By | February 19, 2023

Maa Ki Chudai ki Raat Me : हैलो दोस्तो,  कैसे हो आप सब, मुझे उम्मीद है आप सब ठीक होगे, आज फिर मैं आपका दोस्त राहुल आपके साथ एक नयी कहानी के साथ, तो जायदा समय न लेते हुये अब मैं सीधा कहानी पे आता हु।

माँ और आंटी के बहार जाने के बाद भारती के साथ व्हाथ्सप्प पे बात हुई फिर अपनी फूटी किस्मत के साथ बैठा टीवी देखने लगा।

Maa Ki Chudai ki Raat Me

यूं ही शाम बीती और मैं खाना खाके सोने के लिए जा ही रहा था जब माँ और आंटी वापस आयी पर उन्होंने कुछ कहा सुना नहीं मुझसे बस माँ के रूम को जाने लगे।

तभी माँ ने पलट कर मुझसे पूछा: तुम दोनों ने खाना खाया?

मैं: हाँ मैंने खा लिया।

माँ: तो फिर सोये क्यों नहीं?

मैं: अभी सोने जा ही रहा था।

माँ: हम्म ठीक है, इसके आगे माँ कुछ बोली नहीं और आंटी के साथ अपने रूम चली गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया, सोचने लगा की आज का दिन बेकार ही गया न हाथ में भारती आयी ना ही माँ की चूत चोदने का मौका मिला।

एक तो नकचरी पढ़ाकू भारती जो कोई मौका ही नहीं दे रही और एक वह उसकी माँ कविता आंटी जिसके कारन माँ के साथ अकेले होने का वक़्त भी नहीं मिल रहा इन विचारो में लिविंग रूम के सोफे पे पड़ा हुआ था बिना नींद पाए, करीब 2 घंटे बाद रात के 11.3011.30 बजे मेरे फ़ोन पे मैसेज आया पहले सोचा की कही भारती का कोई मन तो नहीं बन गया।

मुझे अपने रूम बुलाने का  पर फ़ोन लेकर देखा तो मैसेज माँ ने भेजा था । Maa Ki Chudai ki Raat Me

Bete ne ki maa ki chudai

माँ: सो गए क्या?

मैं तुरंत रिप्लाई भेजा: नहीं उठा हुआ हूँ

माँ: भारती के कमरे की लाइट ऑफ है?

मैं पलट कर लिविंग से मेरे रूम के दरवाज़े के नीचे देखा तो अँधेरा था तो माँ को रिप्लाई किया: हाँ वह सो गयी शायद।

माँ: ओके वेट आती हूँ, मेरे मन में लड्डू फूटने लगे की आखिर आज रात सोने से पहले कुछ मस्ती कर पाउँगा।

मैं माँ के कमरे के तरफ देख लेटा रहा तभी नाईट लैंप की धीमी रौशनी में दिखा की माँ के कमरे से एक काला साया बहार आ रहा है, फिर वह अपने हाथ में पकड़े मोबाइल में टोर्च जलाए और मेरी तरफ आने लगी मेरे सोफे के पास आकर मेरे होंठ पर ऊँगली रख बोली: शहहह! ज़्यादा ज़ोर से बात मत करना।

मैं धीमी आवाज़ में बोल: आंटी सो गयी क्या?

माँ भी धीमी आवाज़ में बोली: हाँ अब जाकर सोई वह।

माँ मेरे पेट के पास सोफे पर बैठ गयी और बोली: आज सब अँधेरे में ही करना होगा।

मैं: ओके, हम दोनों काफी धीमी आवाज़ में बात कर रहे थे मानो दो चोर हो ऐसे बात करने का भी मज़ा कुछ और ही था।

माँ अपने एक हाथ मेरे शार्ट के ऊपर से लंड पर रखा और बोली: तुमने मुझे मिस किया क्या बीटा?

मैं: हा बहुत क्या मा, माँ धीरे से मेरे लंड को दबाती हुई बोली: 

माँ:  सामने टेबल पर रखा मेरा फ़ोन विबरते हुआ पर इससे पहले की मैं उसे देखूं माँ ने फ़ोन लिया और पावर बटन दबाते हुये उसे एक ही बार में ऑफ कर के बोली: अब कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।

मैं: कविता आंटी नहीं उठेगीना? Maa Ki Chudai ki Raat Me

माँ: बहार आने से पहले मैंने उसकी फ़ोन ऑफ कर दिया  और मेरी साइलेंट पर वह नहीं उठेगी डॉन’टी वोर्री, इतना कहती हुई माँ उठी और अपने कमर से  कुछ खोलने लगी तब ठीक से देखा की माँ लम्बी साटन की रोबे पहनी हुई थी 

जब माँ ने रोबे को खोलकर चोरी तो उनकी रोबे एक ही बार में उनके कंधे से फिसल कर नीचे फ्लोर पर गिर गयी।

नाईट लैंप की हलकी लाल रौशनी में उनके बदन का पूरा अकार मिल गया वह बिलकुल नंगी खड़ी थी मेरे सामने क्या खूबसूरत नज़ारा था फिर माँ थोड़ी झुकी और मेरी शर्ट की बटन खोलने लगी उनसे अँधेरे में वह खोले नहीं जा रहा थे तो वह मेरे मुँह के पास आकर बोली: जब मैं बोली की आ रही हूँ तो ये सब खोल नहीं सकते थे।

मैं: आप भी मेरे तरह तड़प रही थी क्या? बटन के खुलते ही माँ ने झट से मेरा शार्ट नीचे खींच दिया और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बोली: और नहीं तो क्या कब से तुम्हारे साथ मस्ती करना चाह रही थी पर तुम्हारी आंटी चिपकी हुई थी और पता नहीं अचानक से भारती भी क्यों आ गयी वरना आराम से तुम्हारे रूम में करते सब कुछ।

Maa ko bete ne choda

मैं सोचने लगा की माँ को पता नहीं भारती के यहाँ आने के पीछे मेरा हाथ है चुप रहा बिना कुछ बोले माँ मेरे लंड को सहलाती हुई मेरे होठो से होंठ मिलाकर मुझे चूमने लगी वह अब भी झुक कर खड़ी थी तो उनके बूब्स नीचे को लटक रहे थे।

मैं अपना एक हाथ ऊपर लाया और उनके एक बूब को दबाते हुए किश का मज़ा लेने लगा माँ के हाथ मेरे लंड को ऊपर नीचे रगड़ती सहलाती हुई मुझे तैयार करने लगी और लंड से आते मज़े में मेरे हाथ उनके दोनों बूब्स को बारी बारी दबाके खेलने लगे।

माँ मुझे अपने प्रेमी के तरह होंठ से होंठ और जीभ से जीभ मिलाकर किश कर रही थी और फिर मेरी उंगलियों ने उनके निप्पल को बारी बारी निचोड़ना शुरू कर दिया इस पर माँ किश तोड़कर बोली: बदमाश! मैं क्या गाय हूँ जो ऐसे निप्पल निचोड़ और खींच कर दूध निकाल रहे हो?

मैं: हाँ और मैं आपका नन्हा बेबी काऊ।

माँ: तो दूध पीना है क्या?

मैं: हाँ माँ उठी और मेरे शर्ट को अपने दोनों हाथ से बिना कोई आवाज़ किये धीरे से खींचने लगी तो मैं भी सोफे पे लेटा हुआ अपनी कमर उठाकर उनकी मदत करते हुए अपनी शर्ट अपनी टाँगो से निकलवा दिया।

फिर माँ बोली: चलो अपनी टी-शर्ट निकालो।

मैं कमर के बल उठा और अपना टी-शर्ट खोल फेका माँ मेरे छाती को धकेल कर मुझे वापस सोफे पर लेटाया और फिर मेरे ऊपर अपनी नंगे बदन को सटाकर लेट गयी।

हम दोनों एक दूसरे के नंगे बदन का मज़ा लेने लगे कितना मुलायम है उनका जिस्म वह भी अपनी जांघो के बीच मेरी एक टांग की जांघ को रगड़ती हुई मज़ा लेने लगी और बोली: ममममम! Maa Ki Chudai ki Raat Me

माँ: कितना मन  कर रहा था पूरा दिन ऐसे होने के लिए।

मैं: मैं भी माँ आपको याद कर रहा था ।

माँ फिर से मेरे होठों को किश करने लगी हम ऐसे एक दूसरे को अपनी बांहो में भर कर किश करने लगे फिर माँ थोड़ी ऊपर आकर अपने बूब्स मेरे मुँह के पास रख बोली: लो माय बेबी काऊ पियो दूध, मैं उनके निप्पल मुँह में भर कर चूसने और हलके हलके काटने लगा वह अपने जांघ से मेरे जांघो के बीच मेरे लंड को सहला रही थी,  जिससे मैं जान गया की उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है मैं पूरे चाव से उनके निप्पल को एक एक कर चूसने और काटने लगा।

मेरा लंड अब पूरा तन चुक्का था और वह उन्हें भी पता चल गया था तो माँ एक हाथ नीचे ले गयी और मेरे लंड को ज़ोर से खींचने और दबाने लगी उनके मुँह से काफी हलकी आहे निकल रही थी काश हम कल रात की तरह अकेले होते तो खुले आम सेक्स का मज़ा ज़ोर शोर से करते।

मेरे लंड से उत्तेजना के मारे हलकी नमी निकलने लगी और माँ की उंगलिया उस नमी को समेत कर मेरे लंड को अच्छे से सनसनाती हुई सहलाने लगी थोड़ी देर बाद माँ उठी और फिर धीरे धीरे अँधेरे में मेरी आँखों में देखती हुई नीचे गयी,

इस तरह धीमी लाल रौशनी में ये नज़ारा दिन के उजाले से भी काफी सेक्सी लग रही थी माँ अब मेरे जांघो के एक तरफ घुटना रख और क्यों की सोफे में ज़्यादा जगह नहीं था तो दूसरी पेअर नीचे फ्लोर पर टिका कर ठीक मेरे लंड के पास मुँह लेकर बैठी थी।

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मुझे देखती हुई वह मेरे लंड को सीधा खड़ा कर अपने मुँह में ले लिया, वाहा  कितना मज़ा आया देखने और उनके मुँह को अपने लंड से महसूस करने में वह मेरे लंड के सर पर जीभ से गोल बनती हुई मुझे देखने लगी लाल रंग की रौशनी में उनकी आँखों में वासना की चमक दिख रही थी

उनकी आँखों में मुझे माँ की ममता नहीं एक प्यासी औरत की वासना की चमक दिख रही थी मेरे लंड को अपने मुँह में धीरे से समाती हुई पूरा निगलने लगी धीरे धीरे बिना ज़्यादा आवाज़ किये वह मेरे लंड को अपने मुँह में अंदर बहार घुसाती ओर निकालती हुई खेलने लगी।

मेरे हाथ उनके बालो को सहला रहे थे और मेरी आँखे मज़े में बंद होती जा रही थी माँ अपने मुँह से मेरा लंड निकाल धीमे बोली: मज़ा आ रहा है बेबी काऊ को?

मैं आँख खोल उन्हें देख बोला: हाँ बहुत वह वापस मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और फिर अपने मुँह को लंड से धीरे धीरे चोदने लगी।

इतना मज़ा शायद ही कोई और लड़की मुझे दे सकती है फिर माँ ने मुँह से लंड को बहार निकाला और एक हाथ से पकड़ लंड को पेट  के तरफ झुकाई मेरे अंडो पर बड़े से थूक का गोला थूक डाली और वापस लंड चूसने लगी इसके बाद वह अपना एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे अंडो को अपनी थूक के साथ मालिश करती हुई। Maa Ki Chudai ki Raat Me

मेरे लंड को खाने लगी इतना मज़ा तो मुझे आज तक किसी भी चीज़ करने में नहीं मिला।

माँ उन सभी पोर्नस्टार जिनका पोर्न मैंने देखा है उनसे भी बढ़िया मेरे लंड को खा रही थी ऐसे ही मुझे मदमस्त और पागल करती हुई वह 1010 मिनट मुझे कहती रही और फिर वह उठी अपना मुँह पूछा लाल धीमी रौशनी में उनके मुँह पर लगा थूक और होठो से टपकती लार चमक रही थी।

फिर वह मेरे पास वापस आयी उनके पास आते ही मुझे उनके गीले मुँह से उनकी थूक और मेरे लंड के रस का मिला झूला महक आने लगा वह मुझे देख मुस्कुरायी उनके बाल बिगड़े हुए थे और मुँह थूक से चमक रहा था ।

मैं उनके होठो को किश करते हुए उनकी मुँह पे लगा सारा रास को चाट खाने लगा इसके बाद वह अलग हुई और बोली: बेबी को बहुत मज़ा आया न?

मैं: हाँ 

माँ: तो अब मम्मी को भी मज़ा दो, उनकी बात में समझ गया और झट से सोफे से उठ खड़ा हुआ वह मेरी जगह पर लेटी और एक टांग सोफे के बैक रेस्ट के ऊपर और एक टांग सोफे के दूसरी तरफ नीचे लटकाये लेट गयी।

इससे उनकी जांगे पूरी फैली हुई थी और मुझे मनो उनकी चूत कह रही थी की आओ मुझे काट खाओ।

मैं उनकी जांघो के बीच सेट होकर बैठा और अपने मुँह को उनकी चूत के पास लेजा कर उनकी आँखों में देखने लगा वह भी मुझे देख रही थी और उनकी आँखों में भूख चमक रही थी।

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मैं थोड़ा नीचे हुआ और पहले उनकी चूत को सूंघने लगा, चूत से आती वह हलकी मस्त खुशबू का मज़ा लेने के बाद उनकी चूत के होठो को चाटने लगा, माँ की आँखे मज़े से बंद हो गयी और उन्हें देख मैं और अच्छे से अपनी जीभ की लम्बी लम्बी चाट मारता हुआ चाटने लगा।

माँ के हाथ उनके बूब्स को दबा कर खुद का मज़ा दे रही थी

मेरी भी उत्सुकता उनकी चूत को चाटने में बढ़ गयी अपनी दो ऊँगली से उनकी चूत के होठो  को फैलाया और जीभ को उनकी चूत के अंदर से ले जाता हुआ उनकी चूत के दाने को टटोलने लगा । Maa Ki Chudai ki Raat Me

माँ कमर उठा उठा कर मेरे मुँह में अपनी चूत दे रही थी मानो बिना बोले कहना चाहती हो की और करू उनका एक हाथ सोफे पर कस कर पकड़ी हुई थी तो दूसरे से वह अपने निप्पल को खींच रही थी।

मैं अपने होठो मैं उनकी चूत के दाने को दबाकर चूसने लगा जीभ चूत में घुसते हुए चटकारे मारने लगा, थोड़ी देर बाद दो उंगलियों को उनकी गीली लसलसी हो चुकी चूत में घुसाकर अंदर बहार करने लगा।

माँ का हाथ सोफे को छोड़ मेरे बालो को अब जकड़ती हुई मुझे अपनी चूत में धकेलने लगी।

मैं थोड़ी और गहराई तक उंगलियों को चूत में घुसाने लगा कुछ 2 मिनट ऐसे ही करने पर उनकी पकड़ मेरे बाल पर इतनी कड़क हो गयी की मुझे दर्द हुआ पर मैं कुछ नहीं बोला और करता रहा जो कर रहा था।

और फिर 2 मिनट बाद वह अपना दूसरी हाथ को मुँह में दाबाती हुई कमर को ऊपर झटके मारने लगी उनकी चूत से गरम रस मेरे मुँह और हाथ में छूटने लगा।

वह कुछ 30 से 50 सेकंड ऐसे ही झटके मारती हुई रस निकालती रही और फिर शांत हो गयी।

 मैं उनके जांघो के बीच अपना लंड हिलाते हुए बैठा और इंतज़ार किया की वह कब होश में आये, 5 मिनट बाद वह आँख खोल कर मुझे देख मुस्कुरायी और फिर कमर के बल उठ कर मेरे पास आयी मेरे सर को पीछे से पकड़ अपनी तरफ खींच मुझे चूमने लगी।

मेरे मुँह पर लगी उनके रस को चाटने लगी, फिर अपने हाथ में मेरे लंड को लेकर धीमी आवाज़ में बोली: अब बाकी का रस इससे निकालो निकलो मेरी जान।

मैं: हाँ बिलकुल बहुत वेट किया आज माँ फिर अपने घुटनो के बल सोफे पर उठी और वैसे ही मेरे तरफ पीठ  दिखाती  हुई मूड गयी फिर पलट कर मुझे देख मुस्कुराती हुई मेरे मुँह पर एक हाथ से हलके थपड मारा,सामने को झुकती हुई मेरे तरफ गांड दिखाकर सोफे पर कुतिया बन गयी।

मैं भी उठ खड़ा हुआ और एक पैर फ्लोर पर टिकाया और दूसरे का घुटना सोफे पर उनके ठीक पीछे चूत के पास लंड लेकर खड़ा हो गया। Maa Ki Chudai ki Raat Me

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वह पलट कर मुझे देख और फिर अपनी जांघो को थोड़ा फैलाया फिर अपने एक हाथ पर थूका और मेरे लंड पर अच्छे से लगाती हुई पकड़ कर अपने चूत के पास ले गयी।

माँ समझदार थी अगर वह अपने हाथ से ये ना करती तो शायद अँधेरे में मेरे से उनकी चूत की छेद सही सही खोजने में थोड़ा टाइम लगता।

 वह मेरे लंड के सर को अपनी चूत के मुँह पर सही सा लगाकर मेरे कमर को पकड़ा फिर आगे बढ़ने का इशारा किया, धीरे से मैंने अपना तना हुआ सख्त लोहा उनकी चूत में उतार दिया माँ के मुँह से एक हलकी सिसकारी निकली जो काफी धीमी थी।

वह वापस पलटी और मुझे ऊँगली के इशारे से अपने पास बुलाई मैं सोचा क्या हुआ मैं लंड बहार निकला और उनके पास गया, वह धीमी आवाज़ में बोली: वह कुशिओं दो मुझे, 

मैं सोफे से उतरा और कुशिओं उठाकर उन्हें दिया और उनके पास जाकर पुछा: ये क्यों?

माँ: समझ जाओगे अब जाओ पीछे और फिर से घुसाओ फिरसे मैं माँ के पीछे पहले के तरह सेट हुआ वह अपने हाथ से पकड़ मेरे लंड का सर अपनी चूत के मुँह पर लगा दिया।

मैं उनकी कमर को पकड़ धीरे से अपना लंड उनके अंदर उतार दिया मैं धीरे धीरे उनकी चूत को चोदने लगा, कुछ 2 मिनट बाद वह मेरे कमर को पकड़ आगे पीछे अपनी हाथो से  चोदने लगी और फिर मेरी रफ़्तार उनके इशारे के साथ बढ़ती गयी।

ऐसे ही उन्हें धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ाते हुए चोदता रहा और फिर मुझे पता चला की वह कुशिओं क्यों मांगी।

वह कुशिओं को अपने मुँह में दाबाती हुई चबाकर अपनी आहे शांत कर रही थी शायद कुशिओं न होता तो उनकी सिसकारियां काफी तेज़ निकल आती माँ बड़ी ही माहिर खिलाडी निकली।

मैं इस जोश में उनकी चूत को और ज़ोर से मारने लगा, वह मज़े में चूर होती कुशिओं में मुँह दबायी मदहोश होती गयी तभी वह अपना एक हाथ फिर से पीछे लायी पर इस बार वह मुझे नहीं हाथ लगाया । Maa Ki Chudai ki Raat Me

वह अपनी एक ऊँगली से अपनी गांड की छेद में पहले रगड़ी फिर खुजलाई और फिर धीरे से अंदर डालती हुई चुदाई का मज़ा लेने लगी

माँ को ऐसे करते देख मैं और उत्तेजित हो उठा और उनकी कमर को कस कर पकड़ उनकी चूत को चोदने लगा करीब अगले 22 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद वह मुझे अपने हाथ से धक्के मार कर हटाया।

मैं अपना लंड बहार निकाला तो वह मूड कर मुझे अपने पास बुलाया उनके पास गया तो वह बोली: मेरी गांड भी चाटो न ।

मैं उनके पीछे गया और उनकी गांड को अपने दोनों हाथो से फैलाया फिर मुँह लेजा कर पहले सुंघा की छेद है किधर गांड की धीमी खुशबू से गांड की छेद को खोजै और फिर जीभ से चाटने लगा, जीभ को कभी गोल गोल घुमाया तो कभी जीभ की नोक से गांड के छेद को चोदा, कुछ 5 मिनट के बाद मैं फिर से उनकी चूत में अपना लंड डालकर चोदने लगा।

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साथ ही अपने एक हाथ के अंघूठे से गांड की छेद में धकेलने लगा माँ को काफी मज़ा मिल रही थी।

ऐसे करने पर वह कुशिओं को काट कर अपनी सिसकारियां दबा रही थी वरना  अब तक कविता आंटी और भारती को अपनी आहों  से जगा चुकी होती।

कुछ 5 से 1010 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद मैंने अपना लंड निकला और माँ को बिना बताये उनकी गांड की छेद पर रख धकेलने लगा, गांड काफी टाइट थी और शायद माँ को दर्द हुआ तो वह हाथ पीछे लेकर मुझे धकेलने लगी।

 मैं ज़ोर नहीं देना चाहता था अगर माँ को वह पसंद नहीं तो नहीं करूँगा ऐसा सोचा मैं रुक गया तो माँ पलट कर मुझे देखा और फ्लोर पे पड़ी उनकी रोबे के तरफ ऊँगली से इशारा करने लगी। Maa Ki Chudai ki Raat Me

मैं सोफे से उतर कर उनकी रोबे उठाकर उन्हें दी वह उस रोबे की पॉकेट में से शैम्पू या हेयर जेल की तरह एक तुबे निकली उसका ढकन खोलकर अपने हाथ पीछे को लायी और फिर अपनी गांड की छेद पर एक लम्बी पिचकारी मारी इसके बाद वह अपनी ऊँगली से उस क्रीम को अपनी गांड की छेद पर मलने लगी

और मुझसे बोली: उस जेल को अच्छे से मेरी गांड की छेद पर लगाओ  फिर घुसाओ अपना लंड दर्द नहीं होगा मुझे।

मैं ख़ुशी से पागल हो गया शायद माँ के पास अनल सेक्स जेल थी जो मैं अक्सर पोर्न मूवी में देखता था माँ के पास आया कहा से ये अपने आपको समझाया की ये बाद में सोचना अभी काम पे लगो ।

मैं उनके पीछे गया और उनकी गांड की छेद को अच्छे से जेल से मस्सगे किया और धीरे धीरे एक ऊँगली भी डाला थोड़ी देर बाद माँ को शायद लगने लगा वह पलट कर धीमे आवाज़ में बोली: चलो हो गया अब अपना लंड डालो।

बेबी मैं झट से उठा अपना लंड का सर उनकी गांड की छेद पर लगाया पर मेरी उत्तेजना देख माँ पलट कर धीमी से बोली: शठ श! धीरे धीरे डालना। Maa Ki Chudai ki Raat Me

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मैं उनकी कमर को एक हाथ से पकड़ा और दूसरे से मेरे लंड को फिर धीरे से अपना लंड उनकी गांड में धकेलने लगा, यकीन नहीं हो रहा था की मैं अपनी माँ की गांड में अपना लंड घुसा रहा था उस उत्तेजना में मेरा लंड काफी सख्त हो चूका था और उनकी गांड काफी टाइट भी थी।

 मैं अपने लंड को पूरा अंदर घुसाया और धीरे से बहार जो भी तेल  था वह मस्त था उनकी गांड में लंड काफी आराम से गया और निकला।

वह कुशिओं का काटती हुई पड़ी रही और मैं धीरे धीरे उनकी गांड को चोदने लगा ऐसे ही करीब 55 मिनट के बाद माँ बिना मुझे देखे हाथ से जल्दी करने का इशारा की फिर क्या था

 उनकी कमर को दोनों हाथो से पकड़ा और दे धना धन उनकी गांड में अपना लंड उतरने लगा।

माँ अपने एक हाथ से अपनी चूत में ऊँगली करने लगी मेरा लंड उनकी गांड को और उनकी उंगलिया उनकी चूत को एक साथ चोद रही थी।

 अब जाकर मैं इतना खुश था की दिन भर की सारी निराशा दूर हो गयी थी और खुशी का सारा प्रहार माँ की गांड में उतार रहा था।

माँ के मुँह से दबी आवाज़ निकल रही थी कुशिओं न होता तो वह अपनी आहे चीख उठती करीब अगले 5 मिनट मैं ऐसे ही बिना रुके पूरे जोश के साथ उनकी गांड चोदता रहा। Maa Ki Chudai ki Raat Me

फिर मैं उनकी कमर को ज़ोर से पकडते हुए उनकी गांड में अपने मुठ की लम्बी लम्बी पिचकारी भरने लगा।

मेरे साथ ही माँ की भी कमर दुबारा झटके कहती हुई रस की छीटे सोफे पर टपकने लगी गांड में अपना आखिरी बूँद तक निकालने के बाद मैं थका हरा अपना लंड उनकी गांड से निकाला और सोफे पर बैठ गया ।

माँ भी वैसे ही सोफे के बैक रेस्ट पर थकी तिकी रही, और फिर 44 मिनट के बाद उठी और मेरे मुँह के पास आकर मुझे एक किश कर बोली: थक गया मेरा बेबी।

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मैं: हफ़ कल भी करेंगे ना?

माँ: हाँ अगर दिन में नहीं तो ऐसे ही रात को आजाऊंगी अपने बेबी के साथ मस्ती करने चलो अब कपडे पहनो और सो जाओ गुड नाईट

मैं: आप को भी गुड नाईट

माँ: इतनी जल्दी मैं नहीं सोने वाली

मैं: क्यों?

माँ अपना एक हाथ अपने पीछे ले गयी और कुछ करने के बाद हाथ मेरे पास लेकर दिखाई उनकी उंगलियों में लसलसा सा पानी लगा हुआ था।

वह बोली: तुमने जो दिया है पहले उसे अचे से बेड पे लेट कर खाउंगी फिर सोऊंगी बाई।

मुझे यकीन नहीं हुआ की माँ अपनी गांड से मेरे मुठ को लेकर अपनी मुँह में ली मेरा मुरझाया लंड भी उछाल पड़ा वह मेरे गाल को चूमा और फिर फ्लोर से अपना रोबे उठाकर धीमी रौशनी में मुझे हाथ से बाई बोली फिर अपने कमरे को निकल गयी।

मैं जल्दी से अपना टी-शर्ट और शार्ट पहना और सोफे पर अभी हुए हर चीज़ को दुबारा आँखों में देखा और याद कर सो गया पर जब ये सब हुआ… 

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One Reply to “बाप बाहर बेटे का लण्ड माँ की चूत में अंदर | Maa Ki Chudai ki Raat Me”

  1. Praveen Singh

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