By | May 25, 2023

Mummy ki chudai bete se:हेलो दोस्तों हाजिर हु एक और कहानी के साथ आप कहानी पढे और मुझे फीड बैक देना न भूले, दोस्तों मेरा नाम अभिषेक है और मेरी उम्र 24 साल है मैं हरीयाणा का रहने वाला हु मेरी ये कहानी मेरे चाचा और माँ की चुदाई के बीच की है।

मैं मम्मी को देखता ही जा रहा था और मेरा मन उन्हें देखने से भर ही नहीं रहा था मैं 10 से 15 -मिनट तक मम्मी को ऐसे ही देखता रहा।

Mummy ki chudai bete se

फिर मैंने अपना मोबाइल उठाया और मम्मी की सोते हुए कुछ फोटो ले ली ताकि आज की ये यादे हमेशा मेरे पास रहे मम्मी वाकई बहुत खूबसूरत लग रही थी मुझे उन्हें उठाने का मन नहीं कर रहा था।

फिर मैंने उनके माथे को चुम लिया और वैसे ही लेट गया माथा चूमने से मम्मी थोड़ी हिली और फिर उन्होंने अपनी आँखे खोल ली आँखे खुलते ही उन्हें अहसास हुआ की वह नंगी है और तभी उन्होंने मेरी तरफ देखा और मैं कोहनी टिकाये लेटे हुए मम्मी को ही देख रहा था।

मैं : गुड मॉर्निंग मम्मी, मेरी गुड मॉर्निंग सुनते ही मम्मी एक दम से उठ गयी जैसे ही वह उठी उनका नंगा बदन मेरे सामने आ गया मम्मी बेड से उठ गयी और ज़मीन पर पड़े आपने कपडे उठाने लगी।

मैं मम्मी की नंगी जवानी को ताड़ रहा था और मम्मी अपने कपडे पहन रही थी पहले मम्मी ने अपनी पैंटी उठायी और वह उसे पहनने लगी मम्मी का मुँह दूसरी तरफ था।

वह मुझे नहीं देख रही थी मगर मैं तो उनकी गोरी और मोटी गांड को ही देख रहा था मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा हुआ था और अब मम्मी की गांड को देखकर वह और भी जयादा टाइट हो गया था जब मम्मी पैंटी पहनने के लिए नीचे झुकी तो उनकी गांड और चुत पीछे से खुल के दिखने लगी और मम्मी की चुत और गांड देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया।

मम्मी की चुत का चमड़ा बहार निकल के लटक रहा था पैंटी पहनने के बाद मम्मी ने बाकी कपडे उठाये और उन्हें लेके वह बाथरूम में जाने लगी जब मम्मी चलते हुए बाथरूम जा रही थी तो उनकी मटकती गांड को देखकर मैं पागल हो रहा था।

मम्मी की गोल और मोटी गांड इधर उधर हिल रही थी और मैं उनकी गांड को देखकर अपना लंड सेहला रहा था।

मैं बेड पर लेटकर अपना लंड सेहला रहा था और मम्मी का इंतज़ार कर रहा था लगभग 10-मिनट बाद मम्मी कपडे पहन के और मुँह धोके बहार आयी मम्मी को देखते ही मैंने अपना लंड से हाथ हटा लिया और बहार आते ही मम्मी की नज़र मेरे लंड पर ठहर गयी। Mummy ki chudai bete se

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वह मेरे लंड को घूर रही थी शायद उन्हें याद आ रहा था की कल रात इसी लंड ने उन्हें वह सुख दिया था जिसे वह पापा से लेना चाहती थी।

मगर वह सुख पापा मम्मी को अब देते नहीं थे मम्मी मेरा लंड देख रही थी और फिर उन्होंने अपनी नज़र हटा ली।

मम्मी : बेटा जल्दी कपडे पहन ले हमें निकलना है अभी।

मैं : मम्मी पहले कुछ खा तो लेते है फिर आराम से निकलते है।

मम्मी : नहीं मुझे अभी जाना है जल्दी से तैयार हो जा, मम्मी की बाते सुनके साफ़ समझ आ रहा था की हमारे बीच जो हुआ है वह उससे खुस नहीं थी मगर मेरे लिए तो वह लम्हा किसी जन्नत से काम नहीं था।

जिसमें न चाहते हुए भी मम्मी ने मेरा साथ दिया था और शायद यही बात उन्हें परेशां कर रही थी मैं मम्मी के सामने बेड से उठा और मेरे उठते ही मेरा लंड फिर से मम्मी के सामने आ गया ।

मेरा लंड बहुत टाइट हो चूका था जो बिलकुल सीधा खड़ा था और मैं जनता था मम्मी चोर नज़र से मेरे लंड को ही देख रही थी मैं नंगा ही मम्मी के पास गया और उनके गाल को चुम लिया।

मैं : आई लव यू मम्मी आई  लव यू सो मच, मम्मी ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और फिर मैं 10 मिनट में ही फ्रेश होके आ गया।

मम्मी बेड पर ही बैठी थी जैसे ही मैं बाथरूम से वापस आया, तब भी उनकी नज़र मेरे लंड पर थी मम्मी के सामने होने से मेरा लंड ढीला हो ही नहीं रहा था और मम्मी न चाहते हुए भी मेरा लंड देख रही थी, बहार आके मैंने देखा मम्मी ने मेरे कपडे ज़मीन से उठाके कुर्सी पर रख दिए थे।

मैं मम्मी के सामने कपडे पहनने लगा जैसे ही मैंने कपडे पहन लिए तभी मम्मी बेड से उठ गयी और वह दरवाजे की तरफ जाने लगी।

फिर हम दोनों अपने रूम के बहार आ गए और फिर मैं रिसेप्शन पर आ गया वह अपने बिल देने लगा मम्मी मेरे पीछे ही खड़ी थी तभी रिसेप्शन पर बैठी लड़की बोली, 

लड़की : मैं उम्मीद करती हु की आपको हमारे होटल की सर्विस पसंद आयी होगी, जैसे ही उस लड़की ने ये बात बोली मुझे लगा मम्मी जवाब नहीं देगी मगर तभी मम्मी बोल पड़ी।

मम्मी : हा जी आपका होटल वाकई बहुत अच्छा है मम्मी का जवाब सुनके मैं उन्हें देखने लगा उनके मुह पर एक झूठी स्माइल थी। Mummy ki chudai bete se

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लड़की : थैंक यू सो मच दुबारा जरूर आएगा, फिर मैं और मम्मी उस लड़की को बाई बोलके निकल आये।

फिर मैं कार लेके आया और मम्मी चुप चाप बेथ गयी मैं कार चला रहा था और मम्मी बिलकुल शांत बैठी थी यहाँ तक की वह मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी।

कुछ देर कार चलने के बाद एक चाय की दुकान आयी जहा मैंने कार रोक दी कार रुकते ही मम्मी ने मुझे देखा।

मम्मी : यहाँ क्यों रुका है?

मैं : मम्मी कुछ खा लेते है हम दोनों ही सुबह से भूखे है कम से कम चाय तो पी लेते है फिर मैं जाके मम्मी और अपने लिए चाय और कुछ खाने के लिए ले आया।

मम्मी भी कार के बहार आ गयी और साइड में खड़ी हो गयी मैं चाय लेके मम्मी के पास गया और उन्हें चाय दे दी मम्मी चाय पीने लगी और मैं उन्हें देखने लगा मम्मी बीच बीच में मुझे देख रही थी मगर कुछ बोल नहीं रही थी।

मैं : मम्मी क्या हो गया है? आप मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हो? मम्मी ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया।

मैं : प्लीज बताओ न क्या बात है? क्या आप कल रात वाली बात के लिए नाराज हो?

मम्मी : मुझे उस बारे में कोई बात नहीं करनी है जल्दी से चाय ख़तम कर और घर चल, रस्ते में मम्मी से वह सब बाते करना ठीक नहीं था इसीलिए मैं भी चुप हो गया मैंने सोचा घर पर चल के अच्छे से बात कर लूंगा।

फिर चाय पिके हम दोनों निकल पड़े और 3 घंटे के बाद हम लोग घर पहुंच गए मैं कार पार्क करने लगा और मम्मी दरवाजा खोल के अंदर चली गयी कार पार्क करने के बाद जब मैं घर के अंदर गया तो मम्मी मुझे कही नहीं दिखी।

फिर मैं उनके कमरे के पास गया और कमरा खोलने लगा मगर मम्मी ने कमरा अंदर से बंद किया हुआ था मैंने दरवाजा खट  खटया मगर मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया।

मगर मैंने 3 से 4 बार जब दरवाजा खत खात्या तब मम्मी बोली।

मम्मी : मुझे परेशां मत कर जा यहाँ से।

मैं : मम्मी दरवाजा खोला मुझे आपसे बात करनी है।

मम्मी : मुझे तुझसे कोई बात नहीं करनी है चला जा यहाँ से, मम्मी मुझसे बात नहीं करना चाहती थी इसीलिए मैंने उन्हें अकेला छोड़ दिया और फिर मैं अपने काम में लग गया। Mummy ki chudai bete se

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मैं बस मम्मी का इंतज़ार कर रहा था की कब वह बहार आये और मैं उनसे बात करू मगर मम्मी बहार आ ही नहीं रही थी फिर दोपहर लगभग 9  बजे मम्मी अपने कमरे के बहार आयी और वह सीधा किचन में चली गयी कुछ देर बाद मैं भी किचन में गया।

जैसे ही मैं किचन में घुसा, मम्मी मुझे देखने लगी मुझे देखकर उन्होंने कुछ नहीं कहा और वह अपना काम करने लगी।

पता नहीं क्यों मगर मुझे भी उनसे बात करने में डर लग रहा था मगर शुरुवात कही से तो करनी थी इसीलिए मैं मम्मी के पास गया और उनके कंधे पर हाथ रख दिया जैसे ही मैंने कंधे पर हाथ रखा मम्मी ने मेरा हाथ हटा दिया और दूसरी तरफ मुँह करके काम करने लगी।

मम्मी की बेरुखी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी और इस बार मैंने उन्हें पीछे से जाके पकड़ लिया मेरे दोनों हाथ मम्मी की कमर को पकड़े हुए थे जैसे ही मैंने मम्मी को पकड़ा वह मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी।

मैं : मम्मी आप मुझसे बात क्यों नहीं रही हो? आपकी ये ख़ामोशी मुझे चुभ रही है आप चाहो तो मुझे मार लो मगर प्लीज ऐसे चुप मत रहो।

मम्मी : मुझे तुझसे कोई बात नहीं करनी है छोड़ मुझे और जा यहाँ से।

मैं : मम्मी मैं जानता हु आप रात वाली बात से गुस्सा हो मगर मम्मी मैंने जो भी कहा वह सब सच था मैं आपसे बहुत प्यार करता हु।

मम्मी ने मेरी बात सुनके थोड़ा दम लगाया और खुद को मेरे हाथो की कैद से आज़ाद कर लिया जैसे वह अलग हुई उन्होंने 2 थप्पड़ मेरे गाल पर जड़ दिए जिसकी गूंज पुरे किचन में हुई।

मैं गाल पर हाथ रखकर मम्मी को देख रहा था और उनकी आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था।

मम्मी : दुबारा ऐसे बात की तो मुँह तोड़ दूंगी तेरा यही सब सिख रहा है तू बहार जाके मैंने तेरी सारी हरकते बर्दाश्त की मुझे लगा बच्चा है मगर तू तो कुछ और ही सोच रहा था छि छि छि  अपनी ही माँ के साथ ऐसा करना तू ये सब सोच भी कैसे सकता है।

मैं : मम्मी आप चाहो तो मुझे और मार लो मगर मैं फिर भी यही कहूंगा की मैं आपसे प्यार करता हु और हमेशा करता रहूँगा, मम्मी ने फिर से मेरे गाल पर थप्पड़ मारा और मुझे किचन से निकाल दिया।

मैं अपने कमरे में आके बैठ गया और मम्मी के बारे में सोचने लगा मम्मी अभी गुस्से में थी शायद इसीलिए कुछ समझना नहीं चाहती थी क्युकी जो रिश्ता मैं उनसे बनाना चाहता था वह इतना भी आसान नहीं था और एक माँ आपने बेटे के साथ ऐसा रिश्ता सोच भी नहीं सकती थी। Mummy ki chudai bete se

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मगर अब तो हमारे बीच सब हो चूका था अब बस मुझे सही टाइम का इंतज़ार करना था ताकि मम्मी का गुस्सा थोड़ा ठंडा हो जाये और मैं उन्हें मना  सकू उस दोपहर न मैंने खाना खाया और न ही मम्मी ने और शाम होते ही पापा भी आ गए पापा ने आते ही मम्मी को गले से लगा लिया और वह उन्हें सॉरी बोलने लगे मम्मी ने पापा को कुछ नहीं कहा और फिर वह दोनों अपने कमरे में चले गए ।

मैं अपने कमरे में आ गया फिर कुछ देर बाद पापा मेरे कमरे में आये।

पापा : क्या कर रहा है बेटा? 

मैं : कुछ नहीं पापा बस पढ़ रहा था।

पापा : चल जल्दी से तैयार हो जा हम लोग बहार खाना खाके आते है।

मैं : पापा मेरा बिलकुल भी मन नहीं है शाम को वह पिज़्ज़ा खा लिया था इसीलिए भूख नहीं लग रही थी वैसे आप मम्मी को लेके जाओ वह कल बहुत नाराज थी आपसे।

पापा : ठीक है बेटा फिर हम दोनों होके आते है और भूख लगे तो कुछ मंगवा के खा लेना पापा मेरे कमरे से निकल गए और फिर कुछ देर बाद पापा ने मुझे आवाज लगायी जब मैं बहार गया तो पापा मम्मी जा रहे थे।

मम्मी ने काले रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें वह बहुत हसीं लग रही थी मेरा लंड तो मम्मी को देखते ही सलामी देने लगा और शायद मम्मी ने भी ये देख लिया मम्मी ने मुझसे कुछ कहा और फिर पापा मम्मी बहार निकल गए और मैं अपने कमरे में आके बैठ गया।

मैं बैठा पढ़ाई कर रहा था जो मुझसे हो नहीं रही थी इसीलिए मैं सेक्स स्टोरी पड़ने लगा और मम्मी को खयालो में ही चोदने लगा टाइम कैसे बीत गया मुझे पता ही नहीं चला रात के 11 बजे मम्मी और पापा वापस आ गए।

मैंने गेट खोला तो मम्मी अंदर आ गयी उन्होंने मुझे देखा मगर कोई बात नहीं की फिर पापा भी कार पार्क करके आ गए और वह दोनों अपने कमरे में चले गए और मैं आपने कमरे में आ गया कुछ देर बाद मम्मी मेरे कमरे में आयी और उनके हाथ में खाने की थाली थी जिसे वह मेरी टेबल पर रखकर जाने लगी।

मम्मी : खाना खा लेना, मम्मी मुझे खाना देके चली गयी और फिर मैं भी खाना खाके छत पर टहलने चला गया छत पर जाते हुए मैंने देखा मम्मी के कमरे का दरवाजा बंद था और ये तो मैं जान ही गया था की आज पापा मम्मी की चुदाई जरूर करेंगे।

फिर मैं छत पर चला गया और आधे घंटे बाद टहल के नीचे आया जब मैं नीचे आया तो मैंने देखा किचन की लाइट जल रही है और फिर मैं भी किचन में चला गया जैसे ही मैं किचन में घुसा सामने मम्मी ट्रांसपेरेंट नाइटी में खड़ी थी और वह पानी पी रही थी उनका धयान मेरी तरफ नहीं था। Mummy ki chudai bete se

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मगर मैं तो उनकी गांड ही देख रहा था जिसे देखने से साफ़ पता चल रहा था की उन्होंने अंदर कुछ नहीं पहना था और मम्मी को देखर मेरा लंड खड़ा हो गया मम्मी जैसे ही पानी पिके पीछे मुड़ी वह मुझे देखकर चौक गयी और फिर वह जल्दी से बहार निकल गयी।

मम्मी को देखकर ये साफ़ पता चल रहा था की अभी अभी उनकी चुदाई ख़तम हुई थी और मम्मी को शायद वह संतुष्टि नहीं मिली थी जो एक औरत को चाहिए होती है शायद इसीलिए मम्मी बहार आके ठंडी होने की कोशिश कर रही थी।

फिर मैं भी अपने कमरे में आके सो गया सुबह उठा तो पापा जा चुके थे और फिर मैं भी तैयार होक क्लासेज के लिए चला गया मम्मी अभी भी मुझसे ठीक से बात नहीं कर रही थी बस घर के काम और खाना खाने के लिए ही वह मुझे बुलाती थी।

उसके अलावा वह मुझसे कोई बात नहीं कर रही थी 4 से 5  दिन सब ऐसे ही चलता रहा मम्मी ने मुझसे ठीक से बात तक नहीं की और मैंने भी उन्हें फाॅर्स नहीं किया क्युकी मैं जो बात उन्हें समझना चाहता था उसके लिए उनका गुस्सा शांत होना जरुरी था।

और फिर हलके हलके मम्मी का गुस्सा शांत हो गया जिसमें 7 से 8 दिन लग गए मगर अभी भी वह पूरी तरह से बात नहीं कर रही थी मगर उन्हें देखकर साफ़ पता चल रहा था की अब उनका गुस्सा कम हो गया है और अब मैं उनसे बात कर सकता हु उस दिन मैं क्लासेज से दोपहर में वापस आया और फिर मैंने और मम्मी ने खाना खाया खाना खाने के बाद मम्मी किचन में चली गयी और फिर मैं भी मम्मी के पास गया।

मम्मी फ्रिज में कुछ रख रही थी और मुझे देखते ही वह सीधी हो गयी।

मम्मी : यहाँ क्या कर रहा है तू?

मैं : कुछ नहीं मम्मी मैं बस आपसे बात करना चाहता था।

मम्मी : क्या बात करनी है तुझे?

मैं : मम्मी बात तो वही करनी है जिसका जवाब आप जानते हुए भी जवाब नहीं दे रही हो।

मम्मी : मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी है अब जा यहाँ से।

मैं : नहीं मम्मी आज मैं नहीं जाऊंगा इतने दिनों से आप गुस्सा थी इसीलिए मैंने ये बात नहीं की मगर अब मुझे इस बात का जवाब चाहिए।

मम्मी : मैंने कहा न मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी है।

मैं : मम्मी मैं जानता हु आप बात क्यों नहीं करना चाहती हो? क्युकी आपको डर है की आप भी सच न बोल दो, 

मम्मी : तू कहना क्या चाहता है?

मैं : मम्मी मैं बस यही कहना चाहता हु की आप अपने दिल की सुनो और जो भी सचाई है उसे मान लो जैसे उस रात आप सब भूल गयी थी और आपने वह किया जिसमें आपको खुसी मिली, मम्मी ने ये बात सुनते ही मेरे गाल पर  थप्पड़ मार दिए।

मम्मी : मैंने तुझे पहले भी समझाया था मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती हु और तू बार बार मुझसे यही बात क्यों करता है? Mummy ki chudai bete se

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मैं : मम्मी आप चाहे मुझे कितना भी मार लो मगर सच यही है की मैं आपसे प्यार करता हु और उस रात जब मैंने आपको प्यार किया तो आप भी सब भूल गयी और न चाहते हुए भी आपने मेरा साथ दिया।

मम्मी : अपनी बकवास बंद कर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया था वह सब तूने मेरे साथ किया था और मेरे साथ ऐसे हरकत करने के बाद भी तू मेरे सामने ये सब बोल रहा है।

मैं : मम्मी अगर ऐसा है तो आप मेरे सर पर हाथ रखकर कसम खाओ की उस रात जो भी हमारे बीचे हुआ उसमें आपको मज़ा नहीं आया अगर आप झूट बोलो तो मेरा मारा हुआ मुँह देखो, मैंने मम्मी का हाथ आपने सर पर रख दिया और मम्मी मेरी आँखों में देखने लगी उन्हें समझ नहीं आ रहा था की वह क्या जवाब दे मम्मी ने अपना हाथ मेरे सर से हटा लिया और वह किचन से बहार जाने लगी, मगर मैंने उन्हें कमर से पकड़ लिया और खुद से चिपका लिया।

मैं : क्या हुआ मम्मी आपने मेरी कसम क्यों नहीं खायी?

मम्मी : मैं इस बकवास के लिए तेरी कसम नहीं खाने वाली अब छोड़ मुझे और जाने दे।

मैं : मम्मी मैं जानता हु आप झूट बोल रही है आप सब समझती है बस न समझने का ड्रामा दिखा रही है मम्मी मुझसे लगातार छूटने की कोशिश कर रही थी मगर मैं उन्हें छोड़ नहीं रहा था।

मैंने मम्मी को दीवार से लगा दिया और उनके दोनों हाथो को पकड़ लिया ऐसा करने से मम्मी मुझे घूर के देख रही थी।

मैं : मम्मी मैं जानता हु जब मैं आपको ऐसे छूता हु तो आपके अंदर भी करंट दौड़ जाता है और जब मेरे होंठ आपके होंठों को चूमते है तो आपके नीचे भी गीलापन शुरू हो जाता है मम्मी मेरी बाते सुनके अपनी नज़र चुरा रही थी हो न हो उनका दिल और दिमाग भी इसी असमंजस में था की ये सब क्या हो रहा है।

उनका बेटा ही उन्हें चोदना चाहता है मम्मी ये सब सोच ही रही थी की तभी मैंने अपने होंठ मम्मी के होंठों से लगा दिया और उनके गुलाबी रसभरे होंठों को चूसने लगा। Mummy ki chudai bete se

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मम्मी ने आपने हाथ छुड़ा के मुझे पीछे किया और फिर से मेरे गालो पर थप्पड़ जड़ दिया।

मैं : मम्मी आप चाहो जितने थप्पड़ मर लो मगर सच तो ये है की आप खुद को धोका दे रही है मम्मी किचन से निकल के अपने कमरे में चली गयी और फिर मैं भी आपने कमरे में आ गया।

आज मैं खुस था की मुझे जो मम्मी से कहना था वह मैं कह चूका हु वैसे मैं ये बात जानता था की मम्मी बस खुद से लड़ रही है शिमला के उस कमरे में हुई चुदाई में जब मम्मी मेरा साथ दे रही थी तो ये मैं जान गया था की उनके अंदर भी कितनी गर्मी है।

जिसे अब पापा शांत नहीं कर पाते है और जब मैंने उन्हें वह संतुष्ट दी थी तो वह सब भूल के चुदाई का मज़ा ले रही थी बस अब वह ये बात मानना नहीं चाहती थी मगर ज़िद में मैं भी उनका बेटा हु।

मैं मम्मी को मना के ही रहूँगा, मम्मी पूरी दोपहर बहार नहीं आयी और फिर मैं भी अपने काम में लगा रहा शाम को जब मम्मी बहार आयी तो वह मुझे अपनी गुस्से वाली आँखे दिखा रही थी।

मगर मुझे उसका कोई फरक नहीं पड़ रहा था उसके बाद मैंने उस दिन कुछ भी नहीं किया अगले दिन वही सब हुआ और फिर दोपहर में मैंने मम्मी को फिर से पकड़ लिया और उन्हें समझने लगा मगर मम्मी अपनी ज़िद पर अड़ी हुई थी।

मैं लगातार 3 दिन तक मम्मी को समझता रहा मगर वह नहीं मानी मैंने सोचा मम्मी ऐसे नहीं मानेगी मुझे कुछ और ही करना पड़ेगा अगली दिन जब मैं क्लासेज से वापस आया तो मम्मी ने गेट खोला आज मैंने मम्मी से कोई बात नहीं की और सीधा अपने कमरे में चला गया। Mummy ki chudai bete se

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आज मैंने खाना भी नहीं खाया मैं अपना कमरा बंद करके अंदर ही रहा और मैंने अपना एक बेग पैक कर लिया, शाम को 5 बजे जब मम्मी अपने कमरे से बहार आयी तभी मैं भी अपना बेग लेके बहार आया।

मेरे हाथो में बेग देखकर मम्मी मुझे देखने लगी और मैं जानता था वह मुझसे बेग के बारे में जरूर पूछेगी जैसे ही बेग लेके जैसे ही दरवाजे के पास पूछा मम्मी तुरंत मेरे सामने आ गयी।

मम्मी : ये बेग लेके कहा जा रहा है तू?

मैं : मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है मम्मी बस मुझे जाने दो।

मम्मी : मैं तेरी माँ हु मुझे नहीं बताएगा तो किसे बताएगा और तूने अपने पापा से पूछा।

मैं : मैं पापा से बाद में बात कर लूंगा मगर आप हटो मेरे रस्ते से।

मम्मी : बस मुझे ये बता दे की तू कहा जा रहा है।

मैं : मैं दिल्ली जा रहा हु और अब से वही रहूँगा।

मम्मी : ये दिल्ली जाने का प्लान कब बन गया तेरा और तूने मुझे बताया क्यों नहीं?

मैं : आपको बताके क्या होता? वैसे भी आपको तो खुस होना चाहिए अब आपको परेशां करने वाला कोई नहीं होगा और अब आप पापा के साथ खुस रहना, मम्मी समझ गयी की मैं क्यों जा रहा था कुछ देर वह मेरी आँखों में देखती रही फिर वह बोली।

मम्मी : बेटा मैं जानती हु तू क्यों जा रहा है? मगर तू समझता क्यों नहीं है? जो तू चाहता है वह नहीं हो सकता है।

मैं : मम्मी हमारे बीच जो होना था वह तो हो ही चूका है बस आप उसे मानना नहीं चाहती है अब हटो मेरे रस्ते से और जाने दो मुझे, मम्मी ने मेरे हाथो से बेग लेके साइड में रख दिया और वह मेरा हाथ पकड़ के मुझे सोफे पर ले गयी और उन्होंने मुझे सोफे पर बिठा दिया। Mummy ki chudai bete se

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मम्मी : बेटा तू समझता क्यों नहीं है जो तू चाह  रहा है वह मैं नहीं कर सकती हु हम दोनों माँ बेटे है और माँ बेटे में ऐसा रिश्ता नहीं बन सकता है।

मैं : मम्मी रिश्ता तो बन ही गया है बस आप ही नहीं मानना चाहती हो बस मुझे एक बात का जवाब दो उसके बाद मैं कुछ नहीं पूछूंगा, मैं बिलकुल मम्मी के साथ चिपक के बैठ गया और उनका हाथ अपने हाथो में ले लिया।

मैं : मम्मी सच सच बताना उस रात जो प्यार मैंने आपको दिया क्या आपको वह अच्छा नहीं लगा, मम्मी मेरी बात सुनके मुझसे नज़रे चुराने लगी।

मैं : मम्मी सच सच बताओ क्या पापा अब आपसे ऐसा प्यार करते है जैसे मैं करता हु मम्मी मेरी किसी बात का कोई जवाब नहीं दे रही थी मगर उनकी खामोश चीख चीख के कह रही थी की मैं जो बोल रहा हु वह सब सच है।

मैं : मम्मी पापा तो अब जयादातर बहार ही रहते है और हो सकता है वह बहार भी ये सब करते हो और आप यहाँ उनके बिना अकेली होती हो और अगर मैं आपको प्यार करना चाहता हु तो इसमें गलत क्या है?

मम्मी : बेटा हमारा रिश्ता माँ बेटे का है और यही सबसे बड़ा सच है। Mummy ki chudai bete se

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मैं : मम्मी अगर आप बहार किसी से रिश्ता बनाती हो तो वह भी आपको यही सुख देगा जो मैं दे रहा हु बस फरक इतना सा है की मैं आपका बेटा हु और मेरे साथ आपको कोई खतरा भी नहीं है और रही बात माँ बेटे होने की तो आपके सामने आते ही मेरा लंड क्यों खड़ा हो जाता है और मेरे छूने भर से आपकी चुत क्यों गीली जाती है मेरे मुँह से ऐसे खुले शब्द सुनके मम्मी मुझे देखने लगी।

मैं : मम्मी मैं आपको बहुत प्यार करता हु और हमेशा करता रहूँगा बस आपकी ये बेरुखी मुझे पागल कर देती है मैं आपको वह सारी खुसी देना चाहता हु जो अब पापा आपको नहीं देते है 

तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना ही अगले भाग मे बतऔगा।

इस कहानी का पिछला भाग पढ़ने के लिए:—>माँ की सालगिरह पर माँ की चुदाई की 2

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