By | January 2, 2023

maa ki chudai ki kahani:- हैलो दोस्तो, मैं हर्ष एक बार फिर आया हु पिछली कहानी का भाग 2 लेकर अगर किसी ने भाग 1 नहीं पढ़ा तो पहले भाग 1 पढे तभी समझ आएगा भाग 2। ये भी पढे->मम्मी की ब्रा का हुक खोलने मे हेल्प करते हुये चुदा
मैं 21 साल का हूँ अब सीधा स्टोरी पे आता हूँ

मैं: आराम से खाओ इतनी भी क्या जल्दी है.मैं: तुम्हे पता है माँ.माँ हस्ते हुए
मैं: जल्दी से और एक रोटी दो.माँ ने रोटी परोस दी और मैंने आंखे बंद कर दी. मन में खुश था की खोलूंगा तो पुरे ओपन बूब्स देखने को मिलेंगे. कुछ 15-20 सेकण्ड्स के बाद मैंने आंखे खोल दी और देखा तो माँ के अभी भी 3 ही बटन्स खुले थे.
तो थोड़ा शॉक लगा मुझे. मुझे ऐसे दंग देख के माँ के फेस पे स्माइल थी

मैं: माँ ये तो चीटिंग है.माँ: बस तुम्हारी आखे खुलने का ही इंतजार कर रही थी.मैं: हाँ अभी आगे.माँ: कुछ तो काम हुआ है एक ऊँगली उनकी पेंटी की तरफ करते हुए. माँ ने उनकी पेंटी निकल दी थी. मैं तो दंग ही रह गया.

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एकदम शॉक होने लगा उनकी वाइट पेंटी देखकर. मेरे पुरे शरीर में खून गर्म हो गया था. अभी बस माँ को पकड़ के पेल दू. पर इसी में एन्जॉयमेंट थी सो मैंने वैसे ही कंटिन्यू किया.

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मैं: क्या प्रूफ माँ की ये पेंटी अभी अपने पहिनी हुई थी?माँ: इसके लिए तो तुम और 3.4 रोटी खाओगे तो तुम्हे पता चल जायेगा.
मैं: नहीं अभी के अभी मिलना चाहिए प्रूफ.

माँ पूरी अपने ही जाल में फास गयी थी. अभी माँ को मुझे अपनी चुत दिखानी ही पड़ेगी. मैं बहुत एक्ससिटेड था. शायद माँ को लगा होगा की अब मैं और रोटी नहीं खा पाउँगा. इतने में ही चल जायेगा और सही भी था मेरा पेट भर चूका था शायद माँ ऐसा न करती तो बस बूब्स ही देख के आज मैं बस कर देता. पर माँ को अब चुत दिखानी ही पड़ेगी. maa ki chudai ki kahani

माँ: अच्छा प्रूफ चाहिए?ऐसे बोल के माँ ने नॉटी सी स्माइल दे दी. मुझे आंख मारते हुए अपनी पेंटी मेरी तरफ फेंक दी.
मैं: माँ मेरे साथ ऐसे मत खेलो . ये थोड़ी प्रूफ है. मुझे दिखाओ निकल गयी ऐसे मोम: इसमें ही प्रूफ है तुम उठा लो तुम्हे समझ जायेगा.मैंने माँ की मत उठा ली मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

मैं: अब?माँ: अभी भी समझ नहीं आया? ठीक से चेक कर लो.मैं: इसमें क्या चेक करना?माँ: (हँसते हुए) लगता है कभी किसी की मत…इतना बोल के माँ फिर चुप हो गईमैं: बोलो न माँ.माँ: आगे वाली सिडितना बोल के माँ फिर चुप हो गयी. मुझे इतना तो समझ की माँ क्या कहना चाहती है.

तोह मैंने माँ की मत टेबल पे फैला दी आगे वाली साइड से और माँ की तरफ देखा तो माँ टेबल पे हाथ फेर रही थी.माँ का इशारा समझ गया मैं भी धीरे से पेंटी ऊपर से हाथ घूमना चालू कर दिया पहले तो नार्मल था. पर बिच में गीली और थोड़ी चिप छिपी सी थी.ओके ये तो माँ का पानी था.

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मेरी धड़कन एकदम से तेज हो गयी और लंड और भी टाइट हो गया साँस एक दम से तेज हो गयी थी. मेरे साथ क्या चल रहा है कुछ समझ नहीं आ रहा था.मैं तो माँ की पुसी देखने का प्लान बना रहा था. पर माँ जिस तरह से मुझे लेके जा रही थी बहुत ही मज़ा आ रहा था. माँ की चुत मेरे लंड के लिए रेडी थी. और हम अब इतना खेल चुके थे की चाहे तो माँ को मैं वही लिटा के चोद सकता था. माँ के साथ सुहागरात मानना चाहता था.

क्या करू समझ नहीं आ रहा था. वही माँ को चोद या जैसे माँ चला रही है वैसे गेम का मज़े लूँ मेरा ख़ुशी वाला फेस थोड़ा सा चेंज हो गया माँ ने नोटिस किया. maa ki chudai ki kahani

माँ: क्या हुआ. प्रूफ से खुश नहीं हो?मैं:. नहीं ऐसा कुछ नहीं जानवी (मैंने १स्ट टाइम माँ को नाम से बुलाया था)माँ थोड़ा शॉक होते हुए मेरी तरफ देखा और फिर निचे देखा. उसको समझ नहीं आ रहा था क्या रिप्लाई दे पर माँ ब्लश कर रही थी. मैं फुल माँ को चोदने के मूड में था.

इस लिए मैंने उसे जानवी बुलाया. मैं माँ की और जाने लगा.शायद माँ मेरा मेरा इंटेंशन समझ गयी होगी. और माँ ब्लाउज का बटन क्लोज करने ही वाली थी की मैं वापस घूम के बैठ गया. पर फिर भी माँ ने वह बटन लगा ही लिया था.

और वह भी थोड़ी निकल जानेके मूड में दिख रही थी.माँ: मैं किचन से आयी.और माँ वैसे ही ककुले बूब्स लेकर किचन में चली गयी. मैं माँ को पीछे की और से देख रहा था. पर माँ ने मूड के नहीं देखा सीधा किचन में चली गयी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैंने जल्दबाजी कर दी थी.

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माँ को उसी की टाइप से लेना चाहिए था. पता नहीं अब ऐसा मौका कब मिलेगा. और कभी मिले ही नहीं. मैं अपने आप पे ही बहुत नाराज़ था. पता नहीं अब आगे कैसे रियेक्ट करेगी माँ.

अब तक 5 मिनट्स हुए थे पर माँ बहार नहीं आयी. मैं अब माँ को आवाज लगा के बहार नहीं बुलाना चाहता था. उनको जितना टाइम चाहिए लेने दो बहार आएगी कभी तो. और तभी माँ बहार आयी.पर मेरी तरफ देखा भी नहीं बेड रूम में चली गयी. और बिग बाद न्यूज़ फॉर में माँ ने ब्लाउज क्लोज कर दिया था.

तब माँ बैडरूम से निकल कर किचन में चली गयी.मैं ठीक से देख नहीं पाया पर माँ के हाथ में कुछ तो था. करीब 15 मिनट्स बाद माँ किचन से बहार आ गयी और मेरे आगे आके बैठ गयी. माँ ने ब्लाउज के सारे बटन बंद कर दिए थे. और तभी टेबल पे से पेंटी उठायी और अपने पास रख दी. मैंने नोटिस किया माँ ने ब्रा भी पहन ली थी.कन्फर्म हो गया था की मैंने मौका गवा दिया था.

मेरा खान तभी से वैसा का वैसा ही था और अब तो मूड भी नहीं था खाने का. तो मैं टेबल से उठा और पानी लेकर पिने लगा.माँ: तुम्हारे लिए किचन में गिलास में पानी रखा है.कुछ तो है तभी माँ मुझे किचन में पानी पिने को जाने के लिए बोल रही है.
अभी मुझे माँ से कोई आर्गुमेंट नहीं करनी थी तो मैं किचन की तरफ पानी पिने के लिए गया. मैं किचन में गया तो किचन टेबल पे एक स्टील गिलास में पानी रखा था। maa ki chudai ki kahani

मैने गिलास उठाया तो निचे एक फोल्ड कर के चिट्टी रखी हुई थी. और टॉप पे लिखा था पानी पिलो पहले. मैंने एक झटके में पानी पि लिया और चिट्टी खोल दी.उसमें लिखा था “हर्ष हम दोनों में अब जो हो रहा है वह गलत है. पर मैं भी तुम्हारी ओर हूँ. पर तुम्हे वेट करना पड़ेगा. अभी तक मैं रेडी नहीं हूँ और तुम जल्दबाजी मत करना. तुम जो चाहते हो वह जल्द ही होगा पर तुम्हे थोड़ा सब्र करना पडेका थोड़ा कण्ट्रोल करो.पता नहीं कब मैं कम्फर्टेबले हूँगी या कभी नहीं. मुझे किश या टच करने को भी मत आओ जब तक मैं कम्फर्टेबले न हूँ.

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यदि तुम मान रहे हो ये बात तो गिलास तो फ्लोर जिसकी आवाज टेबल तक आनी चाहिए. और उसकी ठीक 8 मिनट्स बाद ही टेबल पे आना. और एक बात याद रखना मुजसे थोड़ा दूर ही रहना.”वह चिट्टी पढ़ के मैं बहुत खुश हुआ. माँ ने मुझे और एक मौका दिया था. अब मैं ये गवाना नहीं चाहता था किसी भी हालत में. मैंने जोर से गिलास फ्लोर पे पटक दिया बहुत जोर से आवाज हुई. तभी बहार से माँ की आवाज आ गई

मैं: लगता है बहुत ज्यादा ही एग्री हो गया कोई तो.
मैं: बात ही ऐसी थी.अब मैं बस 10 मिनट्स होने का वेट कर रहा था. अब एक एक मिनट बहुत बड़ा लग रहा था. माँ की फिर आवाज आ गयी.

माँ: अब तुम चाहे तो आ सकते हो.इतना सुनते ही मैं भागते हुए बहार गया और मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. माँ अपने ब्लाउज के 3 बटन खोल के बैठी थी. उसकी पेंटी पहले जैसे थी वैसी ही टेबल पे पड़ी थी. मैं टेबल पे जाके बैठा कुछ हुआ ही नहीं ऐसे बेहवे करते हुए माँ ने मेरे खाने की प्लेट से ढकी हुई प्लेट निकाल दी और खाने की ऑफर की.

मैं भी कुछ हुआ नहीं ऐसे ही वह भूल जाना चाहता था. फाइनली सब पहले जैसे था. माँ को मुझे वह दूसरी पेंटी के बारे में पूछना था.मैं: वह सेकंड पेंटी…?माँ: (हँसते हुए) वह मैंने पहन ली थी अंदर.मैंने दोनों पेंटी अपने हाथ में उठा ली. एक नार्मल ही और वह पहले वाली अभी तक थोड़ी गीली और चिप छिपी लग रही थी. मैंने वह गीली वाली पेंटी का स्मेल लिया. माँ के आँखों में देखा एक सेकंड के लिए तो लगा उनकी चुत का ही स्मेल ले रहा हूँ

मेरा ऐसे एक्शन देख के माँ शर्मा गयी.फिर इसके आगे जाके मैंने अपनी जीभ बहार निकली और गिला पार्ट लीक करने लगा. फिर मैंने अपनी आंखे बंद कर दी और पूरी ध्यान से लीक करने लगा. करीब 5 मिनट्स लीक करने के बाद आंखे खोल के माँ को देखा. maa ki chudai ki kahani

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माँ खुश लग रही थी पहले जैसी और उसकी आँखों में चमक थी. फिर जीभ घूमते हुए तभी उसने आंख मार दी. हाय मेरी नॉटी मॉपनटय पूरी गीली हो चुकी थी तो मैंने टेबल पे रख दी और फिर से खाना खाने चालू कर दिया.
अब पेट भर चूका था इससे आगे अब नहीं खा सकता था.

मैं: माँ बस अब नहीं खा सकता.माँ: नहीं एक रोटी तो खाना ही पड़ेगा तुम्हे.ऐसा बोल के एक रोटी प्लेट में रख दी मैंने: अच्छा अब आगे का कुछ काम होना चाहिए.

माँ: (हस्ती हुए) हाँ.तभी माँ उठी और साइड में आ गयी. शायद माँ १स्ट टाइम मेरे सामने माँ के बूब्स पुरे ओपन होंगे. बेस्ट व्यू के लिए माँ साइड में आ गयी होगी शायद. पर कुछ भी हो जाये एंजोयिंग.

माँ ने अपनी चेस्ट हिलायी क्या मस्त हिल रहे थे उसकी बूब्स. बस नाम के लिए बटन क्लोज था. सब दिख रहा था. मैं खुश था. अब माँ पूरा ब्लाउज के बटन ओपन करेगी और उसकी बाद बूब्स हिलेगी तो क्या नजारा होगा.पर माँ के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. उसने बूब्स हिला के अपनी साडी निचे करने लगी. माँ ने और निचे किया और माँ के प्यूबिक हेयर्स दिखने लगे और वह रुक गयी.

मैंने टॉन्ट मरते हुए बोला “बस इतना ही?”माँ ने अपनी साडी को और निचे किये. निचे करते करते साडी उनकी अब चुत की ऊपर स्टार्ट दिखने लगा.

वाहा क्या मस्त चुत थी. स्माल हेयर्स थे. बस 5 सेकंड के लिए देख लिया था पर देख लिया माँ की एंट्रेंस को.उसके बाद माँ ने अपना पेटीकोट की डोरी की गत छोड़ दी और झुक गयी. पेटीकोट निचे से निकल ने के लिए तो माँ के बूब्स ब्लाउज से बहार निकल गए.मैं: इतना खाना खाया कुछ बोनस तो दे दो.मैं चाहता था की माँ ब्लाउज का लास्ट वाला बटन भी खोल दे. माँ ने बोनस सुना और बिना पेटीकोट उठाये वैसे ही खड़ी हो गयी. maa ki chudai ki kahani

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अब मैं माँ की अगली मूव का वेट कर रहा तमाम ने अपनी साडी पूरी ढीली कर दी थी. उसने ने हाथ छोड़ दिए तो साडी आराम से गिर जाएगी पेटीकोट के साथ. पर माँ साडी ऊपर कर रही थी निचे पेटीकोट पड़ा हुआ था. माँ पेटीकोट से बहार आ गयी और अपनी साडी घुटनो तक उठा ली और मेरी तरफ देखा मोम की सांसे फूल गयी थी.

बूब्स ब्लाउज से बहार निकल गए थे और माँ अब काप रही थी. माँ ने साडी थोड़ी और उठायी अब माँ की थिगह मुझे दिख रही थी. गोरी गोरी तांगे उसपे एक भी बल नहीं था. मन कर रहा था पकड़ के चुम लू. पर कण्ट्रोल करने में ही भलाई थी माँ ने साडी अब सिर्फ एक हाथ में पकड़ ली और ब्लाउज के बटन पे एक हाथ रख दिया. मेरी थोड़ा नजदीक आके बोली.

माँ: ये तुम्हारा बोनस.ऐसे बोलते ही माँ ने -ा टाइम ब्लाउज का बटन खोल दिया और साडी हाथ से छोड़ दी और आईज क्लोज कर दी.
ऐसा बोनस काश ही किसी को मिला होगा. अब माँ मेरे सामने खड़ी थी मैं आंखे फाड् फाड् के देख रहा था.तभी दूर बेल्ल बज गयी. फ़क इससे रॉंग टाइमिंग हो नहीं सकता किसी का घर आने का. बेल्ल सुनते ही माँ ने कपडे हाथ में उठाये और बैडरूम की तरफ भाग गयी बिना कपड़ो के.मैं पीछे से माँ की ब्यूटी को देख रहा था. maa ki chudai ki kahani

बड़ी गांड भागने के कारण मटक रही थी. बेड रूम के गेट पे जाके माँ ने मूड के देखा और आंख मर के फ्लाइंग किश दे दी. और बैडरूम के अंदर चली गई अभी गेट पे कोन था आगे क्या हुआ इन थे भाग मे .

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