By | January 26, 2023

Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani: हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब , तो दोस्तो जो भी ये भाग  पहली बार पढ़ रहे हो उनसे कहूंगा की वह भाग 1 से पढे ताकि कहानी का पूरा मज़ा ले सके. आप अपनी ओपिनियन मुझे कमेंट कर दे सकते दे सकते है,

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सबको मेरा बहुत बहुत थैंक्स मेरी स्टोरी को पढ़ने के लिए. आज का एपिसोड भाग 5 का अगला हिस्सा है जिसमे शोभा आकाश के लिए लाइव सेक्स शो का खेल खेलती है.

जो भी ये एपिसोड पहली बार पढ़ रहा हो उनसे कहूंगा की आप पहेले एपिसोड से ही पढ़े ताकि आप लोगो को कहानी ठीक से समझ भी और मज़ा भी ए.

भाग  6: शोभा का लाइव शो खेल शुरुनर्राटेड बी शोभाहेल्लो मैं शोभा और बताने की तो ज़रूरत नहीं आप लोगो को की मैं कौन हूँ. हाँ मैं शोभा आकाश की भाभी. आज का एपिसोड मैं अपने तरफ से ही बताउंगी आपको और ये क्यों ये आपको पढ़ने पर समझ आ ही जायेगा. जैसा की आपने पढ़ा की किश तरह से मैं आकाश को छोटे कपडे पहन कर लुभाती हु.उससे अपने टाँगो की मालिश करवाती हूँ. बताती हूँ की किस तरह से वह आज शाम मुझे और उसके भैया राकेश को चुदाई करते देख सकता है. तो चलिए आगे बताती हूँ.शाम के 6 बज रहे थे और राकेश 7 बजे तक घर आने वाले थे.

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और हमारे देवर जी आकाश तो अब भी सोये हुए ही थे. तो मैंने उसका डोर खटखटायी.मैं: आकाश? आकाश? उठो. 6 बज गए.अंदर से तभी ऐसी आवाज़ आयी मनो वह बेड से ज़मीन पर कूद गया हो. जिससे सुन मैं मन  ही मन  हस्स पड़ी.आकाश अंदर से: हाँ हाँ भाभी आया.तुरंत उसने डोर ओपन किया और मुझे देख बोला: टाइम का पता ही नहीं चला.मैं: कोई बात नहीं. उनके आने में 1 घंटा और है.आकाश: उफ़ ओके. अब?

मैं: ओके अब पहले मुझे राकेश को फ़ोन करने दो.इतना कहती हुई में मुड़ी और लिविंग रूम को धीरे धीरे चलती हुई फ़ोन पर राकेश का नंबर लगाने लगी. साफ़ महसूस हो रही थी की आकाश अपने नींद से खुली आँखों से मुझे पीछे से निहार रहा है.तभी आकाश ने पुछा: भाभी अगर भैया के आने में टाइम है तो क्या मैं जल्दी से नाहा लू? Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

इतने में राकेश ने उधर फ़ोन उठाया तो मैं झट से मुड़ी और आकाश को अपने होंटो पर ऊँगली रख इशारा की की चुप रहे.(राकेश): हेलो शोभा क्या हुआ?मैं: तुम कब तक आओगे?(राकेश): क्यों क्या हुआ? है है है! मेरा भाई आते ही परेशान कर दिया क्या?मैं: अरे नहीं वह तो किसी फ्रेंड के यहाँ गया है.(राकेश): ओहो आते ही फ्रेंड्स के यहाँ पहुँच गया?मैं: अरे नहीं वह उसका कल बतम ले आउट के पास किसी कंपनी में इंटरव्यू है.

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तो इंटरव्यू सुबह सुबह है तो यू क्नोव न बतम कितना दूर है तो मैंने ही उससे सुझाव दी की वह अगर वहीँ से इंटरव्यू के लिए जाये तो अच्छा होगा. वरना यहाँ से वहां पहुँचते पहुँचते ट्रैफिक में उसकी आधी कॉन्फिडेंस निकल जाएगी.इतना कहती हुई मुस्कुरा कर मैं आकाश जो मेरी बाते सुन चुप चाप सामने खड़ा था उससे आँख मार दी.मैं: और फिर आकाश ने कहा की उसका कोई फ्रेंड रूम लेकर रहता है वहां तो वह वहीँ जाकर रुकेगा आज.(राकेश): वाओ नॉट बाद तुम दोनों काफी घुल मिल गए हो. अच्छी बात है.मैं: पर अब मैं अकेली हूँ न और वह अच्छी बात नहीं है क्यों की तुम ऑफिस में हो.

ऊपर से तुम कल जा रहे हो. हम्म्म्म.ये बोलते ही मैं आकाश को देख अपनी होंटो को काट ली.(राकेश): ऐसा है तो जस्ट वेट मेरी जान. बस निकल ही रहा हूँ. थोड़ा टाइम दो मुझे आने का .मैं: ओके जान ऍम वेटिंग फॉर यू. बाई(राकेश): बाई हनी बे रेडी.मैं: ओके!इतना कहती हुई मैं फ़ोन काटी तो सामने से आकाश ने इशारे में पुछा की फ़ोन कट हुआ की नहीं? जिस पर मैंने उससे एक ज़ोर की यस बोला.आकाश: वाह भाभी वाह!!

क्या कहानी बनायीं मेरी इंटरव्यू? मेरा फ्रेंड? ट्रैफिक? कोनसा इंटरव्यू? कोनसा फ्रेंड? है है है!मैं: है है है! अरे ये सब तो मेरे बाए हाथ का खेल है.आकाश: मान गए उस्ताद.मैं हसने लगी उसकी बात सुन और बोली: देख अब टाइम नहीं जैसा मैं बोलूंगी वैसा करोगे तो सब अच्छे से होगा. तेरे भैया कुछ भी नहीं तो इस शाम की ट्रैफिक में बस 10 मिनट ही जल्दी आ सकते है तो हमारे पास 30 से 40 मिनट है. और तुम्हे नहाना है न जल्दी से फटा फट नाहा लो क्यों की उसके आने के बाद तुम्हारे कमरे से तुम्हारी सांस लेने की भी आवाज़ नहीं आणि चाहिए.

आकाश: ओके भाभी जैसा आप कहो.मैं: ओके ठीक है जल्दी. मैं भी नाहा लेती हूँ. वरना वह आते ही मुझे उठा ले जायेंगे साथ में नहाने.आकाश: है है है! ओके भाभी.आकाश अपने कमरे को भगा ऐसा उतावला था मानो किसी बच्चे को मेला दिखने ले जा रहे हो. उसके बाद में आराम से नहाने गयी अपने रूम. नहाते वक़्त शाम की चुदाई के बारे में सोच मुझे अपनी चूत में ऊँगली करने की बहुत मन होने.पर फिर खुद को रोकली की जितना इंतज़ार करुँगी उतनी ही मस्ती आएगी बाद में चुदवाने में. और फिर अच्छे से साबुन मल कर हर जगह अच्छे से रगड़ कर साफ़ करने के बाद एक 20 मिनट में मैं बहार निकली.मेरे बदन पर न कोई टॉवल था न कुछ.मस्ती में अपने कमरे में नंगी ही चल रही थी. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

और खुद को आईने में देख निहार रही थी. और मुस्कुराती हुई खुदसे मैं ही मैं कह रही थी की आज तो काफी मज़ा आने वाला है जब एक भाई मुझे कई बार चोदेगा और दूसरा भाई उसी वक़्त मुझे चचुदते  देखेगा.और मुझे राकेश का भी एक बात पता थी जो मेरे इस खेल को और भी मज़ेदार करने वाली थी. इसके बाद मैं एक मस्त सी छोटी सी एक नाईट ड्रेस निकाली और उससे देखने लगी. देखने में बिलकुल काली पारदर्शी और सामने से खुली हुई सिर्फ एक धागा चुकी के हिस्से के पास बांधने के लिए.पर फिर सोची की नहीं.अगर पहले ही ऐसे अधनंगी रही तो राकेश को मुझे नंगी करने की ज़रुरत पड़ेगी नहीं.

 क्यों की मुझे जब राकेश पुरे कपड़ो में कपडे उठा कर चोदता है तो ज़्यादा मज़ा आता है. तो फिर उससे वापस रखी और फिर काली रंग की एक साटन की लम्बी गाउन निकली जो एक तरफ से घुटने तक कटी हुई थी.फिर मैं उससे पहन कर बहार निकली. बहार निकल कर देखि तो आकाश कबका सामने लिविंग में ही सोफे पर बैठा हुआ मेरे डोर के खुलने का इंतज़ार कर रहा था. मुझे अपनी काली लम्बी गाउन में देख वह मुझे निहारने लगा.

उससे मुझे ऐसे मेरी गाउन में गीले बालो में देख निहारते हुए मुझे अच्छी तो लगी.पर ज़ाहिर न करते हुए उस पर झूट मुठ के गुस्से में बोली: ऐसे क्या यहाँ बैठे हो? पागल हो क्या?आकाश: सोचा एक बार आपको देख लू अपने रूम में छुपने से पहले.मैंने उससे दिवार पर घडी को इशारा करती हुई बोली: देखो टाइम क्या हुआ. बोली थी न राकेश किसी भी टाइम आ जायेगा?आकाश हसने लगा और बोला: है है है! इतना डर?मैं: डर मुझे नहीं नुक्सान भी नहीं. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

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तुम्हे ही नुक्सान होगा सोच लो. इतने में ऐसी आवाज़ महसूस हुई हम दोनों को की कोई मेरे घर के दरवाज़े के सामने चलता आ रहा है. और हम दोनों शांत हो गए.इतने में डोर बेल्ल बजी और आकाश के चेहरे का रंग उड़ गया और मैं उससे धीरे से बोली: इडियट देखा शहहह जाओ अपने रूम.और फिर आकाश उठ कर अपने रूम को जाने लगा तब मैं बोली: अंदर जाओ पर डोर लॉक मत करना वरना बाद में लॉक खुलने की आवाज़ से उससे पता चल जायेगा. हुआ तो बेड के नीचे घुस जाओ अभी और हाँ लाइट ऑफ करलो. लाइट पंखा सब.आकाश: ओके भाभी सी यू इन थे लाइव शो.

मैं: अब जाओ.इसपर एक और घंटी बजी.जब आकाश अपने रूम घुस कर लाइट वगेरा बंद करके छुप गया तो मैं जाकर जल्दी से डोर को ओपन की. डोर को ओपन करते ही सामने राकेश हाथ में कुछ फूल और दुसरे हाथ में एक बोतल वाइन लेकर मुझे मुस्कुराते हुए देखा और बोलै: हेलो ब्यूटीफुल? अरे यू अलोन?तो इसपर मैं भी उसके डायलॉग में साथ देती हुई आंख मारते हुए बोली: हाँ मैं अकेली हूँ क्यों? क्यों पूछे? हु अरे यू? है है है!हम दोनों को प्यार में ऐसी छोटी मोटी मज़ाकिया बाते करने में काफी मज़ा आता था.राकेश भी तब मेरी डायलाग का साथ देते हुए बोला : आपके पति देव घर पर नहीं है क्या?

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मैं: जी नहीं वह तो काम में काफी बिजी है.हमेशा से ऐसे ही है और कल कही बहार भी जा रहे है. मुझ बेचारी को यहाँ छोड़ कर.राकेश: आप उदास न हो मैडम मैं आपकी सर्विस में हाज़िर हूँ.हम दोनों फिर ज़ोर से हसने लगे. वह अंदर आकर मुझे गले से लगाते हुए कहा: क्या सच मे तुम्हारा पति तुम्हे टाइम नहीं देता?

मैं: हाँ देखो न कितना टाइम वेट करवाया?इस पर उसने मुझे अपने से चिपकते हुए ज़ोर से किश कर डाला. सच बोलू तो राकेश इस वैरी गुड किसर. उसकी होंठ मेरे होंटो को अपने से चिपकते हुए मोड़ने मरोड़ने लगा और साथ ही हमारे जीभ एक दूसरे से लपलपाने. और तभी उसका हाथ मेरी गाउन के ऊपर मेरी कमर से होते हुए मेरी गांड के ऊपर सहलाने लगा.और इस पर उससे कुछ पता चला और किश तोड़ते हुए उसने कहा: आपके पति इतने बुरे है क्या की आपको एक पैंटी भी नहीं खरीद के देते.मेरी मुलायम साटन की गाउन के ऊपर से मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए राकेश समझ गया की मैंने अंदर कोई पैंटी नहीं पहनी है.इस पर मैं भी बोली: हाँ पैंटी तो क्या ब्रा भी नहीं खरीद कर देता देखना. इतना कहती हुई मैं अपने गाउन के गले के नीचे आँखों से इशारा करती हुई उससे देखने को बोली.उसने मेरे गाउन से नीचे देखा और फिर मुझे देख मुस्कुराते हुए बोलै: वे अरे सो माध. हम कितने पागल है. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

मैं: हाँ जान और मैं तुम्हारे लिए और तुमसे… (इतना कह में चुप होकर शर्माने लगी)राकेश: और? बोलो?और वहीँ मैं ये कहती हुई आंख मारी और उसका हाथ छुड़ा कर उससे पीछे हाथ कर पीछे को चलने लगी धीरे धीरे. वह भी मेरे तरफ हाथ में वाइन की बोतल पकड़ कर दूसरे हाथ से फूलो को फेकते हुआ बोला: और? और – और बोलो.मैं जानती थी की आकाश हमारी सारी बातो को अपने रूम में छुपा सुन रहा है.

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और इसी लिए और थोड़ी ज़ोर से मैं बोली: और और और में पागल हूँ तुमसे चुदवाने के लिए है है है!राकेश वाइन की बोतल सोफे पर फेक मेरे पास दौड़ते हुए आया. मैं चाहती तो भाग सकती थी. लेकिन रुकी रही की वह आकर मुझे पकडे और ऐसा ही हुआ. वह मेरे पास आकर मुझे पकड़ा. और ठीक आकाश के कमरे के डोर के पास के दिवार पर लगा कर मेरी हाथो को पकड़ मुझे मुदाय.मेरे बालो को ज़ोर से पकड़ मुझसे बोला: बाद वाइफ. यू अरे बाद सेक्सी वाइफ. कितनी पागल हो चुदवाने के लिए.और इतना कहते हुए अपने दूसरे हाथ से मेरी गांड पर गाउन के ऊपर से चमत मारने लगा.मैं: आह! आह! नहीं! मैं अच्छी बीवी हूँ और एक अच्छी सती  सावित्री. मुझे छोड़ दो. है है है!राकेश: पर आज तुझे मैं एक रंडी के तरह चोदने वाला हूँ मेरी सावित्री पत्नी के तरह नहीं.राकेश को पता था की मुझे उसके मुँह से प्यार करते वक़्त गन्दी बाते सुन्ना पसंद है.

तो साथ देती हुई और आकाश को सुनती हुई बोली.मैं: तो मैं भी अपने पति को भूल कर आपसे एक बर्बाद रंडी की तरह चुदवाना चाहती हूँ.राकेश इसपर मेरी गांड पर चमत मारते हुए बोला: चल जा रंडी छोड़ देता हूँ तुझे पांच मिनट के लिए.इतना कहते हुए उसने मुझे अपने हाथो से आज़ाद किया और बोला: में ये पैंट शर्ट निकल कर आता हूँ जान. फिर खेलेंगे तेरी रंडी बीवी वाला खेल है है है!मैं वहीँ आकाश के दूर के पास खड़ी रही और राकेश को अपने शर्ट के बटन खोलते हुए हमारे कमरे में जाते हुए देखा. राकेश के कमरे में जाते ही देख मैं आकाश के कमरे का दूर जो उसने बंद नहीं किया था. उससे हलके से खोल कर देखा. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

अँधेरे में लिविंग रूम से जाती रौशनी में आकाश के बेड के नीचे से एक हाथ दिखा. और देखि तो वह नीचे से मुझे हाथो से इशारा कर रह था की वह नीचे है. मैंने भी ठूंस-उप का इशारा की की सब प्लान के हिसाब से है.और डोर आधा खुला रख कर किचन को चली गयी.किचन मे जाकर फ़ोन निकाला और पास की एक बिरियानी सेंटर से 3 चिकन बिरियानी पार्सल मंगवाई. वैसे भी राकेश तो मुझे कुछ बनाने देगा नहीं आज तो आर्डर तो करना ही पड़ेगा. जैसे ही मैं फ़ोन रखा तो देखा राकेश हमारे कमरे से निकला.मुझे किचन में देख मेरी तरफ बढ़ने लगा. पर बात बस इतनी थी की अब वह पूरा नंगा अपने लंड को झूलते हुए मेरी तरफ आ रहा था. किचन में आते ही उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और पीछे से गले लगते हुए बोला: अब बताओ जान तुम क्या ख़ास बना रही हो हमारे लिए?उसका तना हुआ लंड पीछे से मेरी गाउन के ऊपर से मेरी गांड की दरार पर रगड़ रहा था. और इस मस्ती में मैं बोली: कुछ ख़ास बना नहीं रही पर आज कुछ खास ज़रूर है.राकेश: क्या ख़ास है बोलो?मैं आकाश के कमरे से अपना मुँह छुपाते हुए राकेश को धीरे से बोली: धीरे बोलो.

राकेश तब भी उसी आवाज़ में बोला: क्या? क्या धीरे?मैं तब अपना सर मूडा कर राकेश के कान के पास बोली: शहहह वे अरे हम अकेले नहीं है .राकेश मुझे देखने लगा और फिर घर के इधर उधर देखने लगा. तब मैंने हलके से उसके गाल को पकड़ अपने तरफ कर के बोली: शहहह मैंने कहा हम अकेले नहीं है.इस पर राकेश भी समझ गया की मैं सीरियस हूँ और मुझे पीछे से गले लगते हुआ बोला: क्या कह रही हो मुझे समझ नहीं आया.तो मैं भी बिना हरकत किये हुए उससे धीमी आवाज़ में बोली: तुम्हे अच्छा लगता हैना जब कोई हमे छुप छुप कर चुदते देखे.राकेश: हम्म्म हाँ.मैं: आकाश कही नहीं गया है. यही है अपने रूम में.राकेश: क्या?मैं: शठ! उससे नहीं पता की मैंने तुम्हे ये बात बताई है.अभी तो फिर मज़े लेते है न. बोलो?राकेश कुछ सेकंड सोचा और फिर उसके मुँह पर मुस्कान आ गयी और बोला: पर वह मेरा भाई है. कही किसी से कुछ बोला.मैं: पर मैंने उससे इस तरह ट्रैन किया एक दिन में की वह कुछ भी बहार नहीं बोलेगा. ये मुझ पर छोड़ दो. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

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 और फिर शालिनी भी तो मेरी बहिन है जिसे दिखा कर मुझे छोड़ने में तुम्हे मज़ा आता है.इसपर राकेश ने मुझे अपने तरफ पलटा और फिर ज़ोर से किश कर डाला. मुझे पता था की मैं क्या खेल खेल रही हूँ.एक तरफ एक भाई को उसके छोटे भाई के सामने चोदने के लिए मनाया. और वहीँ छोटे भाई को मुझे उसके बड़े भाई से छुप छुप कर चुदते देखने के लिए.और इसमें जितना मज़ा मुझे आ रही थी उतनी सिर्फ चुदवाने में शायद नहीं मिलती. क्यों की मैं राकेश से तो रोज़ ही चुदवाती हूँ पर आज इस कारन खास था.राकेश किश तोड़ते हुए कहा: खाने के लिए क्या बना रही हो जान?मैं: चिंता मत करो सब आर्डर किया है.राकेश: और आकाश?मैं: तुम बस वह करो जो मैं कहुगी और सब प्लान के हिसाब से हो जायेगा.मैं अब सोच रही थी की मैं कैसे दोनों भाईयो को अपने प्लान के हिसाब से चला रही थी.

मानो वह दोनों सोच रहे थे की खेल का हिस्सा हो वह पर खेल तो सारी मेरी थी. राकेश मुझे अपनी बाहो में ज़ोर से जकड़ते हुए पुछा: तो अब क्या प्लान है?मैं: यकीनन वह अपने कमरे से देख रहा है हम दोनों को. तो क्यों न उससे खाना आने से पहले एक छोटा सा शो दे दे?इसपर राकेश समझ गया और मुझे मेरी गॉड से उठाते हुए किचन के काउंटर पर बैठा दिया. और फिर मुझे किश करने लगा. किश के बीच मैं आंखे खोल कर आकाश के कमरे के तरफ देखा . तो साफ़ दिखा की वह अपने कमरे में दरवाज़े से चिपक कर हम दोनों को देख रहा था.तो मैं आकाश को देखते हुए आंख मार दी. इस के बाद किश करते हुए ही राकेश ने मेरे गाउन को खींच कर मेरी जांघो तक ले आया. और फिर किश तोड़ते हुए बोलै: अब आगे क्या करू तुम्हारे प्लान के हिसाब से?मैं: श बार बार प्लान मत बोलो. फ़िलहाल तुम नीचे जाओ और मेरी चूत को खाओ. और हाँ चबा चबा कर खाना मेरे शेर.मेरी बाते सुन राकेश पागल होगया. एक ही झटके में मेरी गाउन को मेरी कमर से ऊपर उठा कर मुझे उससे उठाकर पकडे रखने को कहा. मैं गाउन को पकड़ अपनी नाभि से भी ऊपर कर दी. ताकि दूर से आकाश को भी दिख जाए की मैं खुली चूत के साथ राकेश के मुँह को बुला रही हूँ.

राकेश मेरी टाँगे जो फैलाया और मेरी चूत में अपना मुँह घुसा कर चाटने और चूसने लगा. उसके होंठ जैसे ही मेरी चूत की होंटो से टकराई मेरी बदन में एक करंट सा आ गया. मेरी सर ऊपर उठ गयी और आंखे बंद हो गयी. फिर वह मेरी चूत को छत्ते हुए अपनी जीब अंदर धकेलने लगा.जिस पर मैं ज़ोर से आकाश को सुनते हुए बोली: आआह्ह्ह्ह राकेश तुम कितने अच्छे से कहते हो मेरी चूत मममम आअह्ह्ह.इस पर राकेश अपना एक हाथ से मेरी चूत के डेन को अपनी ऊँगली से रगड़ने लगा. और साथ ही जीभ को जितना अंदर हो सके उल्टा डालकर मेरी चूत की दीवारों को चाटने लगा.मैं राकेश के सर के बालो को पकड़ मेरी चूत में धकेलते हुए बोली: आह ऐसे ही और खाओ. मेरी चूत काट खाओ. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

तुम्हारी जीभ कितनी अंदर जा रही है.मेरी गाउन बार बार नीचे उसके सर पर गिर रही थी. तो मैं सोची की अब वक़्त हो गया है आकाश को दिखाना का और एक ही बार में मैं अपनी बदन से गाउन खींच कर पूरी नंगी होकर बैठी चूत चुसवाने लगी. अब जाकर आकाश मुझे पहली बार नंगी देख रहा था.मेरी बेशर्मी देख राकेश जीभ के साथ अंघूठे से मेरी चूत के डेन को रगड़ने के साथ ही उसी हाथ के दो ऊँगली चूत में घुसा कर अंदर बहार कर चूत को दो उंगलियों से चोदने लगा. मेरी आंखे अब पूरी बंद थी. और देखा भी नहीं जा रहा था आकाश के कमरे के तरफ.मैं: ओह्ह्ह राकेश और और ज़ोर से रगड़ो मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा आ रहा है. और तेज़ मैं झड़ने वाली हूँ तुम्हारे मुँह में.

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मेरे उसके मुँह पर झड़ने की बात सुनते ही राकेश की उंगलिया मेरी चूत में किसी मशीन के तरह बिना रुकते हुए ज़ोर ज़ोर से मारने लगी. उंगलिया इतनी ज़ोर से चोद रही थी. मुझे की चूत से पच पच हुई आवाज़ दूर खड़े आकाश को भी शायद सुनाई दे गयी होगी.और ऐसे 20- से 30 सेकंड ही हुआ. मेरी ज़ोर की आह के साथ चूत से श्रुणु-श्रुणु की आवाज़ करते हुए मेरी रस की कई धार राकेश के मुँह पर पड़ने लगी. मेरी साँसे मानो अटक गयी थी. और मेरी जंघे उसके सर को अपने अंदर जकड कर रखी थी.जिससे मेरी रस की एक भी बूँद बेकार न जाती हुई ठीक उसके मुँह और नाक को ढक रही थी. मेरी आंखे अब भी मज़े में बंद थी. और राकेश अब भी धीरे धीरे उंगलियों से रगड़ खाकर बेहाल पड़ी मेरी चूत से निकलते रास को चाट रहा था. कुछ 5 मिनट बाद राकेश के सर से मेरी जांघो की जकड ढीली पड़ने लगी.

वह उठ खड़ा हुआ और मुझे गोद में उठाकर लिविंग रूम को चलने लगा. इस पर मेरी आंखे खुली और नशीली आधी खुली आँखों से राकेश को देख मैं पूछी: कहा ले जा रहे हो?राकेश मुझे लेजा कर सोफे पर गिरते हुए बोला: अभी तो सिर्फ ट्रेलर हुआ है जान. असली फिल्म तो अब शुरू होने वाली है.इतना कहते हुए राकेश अपने तने हुए लंड को हाथ से पकड़ कर झूलते हुए मुझे इशारा करने लगा. उसका इशारा मैं झट से समझ गयी. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

और लंड हाथ में लेने ही वाली थी. की तभी सोची की राकेश तो आकाश के कमरे के तरफ पीठ दिखा कर खड़ा है.तो जब मैं उसका लंड चूसूंगी तो आकाश देख नहीं पायेगा. तो मैं राकेश को आंख मारते हुए एक हाथ से बगल वाले सोफे पर बैठने का इशारा की. वह तुरंत सोफे पर आराम से बैठ कर लंड को हिलाने लगा. अब आकाश को यकीनन अपने अँधेरे कमरे से उसके भाई के लंड का पूरा अकार दिख गया होगा.फिर में उठी. और राकेश के जांघो के बीच घुटनो पर बैठ झुकी और एक अच्छी कुतिया बन कर उसके लंड को अपने हाथो में लेकर धीरे धीरे चेतना शुरू की.

पहले उसके लंड के जड़ से ऊपर और फिर नीचे. मैं चाहती थी की आकाश देखे की में लंड खाने में कितनी माहिर हूँ.फिर अपने जीभ से लंड के लिच्ची जैसी फूली मुँह को चाटने लगी. फिर जीभ को नखिली कर के लंड की छेद पर टटोलने लगी. राकेश मेरे सर को सहलाता हुआ आंखे बंद कर सोफे पर आराम से मज़े ले रहा था. मैंने उसके लंड के सर को अपने मुँह में लेकर चूसी. और एक हाथ से लंड को ऊपर नीचे हिलाने लगी.उसके लंड से अब हलकी हलकी नमकीन पानी की रसीली बूंदे उमड़ने लगी थी. जिसे मैं चाव से चूस चूस के पी रही थी. उसका लंड अब इतना तन गया था की मेरी जीभ को उसके लंड में उभरती हर नसे महसूस हो रही थी. पर आज उसका लंड खाने में और भी मज़ा आ रही थी.यकीन नहीं हो रहा था की आकाश को दिखती हुई मैं पूरी नंगी कुतिया बनकर राकेश का लंड खा रही थी. फिर अपने सर को ऊपर नीचे कर के मैं राकेश के लंड से अपनी मुँह चुदवाने लगी. इतने में जोश में आकर राकेश मेरी बालो को पकड़ मेरे सर को हिलने से रोका.

अपनी कमर को ऊपर उछलते हुए खुद मेरी मुँह को ऐसे चोदने लगा. मनो उससे ऐसा लग ही न रहा हो की वह मेरा मुँह है. बस एक खुली छेद समझ कर धना धन लंड घुसाए जा रहा था. पर मुझे भी राकेश का ये अंदाज़ मनो मैं सचमे उसकी खरीदी हुई रंडी हूँ.देख मज़ा आ रही थी और जल्द ही मेरी चूत में चुदवाने की आग लगने लगी. जैसे जैसे मेरी मुँह में लंड जा रहा था पुरे घर में सिर्फ मेरी मुँह से निकलती ‘आग की आवाज़ सुनाई दे रही थी. यक़ीनन आकाश अब तक अपने लंड को निकाल कर हमे देख हिला रहा होगा.और सोचने लगी की काश में उससे हमे देख लंड हिलाते देख पाती. इतने में राकेश रुका और मेरी मुँह से अपना लंड निकल कर मुझे बालो से पकड़ कर हटाया. और झट से उठ खड़ा हुआ लेकिन मुझे उसी तरह कुटिया ही रहने देते हुए मेरे पीछे आ गया.और फिर एक हाथ से मेरी बालो को खीचते हुए दूसरे हाथ से मेरी गांड पर 4 से 5 चमत दे मरी.

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मैं: आह राकेश. और मारो. अपनी बिगड़ी चुड़क्कड़ बीवी को और मारो.इस पर राकेश ने अगले 4 चमत मारी मेरी गांड को लाल कर दिया.राकेश: अब टाइम है असली खेल का.और इतना कहते हुए मुझे कुछ आगे बोलने देता इससे पहले ही राकेश अपना लंड हाथ से पकड़ पीछे से मेरी चूत के मुँह पर लगाया. चूत से निकलते रस और उसके लंड पर सनी हुई मेरी थूक की चिकनाहट के साथ एक ज़ोर के झटके के साथ अपना पूरा लंड इस तरह से घुसाया.मेरे मुँह से ज़ोर की चिक निकल गयी. और फिर राकेश मुझे अपने भाई के सामने सोफे पर एक कुटिया बना कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.मैं: ओह यस राकेश एसससससस फ़क मी .उसका लंड इतनी तेज़ी से मेरी चूत को चोद रहा था. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

पुरे घर में मेरी गांड पर उसकी कमर टकराने से पहात पहात पहात की आवाज़ ही सिर्फ सुनाई दे रही थी. पता नहीं अंदर आकाश का हमे देख क्या हाल हो रहा था. कुछ अगले 4-5 मिनट राकेश ऐसा ही चोदता रहा की तभी.टिंग तोंग डोर बेल्ल बजी और राकेश मुझे चोदना बंद कर मेरी तरफ देखा.मैं अपनी होश सँभालते ज़ोर की सांसे लेती हुई बोली: होम डिलीवरी होम डिलीवरी वाला होगा. खाना आ गया.इसपर राकेश तुरंत अपने रूम को भागा . मैं सोची शायद वह कपडे पहनने भगा होगा. पर नहीं वह तो नंगा ही वापस निकल आया और मेरी हाथ पकड़ मुझे सोफे से खींच कर उठाया और डोर के पास लगाया. फिर देखि तो उसने मुझे 500 का एक नोट हाथ में पकड़ाया.और डोर की तरफ मूडा कर डोर के तरफ झुकाया. और फिर से मेरी चूत में अपना लंड पीछे से घुसेड़कर अंदर बहार मरने लगा.टिंग एक बार फिरसे घंटी बजी जिस पर चुदवाती हुई ही मैं सर मुड़कर राकेश को देखि और इशारा की की वह ऐसा क्यों कर रहा है.

राकेश: डोर ओपन करो और पार्सल ले लो ना.मैंने राकेश को पहले नहीं का इशारा की. पर वह मानेने को तैयार ही नहीं था की फिर से घंटी दो बार बजी. मेरे पास कोई चारा नहीं था और चुदते हुई ही डोर को धीरे से ओपन की. और दरवाज़े के पीछे खुद को छुपाती हुई पार्सल लेने लगी. उस तरफ वह डिलीवरी बॉय मुझे देख कुछ बोल ही नहीं रहा था.उससे साफ़ मेरी नंगे कंधे दिख रही थी. कोई भी साफ़ पता लगा लेता की मैंने कुछ नहीं पहनी. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

और साथ ही राकेश पीछे से चोद  भी रहा था तो में और मेरे कारन डोर दोनों आगे पीछे जा रही थी. कोई शक नहीं था की उस डिलीवरी बॉय को न पता हो की मैं डोर  के पीछे चुदवा रही हूँ.इस पर हिमत जुटा कर डिलीवरी बॉय कहा: मैडम टोटल 375 हुआ. ३६० फॉर ३ चिकन बिरियानी और 15 पार्सल चार्ज.मैं डोर  के साथ हिलते हुए बोली: ओके ओके ये रहा 500 डेलीवेरय बॉय: मैडम चेंज नहीं.मैं 2- 3 सेकंड चुदती हुई सोचने के बाद बोली: कोई बात नहीं चेंज रख लो.और उसके थैंक यू बोलकर रुकते ही मैं एक हाथ से पार्सल पकड़ी और डोर  को बंद कर दी. पर पता नहीं राकेश को क्या हो गया था.

आज की उसने डोर  बंद करते ही मुझे डोर के बल टिका कर पीछे से लंड चोदने लगा. और उसके हर दम  पर डोर  पर धड़ाम धड़ाम की आवाज़ आने लगी.मानो आज वह सबको बताना चाहता हो की मैं किस तरह से अंदर चुदवा रही हूँ. ऐसे कुछ 2।-3  मिनट चुदने के बाद राकेश मुझे हाथ से पकड़ कर सोफे के पास लाया. और फिर मेरी हाथ से पार्सल लेकर मुझे एक धक्के में सोफे पर पीठ क बल गिरा दिया.पार्सल को सामने टेबल पर रख वह मेरी टाँगो को पकड़ फैलते हुई मेरी चूत के सामने आ कर खड़ा हुआ. और फिर मेरी टैंगो को हवा में लहराते हुए बिना लंड को हाथ लगाए. सीधा तने लंड को मेरी चूत में डालकर चोदने लगा.मेरी तो हालत ऐसी हो गयी की मेरी आंखे चिपक गयी थी.

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और इतना मज़ा आ रही थी की राकेश जैसा भी मुझे थोड़े मरोड़े.मुझे कुछ भी पता नहीं चल रही थी. कुछ और मिनट इसी पोजीशन में चुदने पर मेरी चूत से फिरसे  पानी की पहच पहच की आवाज़ आनी शुरू हो गयी और साथ ही मेरी बदन भी अकड़ने लगी.मैं: राकेश झड़ने ने वाली झड़ने वाली हूँ. रुकना मत. फ़क में फ़ास्ट ज़ोर से चोदते रोहो.इस पर उसने पुरे ज़ोर से मेरे अंदर तेज़ी से लंड चोदने शुरू किया. और फिर उसके मुँह से आह निकलने के साथ ही मुझे बहुत भरी मात्रा में गरम गदा पानी मेरी चूत में भर्ती हुई मेसूस हुई. आवर फिर इसके होते ही मेरी मुँह से “Ohhhhhhhhhh फ़क” कहते हुए.एक चीख के साथ उसके लंड को मेरी चूत से धकेल कर बहार निकालते हुए. रस की एक बाद मेरी चूत से छीटे मारती हुई फर्श पर और उसके टैंगो पर गिर कर बहने लगी. मेरा पूरा बदन कांप उठा और फिर चूत पर हाथ दबाती हुई सिकुड़ कर सोफे पर सिमट गयी.

फिर राकेश भी बगल में सोफे पर बैठ कर आराम लेने लगा. आंखे बंद कर मैं उस नशे से उभरती हुई सोचने लगी की. न जाने आकाश क्या सोच रहा होगा मुझे ऐसे चुदवाते हुए. वह पक्का मुझे कोई धंदे वाली समझ रहा होगा. और ये सोच मेरे होंटो पर मुस्कराहट आ गयी.मुझे पता नहीं था की राकेश मुझे देख रहा है और पुछा: क्या सोच कर मुस्कुरा रही हो?तब मेरी आंखे खुली और सामने थक कर बैठे हुआ राकेश को देख बोली: कुछ नहीं बस ऐसे ही मज़े में मुस्कुरा रही थी.राकेश: तो अभी और भी तुम्हे ऐसे मुस्कुराना बाकी है जान क्यों की शाम तो अभी बस शुरू हुई है.मैं उससे देख अपने बदन में हिमत कर उठ बैठी और बोली: तुमने तो मुझे मार डाला.इतना कहती हुई मैं सोफे पर टैंगो को उठा कर रख जांघो को फैला कर राकेश को चूत दिखती हुई बोली: देखो तो क्या किया.

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उस तरह बैठकर जैसे ही मेरी चूत को थोड़ी खुली हवा मिली. वैसे ही प्लूच की आवाज़ के साथ राकेश का मुठ.और साथ मेरी घुली चूत की रस का एक बड़ा सा गोला बहार बाह निकला.राकेश: है है है! ओवरफ्लो हो गया क्या?मैं राकेश और साथ ही आकाश के कमरे के तरफ दिखती हुई एक हाथ की उंगलियों से चूत को फैलाई. और दूसरे हाथ की उंगलियों से सारा बहता रस साफ़ करके अपने मुँह में डाल चाटने और चूसने लगी. Nayi Bhabhi Ki Chudai ki kahani:

जिसे देख राकेश के लंड में फिरसे हरकत होने लगी. और शायद अंदर आकाश का भी यही हाल हो रहा हो.राकेश: चुसो जान अच्छे से स्वाद लेकर चाटो . अभी तो सारी रात मिलेगी तुम्हे ये रस का पान.मैं: मैं भी आज तुम्हे पूरा निचोड़ पियूँगी जानु . देख लेना तुम्हारी हालत ख़राब कर दूंगी.राकेश: वह तो वक़्त ही बताएगा की किसकी हालत ख़राब होने वाली है आज रात.इतना कहते हुए राकेश मेरे पास आया और मुझे अपने बाहो में लेकर मज़ाकिया तौर से गाना  गाने लगा: आज की रात होना है क्या. पाना है क्या. खोना है क्या.मैं: है है है! आज तो गाना भी गा रहे हो?

चलो छोड़ो मुझे भूक लग रही है.राकेश: अरे भूक तो मुझे इतनी लगी है की आज की रात काम पड़ जाये.मैं राकेश को धक्का मारी. और पीछे हटाकर टेबल से खाने का पार्सल उठा कर राकेश को उंगलियों से मेरे पीछे आने का इशारा करती हुई. डाइनिंग टेबल के तरफ पूरी नंगी ही चलने लगी. और मैं ऐसे नंगी इस लिए चल रही थी. आकाश भी देखले की मैं अपने पति के साथ घर में कितनी खुली रहती हूँ..

दोस्तो आज बस इतना ही इस कहानी मे आगे क्या हुआ ये मे अगले भाग मे बतऔगा.

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