By | December 13, 2022

Purani Chudai ki Kahani 9 – हैलो दोस्तो, अभी तक आपने पढ़ा के मेरे एक बार चुदवाने के बाद मेरे दिमाग में ख्याल आने लगे दोबारा चुदवाने के लिए. फिर मैंने दोबारा भी चुदवा ली अपनी चुत. और अब तो मुझे लंड का चस्का सा लग गया था.
अब आगे.

मालिक के वापस आने के बाद मालकिन की चुत कण्ट्रोल में रहती थी.

लेकिन मुझे तो जब भी थोड़ा टाइम मिलता था मैं टाइटस से अपनी चुत की खुजली मिटवाने पहुंच जाती थी.

मुझे अब बिना लंड लिए चैन नहीं मिलता था. लेकिन मेरी किस्मत में टाइटस से जुड़ा ही होना लिखा था.

राजकुमारी मिश्रा की शादी गवर्नर मेथियस से हो रही थी और मिश्रा ने अपनी शादी में मुझे मालकिन से मांग लिया.
मालकिन भी मुझे अपने से अलग नहीं करना चाहती थी.

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लेकिन उनके पति को रॉयल कोर्ट में जगह मिल रही थी तो उन्होंने मुझे गिफ्ट में राजकुमारी को परोस दिया.
मैं मैं ही मैं में रो रही थी. लेकिन किया तो कुछ भी नहीं जा सकता था.

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मैं मालकिन के साथ रोम आ गयी. फिर मिश्रा मुझे अपने साथ अपने पति के शहर स्पार्टा में ले आयी. वह पर मेथियस की माँ यानी मिला रहती थी.

मिला ज़्यादातर अपने कमरे में ही रहती थी और बहार काम ही निकलती थी. और मेथियस ज़्यादातर जंग पर रहता था.
अब यानी राजकुमारी और मेरे बीच कोई भी नहीं था.

पहली रात जब हुई मेथियस और राजकुमारी की तो उन्होंने मुझे बहार भेज दिया.

लेकिन सुबह में जब मैं पहुंची उनके रूम में तो देखा मेरे नए मालिक और

मालकिन नंगे होकर सो रहे है.उनकी चददर पैर खून है और मिश्रा की चुत और टाँगो पर भी है.
मैंने मालिक को उठाया सुबह के शरबत के लिए.

तो फिर उन्होंने उठकर शरबत पिया तो मैंने देखा के मेथियस का लंड तो कुछ ज़्यादा ही बड़ा है.

मतलब उसका लंड पूरी तरह से खड़ा भी नहीं था. लेकिन फिर भी 4-इंच मोटा और 4 इनचेस लम्बा दिख रहा था.
और मेथियस खुद भी काफी लम्बा चौड़ा इंसान था. Purani Chudai ki Kahani 9

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मेरी नज़र उस वक़्त सिर्फ उसके लंड पर ही अटक गयी.

सच बताऊ तो उसको तभी मुँह में लेने का मन भी करने लगा.
मेथियस ने मुझे उसके लंड को निहारते हुए देख लिया. तो बोलै.

मेथियस: चूसना है क्या?मैं (हड़बड़ाते हुए): नहीं नहीं माफ़ करना मालिक. मेथियस: सुना है तू भी वर्जिन है इसकी तरह.
मैं: जी मालिक.मेथियस: तो कभी लंड लेने का मन नहीं करता क्या?

मैं: करेगा भी तो क्या ही कर सकती हु.

मेरी किस्मत में पूरी ज़िन्दगी कुंवारी रहना ही लिखा है मेथियस: मेरा लंड लेगी?

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तभी मिश्रा की भी आँख खुल गयी. और वह कुछ बोल रही थी लेकिन बोल नहीं पा रही थी.

उसके पेट में बहुत दर्द हो रहा था. उसकी टांगो में भी बहुत दर्द था

और चुत तो दर्द से बेहाल थी. वैसे तो मैं मिश्रा से नफरत कर रही थी

लेकिन उस समय बेचारी पर बहुत तरस आया. मैं उसको पहले वाशरूम लेकर गयी.

फिर नहलाने के लिए पानी गरम करवाया और उसको पूल में भरवाकर उसको नहलाने लगी.

गरम पानी से मिश्रा को रहत मिली. उसको मुझपर प्यार उमड़ने लगा और

वह मुझे किश करने लगी. हम दोनों पूल में ही थे नंगे.

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मेरे चुचे मिश्रा से मिले हुए थे और फिर मैं एक कपडे से उसकी चुत को साफ़ कर रही थी.

जिससे उसको बहुत रहत मिल रही थी. फिर हम दोनों नहाकर बहार आ गए और मैंने

फिर उसको थोड़ी शराब पिलाई जिससे उसका दर्द काम हो जाए .
रात में दावत थी उनके महल में. फिर मैंने भी अपने कपडे पहन लिए और फिर मैं भी तैयार हो गयी.

वह कपडे क्या एक ही कपडा होता था उसको ही लपेटकर ड्रेस बना लेती थी मैं.

तो मेरी ड्रेस बैकलेस थी और निचे घुटनो तक आ रही थी.


पार्टी में मैं लोगो को शराब दे रही थी. बहुत लोगो की मुझपर नज़र पड़ी तो सब

मेरे बारे में एक दूसरे से बात करने लगे.

एक आदमी ने तो मुझसे ही आकर पूछ लिया के मैं कोन हु.
तो मैंने उसको अपने बारे में बताया तो वह बोलने लगा के “तुझे मैं यहाँ राजकुमारी से खरीद लूंगा

तेरी मुँह मांगी कीमत देकर और तुझे रोज़ चोदुगा. तेरे जैसा माल कहा मिलेगा.”तभी मिश्रा ने वह सब सुन लिया.

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वह उस आदमी को आकर बोली के “ये बिकाऊ नहीं है.”

कुछ भी कहो लेकिन मिश्रा प्यार तो सच्चा करती थी मुझसे.

मिश्रा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे में ले आयी और वही रहने को कहा.
फिर जब सब चले गए तब मिश्रा और

उसका पति मेथियस अपनी चुदाई के लिए अपने कमरे में आ गए. मेथियस मिश्रा को बुरी तरह से चूस रहा था लेकिन मिश्रा उसको कोई रिस्पांस ही नहीं दे रही थी.Purani Chudai ki Kahani 9
मेथियस ने मिश्रा के सारे कपडे निकाल दिए और

फिर खुद भी नंगा हो गया. उसका लंड अब खड़ा होने लगा था.

मैंने जैसे ही उसको नंगा देखा तो मेरी चुत में भी खलबली मचने लगी थी.

उसकी छाती पर बाल थे और थोड़े बाल उसके बगल मे भी थे.
लेकिन उसका लंड 11 इनचेस लम्बा और 4 इनचेस मोटा था.

मुझे समझ में आ गया के कल रात वर्जिन मिश्रा का क्या हाल हुआ होगा.

मेथियस ने तो मिश्रा की चुत चाटी और ना ही उसने अपना लंड चुसवाया.

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वह सीधा मिश्रा की चुत मारने के लिए उसकी चुत पर लंड घिसने लगा.

मेरी ये देखकर ही गांड फट गयी थी.
मिश्रा की चुत तो गीली भी नहीं हुई थी. तो मैंने एकदम बोल दिया.


मैं: मालिक थोड़ा गिला कर लीजिये वरना मालकिन को बहुत दर्द होगा.
मेथियस: कैसे गिला करू. मैं तो ऐसे ही चोदता था लड़कियों को.

मैं: राजकुमारी वर्जिन है और उनको बहुत दर्द होता है ऐसे.
आप तेल लगा लो वरना किसी से चुसवाकर उसको गिला करलो.
मेथियस: ले आजा तू चूस ले.


मिश्रा: नहीं ये नहीं चूसेगी. किसी रंडी को बुलवा लो.
मेथियस: क्यों इसमें ऐसा क्या लगा है? मिश्रा: ये मेरी बाँधी है मैं इसको एकदम अलग रखूंगी. मेथियस: उससे क्या होगा. मिश्रा: मेरा नाम होगा. के मेरी बाँधी वर्जिन है.

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मैं तभी बहार से एक रंडी को बुलाने चली गयी.

लेकिन मुझे मेथियस और मिश्रा की सारी आवाज़े सुनाई दे रही थी.
मेथियस: कुछ नाम नहीं होता. वैसे बहुत खूबसूरत है ये.

मुझे इसकी चुत मारने का बहुत मन है.
मिश्रा: आपके लिए मैं काफी नहीं हु क्या? मेथियस: रात चुदते चुदते बेहोश हो गयी थी.

नहीं ही सेक्स करने में तुझे मज़ा आता है ना ही तू मुझे सही से रिस्पांस देती है. बोल रही है काफी है.
मिश्रा: अच्छा अब से मैं अच्छी पत्नी बनकर दिखाउंगी. बस उसको चोद दो.


मेथियस: ठीक है चल छोड़ दिया.इतने में मैं रंडी को लेकर आ गयी और मेथियस के सामने उसको नंगी कर दिया. फिर मेथियस उठा और उसके आगे आकर खड़ा हो गया. वह रंडी घुटनो पर बैठ गयी और मेथियस का लंड चूसने लगी.

उसने अच्छे से आगे पीछे ऊपर निचे सब गिला कर दिया.
फिर मैंने उसको राजकुमारी की चुत चाटने के लिए बोला तो उसने वह भी किया. फिर मेथियस अपना मोटा लंड राजकुमारी की कमसिन चुत में डालने लगा.

उसका सूपड़ा फिसलकर अंदर चला गया चिकना होने के कारण. और

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फिर वह उसको अंदर -बाहर करने लगा.

वह हलके हलके धक्के लगाकर उसको अंदर अंदर -बाहर करता जा रहा था. फिर आखिर कार उसने अपना पूरा लंड उसकी चुत में उतार दिया.
मैं मिश्रा के चेहरे के एक्सप्रेशंस देख रही थी. उसको बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था.

फिर मैं मिश्रा के सामने आकर खड़ी हो गयी और मेथियस से पीछे हो गयी.

नंगी होकर अपनी चुत घिसने लगी देख देखकर.पीछे से मेथियस के मोठे मोठे आँड लटके हुए दिख रहे थे.

वह उसके हर धक्के के साथ हिल रहे थे जो की मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

उसका लंड जब मिश्रा की चुत से बहार आ रहा था

तो मिश्रा की चुत के अंदर की स्किन को बहार ला रहा था.
मेथियस के मोठे लंड को देखकर मैं टाइटस के लंड को भी भूल गयी थी.

अब आप कहोगे के कैसी छिनाल है ये बड़ा लंड देखते ही फिसल गयी.

लेकिन आप मेरी दशा भी तो समझो मैं अपने पुराने घर में लगभग रोज़ ही टाइटस के लंड की सवारी कर रही थी.

और अब मुझे 3-4 महीनो से कोई भी लंड नहीं मिला था. ऊपर से मेथियस का लंड था भी तगड़ा.

जब मेथियस राजकुमारी की चुत फाड़ता और वह बुरी तरह से चिल्लाती तो मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आता.
फिर उन्होंने अपनी पोजीशन चेंज कर दी. उसने मिश्रा को अपने ऊपर बैठा लिया.

मिश्रा बेचारी पतली छोटी सी. उसके ऊपर बैठकर उसकी बच्ची सी लग रही थी.

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उसने अपनी चुत में उसका लंड भरा और उसपर कूदने लगी.

अब मैं फिर से मिश्रा के सामने आ गयी और फिर उसको अपनी चुत रगड़ते हुए दिखने लगी.
मिश्रा मेथियस से चुदाई बस मुझे देखते हुए ही कर रही थी.

उसको बहुत दर्द भी हो रहा था पता नहीं मज़ा आ रहा था के नहीं.
फिर मेथियस ने भी निचे से तेज़ झटके मारने लगा.

मिश्रा की आँखें ऊपर चढ़ने लगी. उससे सहन नहीं हो पा रहा था.

फिर मेथियस उसकी चुत में झड़ गया. और फिर मिश्रा साइड में आकर निढाल हो गयी.
मैंने फिर दोनों को शराब पिलाई और फिर मैं अपने कमरे में आ गयी.


फिर आगे कहानी में क्या हुआ ये पता लगेगा अगले भाग 10 में तब तक के लिए. धन्यवाद!

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