By | February 23, 2023

Masti Me Aunty Ki Chudai:हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राहुल  आज फिर एक नयी कहानी के साथ आया हु, पिछेल भाग अगर आपने अभी तक नहीं पढे तो प्लीज पहले उन्हे पढ़ ले , तो चलो आपका टाइम जायदा न लेते हुये कहानी सुरू करता हु

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राहुल सुबह कविता आंटी के साथ चाय और हलकी फुलकी फ़्लर्ट के बाद मैं बाथरूम में जाकर ब्रश किया

फिर अपने कपडे निकाल टॉवल पहना, पानी खोला तो पता चला इस बाथरूम का गीजर तो काम नहीं करता पानी ठंडा था और उसके ठंडेपन से मुझे एक गरमा गरम आईडिया आया।

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पहले माँ फिर भारती और अब मेरे दिमाग में आंटी को लेकर गंदे इरादे बनने लगे उनकी चिकनी साटन की नाइटी मैं याद कर अपने दिमाग में उन्हें भी चोद्दने के सपने देखने लगा।

माँ के आने में अभी 2-3 घंटे तो लग ही जाते, भारती दोपहर के बाद आने वाली थी।

तो मुझे इस बीच ही कुछ सोचकर करना था मैं बाथरूम से टॉवल पहने किचन को गया तो कविता आंटी मेरे लिए ब्रेकफास्ट बना रही थी

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मैं: आंटी!आंटी एक टक मुझे ऊपर नीचे देखने के बाद बोली: अब क्या चाहिए तुम्हे?

मैं: वह कॉमन बाथरूम का गीजर काम नहीं करता पानी ठंडा है

आंटी: तो इसमें पूछना क्या है सारिका के रूम का बाथरूम ले लो। Masti Me Aunty Ki Chudai

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मैं जान बूच कर अपनी पीठ खुजलाता हुआ बोलै: हाँ वही तो उसी लिए पूछने आयाआंटी: अरे बाबा तुम्हारा ही घर है मुझसे क्यों पूछ रहे हो?

मैं अलग अलग तरह से अपने पीठ और गर्दन को खुजलाते हुए बोलै: ऐसा नहीं ये घर आपका भी तो है।

मैं जान कर ऐसे खुजला रहा था ताकि वह इस पर ध्यान दे और बात करे वह बोली: लगता है तुम रोज़ नहाते नहीं इसीलिए ऐसे बंदरो के तरह खुजला रहे हो हाहाहा!

मैं: रोज़ नाहटा हूँ।

आंटी: हाँ तो साबुन भी लाग लो कभी न की सिर्फ पानी डालकर निकल जाओ साबुन लगाकर नहाओगे तो ऐसे नहीं खुजलाओगे अब भी बच्चो की  तरह समझाना पड़ता है तुम्हे।

मैं: साबुन तो मैं लगता हूँ आंटी बस पीठ पे नहीं लगता।

आंटी: क्यों?

मैं: अरे मैं कैसे अपने सारे पीठ पर साबुन लगाऊंगा हाथ नहीं पहुँचता।

आंटी: है भगवान् तुम न बिलकुल भी नहीं बदले हो जब छोटे थे तो मैं या फिर सारिका तुम्हे नहलाते थे, वरना तुम बस पानी डाल कर निकल भागते थे

मैं: अच्छा तो अब क्या मैं इतना बड़ा हो गया की आप मुझे साबुन नहीं लगा  सकते।

आंटी: हाहाहा! तो क्या तुम्हे आज भी कोई और चाहिए साबुन लगाके देने के लिए?

मैं: शायद

आंटी: क्या शायद? चलो जाओ अपना काम खुद करना सीखो हर दिन क्या कोई और आएगा तुझे साबुन लगाने बड़े हो गए हो ये सब खुद से करो, अब मैं  उदास शकल बनता हुआ बोला: काश की मैं कभी बड़ा ही न होता कितना आराम से रहता।

आंटी: हाँ काश की मैं भी कभी बड़ी नहीं होती सब यही चाहते है चलो अब जाओ मेरा और अपना टाइम खराब मत करो।

मैं तब सोचा की मेरी दाल गलने वाली नहीं आंटी के सामने और वाह से निकल गया जाकर माँ के कमरे के बाथरूम में घुसा डोर  के पीछे मुझे एक ब्रा और पंतय टंगी हुई मिली।

 ये शायद माँ या आंटी दोनों में से किसी की भी हो सकती थी, पर अँधेरे में तीर मरता हुआ मैंने बाथरूम की डोर खोली और आंटी को आवाज़ देता हुआ बोलै: आंटी!

आंटी किचन से: अरे बाबा! अब क्या हुआ!

मैं: आपके कुछ कपडे है यहाँ फिर कुछ सेकंड के लिए जवाब नहीं आया पर वह कमरे में जल्दी जल्दी आती हुई मेरे बाथरूम में आयी और बोली: हाँ मेरे है रुको ले लेती हूँ। Masti Me Aunty Ki Chudai

मैं बाथरूम के अंदर ही था वह भी अंदर आयी और दरवाज़े के पीछे देखा तो उनकी ब्रा पैंटी वहा नहीं थी वह मुझे देखा तो मेरे हाथ में अपनी ब्रा पैंटी देख बोली: तुम उसे क्यों लिए दो इधर।

मैं बोलै: अब आप आ ही गए हो तो मुझे साबुन भी लगा दो ना।

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आंटी मेरे हाथ से अपनी पंतय और ब्रा लेती हुई बोली: ओफ्फो ठीक है रुको मैं स्टोव बंद करके आती हूँ वह बहार गयी और अपनी ब्रा पंतय बेड पर डाल के किचन को चली गयी मैं टब में गर्म पानी भरने लगा।

 मैं मन ख़ुशी भी थी की अब तक का प्लान सही जा रहा है तभी वह आयी और दरवाज़ा बंद कर बोली: अरे तुम खड़े हो अब भी पानी डालना अपने पर आंटी मेरे पास आयी और मग में पानी लेकर मेरे कंधे पर 2-3 मग पानी डालने लगी।

ये सोच कर की वह मेरे साथ बाथरूम में है मेरे अंदर अब हलकी चिंगारी नीचे लंड पर फूटने लगी, पीठ पर पानी डालने के बाद वह अपने हाथ से पहले एक बार मेरे पीठ को रगड़ फिर शावर लेकर मेरे पीठ पर डालकर मलने लगी।

मैं सामने पाइप से गिरते पानी को हाथ में लेकर ऊपर की और उछलने लगा जिससे पानी पीछे उनपर जाकर पडा।

वह मेरे पीठ पर हलके से मारती हुई बोली: पानी से मत खेलो बच्चे हो क्य, पर मैं कहा रुकने वाला था।

मैं करता रहा और पानी ऐसे उनके सर पर बूंदो में गिरती रही फिर वह बोली: ओफ्फो राहुल! बस करो बचकानी हरकत वरना ज़ोर से मारूंगी अबकी बार।

मैं उनको टॉवल में अपनी गांड दिखाकर हिलाकर चिढ़ाते हुए बोलै: मारो मारो हाहाहा!

वह भी कम नहीं थी मेरे गांड पर एक थपड मार कर बोली: सीधे खड़े रहो।

मैं मुड कर उनके मुँह पर हाथ में पानी भर कर मारा और हसने लगा।

आंटी ज़ोर से बोली: हैट क्या कर रहे हो मैं चली जाउंगी।

मैं: ओके ओके नहीं करूँगा, इतने में वह पीठ पर साबुन लगाकर बोली: लो हो गया।

आंटी थोड़ी आगे बड़ी अपना हाथ धोने तो मैं अपने एक हाथ को सीधे कर बोलै: हाथ में भी लगा दो नाआंटी मुझे देख सर ऐसे हिलायी मानो कहना चाहती हो की वह परेशां है मुझसे। Masti Me Aunty Ki Chudai

फिर वह मेरे कंधे से हाथ पर साबुन लगाने लगी मुझे कुछ जल्दी सोचना था वरना आंटी अपना काम ख़त्म कर निकल जाती पर क्या?

तब मैं दूसरे हाथ में एक मग पानी ले कर खड़ा हो गया वह साबुन लगाती हुई मेरे कान के पास पहुंची तो गुद गुदी उतनी हुई नहीं पर मैं ज़ोर की गुद गुदी होने की नाटक करता हुआ।

पूरा मग का पानी उनके ऊपर फेक दियाआंटी चिल्लाती हुई बोली: राहुल! ये क्या कर रहे हो।

मैं मुड कर उन्हें देखा तो वह क्या नज़ारा था उनके सीने पर उनका नाइटी पूरा गीला था साटन का कपडा उनकी बूब्स से पूरा चिपक कर पूरा गोल आकर बन गया था .

और साथ ही उनकी निप्पल तन कर नोकीली बनी हुई थी वह मुझे उनके सीने को देख बोली: बदमाश पानी क्यों फेका मुझपे।

मैं: वह आप गुद गुदी किये मुझे।

आंटी: क्या गुद गुदी? देखो तो पूरा भीगा दिए मुझे।

मैं: हाहाहा! हाँ हैप्पी होली आंटीआंटी: मारूंगी तुम्हे अब गुस्सा मत दिलाओ मुझे।

मैं: अरे आंटी आप गुस्सा क्यों कर रही हो पानी ही तो है रंग नहीं है।

आंटी सचमे गुस्से में थी और अपने हाथ धोने लगी यक़ीनन अब मेरा खेल यहाँ ख़त्म था।

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वह शायद जाने वाली थी पर मैं हार नहीं माना था और उनके ब्याहाथ को पकड़ बोलै: प्लीज आंटी सॉरी मत जाओ।

आंटी गुस्से में बोली: ओफ्फो! पहले पानी और अब साबुन भी लगाओ छोडो मुझे मैं जा रही हूँ।

मैं उन्हें छोडा नहीं और बोलै: प्लीज आंटी अब नहीं पानी डालूंगा।

मेरे ऐसे विनती करने पर शायद वह पिघल गयी और बोली: ठीक है हटो।

मैं हटा और फिर वह गीले नाइटी में मेरे दुसरे हाथ पर साबुन लगाने लगी सामने का नज़ारा देख मेरे लंड में हरकत होने लगी गीले साटन पे छपी हुई आंटी के बूब्स और निप्पल क्या मस्त दिख रही थी। Masti Me Aunty Ki Chudai

 वह मुझे एक टक देख रही थी की मेरी नज़र बार बार किधर जा रही है पर बिना कुछ बोले मेरे हाथ पर साबुन लगा रही थी।

 पर इस बीच मुझे भी पता नहीं चला की कब मेरे टॉवल में एक उभर बन्न गया था।

उनकी नज़र बीच बीच में नीचे जाती देख मैं नीचे देखा तब जाकर मुझे पता चला आंटी फिर मेरे छाती पर साबुन लगाने लगी।

तब सोचा की मैंने तो इन्हे बोला नहीं की छाती पर साबुन लगाओ तो ये हाथ पर लगाकर जा क्यों नहीं रही शायद अब आंटी का भी मैं मुझे और ज़्यादा देर ऐसे देखने का मन हो रहा था।

मैं तब उनसे पुछा: वैसे आंटी आप इतनी गुस्सा क्यों हुई?

आंटी: तो और क्या अब जाकर मुझे ये बदलना होगा सुबह ही तो पहनी थी उपर से मैंने ज़्यादा नाइटी भी नहीं लायी।

वह अब थोड़ी झुक कर मेरे पेट पर साबुन लगा रही थी और उनकी गीली चिपकी नाइटी से मुझे उनके मस्त क्लीवेज दिख रही थी।

मैं तब बोलै: अच्छा तो आप इसे बदलोगे अब?

मेरे सवाल पर आंटी सर उठाकर मुझे देखि और तुरंत मुझे उनकी क्लीवेज देखते पकड़ ली लेकिन आंटी उसपर कुछ न बोली और अपनी क्लीवेज दिखाती हुई बोली: तो क्या ये गीली नाइटी पहन कर मुझे बुखार लगवाना है?

मैं तब एक और मग पानी उठाया और सीधे उन पर डालता हुआ बोलै: तो फिर थोड़ा और गीला हो जावा हाहाहा!

आंटी पानी के छीटे को अपने हाथ से रोकने की कोशिश करती हुई बोली: राहुल नहीं!

एक बार और उन पर पानी गिरा और फिर से उनकी बूब्स और बढ़िया से नाइटी पर छप गयी इस बार तो उनके पेट का हिस्सा भी गीला हो चुका था।

और साटन के कपडे से उनकी नावी की छेद छपी दिख रही थी लेकिन इस बार आंटी के चेहरे पे गुस्सा नहीं बल्कि नाराज़गी थी।

तो मैं बोलै: अरे आप नाराज़ क्यों हो रहे हो? Masti Me Aunty Ki Chudai

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आंटी नाराज़ आवाज़ में बोली: क्यों की तुम मेरी बात नहीं सुन रहे।

मैं: अरे आंटी आप नाराज़ मत होना आपके शकल पे नाराज़गी अछि नहीं लगती, आंटी की शकल में एक छोटी सी मुस्कान आने लगी तो मैं दुबारा मग में पानी लेने लगा वह मेरे पास आती हुई मुझे रोकने की कोशिश कर बोली: नहीं नहीं राहुल नहीं और नहीं डालोगे।

उनका एक हाथ मेरे दाए कंधे पर थी तो दूसरी बाए हाथ को पकडे  हुई थी।

 मैं भी ज़िद्दी बन कर उन पर पानी डालने की कोशिश करने लगा धीरे धीरे हम हलकी ज़ोर आज़माइश में लग गए इस बीच अपने दाए हाथ को अपने पीछे ले जाकर अपने टॉवल को थोड़ा खींच कर ढीला कर दिया।

मेरे हाथ से मग टब में गिर गयी उसे उठाना चाहा तो आंटी मेरे हाथ को छोड़ नहीं रही थी।

दुसरे हाथ से मैं पहले उनके कमर को धकेला फिर अनजाना बनता हुआ उसी हाथ से उनकी बूब दबाकर उन्हें धकेलने लगा।

वह शायद समझी या नासमझ बन रही थी पता नहीं पर वह मेरे हाथ को हटाने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी, बस मेरे से उलझी हुई थी की मेरा दूसरा हाथ मग को दुबारा न पकड़ पाए।

और इसी बीच मेरा ढीला हो चुक्का टॉवल खुल कर नीचे जा गिरा।

मेरा तना हुआ लंड उनके सामने सलामी देने लगा वह उसे देख अचानक से सहमी और फिर हस्ती हुई बोली: बेशरम अब तो समबलो।

मैं बोलै: क्यों ऐसा क्या हुआ अब?

आंटी: नीचे देखो तुम्हारी टॉवल गिर गयी सब दिख रहा है

मैं: तो क्या हुआ आप तो मुझे बचपन में ऐसे ही नहलाते थे न।

आंटी: वह तब की बात थी तुम छोटे थेआंटी के हाथ से मेरा हाथ छूट गया और वह मुझे बस देख हस्स रही थी और बोली: बिलकुल बेशरम हो बड़े हो गए पर अकल नहीं। Masti Me Aunty Ki Chudai

 मेरा हाथ अब भी उनके बूब्स पर था  उनकी बूब को हलके दबाता हुआ बोलै: मैं तो आपके लिए अभी भी छोटा हूँ।

आंटी एक टक नीचे मेरे झूलते हुए तने लंड को देखा फिर मेरी आँखों में देख बोली: बहुत कुछ बड़ा हो ही गया है।

आंटी को पता भी नहीं चला की मेरा हाथ शावर के नॉब को पकड़ लिया और मैंने शावर चालू कर दिया ।

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 पर ये जो शावर होती है वह भी कभी टाइम पे नहीं काम करती पहले फुसस्स कर आवाज़ करेगी और फिर बूँद बूँद पानी गिराएगी जिसे देख वह समझ गयी की मैंने शावर ऑन कर दी।

वह मुझसे अलग होकर हटने लगी और मुड कर मुझे पीठ दिखा कर भागने लगी।

पर मैं मौका परास्त उनके कमर से उन्हें पकड़ अपने तरफ खींच लिया ऐसे में वह मेरे से आ सटी अब उनकी गांड से मेरा तना हुआ लंड लगा  और वह पानी की बरसती हुई छिटो से बचने के लिए मचलने लगी।

आंटी: छोडो राहुल… मैं सचमे मारूंगीअब हम दोनों शावर के नीचे थे मैं उन्हें अपने बांहो में फसाकर शावर के नीचे खड़ा किया।

 मेरे हाथ पहले उनके पेट को पकड़ा और फिर उनकी बूब्स को दबोचता हुआ।

 उन्हें मेरे से चिपका लिया वह इस पर मुझसे चिपक कर उलझने लगी पर पानी की बौछार हम दोनों पे पड़ती रही मेरा तना हुआ लंड उनकी नाइटी के ऊपर से उनकी गांड में चुभता रहा पर वह कुछ न बोली और बस हस्ती खिलखिलाती हुई बोली: राहुल नहीं छोडो मुझे, प्लीज मेरे कपडे गीले हो रहे है छोडो हाहाहा!

मैंने अपनी कमर आगे की और हिलता हुआ अपना तना हुआ लंड उनकी गांड पर चुभने लगा पर वह ऐसा दिखा ही नहीं रही थी मानो मैं कुछ गलत कर रहा हूँ

उनके ऐसे करने पर मैं और ज़्यादा उत्तेजित हो रहा था और फिर वह मेरे हाथो से निकल गयी।

वह निकली तो मैंने देखा की उनकी नाइटी पूरी भीग चुकी थी और पीछे से ऐसे चिपक गयी थी।

उनसे की मैं उनकी मस्त गांड की आकार साफ़ देख सकता था क्या खूबसूरत गांड थी उनकी नाइटी गीली होकर उनकी गांड की लकीर में घुस गयी थी। Masti Me Aunty Ki Chudai

वह पलटी और बोली: तुम कितने बदमाश हो राहुल मुझे पूरा भीगा दिया ।

उनके कहने पर मैंने देखा तो उनकी नाइटी सामने से भी गीली होकर उनके पूरे बदन से अब चिपक गयी थी।

उनके बूब्स नावी और चूत के पास व् अकार का हिस्सा और फिर उनकी जंघे पूरी मुझे साफ़ दिख रही थी।

 वह भी मेरे नीचे मेरे तन्न कर खड़े खुले आम झूलते लंड को देखती बोली: तुमने अब तो हद ही पार करदी।

मैं: मैंने क्या किया शावर का पानी था

आंटी अपनी कमर पर हाथ रख मुझे बिंदास अपनी जिस्म का आकर अपने गीले कपडे पे छापा दिखाई दिया।

आंटी: हाँ तो ऐसे करोगे क्या? देखो मैं पूरी गीली हो गयी।

वह ऐसे कह रही थी मानो की मैं उन्हें अच्छे से देखु तो मैं भी अब बेफिक्र होकर उन्हें ऊपर से नीचे देख आँख मारते हुए बोलै: तो क्या हुआ आंटी आप अछि लग रही हो।

आंटी: चुप ये कोई तरीका है? मुझे बुखार लग गयी तो?

मैं: आंटी सच बोलू तो आप काफी खूबसूरत हो ठण्ड तो आपको कभी नहीं लगेगी।

आंटी: बंद करो वह शावर और क्यों ठण्ड नहीं लगेगी मैं इंसान नहीं हूँ क्या? Masti Me Aunty Ki Chudai

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मैं शावर बंद करते हुए मुस्कुराता हुआ बोलै: अब आप इतनी हॉट लग रही हो तो ठण्ड कहा से लगेगी।

इस पर वह पहले मुस्कुरायी और फिर झूठा गुस्सा दिखाई हुई अपने बूब्स और पेट के पास कपडे पर हाथ साफ किया ।

वह बोली: तुम्हे कभी नहीं नहलाऊंगी अब चलो हो गया नहाना अब मैं चली।

मैं: आपने कहा नहलाया मुझे बस हाथ और पेट पे साबुन लगा दिया तो हो गया?।

आंटी अपने मुँह से पानी पोछती हुई बोली: तो अब और क्या करू? पूरा नहलाऊं क्या?

मैं: हाँ आप तो पूरी भींग ही चुकी हो तो अब मुझे पूरा ही नहलाओ।

वह बिना कुछ बोले नीचे गिरे शावर जेल की बोतल उठायी और मेरे पास आकर बोली: अब सीधे खड़े रहो बदमाशी नहीं।

मैं उनके सामने अपना तना हुआ लंड दिखते हुए बेझिझक खड़ा रहा वह शावर गेल मेरे कमर और पेट पर लगाने लगी मैं तो बस उनके कपड़ो पे छपे उनके जिस्म को देख मज़े ले रहा था।

 मेरा लंड बार बार उत्तेजना के झटके मार रहा था।

लेकिन वह उसे देख कर नज़र अंदाज़ कर रही थी कोई शक नहीं था की उन्हें पता है की मैं उन्हें देख उत्तेजित हो रहा हूँ।

वह मेरे कंधे को धकेलती हुई मुझे पलटी और फिर साबुन को मेरे पीछे कमर पर लगाने लगी।

धीरे धीरे नीचे मेरे गांड तक पहुंची वह मेरे नंगे गांड पर अपनी गीली हाथ से एक थप्पड़ मारकर बोली: बड़े बदमाश हो गए हो।

मैं मुस्कुराता रहा और वह मेरे गांड पर साबुन लगाती रही फिर उनकी उंगलिया मेरे गांड के बीच हलकी सी घुसी तो मैं थोड़ा आगे झुका जिससे वह जान गयी की मैं क्या चाहता हूँ।

 वह मेरे गांड के बीच अपनी उंगलिया डाल कर मेरी छेद को साबुन से मलने लगी।

पता नहीं ये उनकी उत्तेजना थी या ममता पर मुझे तो मज़ा आ रहा था इसके बाद वह मेरे सामने आयी मेरी नावी के नीचे साबुन लगाती हुई मेरे लंड पर पहुँचने वाली थी।

 मुझे लगा वह शायद वह हाथ नहीं लगाएगी पर वह सीधे मेरे कड़क लंड को पकड़ लिया और मुझे हैरान कर दिया।

 वह बोली: बचपन में ये इतना बड़ा नहीं था हाहाहा! Masti Me Aunty Ki Chudai

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मैं भी पीछे न हटा और पुछा: क्यों अब बहुत ज़्यादा बड़ा है?

आंटी मुझे देख मुँह में मुस्कान दबती हुई मेरे लंड को पकड़ साबुन लगाने लगी वाह क्या मज़ा दे रही थी।

 वह मेरे लंड को मानो ऊपर नीचे हिला रही हो एक हाथ से लंड सहलाती और साबुन लगाती हुई दुसरे हाथ से मेरे अंडो पर साबुन लगाने लगी।

मस्ती की लहर में मेरी बोलती बंद हो रही थी वह थोड़ा अचे से टाइम लेकर मेरे लंड और अंडो को साबुन लगा रही थी।

मैंने कहा: अच्छे से लगाओ आंटी अच्छे से साबुन लगाइये।

आंटी मुझे देख बोली: हाँ हाँ तुम्हे तो बड़ा मज़ा आ रहा है न बदमाश कही के।

वह फिर अपने पाँव के बल बैठ कर मेरे जांघो पर साबुन लगाती हुई नीचे जाने लगी अब उनका चेहरा मेरे लंड के बराबर आ गयी थी।

वह कई बार मेरे सीधे उनके मुँह की तरफ खड़े लंड पर नज़र दौड़ा रही थी।

मैं नीचे उन्हें देख बोलै: आंटी आपको बुखार हो गया तो।

आंटी: होने दो सब तुम्हारे ही तो कारन होगा नालायक।

मैं: आपको ठण्ड नहीं लग रही क्या?

आंटी: तो लगेगी नहीं क्या? मैं ड्रामा करते हुए: सॉरी आंटी तब सोचा नहीं ऐसे आप एक काम करना आंटी ऊपर मुझे देखती हुई बोली: क्या?

मैं: आप वह गीले कपडे बदल लो जल्दी सेआंटी: हाँ पहले तुम नहाके निकालो फिर मैं कर लुंगी

मैं: अभी कर लो ना क्या पता उतने टाइम में बुखार लग गया तो?

आंटी: अच्छा! अब क्या मैं तुम्हारे सामने अपने कपडे उतारू?

मैं: तो उसमे क्या है? आप तो बचपन में मुझे नहलाती थी तो खुद भी बिना कपड़ो के नहाती थी।

 मेरे सातआंटी मेरे जांघ पर हल्का मारती हुई बोली: हैट वह तुम तब बचे थे।

मैं: तो अब क्या मैं पापा बन गया क्या? Masti Me Aunty Ki Chudai

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आंटी उनके मुँह के सामने लटकते मेरे लंड को अपनी आँखों से इशारा कर बोली: हाँ पापा बनने के लायक तो हो गए हो न उसी लिए।

मैं: क्या आंटी ये तो नार्मल है मेरे लिएआंटी तब उठती हुई बोली: हाँ जानती हूँ जब देखो ऐसे ही रहता है ये।

 कल भी देखा था शाम को जब तुम सोफे पे बैठे थे।

तब याद आया कल शाम चाय पीते वक़्त मैं भारती के साथ चैट  में लगा हुआ था।

तब मेरे गॉड से कुशिओं नीचे गिरा तो मेरे शार्ट से निकले लंड को आंटी ने भी देखा था (ये आप लोगोने पार्ट १५ में पड़ा था)।

मैं तब मौके का फायदा उठाते हुए एक तीर मारा: वह आंटी आपको समझ नहीं आया क्या की ये क्यों ऐसे होता है?

आंटी मेरे साबुन लगे बदन पे पानी डालती हुई बोली: क्यों?

मैं: आपके कारन आंटी अचानक से रुकी और बोली: मेरे कारन क्यों?

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मैं: कुछ नहींआंटी फिर वापस अपने काम में लगती हुई बोली: बोलना क्या कहना कहते हो?

मैं चाहता था की अब वह भी हो जानने के लिए और मैं जवाब जल्दी ना दूँ और बोलै: नहीं नहीं कुछ नहीं।

आंटी: अरे बोलो तो अजीब हो आधा अधूरा पहेली मत बनाओ बताओ।

मैं: अरे कुछ नहीं ऐसे ही बोलै बस वैसे आप ये गीले कपडे निकल फेकना खामखा बुखार हो गया तो।

फिर मुझे बुरा लगेगा की मेरे कारन हुआ आंटी अब मुझे पूरा नहला चुकी थी और बोली: चलो हो गया तुम्हारा बदन पोछकर निकलो मैं बदल लुंगी। Masti Me Aunty Ki Chudai

मैं: तो अभी कर लो नाआंटी: चलो चलो निकलो टाइम नहीं मेरे पास वह मुझे धकेलती हुई पहले बाथरूम से बहार ले गयी।

फिर माँ के कमरे से बहार और फिर बोली: जाओ जाकर कपडे पहले मैं बदल कर आती हूँ ।

इसके बाद उन्होंने डोर बंद कर दी क्या यार अच्छा खासा प्लान सही चल रहा था पर कोई बात नहीं आज नहाने में मज़ा आ गया और वैसे अभी तो सिर्फ 10:40 ही हुए है कविता आंटी ने बताया था की माँ 1  बजे तक आएगी।

 दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना अगले भाग मे बतौगा की कैसे मैंने आंटी की चुदाई कर  डाली ।

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