गिलास नहीं पकड़ सकते क्या?

कविता आंटी: अच्छा हुआ नीचे गिरा के थोड़ा नहीं वरना मुझे काम दे देता।

माँ: पूरा पानी गिरा दिया खुद पे?

माँ उठ कर मेरे तरफ आकर देखा तो मेरे पूरे शार्ट पर पानी था

माँ: बेवक़ूफ़ लड़का रुको आती हूँ

माँ उठाकर गयी और हाथ धो कर अपने कमरे से टॉवल ले आयी और मेरे सामने आकर बोली: उठो।

माँ अपने हाथ से मेरी शर्ट की बटन खोले और सारे आम आंटी के सामने मेरी शर्ट खींच कर नीचे कर दी.

माँ: चलो पैर निकालो वैसे ये तो मेरी चाल ही थी इन दोनों के सामने फिर से नंगा होने की क्यों की अगर मैं अपना शर्म हटाऔगा,  तभी ये दोनों भी अपनी हटाएंगी, Maa ki Chudai Bete Se

मैं शर्ट के अंदर से पैर निकालते हुए आंटी को देखा, वह मुझे देख मुस्कुराती हुई बोली: आज लगता है ऐसे ही रहोगे तुम हाहाहा।

माँ शर्ट लेकर अलग रख दी और फिर मेरे लंड पर टॉवल रगड़ती हुई बोली: अभी के लिए ये टॉवल से धकलो बाद में दूसरी शर्ट पहन लेना खाने के बाद।

मैं कुछ बोलता इससे पहले ही आंटी बोली: दूसरी होगी तबना इसके कपडे इसके रूम में है और भारती लॉक करके गयी है।

माँ ने मुझे देखा और मैंने हामी में सर हिलाया तो माँ बोली: तब तो आज जब तक वह नहीं लौटेगी तुम ऐसे ही रहो.

मैं: हम्म्म वही करना पड़ेगा और वैसे भी अब मुझे कोई शर्म नहीं आ रही आप लोगो के सामने।

Bete ne maa ki chudai ki

इसके बाद वह वापस बैठी और हम सब खाना खाने लगे यकीन नहीं हो रहा था की मेरी  चाल सही हो गयी और अब मैं उन दोनों के सामने अपने लंड को टॉवल से ढक कर बैठा था

माँ खाना खाती हुई बोली: खाना खाकर वह शर्ट को मेरी बालकनी में डाल देना धुप है उधर सूखने पे पहन लेना।

मैं हाँ में सार हिलाया तो आंटी बोली: क्या ज़रूरत है हाहाहा वह तो ऐसे ही ज़्यादा खुश दिख रहा है

माँ हसने लगी और बोली: नहीं नहीं ठण्ड लग गयी तो

मैं: नहीं उतनी ठण्ड नहीं लग रही रूम हीटर का टेम्परेचर थोड़ा बढ़ा दूंगा बाद में आंटी माँ को देख हसने लगी और बोली: देखा वह भी चाहता है की वह ऐसे ही रहे.

माँ: हाहाहा सही में पर जो भी हो भारती के आने से पहले कुछ पहन लेना बस,

आंटी: हाँ सही में मैं नहीं चाहती उसके सामने तुम ऐसे रहो अगर वह न होती तो बात अलग थी।

माँ और आंटी पता नहीं क्यों अब इतनी खुलकर बात कर रही थी कही माँ मुझसे सच उगलवाने का कोई खेल तो नहीं खेल रही थी जिसमे मैं और आंटी फस जाए?

माँ: हाँ अगर वह नहीं होती तो मैं भी ऐसे गाउन में नहीं रहती, मेरी नज़र अचानक से माँ पर गयी साथ ही आंटी भी उन्हें देख बोली: तो क्या पहनती?

माँ मुझे देख मुस्कुराती हुई बोली: अरे मतलब कुछ और बढ़िया पहनती। Maa ki Chudai Bete Se

कविता आंटी: ओह जो कल तुमने मुझे दी वह?

मैं एक टक माँ और आंटी को देखने लगा की ये कल किश वक़्त की बात कर रही है।

माँ ने तुरंत मुझे देखा और बोली: हा वही…फिर वह आंटी को नज़र से कुछ इशारा की और बोली: हाँ वह वैसा ही पर तुमने पहना नहीं ना।

फिर माँ मुझे देख बोली: इसे कल रात सोने के लिए नाइटी दिखाई थी उसी की बात कर रही है

माँ ने आँखों से आंटी को ऐसा इशारा क्यों किया? कुछ तो था जो माँ और आंटी के बीच था जो वह मुझे नहीं बताना चाहती थी पर कल रात तो माँ मेरे साथ थी

कविता आंटी: हाँ हाँ पर नहीं, वह उतनी छोटी थी मैं नहीं पहनने वाली।

माँ: हाहाहा मैं तो पहन लेती हूँ कभी कभी जब घर में अकेली होतीहु।

कविता आंटी: हाँ वह तो मैंने देख ही ली कैसे उस वक़्त तू टॉवल पहन के आ गयी सबके सामने।

माँ: ओफ्फो कोन सबके सामने तू ही तो थी और तुम तो औरत ही हो और रही बात राहुल की उसके सामने क्या शर्माना मेरा बेटा है वह। Maa ki Chudai Bete Se

Maa ki chudai stories

माँ ओर आंटी की बाते सुन नीचे टॉवल के अंदर मेरे लंड में हरकत होने लगी।

कविता आंटी: हाँ हाँ तुम्हारा बस चले तो तुम बिना कपड़ो के भी घूमोगी इसके सामने।

माँ: नहीं नहीं उतनी भी नहीं हूँ मैं हाहाहा पर हाँ राहुल के सामने छोटी वाली नाइटी सब पहनती ही हूँ रुक आज शाम पहनके दिखाती हूँ।

कविता आंटी: जो चाहे कर तू तेरा ही घर है, टॉवल के अंदर मेरा लंड दुबारा जागने लगा और धीरे धीरे टॉवल के कपडे को उठाते हुए उभार बनाने लगा सही मौका था आंटी को भी कहने के लिए की वह भी शाम को माँ को टक्कर देती हुई कुछ मस्त सी नाइटी पहने।

पर माँ के सामने कहना भी नहीं चाहता था जैसा के मैंने कहा अगर कही ये माँ की कोई चाल हुई तो ये सोच मैं चुप रहा।

तभी माँ ने अपना खाना ख़त्म किया और बोली: चल मैं उठ रही हूँ तुम दोनों खाओ आराम से, माँ किचन चली गयी और फिर एक मिनट बाद किचन से अपने रूम गयी, मौका अब सही देख मैंने आंटी से कहा: आंटी वैसे माँ की नाइटी आप भी पहनना, आप कौन सा माँ से कम खूबसूरत लगोगी।

मेरी बात पर आंटी मुस्कुरायी और बोली: नहीं नहीं मैं वह सब पहनूंगी तो अच्छी नहीं लगूंगी

मैं: आपने पहना है क्या कभी?

कविता आंटी: ममम… नहीं पहनना भी नहीं मुझे। Maa ki Chudai Bete Se

मैं: तो जब तक आप पहनोगे नहीं तो आपको कैसे पता चलेगा की आप उसमे अछि लगोगी या नहींआंटी उठी और बोली।

आंटी: बस बस तुमने सुबह के तरह फिर से वकालत शुरू कर दी।, अब मैं तो चली, वह किचन को चली गयी मैं जैसे ही उठा टॉवल मेरे गोद से नीचे गिर गयाऔर सामने को मेरा लंड अपने आधे अकार में झूलने लगा।

मैं पहले माँ के कमरे की तरफ देखा तो उनके कमरे से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी तो वैसे ही लंड झूलता हुआ किचन को चला गया,आंटी अपनी प्लेट धो रही थी मैं पीछे से बोलै।

मैं: आंटी मेरी प्लेट भी धो धोना।

कविता आंटी: हाँ दोआंटी मेरे हाथ से प्लेट लेती हुई चुप छुपाती नज़र से मेरे लंड को देख बोली: लगता है तुम्हे ऐसे ही रहने में ज़्यादा मज़ा आ रहा है।

मैं वही खड़ा रहा इतने में वह प्लेट धोकर बोली: आओ हाथ धोलो, मैं सिंक के पास गया और हाथ धोने लगा वह मेरे बाए तरफ खड़ी थी अचानक से वह हाथ नीचे ले गयी और सीधे मेरे लंड को हाथो में लेकर बोली:

आंटी: दर्द तो नहीं है ना अब भी? उस एक पल में जब उन्होंने खुदसे मेरे लंड को अपने हाथो में लिया तो मानो मुझे एक झटके में जन्नत मिल गयी मेरा लंड हलके झटके दे गया Maa ki Chudai Bete Se

Maa ki chudai hindi story

वह मेरे लंड को धीरे धीरे अपनी उंगलियों के गोले में अंदर बहार सहलाती हुई बोली: सॉरी और थैंक यू की तुमने बताया नहीं सारिका को, मैं उन्हें देख अपने धुले हुए हाथ फिर से धोता रहा नहीं चाहता था की वह मेरे लंड को छोड़े वह भी वैसे ही हिलाती हुई बोली: अगर दर्द हो तो बताना अच्छे से सहला दूंगी।

मैं: दर्द तो है पर माँ देखली तो?तभी पीछे से आवाज़ आयी: क्या हो रहा है और तुम्हारी टॉवल किधर हैआंटी तुरंत हाथ हटा लिया, लेकिन माँ ने देख लिया, मैं मुड़ाऔर मेरे तने हुए लंड को देख माँ बोली: हम्म्म क्या कर रहे थे तुम लोग? फिर से इसका दर्द शुरू हो गया क्या?माँ मेरे पास आयी और मेरे लंड को आंटी के सामने हाथ में लेके बोली: एक दम से तुम बेशरम हो गए हो टॉवल क्यों नहीं लपेटे?

मैं: वह मैं जब उठा तो टॉवल नीचे गिर गया हाथ पे खाना लगा हुआ था तो उठाया नहीं, माँ मेरे लंड के चमड़े को पूरा ऊपर धकेलती हुई बोली: अच्छा दोनों हाथ में खाना लगा हुआ था क्या?

कविता आंटी: अरे हाँ तुमने मुझसे भी यही कहा मेरे ध्यान में नहींआई ये बात, तुम्हारा बाया हाथ तो साफ़ था ना?

माँ लंड के चमड़े को सामने को खींच बोली: कविता बात ये है की राहुल को नंगा रहना ज़्यादा पसंद है हाहाहा!

कविता आंटी: हाहाहा हाँ आखिर बेटा किसका है हाहाहा!

माँ मुस्कुराती हुई अपने दूसरे हाथ से आंटी की गांड पर हलके से मार बोली: हैट क्या मतलब मैं कब इसके तरह ऐसे रही।

कविता आंटी: हाहाहा! मज़ाक कर रही थी

माँ मेरे लंड से हाथ हटाकर मुझसे बोली: चलो जाओ अब हाथ साफ़ है ना जाकर टॉवल पहनो और अपनी शर्ट लेके बालकनी में डालो जाओ… दोनों खड़ी हसने लगी मैं टॉवल पहना और शर्ट लेकर बालकनी में गया।

 वहा धुप में अपने शर्ट् टांग कर कमरे में आया तो माँ और आंटी कमरे में आयी माँ अंगड़ाई लेती हुई बोली:

माँ: थोड़ी देर सो लेती हूँ। Maa ki Chudai Bete Se

कविता आंटी: हाँ मुझे भी थोड़ा आराम करना था।

मैं: हाँ आप लोगो को कितना अच्छा है पर मेरी नसीब में तो सोफा है।

कविता आंटी: अरे नहीं राहुल तुम बेड पर सो जाओ मैं बहार सोफे पे थोड़ी देर आराम कर लुंगी,

कल पूरी रात तुम सोफे पर ही सोये ना,

मैं मन ही मन खुश हुआ की सही है मुझे माँ के साथ अकेले होने का मौका मिलेगा, पर अचानक से माँ बोली: अरे नहीं बेड में काफी जगह है तीनो के लिए तू आराम से यही लेट जाओ।

मैं मन ही मन कोसने लगा की माँ कर क्या रही है इतना अच्छा मौका मिल रहा है माँ और मुझे एक साथ अकेले एक कमरे में और वह है की।

Bete maa ki chudai

कविता आंटी: ठीक है पर मुझे नहीं लेटना कोने में।

माँ अब मुझे देखने लगी और बोली: हम्म्म ठीक है तू बीच में लेट जा।

मैं  मुठी कसता हुआ हाथ से निकलते मौके को खोने के गुस्से के साथ बेड के एक कोने में टॉवल निकाल कर रजाई के अंदर घुस गया।

फिर आंटी बेड पर आयी और फिर माँ हम तीनो अब रजाई के अंदर थे माँ एक कोने में मैं एक कोने में और हमारे बीच कविता आंटी।

माँ: भारती कब आएगी बोली?

कविता आंटी: यही शाम को कुछ 4-5 बजे तक। Maa ki Chudai Bete Se

माँ: हम्म तब ठीक है आराम से 3-4 घंटे आराम कर सकते है तब तक, मन में गुस्सा लेकर मुँह फेर कर लेट गया पर आने वाले दो ढाई घंटे कितने मज़ेदार होने वाले थे

 ये मुझे पता नहीं था

Read More Sex Stories..

One Reply to “माँ व आंटी ने पिया लंड का माल 2 Maa ki Chudai Bete Se”

  1. Praveen Singh

    Praveen Singh
    Bihar se koi unstatisfied lady/women, Girl’s/ housewife, bhabhi/aunty, widowed/divorced ko fully satisfaction chahiye ya ” pregnant hona chahte hai” ya “Couple threesome sex krna ho” please contact me-6201488244
    About me-
    Sainik School Gopalganj boy
    Good Stamina boy
    Age 25
    Height-5’6
    Penis-: 7.5-8 inches
    From-katihar
    Good looking boy
    I am friendly boy (so read krke mt rho
    Please please please contact me-6201488244 call/what’sapp

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *