By | January 3, 2023

Meri aur Saas ki Chudai:- हैलो दोस्तो, मेरा नाम नेहा है. मेरी उम्र 26 साल है. और मैं नॉएडा की रहने वाली हु. मेरी ये कहानी मेरी सास चाचा ससुर और मेरे बीच बने रिश्ते की है. मेरे घर में मेरे पति मेरी सास और मैं ही रहती हु. मेरे ससुर की डेथ कई साल पहले हो चुकी है.मेरी सास का नाम अनुपमा है.

और उनकी उम्र 45 साल है. मगर वह अपनी उम्र से छोटी ही लगती है. उनका भरा हुआ बदन देखकर तो मेरे दिल में भी आग लग जाती है.

मेरी सास का फिगर 40-36-44 है.फिगर देखकर आप समझ ही गए होंगे की वह कितनी मादक जिस्म वाली है. वैसे मैं भी अपनी सास से कुछ कम नहीं हु.

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मेरा फिगर भी किसी को भी पागल बना सकता है. मेरा फिगर 38-32-42 है.वैसे मैंने शादी से पहले ही अपनी आग को शांत कर लिया था. कई लड़को से अपनी आग शांत करवाई. और फिर मेरे घर वालो ने मेरी शादी कर दी.

मेरे पति का नाम विजय है. वह मेरी ही उम्र के है. और दिखने में काफी हैंडसम है. मेरी शादी हुए अभी 1साल ही हुआ है. और मैं आपने पति से पूरी तरह संतुष्ट हु.मगर कहते है न की कदम बहक ही जाते है. मैं जब भी अकेली होती थी. तब मैं आपने पुराने टाइम को ही याद करती थी. और दिन में भी कई बार डिलडो से अपनी चुत को शांत कर लेती थी.ये डिलडो मुझे मेरे पति ने ही दिया था. वह अक्सर इसका इस्तेमाल करते थे. और मुझे भी इससे मज़ा आता था. जब भी मेरे पति अपने काम से बहार जाते है. तब मैं डिलडो का ही सहारा लेती हु.

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टाइम सही चल रहा था. मगर फिर मैंने वह देखा. जिससे सब बदल गया. हमारे घर मेरे हस्बैंड के चाचा आते जाते रहते थे. चाचा जी हरयाणा के रहने वाले है. उनका पूरा परिवार वही रहता है. चाचा जी की उम्र मेरी सास के ही बराबर है. और वह पुरे देसी आदमी है.

वैसे तो वह अक्सर अपनी वाइफ के साथ ही आते है. मगर जब भी वह अकेले आते है. तो कम से कम 2 या 3 दिन रुक के ही जाते है. चाचा जी पर शक करने जैसा कुछ नहीं था.

मगर कभी कभी मैंने उनकी नज़र अपने जिस्म पर घूमती देखि थी. मगर मैंने इस बात पर जयादा धयान नहीं दिया. क्युकी हर मर्द की नज़र कभी न कभी बहक ही जाती है.ऐसे एक दिन मेरे पति अपने काम से बहार गए हुए थे. और चाचा जी घर आये हुए थे. आज चाची नहीं आयी थी. चाचा जी आज घर पर ही रुके थे.मैंने सबके लिए खाना बनाया. और फिर हम सब खाके अपने अपने कमरे में आ गए. हमारे यहाँ 10 बजे तक सब अपने अपने कमरे में आ जाते है. और इस दिन भी ऐसे ही हुआ.मैंने कमरे में आते ही अपने कपडे निकाल दिए. मैं अपने बेड पर नंगी लेटी हुई थी. और मैंने एक नाइटी साइड में राखी हुई थी.
ताकि कोई आ जाये तो मैं उसे पेहेन लू. बेड पर लेटे लेटे मैं अपनी चुत को रगड़ रही थी. और तभी मेरे पति का वीडियो कॉल आ गया. और मैंने भी उसे जल्दी से उठा लिया.

पति – क्या बात है डार्लिंग? आज तो तुम पहले से ही तैयार बैठी हो. लगता तुम्हारी चुत में आग लगी हुई है.
मैं – अब मैं भी क्या करू? आग शांत करने वाला भी तो दूर बैठा है.पति – बेबी नाराज मत हो. अब काम है ये तो करना ही पड़ेगा. वैसे इसीलिए तो मैंने तुम्हारे लिए दूसरे पति का इंतजाम किया है (दूसरा पति मतलब डिलडो). उसको निकल के इस्तेमाल करो.

मैं – बेबी जो मज़ा तुम्हारे लंड में है. वह मज़ा मुझे इस रबर के लंड से नहीं आता है. मैं सच में तुम्हे बहुत याद करती हु. जब भी तुम ऐसे बहार जाते हो.

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पति – चिंता मत करो बेबी. आने के बाद तुम्हारी सारी गर्मी निकाल दूंगा. मगर अभी तो मूड मत ख़राब करो. अब अपने दूसरे पति को निकल लाओ.मैंने अलमारी से डिलडो निकाल लिया. डिलडो का साइज लगभग 9 -इंच का था.

जो मेरे पति से बड़ा ही था. मगर असली लंड का मज़ा अलग ही होता है. मैं डिलडो लेके बेड पर आ गयी.पति – वह बेबी तुम्हारे दूसरे पति का लंड तो काफी बड़ा है. ये तो तुम्हारी पूरी तसल्ली करा देता होगा.

मैं -हा बेबी जब मेरे पति घर से बहार होते है. तब यही मेरा साथ देता है.मैंने अपनी टाँगे फैला दी. और डिलडो को हलके हलके अंदर करने लगी. डिलडो लगभग 6-इंच तक अंदर चला गया. और मेरे पति मुझे देखकर अपने लंड हिलाने लगे.

मैं यहाँ डिलडो से अपनी चुत शांत कर रही थी. और मेरे पति मुझे देखर मज़ा ले रहे थे. फिर मैंने डिलडो को अपने बेड पर चिपका दिया. और मोबाइल को टाँगे के बीचे नीचे रख दिया.अब मैं डोगग्य स्टाइल में डिलडो अंदर ले रही थी. और सच कहु तो मज़ा मुझे भी बहुत आ रहा था. मैं जल्दी जल्दी अपनी चुत को डिलडो पर मार रही थी. और फिर कुछ ही देर बाद मेरा पानी निकल गया.

मैं वैसे ही लेट गयी. और अपने पति से बात करने करने लगी. फिर कुछ देर बाद मेरे पति भी सो गए. और मेरी भी आँख लग गयी.मगर फिर रात के 1 बजे मेरी आँख फिर से खुल गयी. मुझे बहुत जोर से टॉयलेट आयी थी.

इसीलिए मैं बहार आ गयी. टॉयलेट करने के बाद में नीचे किचन में पानी पीने गयी. और जब मैं अपने कमरे में वापस आ रही थी.तब मैंने हलकी हलकी आवाज सुनी. पहले तो मैंने उसे नज़र अंदाज़ कर दिया. मगर फिर वही आवाज मुझे फिर से आयी. सबसे पहले तो मैं गेस्ट रूम में गयी.जहा चाचा जी सो रहे थे. मैंने देखा दरवाजा खुला हुआ था. और चाचा जी बेड पर नहीं थे. मेरा दिमाग गलत ख्याल में घूमने लगा.

क्युकी अब चाचा जी कहा है. क्युकी टॉयलेट से तो मैं अभी अभी बहार निकली हु. वहा तो वह हो नहीं सकते है. फिर मैं दबे पाँव मम्मी जी के कमरे के पास गयी. और उनके दरवाजे पर कान लगाके सुनने लगी.आवाज अंदर से ही आ रही थी. मगर अंदर देखने का कोई भी रास्ता नहीं था. जिस तरह की वह आवाजे थी. उससे मैं ये जान गयी थी की अंदर चुदाई चल रही है.
मतलब अंदर मेरे चाचा ससुर और मेरी सास चुदाई का खेल खेल रही है. ये बात सोचने भर से मेरी चुत फिर से गीली होने लगी. और मैं वही खड़ी अपनी चुत को मसलने लगी.

मेरा दिल कर रहा था की काश मैं दोनों की चुदाई देख पाती. काश मैं चाचा जी का लंड देख पाती. जो मम्मी जी की चुत को शांत कर रहा होगा.मगर मैं कुछ नहीं कर सकती थी. इसीलिए मैं पास में ही छुप गयी. और चाचा जी के बहार निकलने का इंतज़ार करने लगी. मुझे बैठे बैठे आधा घंटा हो गया. और दोनों में से कोई भी बहार नहीं आया था. मगर मैं फिर भी उन्हें देखना चाहती थी. फिर कुछ देर बाद मम्मी जी के कमरे का दरवाजा खुला. और कमरे से निकलती रौशनी बहार आयी.पहले मम्मी जी बहार आयी.

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जो पूरी नंगी थी. उन्होंने इधर उधर देखा. कही मैं ही न नीचे आयी हु. फिर चाचा जी बहार आये. वह भी पुरे नंगे थे. उनके हाथ में उनके कपडे थे.मेरी नज़र चाचा जी के लंड पर गयी. जो की पूरा कला था. और उसका सूपड़ा एक दम गुलाबी था. चाचा जी का लंड नीचे झूल रहा था. उनका ढीला लंड भी 4-इंच के आस पास था.

चाचा जी ने मम्मी जी को अपनी बाहो में भर लिया. और मम्मी जी भी उनसे चिपक गयी. चाचा जी मम्मी जी के होंठों को चूसने लगे.चाचा जी और मम्मी जी को ऐसे देखकर. मेरी भी चुत पानी पानी होने लगी.

मुझे मम्मी जी से जलन सी होने लगी. वह इस उम्र में भी कितने मज़े ले रही थी. और मैं एक नकली लंड से खुद को शांत कर रही थी.फिर चाचा जी अपने कमरे में चले गए. और मम्मी जी भी अपने कमरे में चली गयी. दोनों के जाते ही मैं अपने कमरे में आ गयी.

और फिर मैंने अपनी नाइटी निकल के फेक दी.मेरी चुत पानी पानी हो रही थी. और फिर मैंने अपने बेड पर चिपका डिलडो निकल लिया. और उसे अपनी चुत में डाल लिया. मैं जल्दी जल्दी डिलडो अंदर बहार करने लगी.डिलडो अंदर बहार करते हुए. मुझे अपने पति नहीं बल्कि चाचा का लंड दिखाई दे रहा था. चाचा जी का वह कला लंड मुझे अपनी चुत में जाता महसूस हो रहा था.

मैं आँखे बंद करके चाचा जी को महसूस कर रही थी. और कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया. पानी निकलने के बाद में चाचा जी के बारे में ही सोच रही थी.और उनके बारे में सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. सुबह मैं जल्दी उठी. और मम्मी जी और चाचा जी के लिए चाय बनाके ले गयी.

मम्मी जी और चाचा जी बीएड टिया पीते है.मम्मी जी को चाय देने के बाद में चाचा जी को चाय देने चली गयी. मगर इस बार मैंने उन्हें आवाज नहीं दी. और हलके से दरवाजा खोल के अंदर चली गयी. अंदर का मंजर देखर. मेरी चुत फिर से गीली हो गयी.चाचा जी पाजामे और बनियान में लेटे हुए थे. और पाजामे में उनका खड़ा हुआ लंड साफ़ दिख रहा था. और चाचा जी का लंड देखकर मेरे होंठों सुख गए.

जिसे मैं अपनी जीभ से गीला कर रही थी. लंड का उभर देखकर मैं समझ गयी थी की चाचा जी चुदाई में कितने माहिर होंगे. वैसे भी मैं अपने पति से पहले काफी लंड ले चुकी थी.मैंने कल रात ही फैसला कर लिया था की मैं भी मम्मी जी की तरह चाचा जी के लंड की सेवा करुँगी.

मेरी सास को चाचा ने जम के चोदा

वैसे भी मेरे हस्बैंड तो काम की वजह से बहार रहते है.मैंने आपने दुपट्टा बिलकुल साइड में कर दिया. जिससे मेरी चूचिया चाचा जी को साफ़ दिखाई दे. और फिर मैंने अपना हाथ चाचा जी के लंड के उभर पर फिर दिया.मगर चाचा जी हाथ फिरने से भी नहीं उठे. मैंने चाचा जी की जांघो पर हाथ रखा. और उन्हें हिला दिया. चाचा जी तुरंत उठ गए. और आँखे खुलते ही उनके सामने मेरी चूचिया थी.

मैं वैसे ही झुकी हुई थी. और चाचा जी मेरी चूचियों को घूर के देख रहे थे.मैं – चाचा जी चाय पे लीजिये. वैसे चाचा जी आप तो बड़ी गहरी नींद में सोते है.चाचा जी – हा बहु बस कभी कभी होश नहीं रहता है.मेरी नज़र चाचा जी के लंड पर ही थी. और चाचा जी ने भी मेरी नज़र को पकड़ लिया था.

मैं -सही कहा चाचा जी जो लोग मेहनत जयादा करते है. उनकी नींद ऐसे ही होती है.मैंने चाचा जी को एक हल्का सा हिंट दिया था. जिसे वह शायद समझ ही गए होंगे. और मैं खड़ी खड़ी उनके लंड को ही देख रही थी. चाचा जी भी मेरी नज़र को ही पकड़ रहे थे.

चाचा जी – बहु कुछ और भी काम था क्या?
मैं -नहीं चाचा जी बस आप चाय पीजिये.जाते जाते भी मेरी नज़र चाचा जी के लंड पर ही थी. और मैंने उन्हें देखकर हलके से स्माइल किया. और फिर उनके कमरे से निकल गयी. मर्दो को फ़साना मुझे अच्छी तरह से आता है.और कही न कही चाचा जी भी मेरे बारे में ही सोच रहे होंगे. फिर मैं किचन में आ गयी. और सबके लिए नास्ता बनाने लगी. कुछ देर बाद चाचा जी भी नाहा के आ गए.

वह अपने कमरे में ही थे. और तभी मैं चाय का कप लेने गयी. चाचा जी लोअर और बनियान में थे.अंदर जाते ही उन्होंने मुझे देखा. और एक स्माइल किया. मैंने भी उन्हें देखकर स्माइल किया. फिर मैं कप लेने के लिए झुक गयी. और इस बार मेरी गांड ऊपर उठ गयी. जिसे चाचा जी देख रहे थे.और फिर मैं कप लेके बहार निकल गयी. कुछ देर बाद चाचा जी और मम्मी जी बहार बैठे हुए थे.

और फिर मैं दोनों के लिए नास्ता लेके आयी. मगर इस बार मैंने अपनी चूचिया ढक हुई थी.ये बात देखकर तो चाचा जी भी समझ गए होंगे की कमरे में दिखाया हुआ नज़ारा सिर्फ उनके लिए था.

मैंने सास को रात मे चाचा ग से चुदते हुये देखा

चाचा जी बार बार मुझे ही देख रहे थे. क्युकी आज से पहले मैंने कभी उनके साथ ऐसे नहीं किया था.मगर मेरा मन भी कल रात से ही उनके लिए बदल गया था. मम्मी जी की वह सिसकिया और चाचा जी का लंड देखकर. मेरे अंदर तूफ़ान घूम रहा था की चाचा जी ने कितने अच्छे से मम्मी जी की चुत को शांत किया होगा.

मैं काम करके अपने कमरे में चली गयी. और जाके लेट गयी. मैं हाथ में डिलडो लेके खेल रही थी. दोपहर का टाइम हो रहा था. तभी किसी ने मेरे दरवाजा पर दस्तक दी.मैंने जल्दी से डिलडो तकिया के नीचे रख दिया. मुझे लगा मम्मी जी होगी. मगर जैसे ही मैंने दरवाजा खोला. सामने चाचा जी खड़े थे. दरवाजा खुलते ही उनकी नज़रे मेरी चूचियों पर गयी.

जो मेरे सूट में से बहार निकल रही थी. चाचा जी मेरी चूचियों को देखे जा रहे थे. और मैं भी उन्हें कुछ नहीं कह रही थी. फिर उन्होंने मेरे चेरे की तरफ देखा. और स्माइल करने लगे.

मैंने भी उन्हें देखकर स्माइल किया. चाचा जी भी सोच रहे होंगे की ये बहु को क्या हो गया. आज से पहले तो कभी उन्हें इतना भाव नहीं दिया. और आज में इतना सब कुछ दिखा हु.मगर उन्हें क्या मालूम था. ये सब उनके लंड की वजह से हो रहा था. और अगर एक बूढ़े को जवान चुत मिलने वाली हो. तो वह भी चाचा जी जैसे ही बेसबर हो जाता है.
मैं – अरे चाचा जी आये अंदर आये.

चाचा जी -बहु कही मैंने तुम्हे परशान तो नहीं कर दिया.
मैं -अरे नहीं चाचा जी मैं भी बस बैठी हुई थी.चाचा जी -और मेरा नालायक भतीजा कहा रहता है आज कल. इतनी खूबसूरत बीवी को छोड़ के कहा घूमता रहता है.मैं – बस चाचा जी पूछिए मत. हफ्ते में 2 बार तो बहार ही रहता है. और मैं और मम्मी जी अकेले बोर होते रहते है.चाचा – हा भाभी भी यही कह रही थी. (भाभी मैं मेरी सास) की बेटा काम से बहार ही रहता है. पता नहीं कब उन्हें पोते का मुँह देखना नसीब होगा.

मैं -अब मैं भी क्या करू चाचा जी? ये तो बहार ही रहते है. मैं कहा से पोता दे दू. मैं बहुत खुले खुले जवाब दे रही थी. जिससे चाचा जी को भी मज़ा आ रहा था.चाचा जी – अरे बहु चिंता मत करो. बच्चे भी हो जायेंगे. अभी तो विजय के साथ टाइम बिताओ. बच्चे होने के बाद तो तुम्हे टाइम ही नहीं मिलेगा.

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चाचा जी मुझे ही घूर थे. और मैं उनके लंड को देख रही थी. मगर तभी चाचा जी की नज़र डिलडो पर पड़ गयी. जो तकिया के नीचे से थोड़ा बहार दिख रहा था.

डिलडो का टोपा बहार निकला हुआ था. जिसे चाचा जी देख रहे थे. और चाचा जी को ये समझते देर नहीं लगी की मैं क्या क्या करती हु. चाचा जी फिर खड़े हो गए.और मुझे देखकर हसने लगे. चाचा जी मेरे पास आये. और मुझे गले लगाके बोले.
चाचा जी – बहु तुम बच्चे की चिंता मत करो. अगर भाभी कुछ कह भी देती है.

जयादा धयान मत देना.चाचा जी का लंड मुझे महसूस हो रहा था. और मैं भी इस चीज का पूरा फायदा उठा रही थी. मैं खुद अपनी चूचिया उनके सीने में दबा रही थी.चाचा जी फिर अलग हो गए. और मुझे उनके खड़े लंड का शेप साफ़ दिख रहा था. चाचा जी बहार जाने लगे. और मैं उन्हें दरवाजे तक छोड़ने आयी.

चाचा जी जैसे ही बहार गए. मैंने आपने दरवाजा पूरा बंद किये बिना ही अपनी लेग्गिंग्स नीचे कर दी. अब मेरी गांड बिलकुल नंगी थी. जिसे चाचा जी आराम से बहार से देख सकते थे.दरवाजा बस थोड़ा सा खुला था. मगर वह काफी था.
चाचा जी को पागल करने के लिए. मैंने जानती थी चाचा जी सब देख रहे है. मगर मैंने इस बात पर धयान नहीं दिया.मैं पूरी नंगी होके बेड पर आ गयी. और जो डिलडो तकिया के नीचे था.

से बहार निकल के आपने मुँह में लेने लगी. ये नज़ारा तो चाचा जी के अंदर तूफ़ान ले आया होगा.मैंने दरवाजे की तरफ बिलकुल भी धयान नहीं दिया. मगर मैं जानती थी. चाचा जी वही खड़े है. मैं बेड पर से खड़ी हो गयी. और अपनी गांड को दरवाजे की तरफ कर दिया.और फिर डिलडो उठा के पीछे से अपनी चुत में ले लिया.

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अब मैं डोगग्य स्टाइल में झुकी थी. और पीछे से डिलडो अंदर बहार कर रही थी. सच कहु तो ऐसे किसी को चुदाई दिखने में बहुत मज़ा आ रहा था.मैंने सोचा था. चाचा जी अंदर आ जायेंगे. और मेरी चुदाई कर देंगे. मगर चाचा जी नहीं आ रहे थे. मगर तभी नीचे से मम्मी जी ने आवाज लगायी.

मम्मी – किशोर किशोर – (चाचा जी का नाम).चाचा जी तुरंत नीचे भाग गए. मैंने उनके कदमो की आवाज साफ़ साफ़ सुनी. और फिर मैंने दरवाजा बंद करके कपडे पेहेन लिए.चाचा जी आगे नहीं बढ़ रहे थे. और मैं खुल के आगे बढ़ नहीं सकती थी.जैसे मैं पहले हुआ करती थी.

कॉलेज के टाइम में बहुत बेबाक हुआ करती थी. अपने बॉयफ्रैंड्स को खुद बुलाके चुदवाती थी. शर्म करना मुझे नहीं आता है.कुछ देर बाद मैं नीचे चली गयी. मम्मी जी ने खाना निकलने के लिए कह दिया था. चाचा जी बहार बैठे मुझे ही घुर रहे थे. और मैं भी उन्हें ही घूर रही थी.मुझे लगा अब चाचा जी जरूर पूरी तरह समझ गए है. और आज मेरी भी चुदाई उनसे जरूर होगी. ।
वह मुझे देख देखकर ही रहे थे.और मैं भी उन्हें देखकर स्माइल कर रही थी. हम दोनों की स्माइल ने एक दूसरे को है बोल दिया था. और फिर मैंने मम्मी जी और चाचा जी को खाना दे दिया.

चाचा जी और मम्मी जी खाना खाके बाते करने लगे. और फिर मैंने भी खाना खा लिया. फिर मैं सारा काम करके बैडरूम में आ गयी. और फिर चाचा जी का इंतजार करने लगी.दोपहर का टाइम था और मम्मी जी और मैं इस टाइम सो जाती है. काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब चाचा जी नहीं आये.

तो मैं उन्हें नीचे देखने आयी. मैं बहुत आहिस्ता आहिस्ता नीचे आयी.ताकि कुछ भी आवाज न हो. पहले मैं मम्मी जी के कमरे के पास गयी. मगर वह तो पहले से ही खुला हुआ था. फिर मैं चाचा जी के कमरे के पास गयी. और अंदर से मुझे आवाज सुनाई दी.आज मेरा अच्छा दिन था. क्युकी चाचा जी के कमरे का दरवाजा पूरा बंद नहीं था. मैंने उसे थोड़ा सा और खोल दिया. और सामने के गरम नज़ारे ने मेरी चुत को गिला कर दिया.

मम्मी जी और चाचा जी बेड पर नंगे लेटे हुए थे.और वह दोनों एक दूसरे को चुम रहे थे. चाचा जी का लंड खड़ा हुआ था. जो मम्मी जी के हाथ में था. और मम्मी जी उसे आगे पीछे कर रही थी. चाचा जी का मोटा कला लंड देखकर मेरी चुत भी पागल हो रही थी.चाचा जी – क्या बात है भाभी? लगता है अभी भी तुम्हारी गर्मी निकली नहीं है. जो अपनी बहु के होते हुए भी चुदवाने आ जाती हो.

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मम्मी – अब मैं भी क्या करू? जब बहु नहीं थी. तो कभी भी हम दोनों एन्जॉय कर लेते थे. मगर अब तो थोड़ा देखकर ही आना पड़ता है.

चाचा जी – अरे भाभी कही वह नीचे आ गयी. तो अपनी सास को ऐसे मेरे लंड से खेलते देख पागल ही हो जाएगी.
मम्मी – अरे किशोर वह इस टाइम सोती रहती है. अभी तुम जाके देखोगे. तो सो रही होगी. या मोबाइल चला रही होगी. आज कल की बहु लोग अपने मोबाइल में ही लगी रहती है. अपनी सास का तो धयान ही नहीं रहता उन्हें.मम्मी जी बिलकुल सही ही कह रही थी. मैं जयादा टाइम तो मोबाइल में ही लगी रहती हु.

और मम्मी जी के बुलाने पर ही आती हु. मगर अब मुझे मालूम चला की मेरे घर में तो मेरी भी गुरु बैठी है.मम्मी – किशोर मेरे लिए तो अच्छा ही है. जितना वह काम धयान देगी. हम दोनों उतना जयादा टाइम बिता पाएंगे. अब तू पहले जैसे भी नहीं रह सकता है.

पहले कैसे तू खुद भी नंगा रहता था. और मुझे भी नंगी रखता था.चाचा जी – सच कहा भाभी वह टाइम भी अलग था. विजय की शादी के बाद से मुझे भी वह सब बहुत याद आता है.मम्मी जी की बाते सुनके मैं हैरान हो गयी थी. मेरी सास इतनी रंगीन मिज़ाज़ औरत है.

और मुझे ये बात मालूम ही नहीं थी. अंदर मम्मी जी ने चाचा जी का लंड मुँह में ले लिया. और वह उसे चूसने लगी. मम्मी जी का जिस्म इतनी उम्र मैं भी क़यामत था. अगर मैं और मम्मी जी साथ में नंगी खड़ी हो जाये. तो शायद हर इंसान पहले मम्मी जी को चोदना चाहेगा.मम्मी जी की गांड दरवाजे की तरफ थी. और उनकी चुत मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी.

चाचा जी मम्मी जी का मुँह अपने लंड पर दबा रहे थे. और मम्मी जी भी गप गैप लंड मुँह मे ले रही थी.चाचा जी ने मम्मी जी को नीचे लिटा दिया. और मम्मी जी ने चाचा जी का मुँह पकड़ के अपनी चुत में लगा दिया. चाचा जी मम्मी जी की चुत चाट रहे थे. और मम्मी जी उनके बाल सेहला रही थी.कुछ देर चुत चाटने के बाद चाचा जी ने मम्मी की टाँगे अपना लंड पर रख ली. और आपने लंड उनकी चुत में डाल दिया.

चाचा जी धक्के लगाने लगे.और मुझे मम्मी जी की चुत में जाता लंड साफ़ दिखाई दे रहा था. चाचा जी की ऐसे मर्दानगी देखकर. मुझे मम्मी जी से जलन होने लगी थी. चाचा जी धना धन धक्के लगा रहे थे.और कमरे में थप थप की आवाज के साथ साथ मम्मी जी की सिसकियों की आवाज भी गूंज रही थी.

सास ने चाचा का पूरा लंड मुह मे लेके चुदाई करवाई

मम्मी जी बिना किसी फ़िक्र के चाचा जी से अपनी गर्मी निकलवा रही थी. उन्हें मेरे आने का बिलकुल भी डर नहीं था.क्युकी मैंने कभी मम्मी जी पर इतना धयान ही नहीं दिया. और चुदाई की आवाज मेरे कमरे तक जाने से रही. अब मुझे पता चला की चाचा जी मेरे पति के जाने बाद कैसे आ जाते है.और चाचा जी और मम्मी जी नीचे कैसे कैसे खेल खेलते है. मम्मी जी ने चाचा जी को खुद से चिपका लिया था. और चाचा जी भी तेज तेज धक्के लगा रहे थे.जब चाचा जी थक जाते.

तो वह धक्के हलके कर देते थे. और फिर कुछ बाद तेज कर देते थे. कुछ देर बाद चाचा जी मम्मी जी के ऊपर से उठ गए. चाचा जी का मोटा लंड मम्मी जी के चुत के पानी से भीग कर.और भी भयानक लग रहा था. मगर ऐसे लंड हर औरत की किस्मत में नहीं होता है. फिर चाचा जी सीधे लेट गए. और मम्मी जी चाचा जी के लंड पर बैठ गयी.फिर मम्मी जी चाचा जी के लंड पर कूदने लगी. और चाचा जी भी मम्मी जी की गांड को पकड़ के अपने लंड पर मार रहे थे. मम्मी जी चुदाई की खिलाडी थी. और चाचा जी भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.

चाचा जी को मम्मी जी की चुदाई करते हुए. काफी टाइम हो गया था. और बहार मेरी चुत भी पानी पानी हो गयी थी. फिर चाचा जी ने मम्मी जी को कुतिया बना दिया. आगे क्या हुआ ये मैं आपको अगले भाग 2 मे । प्लीज कमेंट करके ज़रूर बताना।

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