By | January 27, 2023

Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:-हैलो दोस्तो, सबको मेरा बहुत बहुत धन्यवाद मेरी स्टोरी को पढ़ने के लिए. आज का एपिसोड भाग 1(जब बस मे मुहे भाभी मिली थी और मैं उनके घर गया था ) का अगला हिस्सा है.
अगर आपने अभी तक इसका भाग 1 नहीं पढ़ा वो यहा क्लिक करके पढ़ सकता है

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अमित को कुछ 10-15 मिनट हुआ की अंदर रूम में डोर खुलने की आवाज़ आयी और फिर श्रद्धा ने आवाज़ लगायी: अमित? मैं झट से जवाब दिया: हाँ बोलिये.श्रद्धा: एक मिनट आना इधर.मैं खुश हो गया और उठकर झट से उसके कमरे में गया. तो देखा श्रद्धा बाथरूम के डोर को हलके से खोलकर खड़ी है डोर के पीछे अपना बदन छुपा कर. गीले बाल चेहरे और डोर से बहार निकले कंधे से टपकती पानी उसे कितनी सेक्सी बना रही थी.

श्रद्धा: सॉरी अमित. वह बेड पे टॉवल रखा हुआ है ज़रा दे दो. लेना भूल गयी.मैं: हाँ क्यों नहीं.मैं पलट कर बेड पे रखा टॉवल उठाया. जैसे ही उसे देने गया तो टॉवल में से एक कपडे का छोटा टुकड़ा नीचे मेरे पैरो पर गिरा. गौर से देखा तो वह उसकी पहनी हुई पेंटी थी.इस पर उसने कहा: ऊप्स! सॉरी अमित. उसे वही रहने दो और टॉवल दे दो.मैंने उसे चुप चाप टॉवल दिया और उसने डोर बंद कर दी. मैं फिर उसके रूम से जाने लगा तो पलट कर फिर से नज़र उसकी पेंटी पर पड़ी. पेंटी की हालत देख पक्का था की ये वही पेंटी है जो श्रद्धा अब तक पहनी हुई थी. मैं धीरे से उसे उठाया तो महसूस हुआ की वह अब भी उसके पसीने से हलकी नमी भरी थी

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कुछ न सोचा और उसे अपने मुँह पर लगा कर सूंघने लगा. ह्म्म्मम्म क्या खुशबू थी. नीचे मेरे लंड ने सर उठाना शुरू कर दिया पंत में. ये खुशबू उसकी चूत की है यही सोच कर मैं पागल होने लगा. तभी अंदर नल बंद होने की आवाज़ आयी.और ये सुन मैंने पेंटी को बेड पर फेका और जल्दी से जाकर अक्षुण के पास बैठ गया. फिर अंदर से डोर खुलने की आवाज़ आयी तो याद आया की हड़बड़ी में मैंने उसकी पेंटी बीएड पर फेक दी जबकि उसे फ्लोर पर वही डालना था. अब तो श्रद्धा को पता चल ही गया होगा की मैंने उसकी पेंटी को हाथ लगाया.सोच कर मुझे शर्मिंदगी होने लगी. तभी देखा तो श्रद्धा ने अपने रूम का डोर बंद कर दिया. मन ही मन सोचने लगा वह क्या सोचेगी. साथ ही कभी कभी अपने उंगलियों को भी सूंघ लेता जो अब भी उसके खुशबू से महक रही थी. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

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वह महक मुझे अंदर ही अंदर रोमांच दे रही थी.मेरा लंड भी आधा तन चुक्का था. कुछ 5-10 मिनट के बाद श्रद्धा रूम की डोर ओपन की. उसे देख में देखता ही रह गया. क्या हाय की बला लग रही थी. वह अपने नाईट गाउन में निकल कर आयी. गहरे लाल रंग की उसकी चमकती साटन की गाउन में वह एक अप्सरा लग रही थी.साथ ही उसके आने से आयी उसकी बदन से निकलती साबुन की ताज़ी खुशबु माहौल को खुशबूदार बना रही थी.

वह मुझे देख मुस्कुरायी. और उसे भी शायद पता चल ही रहा था की उसे देख में मदहोश हो रहा हूँ. कितना गोरा बदन है उसका और घने काळा लम्बे बाल.एक पल के लिए भूल ही गया की उसका बेटा मेरे साथ ही बैठा है. तभी उसने अक्षुण के सर पर हाथ फेरा और पूछा उससे: पानी पिया अक्षुण?अक्षुण: नो माँ.श्रद्धा: जो ड्रिंक वाटर एंड जो तो योर रूम ओके.अक्षुण: नो माँ डोरीमोन देखो आप प्लीज.श्रद्धा: नो जो. दो योर होमवर्क. जाओ!!अक्षुण अपने कार्टून को पूरा न देख पाने के गुस्से में श्रद्धा के हाथ पर मार कर अपने रूम को चला गया. ये देख श्रद्धा मुझे देख मुस्कुराती हुई बोली: बिलकुल अपने पापा पे गया है. गुस्सा नाक पे रहता है हमेशा.

मैं: अरे नहीं वह तो बच्चा है.इतने में श्रद्धा झुक कर टेबल पर से अक्षुण के प्लेट को लेने जाती है. तोह उसकी गाउन छाती के पास उसके क्लीवेज को दिखा देती है. मुझे उसके बूब्स दिखने लग गए और साफ़ दिख रहा था की उसने अंदर कोई ब्रा नहीं पहनी है. वह उसी तरह झुकर मेरे तरफ देखि तो पाया की मैं उसकी बूब्स को देख रहा हूँ.पर वह भी चालू है. ये देख के की मैं उसकी बूब्स को ताड़ रहा हूँ फिर भी वैसे ही झुक के मुझे देख कर बोली: अपनी प्लेट भी दे दो.

मैं: नहीं नहीं मैं धो दूंगा इसे.इतना कहते हुए में प्लेट लेकर खड़ा हो गया और वह भी सीधे हो गयी.श्रद्धा: नो वे दो इधर मेरे घर प्लेट धोने आये हो क्या? और भी बहुत कुछ कर सकते हो. प्लेट दो इधर.मैं उसको प्लेट देते हुए बोला: और क्या क्या है करने को? (मैंने मज़ाकिया अंदाज़ में बोलै.)तो वह बोली: बैठ के टीवी देखो. या अक्षुण की कुछ किताब लेकर देखो उसको क्या क्या पढ़ना है तुम्हे. और क्या करोगे. जो करना है करो. बे माय गेस्ट.इतना कहते हुए वह मुस्कुराकर किचन को जाने लगी. क्या चाल थी. क्या मटक थी कमर की. मेरा तो जैसे कण्ट्रोल धीरे धीरे छूटने लगा.तभी सोचा चलो किचन में खाना बनाने में उसकी मदद करता हूँ. उसी बहाने उसके पास रहूँगा. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

फिर मैं उसके पीछे किचन को गया.श्रद्धा: अरे फिर आ गए? लगता है तुम्हारा मन अकेले लग नहीं रहा.मैं: हाँ क्या करू मुझे उतना टीवी देखने की आदत नहीं.श्रद्धा: हम्म तो किस चीज़ की आदत है तुम्हे? लड़किया ताड़ने की?मैं: अरे आप तो उसी बात को लेकर बैठ गए हो. मैं तो कुकिंग में हेल्प करने आया हूँ.श्रद्धा: अच्छा? कुकिंग आती है?मैं: बिलकुल बोलिये क्या खाना पसंद करेंगे आप?श्रद्धा: है है है!! अच्छा? क्या खिलाओगे? मतलब क्या बनाना आता है तुम्हे? और प्लीज ये आप आप बोलना बंद करो.मैं: आपको आप नहीं बोलू तो और क्या बोलू?श्रद्धा: तुम तुम ही बोलना आप मत बोलो. खुद ही कहते में में 25-26 की लगती हूँ और फिर आप बोलकर 35 का होने का एहसास भी दिलाते हो.

मैं: ओके ओके अब से आपको आप नहीं बोलूंगा.
श्रद्धा: फिर से आप!मैं: सॉरी तुम्हे आप नहीं बोलूंगा.श्रद्धा: हम्म्म वैरी गुड. अब बोलो क्या खाओगे?मैं: हम्म.मैंने फ्रिज को खोला और देखा की क्या क्या है खाना बनाना को और फिर बोला: तुम्हे भिंडी पसंद है?श्रद्धा: हाँ मुझे तो भिंडी बहुत पसंद है. पर अक्षुण को पसंद नहीं. डाट कर खिलाना पड़ता है.मैं: ओहो ओके तो उसे क्या पसंद है?श्रद्धा: आलू खा लेता है.मैं: ओके तो हम आज भिंडी का फ्राई और आलू और बीन्स की सब्जी बनाते है?श्रद्धा: हम्म मुझे आती है दोनों तुम्हे तकलीफ करने की ज़रुरत नहीं.मैं: अब चुप भी रहो आप मतलब तुम.

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तुम कुछ मत बोलो मैं करता हूँ.फिर हम दोनों मिलकर खाना बनाने की तयारी करने लगे. वह मेरे एक तरफ सिंक में सब्जिया धो धो के दे रही थी. मैं सब्जियों को काट रहा था. किचन का काउंटर शेप का था.तो जब श्रद्धा सिंक में सब्जिया धो रही होती हो तो वह मुझे पीठ दिखा के खड़ी रहती. और मैं पीछे खड़ा उसे ऊपर से नीचे निहारता रहता. मन तो कर रहा था की उसे पीछे से गले लागलु. उसकी कूल्हों के पास उसकी साटन की गाउन काम करते वक़्त कभी गांड की दरार में घुस जाती और कभी कस जाती. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

तो ऐसा लगता मानो उसने गाउन के अंदर शायद पेंटी भी नहीं पहनी है.ये सोच की वह उस कपडे के अंदर पूरी नंगी है. मेरे लंड में हलचल होने लगी. मन कर रहा था की हवा बन कर उसके गाउन में घुस कर अंदर उसके नंगे बदन के हर हिस्से को गुड़गुड़ाऊं.तभी अचानक से वह मुड़ी और झट से मुझे उसके गांड को देकते हुए पकड़ली और बोली: हेलो!! वाह देख के सब्जी काटो वरना हाथ काट जाएगा .मैं कुछ बोलने के लायक नहीं बचा और चुप चाप सब्जी को काटने लगा. बीच बीच में कभी काम करते वक्त उसके मुलायम हाथ मेरे हाथो से टकरा जाते तो बदन में करंट आ जाता.और शायद श्रद्धा को भी ये बात पता थी. इसके कारन वह बार-बार मेरे हाथो से अपने हाथो को छू लेती कुछ न कुछ करने के बहाने.

तभी फ्रिज के ऊपर रखा हुआ श्रद्धा का सेल फ़ोन बजने लगा. फ्रिज के पास ही मैं खड़ा था तो मैंने सोचा फ़ोन उठा कर श्रद्धा को दे दू.तभी उसने जल्दी से मेरे हाथ को पकड़ रोक लिया और बोली की रुको में देख लूंगी. पहली बार उसने मेरे हाथो को पकड़ा ये सोच मैं खो गया पल भर के लिए. फिर श्रद्धा फ़ोन में बात करते हुए कड़ाई में सब्जी को हिलाते हुए पकाने लगी.श्रद्धा: हेलो….……………………………………..श्रद्धा: हाँ है मेरे पास.………………………………………श्रद्धा:

५%.………………………………………श्रद्धा: हाँ भेजवा दूँगी ओके बाई.फिर श्रद्धा फ़ोन कट करके मुझसे बोली: सॉरी! काम के सिलसिले में था.मैं: कोई बात नहीं. भला सॉरी क्यों?यूं ही कुकिंग करते करते और काम-पढ़ाई की बातो में टाइम निकल गया. एक घंटे में सारा खाना टेबल पर रेडी था. टाइम का पता भी नहीं चला कब 9 बज गए थे.फिर श्रद्धा बोली: तुम अभी खाओगे या बाद में?मुझे समझ नहीं आया की अभी तो सब टेबल पर लग गया तो बाद में क्यों खाना है? मैंने पुछा: क्यों तुम अभी नहीं खाओगी क्या?श्रद्धा: नहीं मैं इतना जल्दी नहीं खाती तुम्हे भूख लगी है तो अक्षुण के साथ तुम खालो. वह अभी खाकर सोने जाता है.

फिर मैं बाद में खाता हूँ.मैं: ठीक है तो हम साथ में बाद में खाते है. अभी तुम अक्षुण को बुलाकर खिलादों.श्रद्धा: हाँ ठीक है सही रहेगा.श्रद्धा अक्षुण को लेने उसके रूम को गयी और मैं लिविंगरूम के सोफे पे जाकर बैठ गया. वह फिर उसे लेकर आयी उसके हाथ मुँह धुला कर उसे खाना खिलने लगी. कुछ 20 मिनट बाद अक्षुण का खाना हो गया.श्रद्धा: अमित मैं इसे इसके रूम में अब सुलाकर आती हूँ ओके.मैं: हाँ ठीक है.फिर कुछ 15 मिनट के बाद श्रद्धा अक्षुण के कमरे से बहार आयी और उसका दरवाज़ा बंद कर दी. मेरे तरफ मुस्कुराते हुए आने लगी. आकर वह मेरे ठीक सामने वाले सोफे पे बैठ गयी.श्रद्धा: बोर हो रहे हो क्या?मैं: अरे नहीं बिलकुल भी नहीं.श्रद्धा: क्या पियोगे?मैं एकदम सा चौंक गया और पुछा: क्या?

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श्रद्धा: ड्रिंक क्या पसंद है? मैं एक पेग व्हिस्की पी कर ही सोती हूँ. तुम कुछ पियोगे.मैं: अरे नहीं नहीं चलेगा.श्रद्धा: अब शर्माओ मत बोलो व्हिस्की चलेगा?मैं: अच्छा ठीक है व्हिस्की.श्रद्धा उठी और किचन के पास के स्टोर रूम में गयी. दो गिलास और व्हिस्की की एक बोतल ले आयी जो आधी खाली हो चुकी थी.मैं: तुम रोज़ पीती हो?श्रद्धा: हाँ टाइम काटने के लिए एक पेग पी लेती हूँ.इतना कहते हुए वह फिरसे झुक कर गिलास में पेग डालने लगी. मैं फिरसे उसके क्लीवेज को घूर रहा था. तभी उसने मेरे तरफ देखा और पूछी: वाटर या नेट या ओनली आइस?इतना कहते हुए वह मुस्कुरा दी ये देख की मैं उसकी क्लीवेज को देख रहा हूँ और बोली: चखने के बारे में बाद में सोचना अभी बोलो. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

मैं हड़बड़ाते हुए बोला: हाँ बस दो आइस चलेगा और आधा पानी.फिर वह सीधी हुई और किचन में जाकर पानी का बोतल और एक ट्रे आइस लेकर आयी. मैं सोचने लगा की आखिर उसका मतलब क्या था की चकने के बारे में बाद में सोचु. फिर हमने पेग बनाया और चियर्स बोलते हुए ड्रिंक शुरू की.श्रद्धा ने अपनी गिलास नीचे रखी.हु किचन को जाकर एक प्लेट में कुछ चकने के लिए लेकर आयी. फिर बैठ कर टीवी में कुछ गाने लौ वॉल्यूम में लगायी और फिर मुझसे बात करने लगी.श्रद्धा: तो अब बोलो अमित हाउ’स योर लव लाइफ? कोई गर्लफ्रेंड है?

मैं: नहीं अभी तक तो कोई नहीं बनी .श्रद्धा: क्यों कोई पसंद नहीं आयी?मैं: मुझे तो पसंद आती है पर उन्हें पसंद नहीं आता.इस बात पर श्रद्धा है पड़ी और एक ही बार में पूछी: तो तुमने कभी कुछ नहीं किया?मैं समझ गया की वह क्या पूछी पर अनजान बना: मतलब कुछ नहीं किया मतलब?श्रद्धा: बनो मत जैसे की समझे नहीं. कभी किसी लड़की के साथ कुछ किया क्या?मैं: नहीं किस्मत कहा. गर्लफ्रेंड ही नहीं बनती कोई तो वह सब कहा.श्रद्धा पेग का सिप लगाती हुई बोली: गर्लफ्रेंड के साथ ही करो ऐसा ज़रूरी तो नहीं.

इतना कहती हुई उसने मुझे आंख मारी दी और मैं मुस्कुराने लगा.श्रद्धा: अरे शर्माओ मत मैंने कुछ गलत थोड़ी न कहा.मैं: हाँ गलत तो नहीं पर ऐसे खुले विचारो वाली कोई लड़की भी तो मिलनी चाहिए जो ऐसा सोचे.श्रद्धा: अगर मिल गयी तो करोगे?मैं: हाँ बिलकुल.श्रद्धा: क्या क्या करोगे?मैं: जो भी कर सकता हूँ.श्रद्धा: चलो मान लो की मैं वह लड़की तो अब बताओ क्या क्या करोगे?मैं एक दम मनो बातो में फस गया: तुम हम्म्म तुम मिली तो….श्रद्धा: है है है! बोलो बोलो.इतने में वह उठी और टीवी में ‘मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त’ वाले गाने पर हलकी हलकी कमर हिलाकर नाचने का मूव्स बनाना लगी.श्रद्धा: तुम्हे डांस करना पसंद है क्या?मैं: हाँ पर कोई स्टेप्स नहीं है बस बारात में जैसे लोग नाचते है वैसे नाच लेता हूँ.श्रद्धा हसने लगी और कमर पर एक हाथ रख ठुमके मारती हुई नाचने लग.

जिसे देख मेरा नशा मनो और बढ़ रहा था. वह मेरे आँखों से आंखे मिला कर नाच रही थी. मनो मुझे लुभा कर बुला रही हो. मैं तो था की उठ कर उसे लपक लू. पर जल्दबाज़ी में सब बिगाड़ना नहीं चाहता था.इतने में उसने मुझे आँख मरी और ऊँगली से अपने पास बुलाने का इशारा की. मैंने अपना गिलास नीचे रखा और उसके पास गया. मुस्कुराती हुई मेरे एक हाथ को अपने कमर पर रखा और दूसरा उसके कंधे पर. फिर हम धीरे धीरे गाने के साथ हिलने लगे.उसके कमर पर हाथ रखते ही मैं पक्का हो गया की उसने सचमे उस गाउन के अंदर कुछ नहीं पहनी थी. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

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फिर हम एक दूसरे के आँखों में आंखे डाल यूं ही हलके से हिलते रहे. मनो जिस तरह से मैं उसके आँखों में खो गया था वह भी मेरी आँखों में डूब गयी थी.कुछ सोचा नहीं और अपने होठो को उसके होठो से लगा दिया. डर था की शायद मैं हद से आगे बढ़ गया. पर नहीं उसने किश को आगे बढ़ाया और फिर हम दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे. मेरे हाथ उसके कंधो से हैट कर उसके बालो को बिगड़ने लगे.तोह उसके हाथ मेरे पीठ पर अपने नाख़ून गाड़ने लगी. तभी उसने अपना दूसरा हाथ पकड़ी और उठाकर उसे अपनी गांड पर रख दी. अब मैं उसके रेशमी गाउन के ऊपर से उसकी गांड को हलके दबाव से दबा रहा था.

कितनी मुलायम लग रही थी उसकी गांड दबाने में. हमारे जीभ एक दूसरे के मुँह में जाने लगी.फिर जीब आपस में गले लग रही थी. कभी वह मेरी जीभ अपने मुँह में खींच लेती तो कभी में उसकी. और ऐसे ही हम एक दूसरे को अपने मुँह का रस पान करवाते रहे. तभी टेबल पे रखी मेरी फ़ोन बजने लगी. फ़ोन की आवाज़ से हम दोनों अलग होगये.वह शर्माकर नीचे देख अपने बालो में उंगलियों से खेलने लगी.

मैं चुप चाप अपने फ़ोन को उठा कर देखा तो स्वाति का कॉल आ रहा था. और स्क्रीन पर श्रद्धा ने भी स्वाति का नाम देख लिया. मैं खड़ा सोचने लगा की स्वाति का कॉल अटेंड करू या नहीं. ऐसा लग रहा था मनो क्यों ये कॉल अभी आया.पर कॉल तो उठाना ही था तो जैसे ही मैं अटेंड करने को गया श्रद्धा मेरा हाथ पकड़ी और बोली: क्या बोलने वाले हो उसे?मैं: यही की मैं यहाँ पार्क में हूँ.श्रद्धा: और फिर?मैं: शायद वह आ गयी हो तो अब मुझे जाना होगा.मन तो नहीं था कहने का पर और कोई चारा नहीं दिख रहा था. टाइम देखा तो 10 बज रहे थे. काश वह सचमे 11 या 12 बजे कॉल करती. ये सोच मन सेल पकडे खड़ा था तभी रिंग बजनी बंद हो गयी.श्रद्धा: क्या तुम रुक नहीं सकते? हम्म्म्म चाहो तो तुम्हारी मर्ज़ी.

मैं: पर कैसे मैंने उसे बोल दिया की मैं ऑलरेडी यहाँ पहुँच गया.श्रद्धा: एक काम करो. उसे कॉल करो और बोल दो की जब तुम वेट कर रहे थे तो तुम्हारे फ्रेंड का कॉल आया. क्यों की स्वाति 12 बजे बोली थी तो तुम वापस अपने दोस्त के यहाँ चले गए और कल सुबह वापस आओगे.मैं: हम्म्म कोसिस कर सकता हूँ.मेरा कोई मन नहीं था अभी श्रद्धा को छोड़ के जाने का. तो मैंने श्रद्धा की बात सही समझी और साथ ही 12 बजे तक के जगह अब मैं पूरी रात श्रद्धा के साथ रह सकता था. और कुछ नहीं सोचा और स्वाति को लगा डाला कॉल.स्वाति: हेलो अमित?

मैं: हाँ स्वाति.स्वाति: कहा हो? माँ डैड का कॉल आया था. वह लोग घर पहुँच गए है.मैं: क्या? पर तुमने तो कहा की वह.स्वाति: हाँ पता है मैं भी वही सोची थी. मैं भी इसी लिए घर आ रही हूँ. तुम नीचे ही होना अपार्टमेंट के? तो ऊपर घर चले जाओ.मैं: अरे स्वाति नहीं. वह मैं अपने फ्रेंड के पास वापस आ गया.स्वाति: क्यों?मैं: तुमने कहा तुम्हारे आते 12 बज जायेगा तो मैं उसके यहाँ वापस आ गया.स्वाति: क्या ढक्कन हो तुम थोड़ा वेट नहीं कर सकते थे क्या?मैं: मुझे क्या मालूम था की ऐसा होगा वरना वेट करता न.स्वाति: ओके चलो कोई बात नहीं. माँ डैड को कॉल करके बता दो.मैं: स्वाति प्लीज एक काम करना.स्वाति: क्या?मैं: जब तुम घर पहुँचोगी तो प्लीज तुम्ही बोल दोना. की मैं आया था पर कोई नहीं था तो मैं वापस चला गया. प्लीज.स्वाति: ओके ओके कह दूँगी.मैं: थैंक यू स्वाति.स्वाति: हम्म्म ओके बाई. बोल दूंगी. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

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मैं: बाई.स्वाति ने झट से कॉल कट कर दी तो पता चल रहा था की वह शायद गुस्से में है. पर मैं तो पूरा खुश था की आज रात भर मैं श्रद्धा के साथ रहूँगा. मैंने श्रद्धा को देखा और बोला: लो हो गया. क्या आईडिया दिया तुमने.श्रद्धा: हम्म्म और अब आगे तुम्हारा क्या आईडिया है?उसने मुस्कुराते हुए पुछा तो समझ गया मैं. उसके हाथो को पकड़ कर खींच कर उसे गले लगा कर बोला: बात ये है की आज की रात मेरे पास सोने के लिए जगह नहीं है. तो तुम बताओ उसके लिए कोई आईडिया.श्रद्धा भी अदाओ के साथ मुझसे पूछी – आज की रात भला सोना कौन चाहता है?और फिर हम दोनों फिरसे एक दूसरे को किश करने लग गए. इस बार किश काफी वाइल्ड होने लगा. हमारे होंठ एक के ऊपर एक करवाते लेने लगे जीभ एक दूसरे के मुँह में घुसकर आपस में गले लगने लगे.

मेरा हाथ उसके पुरे पीठ पर उसके गाउन के ऊपर दौड़ रहा था.वही उसके हाथ मेरे पीठ को मेरे टी शर्ट के ऊपर से खरोचों पे खरोच मार रही थी. उसकी जंघे गाउन के अंदर से मेरे पैरो के बीच घुसकर मेरे लंड को सहलाने लग गए. तो मेरे हाथ उसकी जांघो पर इस कदर सहलाने लगे. उसकी गाउन धीरे धीरे ऊपर उठने लगी.जल्द ही उसकी गाउन इतनी ऊपर थी की मेरे हाथ आराम से उसकी नंगी जांघो को छू रही थी. नंगी जांघ को सहलाते हुए मेरे हाथ अब ऊपर आ गया था. मैं उसकी नंगी गांड को सहलाता तो कभी ज़ोर से मसल रहा था. और साथ ही दूसरा हाथ उसके गाउन के ऊपर से उसके बूब को दबा रही थी.

उसकी मुँह किश के बीच हलकी हलकी आहे भी दे रही थी. क्यों की उसने पेंटी नहीं पहनी थी. जल्द ही मेरे हाथ उसकी गांड की रेखा में घुस कर गांड की छेद को छेड़ने लगी. जिसपर उसने मेरे होंटो पर ज़ोर से काट मार दी. मैं भी उसकी निप्पल को कपडे के ऊपर से ही चुटी कटनी शुरू कर दी.हम दोनों इतने पागल हो गए थे. उसने झट से अपनी हाथ नीची बढ़ायी और मेरे जीन्स के ऊपर से मेरे लंड को ज़ोर से दबा दिया. मैंने किश को तोडा और एक धक्के में उसे सोफे पे बैठा दिया. वह सोफे पर ऐसे गिरके बैठी की उसके दोनों पेअर फैल गयी.और क्यों की गाउन उठा हुआ था तो वह अब पूरा जांघो के पास फैलकर खुला हुआ था. और अंदर की साडी खूबसूरती का प्रदर्शन दे रही थी. उसकी चूत बिलकुल साफ़ थी मनो आज ही शेव किया हो और गीले पैन से चमक रही थी. बेशर्म होकर वह पैरो को खोल कर बैठी थी.अपने बूब्स को गाउन के ऊपर से मसलती हुई मुझे ऊँगली से पहले उसके पास जाने का इशारा की.

फिर उसी ऊँगली से अपनी चूत के तरफ इशारा करके बोली: आओ मेरी दूसरी होंठ को भी किश करना.मैं तुरंत अपने घुटनो पे बैठा. उसकी टैंगो के बीच मुँह डालकर उसकी चूत को चुम लिया. क्या खुशबू थी और क्या नमकीन सा स्वाद. मेरे होठो के उसके चूत को छूते ही उसकी आंखे बंद हो गयी. फिर वह मेरे सर को पकड़ी और अपनी चूत के तरफ खींचती हुई बोली: प्लीज खा जाओ मुझे. कितने दिन से तड़प रही हूँ.मैंने उसकी चूत को पहले चाटा. फिर उसके चूत के डेन को जीब से सहलाने लगा. जिसपर वह पागल हो कर मेरे बालो को खींचने लगी. उसकी चूत में मैं अपना जीभ धकेला. पूरा तो नहीं गया पर जितना अंदर गया उतने में चाट चाट कर उसकी रस को अपने मुँह में भरने लगा.अब तक वह अपनी एक बूब को अपनी गाउन के गले से बहार निकल उसे खुद मसल रही थी. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

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कभी निप्पल को ज़ोर से खींच रही थी जैसे कोई रबर की बानी हो. मैं उसे पागल होते देख दो ऊँगली चूत में घुसके उसे ऊँगली से चोदने लगा. साथ ही चूत से निकलते रस को चाट चाट कर गले से नीचे उतारणे लगा.जल्द ही उसकी आहे तेज़ होने लगी और वह झड़ने वाली थी. पर बस झड़ने से पहले उसने मेरे सर को बालो से पकड़ कर हटा दी. मुझे लाथ से धकेलती हुई फ्लोर पर लेटा दिया वह उठ खड़ी। हुई मैं फ्लोर पर लेटा ऊपर उसे देख रहा था. वह मेरे सर के ऊपर आयी.अपनी गाउन को अपनी कमर तक उठती हुई मेरे मुँह पर ऐसे बैठी जैसे की वह टॉयलेट करने बैठी हो. और ठीक उसकी चूत मेरे मुँह पर आ गयी. अपनी कमर को हिलती हुई रस से टपकती हुई उसकी चूत को वह मेरे मुँह पर रगड़ने लगी. मैं जीभ निकल कर आगे पीछे जाता चूत को चाटने लगा.चूत को मेरे मुँह पे लगा कर वह मेरे ऊपर लेट गयी. जिससे उसकी मुँह ठीक मेरे पैंट के ऊपर मेरे लंड के पास आ पहुंची.

मैं उसकी चूत को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था. उसने मेरे पैंट की बटन खोली और नीचे करके मेरे लंड को एक ही बार में खींच कर बहार निकाल दिया श्रद्धा अपनी चूत चुसवाने के मज़े में मेरे लंडको निचोड़ रही थी. फिर एक ही बार में पूरा लंड उसने मुँह में घुसा ली. अब हम 69 के पोजीशन में थे. मैं उसकी चूत को पागलो की तरह चूस और चाट रहा था. उसके चूत से रास की धार बाह रही थी.वह भी पागलो की तरह मेरे लंड को अपनी मुँह में डाल कर अपने सर को ऊपर नीचे कर अपनी मुँह को लंड से चुदवा रही थी.

मुझे तब समझ आयी की हाथ से हिलाने और एक महिला के साथ करने में काफी फरक होता है. क्यों की मैं जल्द ही झड़ने वाला था. और साथ ही ऐसा लग रहा था की श्रद्धा भी झड़ने वाली है.कुछ सेकंड ही हुआ की मेरे लंड से गरम लावा फूट पड़ा उसके मुँह के अंदर. तभी ऐसा लगा की मेरे मुँह में कोई गरम पानी की धार छूट गयी हो. वह भी ठीक मेरे बाद झड़ गयी. उसका सारा पानी मेरे मुँह में पिचकारी के तरह भरने लगी और मैं गटकता गया.वही वह भी मेरे लंडको मुँह में रखे रही. जिससे मेरा मुठ उसकी मुँह से बहार नहीं आयी और वह सारे रस को पी गयी. कुछ देर के लिए हम दोनों बेजान हो कर वैसे ही पड़े रहे. फिर मुझे महसूस हुआ की कोई मेरे बेजान पड़े लंडको फिरसे दाये बाये हिलाने लगा है.

तब जाकर आंखे खोली मैंने.देखा तो कितना सेक्सी नज़ारा था. जिस तरह से उसकी गांड और चूत मेरे मुँह से थोड़ी ऊपर थी मैं कर रहा था की अब उठु ही नहीं. मैं उसकी गाउन को उठा कर उसके कमर पर टिका दी और ठीक गांड की छेद पर एक किश लगा डाला.जिसपर उसने कहा: यू सो नॉटी डर्टी बॉय.मैं: रहा नहीं गया देख कर.श्रद्धा: किसने कहा देख कर कुछ मत करने को.इतना कहती हुई उसने मेरे बेजान झूलते लंड को मुँह में भर कर फिरसे चूसने लगी. मैं भी चालू हो गया वापस उसकी चूत चाटने. पर इस बार में चूत के साथ गांड को भी चाट रहा था. वह मेरे लंड को लोल्लिपोप की तरह चूस रही थी जिससे कुछ ही देर में मेरे लंड में फिरसे जान आने लगी.साथ ही उसके चूत भी फिर से गीली होकर तारो ताज़ा होने लगी.

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हम दोनों फिरसे गरम हो रहे थे. और कुछ पांच मिनट में ही हम दोनों अगले राउंड के लिए तैयार थे. वह उठ कर कड़ी हुई. और सोफे पर घुटने टिका कर घोड़ी बैंकर कड़ी हो गयी. गाउन को उठाकर अपने कमर तक रखी और फिर उसी हाथ से मुझे इशारा कर के बुलाने लगी.श्रद्धा: अब आओ इधर अमित. शो में व्हाट यू अरे.मैं झट से खड़ा हुआ. अपने पैंट और अंडर वियर एक ही साथ खींच कर निकल फेका. मेरा लंड उसके थूक से सनसना रहा था और उसकी चूत मेरे थूक से. उसके पास जाकर उसके कमर को पकड़ा.और लंड को चूत के मुँह पर लगा कर धीरे से घुसाने लगा. अपनी ज़िंदगी में आज पहली बार मेरा लंड चूत का अनुभव करने जा रहा था. इसी लिए मैं धीरे से घुसते हुए देख रहा था की कैसे लंड चूत में समां जाता है.तभी श्रद्धा बोली: मैं तुम्हारे तरह वर्जिन नहीं हूँ जो इतना धीरे दाल रहे हो. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

ये सुनते ही मैं एक ही झटके में आधा घुसा लंड पूरा घुसा डाला जिसपर श्रद्धा ने ज़ोर से आह मार दी. फिर मैं उसके कमर को पकड़ खचा खच उसे चोदने लगा. वह सोफे के रेस्ट पर हाथ टिका कर कुतिया की तरह चुदने लगी.श्रद्धा: आह यस यस अमित फीलस सो गुड.उसकी बात सुन कर मैं और तेज़ उसके चूत के अंदर अपना लंड घुसाने लगा. उसकी आहे तेज़ होने लगी तो मैंने कहा: धीरे अक्षुण उठ जायेगा.श्रद्धा: आहे आह! मुझे ज़ोर ज़ोर से चिकने से सेक्स करना पसंद है. फ़क मे मोर प्लीज.उसकी बातो ने मुझे जोश में ला दिया. और मैं और तेज़ी से खचा खच लंडअंदर मारे जाने लगा. कितनी गरमाहट थी उसकी चूत के अंदर. ऐसा लग रहा था मनो मेरा लंड पिघल जायेगा.

मैं उसकी तेज़ सिसकारियों को सुनकर पागल होता गया. और उसी तरह मेरा लंड भी धना धन उसे चोदता गया.जल्दी ही मैं फिर से झड़ने वाला था पर ऐसा लग नहीं रहा था की वह झड़ने वाली है.मैं: आह लगता है मैं झड़ने वाला हूँ.श्रद्धा: इतनी जल्दी फ़क.मैं: हाँ सॉरी मैं निकल रहा हूँ.श्रद्धा: नहीं मत निकालो. और चोदो अंदर ही निकलने दो उसे.मैं: पर.श्रद्धा: कोई पर नहीं बस चोदते रहो मुझे रुको मत.जब ऐसा एहसास हुआ की मैं झड़ने वाला हूँ तो खुद को रोका नहीं और देते गया उसके अंदर. पता नहीं कब मेरे मुँह से आह निकली और एक लम्बी धार मुठ की मैंने उसके अंदर छोड़ दिया. कुछ 10-से 15 सेकंड मैं उसकी कमर पकड़ा खड़ा रहा जब तक उसकी चूत के अंदर मेरी निकलती पिचकारी बंद न हो गयी.फिर मैं उसे छोड़कर साइड पर बैठ गया. मनो अब मुझे हिमथ ही न हो कुछ करने की. वह मुझे देखि और फिर मूड कर ठीक मेरे तरफ पैरो को फैलाकर बैठ गयी. मुझे देखती हुई अपनी चूत में ऊँगली डाल कर खुद को चोदने लगी.

उसे खुद को अपनी ही ऊँगली से चोदते देखने में मज़ा आ रहा था.वह आंखे बंद कर के खुद को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगी. और देखते ही देखते उसकी चूत से मेरा और उसका मिला घुला पानी पहच पहचाती हुई बहार फेकने लगी. साथ ही वह आह की आवाज़े करने लगी. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

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फिर उसका हाथ धीरे धीरे रुक गया और कुछ देर के लिए वह ऐसे आंखे बंद कर पड़ी रही.उसकी उगलिया चूत में ही थी पर बेजान. कुछ पांच मिनट्स के बाद वह उठी और मुझे देख मुस्कुराती हुई उठ कर टीवी के पीछे से एक सिगरेट की पैकेट निकाली. एक सिगरेट निकल कर पीने लगी और बोली: सिगरेट पियोगे?मैं: हाँ क्यों नहीं.उसने मेरे तरफ सिगरेट की पैकेट और लाइटर फेक के दी. मैंने एक सिगरेट जलाई और उसे देखा.श्रद्धा: तुम्हारा खेल तो बड़ी जल्दी ख़तम हो जाता है.मैं: पता नहीं. जब मैं मुठ मारता हूँ तो इतनी जल्दी नहीं निकलता.श्रद्धा: है है है! एक लड़की के साथ करने में बहुत फरक होता है. कोई बात नहीं पहली बार है ना. इसका इलाज है मेरे पास. और फिर तुमने तो पूरी रात का डायलॉग मारा है.इतना कहती हुई उसने मुझे आंख मार दी.मैं: पर मुझे अब फिर से खड़े होने में पता नहीं शायद टाइम लगेगा. ये काम इतना मुश्किल होता है पता नहीं था.श्रद्धा: हम्म्म कोई बात नहीं.

अगर तुम तैयार होतो मेरे पास इलाज है.भला मैं कैसे बोलता की मैं तैयार नहीं.मैं: मैं किसी भी चीज़ के लिए तैयार हूँ तुम बोलो क्या करू.श्रद्धा: फ़िलहाल हम खाना खाते है. देखो 10 बज गए है. लेट’स बात फर्स्ट.इतना कहती हुई श्रद्धा आधी सिगरेट ऐश ट्रे में दबा के बुझा दी. फिर उसे ध्यान आयी की उसकी एक बूब अब भी बहार लटक रही थी.श्रद्धा: ऊप्स ये अब भी बहार है मुझे तो पता भी नहीं चला है है है!मैं: रहने दोना अच्छी लग रही हो.श्रद्धा मुझे शरारती मुस्कराहट मारी हुई बूब्स को अंदर डालती हुई बोली: डॉन’टी वोर्री जल्द ही कुछ नहीं होगा मेरे ऊपर. लेट’स बात चलो जल्दी.

फिर हम उठे और किचन को जाकर हाथ और मुँह धोये. और फिर खाने को बैठ गए. हमने जल्द ही खाना खाया. इस बीच उसने मेरे कुकिंग की तारीफ भी की और साथ ही ये भी कहा की मैं रोज़ आकर खाना बनाऊं उस के लिए. इस बीच मैं सिर्फ अपनी अंडर वियर और टी शर्ट ही पहना हुआ था. Ek Raat Me Ghar Par Bhabhi Ki Chudai:

तो दोस्तो आज इस कहनी मे बस इतना ही आगे क्या हुआ ये मैं आपकों कल बतौगा.
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