By | February 22, 2023

Nind Me Aunty Ki Chudai:-हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राहुल आज फिर नयी कहानी लेके आया हु, पिछले भाग मे आपने पढ़ा था कैसे मैंने अपनी माँ को रात के अंधेरे मे चोदा, और फिर मैं वही सो गया तो चलो अब सुरू करता हु आगे की कहानी की आगे क्या हुआ।

आँख खोलने का मन ही नहीं हो रहा था लेकिन एक नया दिन मतलब माँ को चोदने की एक और नए दिन की शुरुआत
ये सोच मैंने आँख खोली तो सामने कुछ दिखा आँखों को बंद कर दुबारा देखा तो मैं खुश हो गया.

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माँ नाईट गाउन पहनी रूम में झाड़ू लगा रही थी, वह मेरे तरफ गांड दिखा कर सामने को झुक कर टेबल के नीचे झाड़ू लगा रही थी, साटन के गाउन में उनकी चिपकी गांड का अकार देख मन मचल उठा जैसे ही वह झाड़ू लगाती हुई पीछे आयी।

मैंने उनके कमर को पकड़ अपना मुँह उनकी गांड में लगाकर रगड़ने लगा.

तभी अचानक से वह बोली: अरे अरे! ये क्या कर रहे हो? राहुल!

आवाज़ सुन कर मैं झटका खा गया,ये तो कविता आंटी थी।

मैं झट से उन्हें छोड़ा और वापस सोफे पर गिर गया और बोला: आप!

कविता आंटी मुझे हैरानी से देखती हुई: तुम कर क्या रहे थे?

मैं: मैं… मैं वह…नींद में था.

कविता आंटी: भला नींद में कोई ये क्यों करेगा?

मैं: पता नहीं… मैं नींद में था.

कविता आंटी मेरे सर पर थप थापती हुई बोली: ज़रूर कुछ उटपटांग सपने देख रहे थे.

मैं: अरे नहीं….कविता आंटी: तो फिर? Nind Me Aunty Ki Chudai

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या जवाब दूँ और उठ कर सोफे पर बैठ गया.

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कविता आंटी: रुको मैं झाड़ू लगा लू फिर तुम्हारे लिए चाय लाती हूँ फिर पूछूँगी बाकी.

मैं चुप चाप बैठा रहा और वह बाकी के रूम झाड़ू लगाने लगी,

मैं एक तो शर्मिंदा था और साथ ही वह भी कुछ काम नहीं, साटन की मैक्सी में झुक झुक कर झाड़ू ऐसे लगा रही थी मानो उनको फ़िक्र ही नहीं की यहाँ कोई जवान मर्द बैठा है.

और आप सब तो जानते ही है की जब हम मर्द उठते है तो सुबह सुबह लंड तना हुआ होता हैतो मेरी ऐसी भी हालत थी की उठ कर जा भी नहीं सकता था उनके सामने से, वैसे ही बैठा रहा और बीच बीच में न चाहते हुए भी मेरी नज़र आंटी पर जा रही थी.
थोड़ी देर बाद वह मेरे सोफे के नीचे झाड़ू लगाती और झुकती हुई मेरे सामने आने लगी.

ना चाहते हुए भी मैं नज़र नहीं हटा पा रहा था वह जब झुकी तो उनके मैक्सी का गाला इतना खुला दिख रहा था की अंदर उनकी झूलते बूब्स मुझे साफ़ दिख रहे थे ।

बस निप्पल नहीं नज़र आ रही थे.वह अचानक से ऊपर मेरे तरफ देखा और बोली: बैठ कर बस देखोगे या अपना पैर उठाओगे?
तब मैं अपना एक पैर उठा कर उनको झाड़ू लगाने दी, तो वह मुझे देख बोली: ऐसे क्या देख रहे हो?

वह अपने गले के नीचे देखि और फिर अपने हाथ अपने छाती पर रख कर बोली: नॉटी बॉय! मैं तुम्हारी आंटी हूँ.

भले वह ऐसे बोली पर तुरंत ही अपना हाथ हटाकर मुझे वापस नज़ारा देने लगी और फिर मुझे देख बोली: ऐसे कोई अपनी आंटी को देखता है क्या? बोलो!

मैं: मैंने कुछ नहीं देखा!वह उठ कर सीधी हुई और बोली: सब दिखा मुझे क्या देखे और नहीं देखे.

मैं बात टालने के लिए बोला: माँ किधर है?

आंटी फिर आगे आगे झाड़ू लगाती हुई चलती हुई बोली: वह कुछ काम से बहार गयी है बोली 1 बजे तक आएगी.
मैं पीछे से आंटी की गांड की अकार अपनी आँखों में नापता हुआ पूछा: इतनी सुबह वह कहा गयी?

आंटी तभी मुड़ी और बोली: सुबह टाइम देखो 10 बज रहे है। Nind Me Aunty Ki Chudai

भारती भी उठ कर अपनी कोचिंग क्लास को गयी, अचानक से उनके मुड़ने पर मैं घबरा गया, क्यों की मेरी नज़र उनकी गांड पर थी जो शायद उन्हें दिख गयी.

मैं हड़बड़ाते हुए बोलै: सीओ…कोचिंग क्लास? आज?आंटी: हाँ बोली कुछ क्लासेज है, क्या पता पर किताबे ले कर गयी।
अभी सिर्फ हम दोनों ही है घर पर, चाय बनाके लाती हूँ.

वह इतना कह कर किचन को चली गयी अब जाकर चैन से टंगे फैलाकर बैठा लंड काफी तना हुआ था।

कैसे भी उसे शांत करने की सोच रहा था पर बार बार आंटी के मैक्सी में झूलते बूब्स और उनकी गांड के अकार का नज़ारा मन में आ रहा था ।

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अपने लंड को पकड़ में दबाने लगा की बस शांत हो जा कम्बख्त की तभी आंटी मुझे किचन से आवाज़ देने लगी.
कविता आंटी: राहुल!

मैं: हाँ आंटी!

कविता आंटी: ज़रा यहाँ आओगे क्या?

इस खड़े तन्ने लंड का उबार मेरे शार्ट में टेंट बनाये हुए था

जिसे लेकर मैं उनके सामने नहीं जा सकता था तो मैं बोला : क्यों क्या हुआ?

कविता आंटी: अरे आओ तो सही एक हेल्प चाहिए.

मैं उठा और अपने एक पॉकेट में हाथ डाल कर अपने लंड को एक आवर दबाके पकड़ा और फिर किचन को गया।

वहा जाकर देखा तो आंटी एक स्टूल लेकर खड़ी थी और मेरे तरफ देख बोली: वह चीनी निकलना है ऊपर वाले लॉफ्ट से.

मुझे तसल्ली हुई की चलो उन्हें मेरा तना हुआ लंड नहीं दिख रहा अब और बोलै: चीनी तो होगा न उस शेल्फ में.

कविता आंटी: नहीं वह छोटे डब्बे में नहीं है ख़तम हो गयी, सारिका बोल के गयी थी की ऊपर लॉफ्ट में बड़े डब्बे से छोटे डब्बे में डाल लेने को.

मैं एक हाथ से स्टूल पकड़ने गया तो आंटी बोली: पॉकेट में हाथ रख के हीरो बने खड़े हो तुम कुछ मत करो।

मैं चढ़के निकाल लुंगी, बस अगर स्टूल लड़खड़ाई तो गिरु नहीं इसी लिए तुम्हे बुलाई.

मैं: अरे नहीं आंटी आप क्यों चढ़ोगे मैं कर देता हूँ न.

आंटी: नहीं नहीं मैं कर लुंगी उतनी भी बुद्धि नहीं हूँ मैं? बचपन में पेड़ चढ़ने की एक्सपर्ट थी.

मैं हस्ता हुआ बोलै: अच्छा ठीक है आप चढ़ो मैं यही हूँ. Nind Me Aunty Ki Chudai

वैसे तो खुद भी पॉकेट से हाथ न निकलने के लिए ऐसे बोलै की वह ही चढ़े।

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फिर वह स्टूल को सेट की और मेरे कंधे पर एक हाथ रख उस पर चढ़ी फिर उस पर सीधे कड़ी होकर लॉफ्ट खोलकर चीनी का डब्बा निकलने लगी, पर उनको नहीं मुझे ये ख्याल पहले आया की चीनी का डब्बा भारी भी हो सकता है.

वह अंदर से निकाल तो ली पर अपने हाथ में उसे ज़्यादा देर पकड़ के नहीं रख पायी और वह सीधे मेरे तरफ देने लगी।
मेरे पास कोई और चारा नहीं था अपना हाथ पॉकेट से निकला और चीनी के डब्बे को दोनों हाथ से पकड़ लिया।
मेरा लंड रबर की तरह तन्न के शार्ट में खड़ा हो गया.

पर शायद हाथ में डब्बा होने के कारन ऊपर से उन्हें वह नहीं दिखा आंटी बोली: डब्बा उधर काउंटर पर रख दो.
मैं: पहले आप उतरो तो सही.

आंटी: अरे तुम रखना फिर मैं उतरती हूँ कूद नहीं सकती तुम्हे मेरा हाथ पकड़ना होगा.

मैं धर्म संकट में तो आ ही चूका था, कोई चारा नहीं बचा और डब्बा किचन के काउंटर पर रख उनके सामने अपना उभार दिखते हुए खड़ा हो गया, वह एक टक मुझे देखि और फिर नीचे मुझे पता था उनकी नज़र कहा जा रही थी।

वह गले से थूक उतारा और मेरे तरफ अपने हाथ बढ़ाया .

मैं उनका हाथ पकड़ा और फिर वह मेरे कंधे पर हाथ टिकती हुई धीरे से उतरने लगी।

ऐसे करने के बीच वह मेरे मुँह से अपने गाउन में छुपी बूब्स को रगड़ गयी वैसे सच कहु तो मज़ा तो आया ही जब उनके मुलायम साटन के कपडे के साथ उनके बड़े बूब्स मेरे मुँह से रगड़ी तो.

ये मेरे तने लंड पर एक और चोट थी जिसके कारन मेरे शार्ट में झटके शुरू हो गए, चीनी के डब्बे में काफी धुल थी क्यों की वह हमेशा ऊपर ही रहता था ।

उसे पकड़ने के कारन मेरे टी-शर्ट पे भी धुल लग गयी थी.

आंटी की नज़र उस पर पड़ी और बोली: एक डब्बा भी पकड़ना नहीं आता पूरा धुल लगा लिए खुद पर.

मेरे गाल पर हलकी सी चींटी काट बोली: हाथ पेअर और बाकी सब बड़ा हो गया तुम्हारा पर दिमाग अभी भी बच्चे जैसा है.
मैं समझ गया की उनके बातो में दोहरी मतलब थी Nind Me Aunty Ki Chudai

वह मेरे टी-शर्ट पर लगे धुल को हाथ से झाड़ने लगीपहले मेरे छाती फिर मेरे पेट और फिर धुल तो था नहीं वह पर फिर भी वह मेरे शार्ट पर मेरे लंड से बने उभर पर हाथ मारने लगी.

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वह बिलकुल नार्मल बनी रही मनो उन्हें ऐसा लग ही न रहा हो की एक जवान लड़के के लंड पर वह हाथ मार रही थी.

फिर वह हटी और मुझसे बोली: जाओ बाथरूम हो कर आओ, वरना उस के लिए भी मुझे ही लेकर जाना होगा क्या?
जैसे बचपन में ले जाती थी हाहाहा!

मैं उनकी बात सुन मुस्कुराता हुआ वहा से निकल के वाशरूम गया और ज़ोर की सुसु मार अपने लंड को शांत किया।
सुबह का तना हुआ लंड पहली सुसु के बाद शांत हो ही जाता है।

हाथ धोकर मैं वापस लिविंग रूम में जा रहा था की आंटी फिर से मुझे बुलाई.बोली: हो गया डाल दिया चीनी छोटे डब्बे मेंअब प्लीज इसे वापस तुम रख दो।

ना वह क्या है की ये डब्बा भरी है वरना मैं रख देती.

मैं मुस्कुराता हुआ स्टूल पर चढ़ा और आंटी मुझे डब्बा उठाकर हाथ में पकड़ाई।

मैं डब्बे को वापस लॉफ्ट में रखने उसे उठाया तो स्टूल एक तरफ उठ कर वापस बैठा पर गिरा नहीं लेकिन ये देख आंटी चरण अपने दोनों हाथ ऊपर कर मुझे पकड़ ली.

उनका एक हाथ मेरी गांड पर था तो दूसरी ठीक मेरे लंड पर, भले लंड तना हुआ नहीं था पर उनका हाथ ठीक मेरे लंड पर कास कर उसे पकडे हुई थी।

मैं डब्बा वापस तो रख दिया और सोचने लगा की आंटी को तो पता ही होगा उनका हाथ किस पर है तो वह हटा क्यों नहीं रही.
अजीब औरत है खामखा मेरे सोये अरमानो के साथ खेल रही है।

मैं डब्बा रख वापस नीचे देखा तो लो नीचे आंटी के गाउन से मुझे उनकी क्लीवेज इतना बढ़िया दिख रहा था की मेरे लंड ने झटका मार दिया।

वह भी उसे महसूस कर ही रही होगी क्यों की तभी वह अपने गले की और नीचे देखि.

वह बोली: ओफ्फो अब देखना बंद करो और नीचे आओ पुरे दिन मैं क्या ऐसे पकडे रहूंगी?

मैं तुरंत नीचे उतर गया और फिर सोचने लगा की आज अचानक आंटी ऐसे क्यों बात कर रही है मुझसे कल रात से पहले तो ये इतनी मज़ाकिया नहीं थी।

आंटी चाय बनती हुई मुझसे बाते करने लगी.वह बोली: जब सारिका गयी तब मुझे तुम्हे जगाने को कह गयी.
लेकिन बाद में तुम्हे सोते देख मैंने सोचा तुम्हे थोड़ी देर और सोने दे दूँ आज भी छोटे बचे के तरह सिकुड़ के सोते हो.
मैं: माँ कब गयी?

आंटी: शायद एक 9.30 के आस पास तब सोचा की झाड़ू लगा दूँ घर मे फिर तुम उठोगे तो तुम्हारे लिए चाय बनाऊं.
चाय उबल गयी तो आंटी ने 2 कप में चाय डाली और बोली: ये लो चलो जाओ मैं आती हूँ. Nind Me Aunty Ki Chudai

मैं चाय लेकर लिविंग रूम जाकर बैठा, मेरे पीछे आंटी भी अपनी चाय लेकर मेरे बगल वाली सोफे पर बैठ गयी,बैठते वक़्त उन्होंने ऐसा मुँह बनाया जैसे की उन्हें दर्द हुआ हो.

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मैंने पूछा: क्या हुआ आंटी?

कविता आंटी: कुछ… कुछ नहीं बस कमर में थोड़ी दर्द है, शायद बेड बदल के सोई न कल तो इसी लिए कमर में दर्द शुरू हो गयी.

मैं: आप थोड़ी देर और सो जाईये सब ठीक लगेगा.

आंटी: नहीं ! कल रात अच्छी नींद सोई मैं अब और नहीं.

मैं भी मन में सोचने लगा की जब ये अछि नींद सो रही थी तो मैं यहाँ अपनी माँ की गांड मार रहा था और बस आज भी अच्छे से सोती रहे।

सोच मेरे मुँह पे मुस्कान आ गयी जिसे देख आंटी बोली: ऐसे अकेले अकेले क्या सोचकर मुस्कुरा रहे हो? मुझे भी बताओ.

मैं: न… कुछ नहीं आंटी बस ऐसे ही.आंटी: शर्माओ मत अब तुम भी भारती की तरह न बनो.

मैं: भारती की तरह? मतलब?

आंटी: अगर मैं उससे कुछ पुछु तो वह सोचती है की उसके उम्र की बात है मुझे क्यों बताना.

मैं: अरे ऐसा मैं नहीं सोचता, वैसे क्या उसके उम्र की वह कौनसी आपकी पोती है बेटी ही तो है.

आंटी: हाँ पर मुझ जैसी 43 साल की औरत को वह 19 साल की लड़की क्या बताएगी.

मैं सोचने लगा 43? मेरी माँ 42 की है और मैंने उसे अपनी गर्लफ्रेंड के तरह चोदता हूँ.

ये सोच मैं बोलै: अरे आंटी आप पागल हो क्या जो ऐसे सोचती हो? उम्र तो बस एक नंबर है, वरना आपको देख के थोड़ी कोई कहेगा की आप 43 की हो.आंटी: हाहाहा! अच्छा बोलते हो पर सच तो वही है न.

मैं: नहीं सच ये है की आपको देख के तो आप 34-35 की लगती हो बस उससे ज़्यादा नहीं.

आंटी के मुँह पे एक शर्म आ रही थी और वह उसे छुपाने के लिए हस्स पड़ी.

वह बोली: हाहाहा! 34-35 ! हो ही नहीं सकता.

मैं: सच्ची गॉड प्रॉमिस.

आंटी अपने आगे गिरे बालो को सवारती हुई मुस्कुराने लगी। औरत चाहे जो भी उम्र की हो उसकी तारीफ कर दो तो वह वापस जवान फूल बनने लग जाती है.

वह मुस्कुराती और शर्माती हुई बोली: अब बस भी करो झूठी कस्मे नहीं खाते. Nind Me Aunty Ki Chudai

मैं: मैं झूठ नहीं कह रहा मुझे जो लगा वह कह दिया

मैं तो सीधे मुँह ही बोलता हूँ सब

.आंटी हस्ती हुई बोली: अच्छा… उसी लिए सुबह मुझपे झपट पड़े, हाहाहा!

मैं शर्मिंदा होने लगा की मैंने सुबह उठते ही क्या किया फिर सोचा की मौका सही है बोलने को और बोलै: हाँ मुझे लगा की मैं सपनो में हूँ और मेरे सामने एक खूबसूरत अप्सरा खड़ी है.

आंटी: तो ऐसा करोगे क्या तुम लड़कियों के साथ बदमाश!

मैं: अब वैसा खूबसूरत नज़ारा मिले तो कोई कैसे रोकेगा.

आंटी: थैंक गॉड मैंने सही वक़्त पे आवाज़ देदी वरना पता नहीं सपना समझ के और क्या करते.

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मैं: वह तो सही कहा आपने पर आप बात मत बदलो आपको तो मान ना ही पड़ेगा की आप 43 की नहीं लगती.

आंटी: ओफ्फो! अब इसमें न मान ने की क्या है जो है वही तो सच है.

मैं: नहीं नहीं जो दीखता है वह सच है.आंटी तिरछी नज़रो से मुझे देख बोली: क्या दीखता है.

आंटी जान कर शायद मेरे मुँह से बार बार अपनी तारीफ सुन्ना चाहती थी।

तो मैं पीछे क्यों हटु, भी और कोई तो था नहीं घर पे तो मैंने कहा: आपको देख के तो मेरे उम्र लड़के लट्टू हो जाये।

आंटी अगर आप मेरी आंटी न होती तो मैं तो आपको लव लेटर लिख डालता.

आंटी ज़ोर से हस्स पड़ी और बोली: हाहाहा! लव लेटर?

मैं: हाँ प्रोपोज़ कर देता मैं आपको.

आंटी: चल हैट पागल कुछ भी.

मैं: क्या कुछ भी एक बार आप ज़रा बालकनी में जाकर खड़ी हो जाओ, फिर देखो सामने रोड में कितने एक्सीडेंट्स होंगे.

आंटी: हाहाहा! ओह गॉड तुम बड़े अच्छे फ़्लर्ट हो।

ये सब कितनी लड़कियों पे ट्राइ किये हो अब तक?

मैं: अगर करता तो अभी आपसे बात करता या दूसरी लड़कियों से.

आंटी: मतलब?

मैं: मैं ऐसा वैसा नहीं जो हर लड़कियों पे डोरे डालु, आपको देख के जो लगा मैं वही बोलै.उनकी आँखों में चमक और चेहरे पे वह मुस्कान आ रही थी मानो मेरे हर बात से उनकी उम्र मन ही मन कम होती जा रही थी।

मैंने फिर से अपना दाव फेका और कहा: और वह भारती है जो सोचती है की उसकी उम्र की बात आपके लिए बहुत अलग है? बिलकुल भी नहीं.

आंटी: क्यों?

मैं: आप बिना मेकउप के भी उससे कई ज़्यादा खूबसूरत दिखती हो आपको पता नहीं.

आंटी चाय की सिप लेने के बहाने अपना मुँह कप के पीछे छुपा रही थी मनो शर्मा रही हो. Nind Me Aunty Ki Chudai

फिर मुद्दा बदलने के लिए बोली: चलो चलो बहुत हुई मीठी बाते, अब चाय ख़त्म करो और जाकर ब्रश करो और नहाकर आओ, मैं ब्रेकफास्ट लगा देती हूँ.

मैं: हम्म्म्म… नहाना भी होगा क्या!

आंटी को नंगा करके की चुदाई

आंटी: हाँ सुबह उठ कर नहाना चाहिए दिमाग फ्रेश रहता है.

मैं: मेरा तो दिमाग तो आपको देख के आलरेडी फ्रेश हो चूका है आंटी.

आंटी: उफ्फ्फ… प्लीज ये सब तुम्हारी माँ और भारती के सामने मत कहना वर्ण वह दोनों मेरे ऊपर हसेंगे.

मैं: नहीं नहीं उनके सामने नहीं कहूंगा

जिनको खूबसूरती की परख नहीं वह क्या जानेंगे.

आंटी मुस्कुराती हुई सर पर हाथ मारी और सोफे से उठ कर बोली:

मैं तो चली किचन को तुम अपनी चाय पीकर जाओ नहाकर आओ.

आंटी उठकर किचन को जाने लगी पर इस बार उनकी चाल में एक अलग ही लुभावना मटक थी।

ज़रूर मेरे शब्दों ने उनके अंदर की जवान औरत को थोड़ा जगाया हो और जब वह किचन के पास पहुंची तो हलके से मूड कर मुझे मुस्कुराती हुई देखा और फिर चली गयी.

मेरे मन में अब आंटी के लिए भी इरादे बदल रहे थे जल्दी से चाय ख़तम की और कप लेकर किचन को गया, तो वह आंटी सिंक में अपनी कप धो रही थी।

मैं उनके पीछे से गया और उनके कमर और ब्याह के बीच से अपनी कप देने के बहाने उनके पीछे काफी करीब होते हुए खड़ा हो गया.

मैं बोला: मेरा कप.वह पहले घबराई और बोली: अहह! तुमने तो डरा ही दिया

मेरे शार्ट में लंड का हिस्सा उनकी मुलायम साटन में छुपी गांड से सटा हुआ था

मैं बिना हटे बोला: क्यों मैंने क्या किया?वह भी वैसे ही मुझसे सटी रही बिना हिले और मुँह पीछे कर बोली: अब ऐसे अचानक से आओगे और नीचे से हाथ लाओगे तो कोई भी डरेगा ही.

मैं: बड़े बोलते हो की 43 के हो और डरते हो 18 साल की लड़की के तरह.

आंटी पहले हसी और फिर मुँह बनाकर बोली: हाहाहा! हम्म्म्म… मुँह से बदबू आ रही है जाओ जाकर ब्रश करो.
वैसे तो उन्होंने अपनी कप धो ली थी लेकिन वह उसे अब भी धोये जा रही थी मानो उन्हें भी मुझसे ऐसे सटे रहने में अच्छा लग रहा था। Nind Me Aunty Ki Chudai

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उनके मुलायम गांड के ऐसे मेरे लंड के हिस्से से सटे रहने का असर मेरे लंड पे होने लगा और धीरे धीरे वह सख्त होने लगा.
मैं: अच्छा… तो अगर मैं ब्रश करके आऊं तो क्या पकड़ के चुम्मी ले लेते आप?

आंटी: चल हैट पगले कुछ भी.

ऐसा कहती हुई वह अपनी कमर को पीछे मारी जिससे उनकी गांड मेरे लंड को दबा गयी,

काश की हमारे बीच उनकी साटन निघ्त्य और मेरे शार्ट का कपडा नहीं होता।

मैं भी अपने कमर को आगे को मारा और अपना सख्त होता हुआ लंड उनकी गांड पर दबाता हुआ बोला: नहीं जाऊंगा क्या करोगी.

इस पर वह दुबारा पीछे को कमर मार्टी हुई अपनी गांड फिर से मेरे लंड को दबाकर बोली: मार कर भगाऊँगी.

मैं भी फिर से आगे को कमर मारा और दुबारा बोला: मारो मारो देखे ज़रा हाहाहा!.

जितना मज़ा मुझे इस खेल में आ रहा था उतना ही शायद आंटी को भी आ रहा था ।

तभी तो उन्होंने वापस अपने कमर को पीछे मारती हुई बोली: मार मार के पहला दूंगी.

उनकी बातो में दोहरी मतलब थी या नहीं पता नहीं पर मैं आगे को मारते हुए बोला: कहा मरोगी कहा मारके फुलाओगी?

अब तो हमारी हरकत से मेरा लंड पूरा सख्त हो चूका था पर वह ऐसा बिलकुल ज़ाहिर नहीं कर रही थी की उन्हें पता है वह एक आखिरी झटका कमर का पीछे मारा और मैं इस बार दूर चला गया और वह मेरे तरफ मूड कर हाथ दिखाती हुई मुस्कुराकर बोली: भागते हो या सच मे लगाऊं तुझे जाओ जाकर नहाओ.

वह जब मुड़ी तो उनके साटन की निघ्त्य में उभरे उनके बूब की तरफ मेरी नज़र गयी उनकी निप्पल साटन कपडे पर नोकीली हो चुकी थी।

यकीनन वह भी थोड़ी बहुत उत्तेजित थी पर छुपा रही थी।

तभी लिविंग में मेरा फ़ोन बजने लगा. Nind Me Aunty Ki Chudai

मैं उठा और इससे पहले की आंटी सच मे मुझे मारे मैं वहा से जीभ दिखाते हुए उन्हें छिड़कर फ़ोन लेने चला गया।
फ़ोन देखा तो श्रद्धा दीदी का कॉल था श्रद्धा दीदी हमारे अपार्टमेंट में ही रहती है उन्हें मैं श्रद्धा दीदी बुलाता हूँ।
मैं अटेंड किया और बात करने लगा.

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मैं: हेलो श्रद्धा दीदी.

श्रद्धा: हाँ राहुल फ्री हो न बात करने के लिए?

मैं: हाँ बोलिये मैं घर में ही था.

श्रद्धा: तो आज क्लास नहीं थी क्या?

मैं: नहीं छुट्टी चल रही है.

श्रद्धा: अच्छा ओके ओके तब तो ठीक है, बस एक छोटा सा काम था।

शाम को 5 मिनट के लिए आ सकते हो क्या?

मैं: हाँ दीदी ओके 3 बजे तक आऊं क्या?

श्रद्धा: नहीं नहीं उतनी जल्दी नहीं शाम 7 बजे के बाद आ जाना ओके.

मैं: ओके दीदी मिलता हूँ आपसे शाम को बाई!

श्रद्धा: बाई!

फ़ोन कटा और उठ कर नहाने को गया नहाकर पहनने के लिए कपडे लेने अपने रूम पर देखा तो भारती मेरे रूम को लॉक कर के गयी थी।

वैसे पहने हुए कपडे तो कल ही पहने थे तो दिक्कत नहीं थी। पर टॉवल तो था नहीं मेरे पास मैं वापस किचन गया.

मैं: आंटी.

आंटी: तुम फिर आ गए.

मैं: सुनो तो भारती मेरे रूम को लॉक करके गयी है, मेरे पास टॉवल नहीं.

आंटी: ओफ्फो आओ मेरे साथ.

वह मुझे अपने पीछे माँ के कमरे में ले गयी और वार्डरॉब से एक नया टॉवल लेकर मुझे दिया.

फिर वापस अपना काम करने किचन चली गयी.

मैं भी निकाल कर बाथरूम में जा घुसा और अपने कपडे निकल कर टॉवल पहना और फिर पानी खोला, पानी ठंडा था और उसके ठंडेपन से मुझे एक गरमा गरम आईडिया आया। Nind Me Aunty Ki Chudai

सोचने लगा की पहले माँ फिर भारती और अब मेरे दिमाग में आंटी को लेकर गंदे इरादे बनने लगे.

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