By | May 27, 2023

Mummy ki chudai kahani: हैलो दोस्त, क्युकी दुनिया की सबसे हसीं औरत को मैं हासिल कर ही चूका था. अब बाकी मुझे कुछ नहीं चाहिए था.फिर सबने कपडे पहन लिए. इस बार मैं बहार नहीं नहाया. फिर हम लोग वहा से बहार आ गए.

मैं मम्मी के पीछे ही चल रहा था. और इस बार मेरा हाथ उनकी गांड पर ही था. जिसे मैं दबा रहा था. क्युकी अब मुझे उनसे कोई भी डर नहीं था. और ताजुब की बात ये थी की मम्मी ने भी एक बार भी पीछे मूड के नहीं देखा.

मैं पुरे रास्ते मम्मी के साथ मज़े लेता रहा. फिर हम सबने बहार नास्ता किया. और नास्ता करते हुए भी मम्मी मुझे ही देख रही थी.
फिर हम सब होटल आ गए अपना सामान लेने के लिए. आंटी और उनकी बेटी अपने कमरे में चली गयी.

Mummy ki chudai kahani:

मैं और मम्मी अपने कमरे में आ गए. कमरे में आते ही मैंने पहले दरवाजा बंद किया.और जैसे ही मैं पीछे मुड़ा. मम्मी मेरे पीछे ही खड़ी थी. मेरे मुड़ते ही उन्होंने मेरे गाल पर थप्पड़ की बरसात कर दी. मम्मी ने मुझे 3 थप्पड़ मारे.

मम्मी – ये जो सब हरकत तू बहार मेरे साथ कर रहा था. अगर उषा देख लेती तो क्या होता? मैंने तुझे अभी चलने से पहले समझाया था की ये सब बंद कर दे. मगर तू फिर भी नहीं सुन रहा है. मैंने मम्मी का हाथ पकड़ा. और उसे अपने गाल पर मारने लगा.

मैं -चाहे मेरे 10 थप्पड़ मार लो. और चाहे तो मेरी चमड़ी मार मार के निकाल दो. मगर अब मैं खुद को रोक नहीं पाउँगा. अब समझना आपको है.ये बात बोलके मैंने मम्मी के होंठों पर किश कर दिया.

मम्मी ने फिर से मुझे मारा. मगर मेरे ऊपर कोई फरक नहीं पड़ा.

मैंने मम्मी को दीवार से लगा दिया. और उनके होंठों को चूसने लगा. लगभग 2 -मिनट तक मैं मम्मी के होंठों को चूसता रहा. फिर मैं हट गया.

मम्मी भी जाके कपडे पाककरने लगी. कपडे पैक होते ही मैं मम्मी के पास फिर से गया. और इस बार उन्हें पीछे से पकड़ लिया. Mummy ki chudai kahani

मम्मी मुझसे चुतने की कोशिश कर रही थी. मगर वह नाकाम हो रही थी.

मैं मम्मी की चूचियों को उनके सूट के ऊपर से दबा रहा था. और वह मेरा हाथ हटा रही थी. मैं मम्मी की पीठ और गर्दन को चुम रहा था.

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फिर मैंने उन्हें सीधा किया. और उनके होंठों को चुम लिया. फिर हम लोग कमरे के बहार आ गए. और होटल से चेकआउट करके बहार आ गए. कार स्टैंड वहा से कुछ दूर था. तो हम लोग पैदल चलने लगे. फिर मैं कार लेके आ गया. और हम सब घर की तरफ चल पड़े. मैं मम्मी की तरफ ही देख रहा था.

मम्मी आंटी से बात करते हुए एक दम नार्मल थी.मगर सच तो ये था की अब मेरे और मम्मी के बीच सब बदल गया था. रस्ते में हमारे बीच कुछ नहीं हो सकता था. इसीलिए पूरे 5 घंटे कार चलाके हम लोग घर आ गए.

मम्मी ने आंटी को भी घर पर रोक लिया. और आंटी भी चाय पीने के लिए आ गयी. मम्मी चाय बनाने लगी. मैंने पापा को बता दिया की हम लोग आ गए. आंटी और मम्मी कुछ देर बाते करते रहे.

फिर आंटी चाय पिके निकल गयी. मम्मी ने दरवाजा बंद कर लिया. आंटी के जाते ही मैं कमरे से बहार आ गया. मम्मी चाय के कप लेके किचन में चली गयी. मैं भी किचन मैं आ गया. किचन में घुसते ही मम्मी ने मुझे देखा. मुझे देखकर वह फिर से काम में लग गयी. मगर मैंने उन्हें पीछे से जाके पकड़ लिया. मगर तभी मम्मी ने मुझे धक्का दे दिया.

फिर मम्मी ने मुझे मारना शुरू कर दिया. मम्मी के हाथ रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे. वह मेरे गालो पर हाथो पर और सर पर मार रही थी. मम्मी का रूप पूरी तरह बदल चूका था. Mummy ki chudai kahani

मम्मी – देख मैं तुझे आखिरी बार समझा रही हु. अगर तू अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आया. तो मुझसे बुरा कोई न होगा.
मम्मी का ये रूप देखकर मेरी गांड फट गयी. मुझे लगा था अब मैं मम्मी को बहुत चोदुगा.

मगर घर आते ही सब बदल गया. और इतनी मार खाने के बाद मेरी हिम्मत नहीं थी. मगर फिर मैं एक बार और कोशिश करना चाहता था. क्युकी मम्मी मुझे किसी भी हालत मैं चाहिए थी. उन्हें भूलना बहुत मुश्किल था. फिर मैं अपने कमरे में आ गया.

मैं लेट कर यही सोचने लगा की मम्मी शायद अभी के लिए ये बोल रही है. बाद में वह खुद मान जाएँगी. फिर मैं सो गया. शाम को उठा तो मैं बहार चला गया. फिर कुछ देर बाद वापस आया.फिर पापा भी घर आ गए. मम्मी पापा से बात करने लगी. मगर उन्होंने और कुछ नहीं कहा. फिर रात में हम सबने खाना खाया. और उसके बाद अपने अपने कमरे में चले गए रात को कुछ भी नहीं हो सकता था. इसीलिए मैं सो गया.

अगली सुबह मैं पापा के जाने का इंतज़ार करने लगा. और जैसे ही पापा गए. मैं सीधा मम्मी के पास गया. मम्मी बैडरूम में सफाई कर रही थी.

मैंने मम्मी को देखा. वह सिर्फ मैक्सी पहने हुए थी. मैं हलके हलके उनके पास गया. और इस बार मैंने सीधा उनकी चूचिया पकड़ ली. मगर इस बार भी वही हुआ. मम्मी ने अपनी पूरी ताकत लगा के मुझे हटा दिया.और दूर होते ही मेरे गाल पर थप्पड़ जड़ दिए.

मम्मी – तुझे मैंने कल समझाया था. मगर फिर भी तू अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है.

मैं – मगर मम्मी पहले तो आपने कुछ नहीं कहा था. तो अब क्या हो गया? हम दोनों कितने खुश थे एक दूसरे के साथ.

मम्मी – मैंने तुझे उस रात भी रोका था. मगर तू रुका नहीं. और तूने अपनी हवस को मिटा ही ली. मैंने इसीलिए तेरा साथ नहीं दिया. क्युकी मैं कभी तेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहती थी.

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मैं – मम्मी आप झूट बोल रही हो. इतना तो मैं भी आपको को समझता हु. क्युकी उस दिन जब मैं आपके साथ सेक्स कर रहा था. तो आप भी अंदर से यही चाह रही थी. इसीलिए आपने मुझे रोका नहीं. बस आप ये मानना नहीं चाहती है.

मम्मी – हा मैं ये नहीं मानना चाहती हु. क्युकी तू मेरा बेटा है. मैं तेरे पापा को धोका नहीं दे सकती हु.

मैं – मगर मम्मी पापा को तो कभी मालूम ही नहीं चलेगा की आप मेरे साथ ये सब करती हो.

मम्मी – चुप कर मैंने तुझे कह दिया सो कह दिया. आगे से मेरे पास भी मत आना. वरना मुझसे बुरा कोई न होगा.
मैं मम्मी को समझता रहा. मगर वह मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थी. मेरे तो दिमाग का दही हो गया था. क्युकी मेरा दिल और मेरा लंड मम्मी को ही मांग रहा था. मैं अपने कमरे में आ गया. अगले 2 दिन मम्मी और मेरी कोई बात नहीं हुई. यहाँ तक की वह मेरे पास तक नहीं आती थी. मगर अंदर ही अंदर मैं तड़प रहा था.

मैं मम्मी को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता था. और उसके लिए मैंने एक प्लान बनाया.मुझे मम्मी से बात किये 2 दिन हो गए थे. Mummy ki chudai kahani

फिर अगली सुबह मम्मी मेरे कमरे में नासता लेके आयी. उन्होंने नास्ते की प्लेट टेबल पर रख दी. मगर तभी मैं बोला.

मैं – मुझे नास्ता नहीं करना. ले जाओ इसे.

मम्मी -नास्ता यहाँ रखा है. खाना है तो खा वरना मत खा. मम्मी ये बोलके बहार निकल गयी. मैं अपने काम में लग गया.

फिर कुछ देर बाद मैं काम से बहार निकल गया. फिर सीधा दोपहर को घर आया. मम्मी और मेरे बीच कोई बात नहीं हो रही थी. इसीलिए मैं सीधा अपने कमरे में आ गया. फिर कुछ देर बाद मम्मी खाना लेके आयी. उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा. बस खाना रखकर चली गयी. मगर मैं भी अपनी माँ का बेटा था.

ज़िद तो मेरे अंदर भी बहुत थी. मैंने खाने की तरफ देखा तक नहीं और ऐसे ही सो गया. शाम को जब मेरी आँख खुली. तो मैंने देखा मम्मी खाने की प्लेट ले जा चुकी थी. भूख तो बहुत लग रही थी.

मगर मैं भी मम्मी को दिखाना चाहता था की ज़िद में मैं उनका बेटा हु. मैं अपने कमरे के बहार आ गया. मम्मी बहार बैठी टीवी देख रही थी. मैंने उनकी तरफ देखा. और बहार निकलने लगा. मगर तभी मम्मी बोली.

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मम्मी – क्या बात है तू खाना क्यों नहीं खा रहा है?

मैं – मुझे कुछ नहीं खाना है. मेरे लिए रात का भी खाना मत बनाना. मैं ये बात बोलके बहार निकल गया. और बहार जाके दोस्तों के साथ कुछ खा लिया. फिर रात को मैं घर आया. मम्मी ने जैसे ही गेट खोला. तो मैंने उनकी तरफ देखा. मगर अब मुझे उनकी आँखों में थोड़ी नमी दिखाई दी.

मम्मी हलके हलके पिगल रही थी. मेरे खाना न खाने से उन्हें भी अच्छा नहीं लग रहा था. और मेरा प्लान काम कर रहा था.
मैं सीधा अपने कमरे में आ गया. फिर कुछ देर बाद पापा भी आ गए. मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था. तभी पापा की आवाज आयी.

पापा – रवि चल बेटा खाना लग गया है आजा जल्दी से, पापा की आवाज सुनके मैं बहार गया. मैंने देखा मम्मी पापा के साथ बैठी है.

मैं – पापा मेरा पेट भरा हुआ है. मुझे बिलकुल भी भूख नहीं है.

पापा – मगर बेटा थोड़ा खाना तो खा ले. Mummy ki chudai kahani

मैं – पापा वह मैं दोस्तों के साथ गया था. तो वह मैंने छोले भठूरे खा लिए थे. आप लोग खा लो.

अपनी बात ख़तम होते ही मैंने मम्मी की तरफ देखा. उन्हें ये बताने के लिए की मैं झूट बोल रहा हु. मगर सच तो ये था की मैं खाना खा चूका था. मगर अब मम्मी यही सोच रही होगी.की उनका बेटा भूखा सो रहा है. मैं आके अपनी पढ़ाई में लग गया.

फिर कुछ देर बाद मम्मी दूध लेके मेरे पास आयी. और उन्होंने दूध मेरी टेबल पर रख दिया. और जाते जाते मेरे सर पर हाथ फेरकर बोली.

मम्मी – बेटा दूध पि लेना.मम्मी ये बोलके निकल गयी. मैंने दूध वैसे ही रखे रहने दिया. और कुछ देर पढ़ाई करके मैं भी सो गया. सुबह जब मेरी आँख खुली तो कमरे से दूध का गिलास गायब था.यानी मम्मी आके दूध ले गयी थी.

फिर मैं बहार आया. तब तक पापा जा चुके थे. फिर मैं भी फ्रेश होने लगा. और इससे पहले मम्मी मेरे लिए नास्ता लेके आती.

मैं घर से निकल गया.मम्मी से मेरी कोई भी बात नहीं हो रही थी. फिर बहार जाके मैंने हल्का फुल्का कुछ खा लिया.

फिर मैं अपने दोस्त के घर चला गया. फिर वहा से मैं सीधा दोपहर को घर आया. मैंने घंटी बजायी तो मम्मी ने गेट खोला.

मैं उनकी तरफ देखे बिना अपने कमरे में चला गया. कमरे मैं आके में अंडरवियर और बनियान में बैठ गया. कुछ देर बाद मम्मी खाने की प्लेट लेके आयी.

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मैंने मम्मी की तरफ देखा. और अब मुझे उनकी आँखों में वह गुस्सा नहीं दिख रहा था. जो पहले मैंने देखा था. मम्मी की तरफ देखकर. मैं फिर आपने काम करने लगा. मम्मी ने खाने की प्लेट मेरे सामने रख दी.

मैं – मुझे खाना नहीं खाना है. आप ले जाओ इसे.

मम्मी – ये क्या ड्रामा लगा रखा है तूने. खाने पर आपने गुस्सा मत निकल. मैं जानती हु तूने खाना नहीं खाया है. तू नाराज मुझसे है. मगर कम से कम खाना तो खा ले.

मैं – मम्मी मुझे कुछ नहीं चाहिए. आप ये खाना ले जाओ.

मम्मी – बेटा तू समझता क्यों नहीं है? जो तू चाहा रहा है. वह सही नहीं है.

मैं – मम्मी जो होना था. वह तो हो ही चूका है. मैं ये भी जनता हु की आप भले ही ये न मानो. मगर अपने भी उस पल का बहुत आनद उठाया था. बस आप ये बात मानना नहीं चाहती है.

मम्मी – बेटा जो हुआ उसे एक गलती समझ के भूल जाओ. तू मेरा बेटा है. और एक माँ बेटे में ऐसे रिश्ता नहीं होता है.

मैं – मम्मी ये तो सिर्फ सोचने का नजरिया है. अगर मेरी जगह आपका यही रिश्ता. आपने देवर के साथ बना होता. तो क्या आप एन्जॉय नहीं करती. मगर मैं आपका बेटा हु. इसीलिए आप ये सब कह रहे हो.

मम्मी मेरी बातो के बारे में सोचने लगी. और आज पहली बार वह बिना गुस्से के मेरे साथ बैठी थी.

मम्मी -बेटा प्लीज वह सब भूल जा. मैं भी वह सब भूलना चाहती हु. Mummy ki chudai kahani

मैं – मम्मी अगर वह सब गलत होता. तो मैं भी उसे भूल जाता. मगर सच तो ये है की मैंने और अपने उस पल का मज़ा लिया है. और वह पल मेरी ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है.

जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा. वैसे मम्मी बस एक बार आप मेरी कसम खाके कह दो की आपको वह सब अच्छा नहीं लगा था. मैं फिर आपसे कभी ये बात नहीं बोलूंगा. मैंने मम्मी का हाथ पकड़ के अपने सर पर रख दिया. मगर मम्मी ने अपना हाथ हटा लिया. क्युकी कही न कही. उन्होंने भी मेरी चुत और गांड चटाई का मज़ा लिया था.

मैं – क्या हुआ मम्मी खाओ न मेरी कसम? और एक बार कह दो की आपको वह सब अच्छा नहीं लगा था. मम्मी कमरे से उठके जाने लगी. मगर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया. मम्मी ने मुझे देखा. फिर मैं भी खड़ा हो गया.

मैं – मैं जनता हु मम्मी आप मेरी झूटी कसम नहीं खा पाओगी. क्युकी आप मुझसे बहुत प्यार करती हो.

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मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हु. बस फरक इतना सा है की मैं आपको एक मर्द की तरह भी प्यार करना चाहता हु. मैंने मम्मी का मुँह पकड़ा. और उनके होंठों को अपने मुँह में लेके चूसने लगा. मम्मी ने मुझे कुछ नहीं कहा. वह वैसे ही खड़ी हुई थी. मैंने 1 मिनट तक उनके होंठों को चूसा. मगर वह वैसे ही खड़ी हुई थी. उन्होंने कुछ भी नहीं किया.

फिर मैंने मम्मी को बेड पर बिठा दिया. और रोटी का एक कौर बनके उन्हें खिलाने लगा.

मैं -लो मम्मी आप भी खाना खा लो. मैं जनता हु अपने भी कुछ नहीं खाया है. जैसे आप मुझे अच्छे से जानती हो. वैसे मैं भी आपको जनता हु. और यही हम दोनों का प्यार है. इसीलिए मैं आपकी उस जरुरत को भी जनता हु. जो शायद आप किसी से कभी नहीं कहती.
मम्मी ने मेरे हाथ से खा लिया. फिर उन्होंने अपने हाथ से मुझे खाना खिलाया. और ऐसे ही हम दोनों ने एक दूसरे को पूरा खाना खिला दिया. खाना खाने के बाद मम्मी किचन में चली गयी.

मैं भी उनके पीछे पीछे किचन में चला गया. मम्मी बर्तन रख रही थी. तभी मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया. और उनकी गर्दन को चूमने लगा. तभी मम्मी बोली.

मम्मी – बेटा ये सही नहीं है. अगर किसी को पता चल गया. तो हम दोनों किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.

मैं – मम्मी हमारा रिश्ता तो उस होटल के कमरे से ही बदल गया था. और अभी तक तो मैं कई बार आपको प्यार कर चूका हु. हमारा रिश्ता सिर्फ इस चार दीवारी में अलग है. बाकी दुनिया की नज़र में आप मेरी मम्मी ही हो.

मम्मी – बेटा मुझे डर लग रहा है.

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मैं – मम्मी डरने की जरुरत नहीं है. हम दोनों पर किसी को शक नहीं होगा. बस आप डरो मत. मैं और आप मिलके सब संभाल लेंगे. बस अब आप खुल के वह करो जो आप मन ही मन कर रही थी.

मेरी बात सुनके मम्मी नीचे देखने लगी. मैंने उनका चेरा ऊपर किया. तो मैंने देखा उन्होंने अपनी आँखे नीचे कर ली थी. मैंने अपने होंठ मम्मी के होंठों से लगा दिए.और अब मैं उनके होंठों को चूसने लगा. मम्मी वैसे ही खड़ी हुई थी.

फिर मैं मम्मी के होंठों को चूसते हुए. अपने हाथो को उनकी गांड पर ले गया. फिर मैंने दोनों हाथो से उनकी गांड को दबा दिया.जैसे ही मैंने मम्मी की गांड को दबाया. मम्मी ने अपने हाथो को मेरे सीने पर रख दिया. Mummy ki chudai kahani

मम्मी की गांड को पकड़ के उन्हें ऊपर उठा लिया. और उनकी दोनों टांगो को अपनी कमर में डाल लिया. अब मम्मी ने अपनी बाहो का मेरे गले में डाल लिया. मैं मम्मी के होंठों को चूसते हुए. उन्हें बहार ले आया किचन से बहार आते ही मम्मी ने मुँह पीछे कर लिया.
मुझे अपनी आँखों से दरवाजे की तरफ इशारा किया. मैं समझ गया की मम्मी मुझे दरवाजा चेक करने के लिए कह रही है. मैं मम्मी को उठाये उठाये ही दरवाजे के पास ले गया.मम्मी ने खुद ही ऊपर वाली चटकनी बंद कर दी. मम्मी मेरी आँखों में ही देख रही थी. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे देख रह थे. जैसे हम दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड हो.
मेरे दोनों हाथ लगातार मम्मी की गांड को दबा रहे थे. और वह भी मेरी गोदी में चिपकी हुई थी. मैंने मम्मी के होंठों को फिर से अपने मुँह में भर लिया. मैं फिर से मम्मी के होंठों को चूसने लगा.

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मैं मम्मी के होंठ चूसते हुए. उन्हें उनके ही बैडरूम में ले जाने लगा. मम्मी अब थोड़ी थोड़ी खुल चुकी थी. वह पूरी तरह मेरा साथ तो नहीं दे रही थी. मगर अंदर ही अंदर उनकी जीभ भी मेरी जीभ के साथ खेल रही थी.

बैडरूम में जाके मैंने मम्मी को बेड पर बिठा दिया. और उनकी कुर्ती को निकालने लगा. मम्मी मुझे ही देख रही थी. मगर इस बार वह कुछ नहीं कह रही थी. और न ही मुझे रोक रही थी.बल्कि इस बार तो उन्होंने खुद अपने हाथ ऊपर करके. मुझे कुर्ती निकलने में मदद की. कुर्ती निकलते ही नीली ब्रा में मम्मी की बड़ी बड़ी चूचिया मेरे सामने थी.

मैंने जल्दी से मम्मी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया.और उन्हें दबाने लगा. फिर मैं आगे झुककर मम्मी की चूचियों की लाइन को चाटने लगा. मम्मी ने अपना मुँह ऊपर कर लिया. मैं उनकी चूचिया दबाते हुए. पूरी लाइन को चाट गया. मम्मी की चूचिया पूरी गीली हो चुकी थी. तभी मैंने अपनी बनियान निकाल दी. फिर मैं जाके मम्मी के पीछे बैठ गया.

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फिर मैंने अपने दोनों हाथ मम्मी के हाथो के नीचे से निकाले. फिर से उनकी चूचियों को पकड़ लिया. मैं मम्मी की चूचिया मसलते हुए. उनकी पीठ को चूमने लगा. मेरी जीभ मम्मी की पीठ और गर्दन पर चल रही थी.

मम्मी आँखें बंद किये. तेज तेज सांस ले रही थी. फिर मैंने मम्मी की ब्रा को नीचे कर दिया. मम्मी की चूचिया बहार निकल आयी. मैंने दोनों चूचियों के निप्पल को पकड़ लिया. और उन्हें मसलने लगा.

मम्मी को भी मज़ा आ रहा था.और उनके हाथ भी मेरे हाथो के ऊपर आ गए. मगर मैंने अपने हाथ नहीं रोके. बल्कि और भी जयादा उनके निप्पल और चूचियों को मसलने लगा. मेरा खड़ा लंड भी मम्मी के पीछे दस्तक दे रहा था.

मम्मी अब गरम हो चुकी थी. फिर मैंने मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया. और उसे निकालने लगा. मगर मुझसे पहले ही मम्मी ने खुद ब्रा को निकल दिया. फिर मैंने मम्मी का मुँह पीछे किया.और एक बार फिर से उनके होंठों को चूसने लगा. मम्मी भी अब थोड़ा थोड़ा मेरे होंठों को चूस रही थी. मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लग रहा था.

मैं एक हाथ से उनकी चुकी दबा रहा था.और दूसरे हाथ को मैंने उनकी सलवार में डाल दिया. मेरा हाथ चुत पर लगते ही मुझे मम्मी की चुत का गीलापन महसूस हो गया. बल्कि उनकी चुत मेरी उम्मीद से कही जयादा ही गीली थी. मैं मम्मी के होंठों को चूसते हुए. उनकी चुचि और चुत को मसल रहा था. मम्मी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी.

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हम दोनों 2 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे.और इस बार तो मम्मी ने भी काफी हद तक मेरा साथ दिया. फिर मैंने मम्मी की सलवार का नाडा खोल दिया. और उनकी सलवार को ढीला कर दिया.

फिर मैं मम्मी के पीछे से उठ गया.मेरे उठते ही मम्मी की नज़र मेरे खड़े लंड पर गयी. जो अंडरवियर में तम्बू बनाये खड़ा था. फिर मैं मम्मी के पैरो के पास आ गया. और उनकी चूचियों पर हाथ रखकर उन्हें लिटा दिया. Mummy ki chudai kahani
फिर मैंने मम्मी की सलवार पकड़ी. और उसे निकालने लगा. मम्मी ने कुछ भी नहीं कहा. मैंने बड़े ही आराम से मम्मी की सलवार निकाल दी. मुझे सामने जन्नत दिखने लगी.

मम्मी के पैर चिपके हुए थे. इसीलिए उनकी चुत भी बंद थी. मगर वह दिखने में बहुत ही सुन्दर लग रही थी. फिर मैं नीचे झुका और मम्मी के पैर को चूमने लगा. मेरी जीभ मम्मी के पैरो पर घूम रही थी.

मम्मी को हलकी हलकी गुदगुदी हो रही थी. मैंने मम्मी के पैर का अंगूठा मुँह में ले लिया. और उसे चूसने लगा. जैसे ही मैं अंगूठा चूसने लगा. मम्मी को भी मज़ा आने लगा.

मैंने एक एक करके मम्मी के सारे पैर की उंगलिया चूस डाली. और इससे मम्मी काफी खुस दिख रही थी. मम्मी के दोनों पैर चूस के मैं मम्मी की जांघो पर आ गया. मेरा एक हाथ उनकी जांघो को सेहला रहा था.और मेरी जीभ मम्मी की जांघो को चाट रही थी. मम्मी की जांघो को चाट ते हुए. मैं मम्मी की चुत के पास आ गया.

मैंने मम्मी की टाँगे फैला दी. टांगो के खुलते ही जन्नत का दरवाजा भी खुल गया.फिर मैंने अपनी नाक मम्मी की चुत पर लगा दी. और उनकी चुत से आने वाली खुसबू सूंघने लगा. मेरी नाक मम्मी की चुत के दाने से छू रही थी.

जिससे मम्मी को और भी जयादा मज़ा आ रहा था. फिर मैंने अपनी जीभ निकाली. और उसे मम्मी की चुत के साइड में लगा दी. अब मैं मम्मी की चुत के आस पास चाट रहा था.

मैंने इसके बारे में पड़ा था की चुत के साइड में चाटने से औरते और जयादा गरम हो जाती है.और इसका असर मुझे जल्द ही दिखने लगा. मम्मी अपने होंठों को काट रही थी. और उन्हें ऐसा देखकर मुझे बहुत खुसी मिल रही थी. मैंने मम्मी की चुत की साइड को चाट चाट के गिला कर दिया था.

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फिर मैंने मम्मी की जांघो को पकड़ के थोड़ा ऊपर उठा दिया. मम्मी की गांड का वह भूरा छेद मुझे दिखने लगा. जो देखने में ऐसा लग रहा था. जैसे वह साँसे ले रहा हो.वह थोड़ा खुलता और फिर से बंद हो जाता. फिर मैंने अपनी जीभ मम्मी की गांड के छेद पर लगा दी. और उस खुलते बंद होते छेद को चाटने लगा.

मैं अपनी जीभ गांड के छेद से लेके चुत तक चला रहा था.मुझे चुत और गांड दोनों का स्वाद मिल रहा था. मेरे चुत और गांड को चाट ते ही मम्मी ने तकिया को पकड़ लिया. और वह आहे भरने लगी. मम्मी की चुत का निकलता पानी मेरे मुँह में आ रहा था.फिर मैंने अपनी ऊँगली मम्मी की चुत में डाल दी. और उनकी चुत को चाट ते हुए. मैं ऊँगली अंदर बहार करने लगा. मम्मी मोअन कर रही थी. मम्मी को जल्दी ही चरमसुख मिलने वाला था.

मेरी जीभ मम्मी की चुत पर चल रही थी. और मेरी एक ऊँगली उनकी चुत के अंदर थी. और दूसरे हाथ से मैं उनकी चुचि को मसल रहा था. अब मम्मी अपनी कमर को इधर उधर जयादा कर रही थी.और कुछ ही देर बाद मम्मी का पानी निकल गया. और जैसे ही उनका पानी निकला. मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ लिया. जो उनकी चुत में चल रहा था. Mummy ki chudai kahani


तो दोस्तो आपको कैसी लगी ये कहानी, आगे क्या हुआ ये मैं आपको अगले भाग 3 मे बतौयाग।

इस कहानी का पिछला भाग पढ़ने के लिए:—> ट्रिप पर निकाली मम्मी की चुदाई की हवस

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