By | January 5, 2023

Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:-हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त रोहन , पिछली कहानी मे आपने देखा कैसे चाचा मम्मी की चुदाई कर रहे थे , अगर आपने इसका भाग 1 नहीं पढ़ा तो यहा क्लिक करके पढे। ये भी पढे >ससुर ने मुझे और मेरी सास को चोद के चुत फाड़ दी

अब चाचा जी पीछे से मम्मी जी की चुदाई कर रहे थे. और मम्मी जी की चूचिया हवा में लटक रही थी. चाचा जी के तेज धक्को की वजह से मम्मी जी की चूचिया आपस में टकरा रही थी.और चाचा जी मम्मी जी की मोटी  गांड पकडे धना धन धक्के लगा रहे थे. मम्मी जी का बदन कांप सा रहा था. देखने से लग रहा था की वह चरमसुख के काफी नज़दीक है.

मम्मी जी – रुकना मत किशोर रुकना मत.मम्मी जी के मुँह से ये शब्द सुनके. चाचा जी और तेज धक्के लगाने लगे.

और फिर कुछ ही देर में मम्मी जी जन्नत की सैर कर रही थी. और कुछ देर बाद ही चाचा जी ने अपना सारा पानी मम्मी जी की गांड पर निकल दिया.

Saas ki chudai ki kahani

मम्मी जी और चाचा जी दोनों हाफ रहे थे. फिर मम्मी जी ने खुद को साफ़ कर लिया. और वह दोनों बेड पर लेट गए.

चाचा जी – भाभी आज भी तुममे उतनी ही गर्मी है. जितनी पहले थी. कम  से कम मेरी ठंडी बीवी से तो जयादा ही मज़ा आता है.

मम्मी -किशोर तेरी ही वजह से मैं भी अपनी गर्मी निकल पाती हु. नहीं तो मेरी ज़िंदगी भी बत  से बतर हो जाती. वैसे भी मर्दो को दूसरी की बीवी जयादा पसंद होती है. चल अब मैं चलती हु. कही बहु न आ जाये.मैं जल्दी से वहा से निकल गयी. और सीधा अपने कमरे में आ गयी. मैंने जल्दी से अपने कपडे निकाल दिए. 

Damad aur saas ki chudai

और चाचा जी के बारे में ही सोचने लगी.मैं यही सोच रही थी की मैं कितनी बड़ी बेवक़ूफ़ हु. मेरे ही घर में इतने टाइम से चुदाई का खेल चल रहा है. और मैं आपने कमरे में घुसी रहती थी.मुझे कैसे भी करके. आज चाचा जी से अपनी चुदाई करवानी थी. क्युकी कल मेरे पति आने वाले थे. मैंने आज रात का ही प्लान बनाया था.  Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

जिससे मैं चुदाई करवा सकू.

शाम को मैं जब चाचा जी को चाय के लिए बोलने गयी. तब भी वह सो रहे थे. और सोये भी क्यों न एक अच्छी चुदाई जो मिली थी. 

मेरी नज़र उनके लंड पर गयी. जो पाजामे के अंदर साफ़ दिख रहा था.मैं पूरी तरह से बेशरम हो गयी थी. मैं चाचा जी के बेड पर बैठ गयी. 

और आपने हाथ सीधा चाचा जी के लंड पर रख दिया. चाचा जी का लंड छूने में मज़ा आ रहा था.मैंने पाजामे के ऊपर से ही उसे पकड़ लिया. 

और उसे थोड़ा सा दबा दिया. मेरे दबाते ही चाचा जी का लंड खड़ा होने लगा. और तभी चाचा जी ने भी अपनी आँखे खोल ली.मैंने उनकी तरफ देखा. 

और फिर अपना हाथ हटा लिया.मैं – चाचा जी वह मम्मी जी चाय के लिए बुला रही है. आप बहार आ जाये.

मैंने चाचा जी तरफ देखा. तो वह भी मुझे ही घूर रहे थे.इस बार मैंने चाचा जी का लंड पकड़ के उन्हें सामने से है बोला था. मैं बहार आ गयी. और किचन में जाके चाय बनाने लगी. मम्मी जी बहार ही बैठी थी. तभी किसी ने पीछे से मेरी गांड को दबा दिया.मैंने पीछे देखा तो चाचा जी खड़े थे. और उनका हाथ अभी भी मेरी गांड पर था. 

उनके चेरे पर एक स्माइल आ गयी. 

और फिर मैंने चाचा जी का हाथ हटा दिया.चाचा जी ने फिर से मेरी गांड को दबा दिया. 

जिससे में थोड़ी उछाल गयी. और चाचा जी हसने लगे. फिर वह पानी पिके बहार चले गए. और फिर हम सबने साथ में चाय पी.

चाचा जी मुझे ही घूरे जा रहे थे. और मैं भी छुपी नज़र से उन्हें ही देख रही थी. चाय के बाद मम्मी जी ऐसे ही टहलने छत पर चली गयी. 

और मैं अपने कमरे में आ गयी. मैं बेड पर लेटी लेटी मोबाइल चला रही थी. तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला. और चाचा जी अंदर आ गए.

 इससे पहले मैं उठ पाती. वह मेरे ऊपर आ गए. अब मैं उनके नीचे दबी हुई थी.उन्होंने देर किये बिना अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा दिया.  Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

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और वह मेरे होंठों को चूसने लगे. मैं अपना मुँह इधर उधर करने लगी.

मगर चाचा जी मेरे होंठों को अपने मुँह में दबा रहे थे.मैं चाचा जी को ठीक से किश नहीं करने दे रही थी. तभी चाचा जी बोल पड़े.

चाचा जी – तुम औरतो का भी अजीब ड्रामा है. पहले मर्दो को बहलाती हो. और जब मर्द तुम्हारे पास आते है. 

तो सती सावित्री बनने का नाटक करती हो.चाचा जी ये बात बोलके मेरे ऊपर से उठने लगे. मगर तभी मैंने उनका हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लिया. 

और अपने होंठों से चाचा जी के होंठों को दबा लिया.

चाचा जी मेरे होंठों को चूसने लगे. और मैंने भी चाचा जी के होंठों का स्वागत किया. हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगे.मैं चाचा जी के बालो में हाथ फिरते हुए

 उनके होंठों को चूस रही थी. और चाचा जी का हाथ मेरी चूचियों को मसल रहा था. चाचा जी के छूने भर से मेरी चुत में पानी आ गया था.

चाचा जी बहुत अच्छी तरह से मुझे किश कर रहे थे. हम लोग लगभग 5-मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे. फिर चाचा जी अलग हो गए.

चाचा जी – मुझे नहीं मालूम था की मेरी बहु मेरे स्पर्श के लिए इतना तड़प रही है. वैसे मैं समझ सकता हु. जब पति बहार रहे. तो बीवियों को किसी का सहारा लेना ही पड़ता है.

मैं – हा चाचा जी आपने सही कहा. इसीलिए तो आप भी मम्मी जी की गर्मी निकालते रहते है.मेरे मुँह से बात सुनके चाचा जी चौक गए. 

वह जान गए थे की मैं सब जान चुकी हु.

चाचा जी – अच्छा जी तभी मैं कहु की बहु के अंदर इतना बदलाव कैसे आ गया. जिसने मुझे पहले कभी देखा था नहीं वह मुझ पे इतना मेहरबान क्यों हो रही है?

मैंने चाचा जी का लंड पकड़ लिया. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

सास और बहू को ससुर ने रात मे चुदाई की

मैं – हैरान तो मैं हो गयी थी चाचा जी. जब मम्मी जी को आपके इस घोड़े की सवारी करते देखा था. तब मुझे पता चला था की मेरे ही घर में इतना बड़ा काण्ड चल रहा है.

चाचा जी – भाभी तो इस घोड़े की सवारी बहुत पहले से कर रही है. उनकी भी हालत तुम्हारी तरह थी बहु. मेरा भाई भाभी के ऊपर ज्यादा धयान नहीं देता था. 

और विजय के पैदा होने के बाद से हमारा रिश्ता चल रहा है.

मैं – आपका भतीजा भी मेरे साथ वही कर रहा है. इसीलिए जब मैंने आपको और मम्मी जी को देखा. तो आपके इस घोड़े को देखकर. मुझे भी इसकी सवारी करने का मूड हो गया.चाचा जी बेड से उठ के खड़े हो गए. और उन्होंने अपना लोअर नीचे कर दिया. चाचा जी का लंड उछाल के बहार आ गया. और मैंने उसे तुरंत पकड़ लिया. क्या मस्त मोटा लंड था.

मैंने तुरंत उसे अपनी नाक से लगा लिया. चाचा जी के लंड की मरदाना गंध सूंघ के मैं अंदर तक मचल उठी. मैंने तुरंत उसे अपने मुँह में ले लिया. 

और मैं चाचा जी का लंड चूसने लगी.चाचा जी भी आँखे बंद किये. मेरी लंड चूसै का मज़ा लेने लगे. मैं अपनी जीभ चाचा जी के लंड के सुपडे पर फिर रही थी. 

और चाचा जी को मज़ा आ रहा था.

चाचा जी – वह बहु तुम भी बिलकुल भाभी जैसा ही चूस रही हो. लगता है भाभी ने ही तुम्हे सब सिखाया है.

मैं – अरे चाचा जी मैं कहा मम्मी जी की बराबरी करुँगी. उन्हें देखकर तो लग रहा था की वह मेरी भी गुरु है. 

अब आप भी देर मत कीजियेगा. आज रात मेरी भी गर्मी निकल दीजिये.चाचा जी – चिंता मत कर बहु. आज रात भाभी के बाद तेरा ही नंबर लगा दूंगा.

मैं -क्यों चाचा जी सास और बहु को एक साथ संभल नहीं पाओगे क्या?चाचा जी – ये क्या कह रही है बहु? तू अपनी सास के सामने मेरे साथ चुदाई करना चाहती है.

मेरी मेरे चाचा ससुर ने रात मे जम के चुदाई की

मैं – वैसे चाचा जी इसमें गलत क्या है? अब मेरे सामने सब आ ही चूका है. और अब मैं चाहती हु की हमारे बीच कोई भी पर्दा न रहे. ताकि मम्मी जी और मैं खुल के मज़े कर सके. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

चाचा जी -बहु वैसे आईडिया बुरा नहीं है. भाभी थोड़ी न मना जरूर करेगी. मगर मैं जनता हु. उनके अंदर भी बहुत आग है. वह जरूर मान जाएगी.

मैं – तो फिर आज रात मैं और मम्मी जी आपको जन्नत की सैर करवा देंगे.

चाचा जी – वह बहु सुनने में अच्छा  लग रहा है. अब मैं चलता हु भाभी कभी भी आ सकती है. मगर जाने से पहले मुझे अपनी जन्नत तो दिखा दे.

मैं – चाचा जी थोड़ा सबर कर लीजिये. आज रात 2 दरवाजे आपको जन्नत ले जाने के लिए खुलेंगे. जिसमें मर्ज़ी हो घुस जाना.उसके बाद चाचा जी कमरे से चले गए. और मैं नीचे आके खाना बनाने लगी. खाना बनाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गयी. और आज रात के बारे में सोचने लगी.कुछ देर बाद मेरे पति का कॉल आ गया. मैं उनसे काफी देर तक बात करती रही. फिर रात 9 बजे हम सबने खाना खाया. और फिर मैं सारे काम करके आपने कमरे में आ गयी. 

मैं बस लेटी लेटी टाइम बीतने का इंतज़ार कर रही थी.मैं सिर्फ नाइटी पहने हुए थी. और चाचा जी का इंतज़ार कर रही थी. लगभग 11.15 पर मेरे कमरे का दरवाजा खुला. और मेरे सामने चाचा जी खड़े हुए थे.उन्होंने सिर्फ कच्छा पहना हुआ था. और मुझे देखते ही वह खुस हो गए. चाचा जी ने दरवाजा पूरा बंद नहीं किया. और वह सीधा मेरे पास आ गए. मैं भी उन्हें देखकर खड़ी हो गयी.चाचा जी ने आते ही मुझे बाहो में भर लिया. उनके हाथ सीधा मेरी गांड पर गए. और वह मेरी गांड को दबाने लगे. और मैं उनके होंठों को चूसने लगी. 

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चाचा जी कभी मेरी गांड दबाते. तो कभी मेरी चूचियों को मसल देते. हम लोगो को चूमा चाटी करते हुए. 10  मिनट हो चुके थे. फिर चाचा जी ने मेरी नाइटी  निकाल दी. 

और अब मैं सिर्फ ब्रा पेंटी में खड़ी थी.चाचा जी मेरी लाल ब्रा पेंटी देखकर खुस हो गए. और उन्होंने अपना मुँह सीधा मेरी चूचियों में घुसा दिया.  चाचा जी ने मेरी ब्रा को नीचे किया. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

 जिससे मेरी दोनों चूचिया बहार आ गयी.अब चाचा जी बारी बारी से मेरी दोनों चूचिया चूस रहे थे. और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.  कुछ देर चाचा जी मेरी चूचिया चूसते रहे. फिर उन्होंने खुद मेरी ब्रा को निकाल दिया.और ब्रा निकलते ही चाचा जी मेरी चूचिया मसलने लगे.  और मैंने उनका लंड पकड़ लिया. चाचा जी का लंड पूरा खड़ा हो चूका था. मैंने चाचा जी का कच्छा उतार दिया.

चाचा जी का लंड बहुत टाइट हो चूका था. और फिर मैंने चाचा जी को बेड पर धक्का दे दिया. चाचा जी आराम से बीएड पर लेट गए. और मैं पलंग के दूसरी तरफ चली गयी.बीएड के दूसरी तरफ जाते ही मैं चाचा का लंड चूसने लगी. 

मैं चाचा जी का लंड गप गैप चूस रही थी.और चाचा जी भी मेरी गांड को दबा रहेथे. फिर चाचा जी ने मेरी पेंटी को निकल दिया.और मुझे सीधा लिटा दिया. फिर मैंने अपनी टाँगे फैला दी. और अब चाचा जी के सामने एक नयी चुत थी.चाचा जी ने देर किये बिना अपने मुँह मेरी चुत में लगा दिया.

 और वह मेरी चुत के दाने को चाटने लगे. 

मेरे मुँह से भी आठ आह की आवाज आने लगी. आज मुझे किसी का डर नहीं था.मैं अपनी आँखे बंद किये. चुत चटवाने का मज़ा ले रही थी.

 और चाचा जी भी मेरी चुत चाटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. तभी एक दम से दरवाजा जोर से टकराया.मैंने अपनी आँखे खोल के देखा. तो सामने मम्मी जी खड़ी थी. 

और वह मुझे आँखे फाड़े देख रही थी. मम्मी जी जोर से बोली.

मम्मी जी – ये सब क्या चल रहा है मेरे घर में? बहु तुझे शर्म नहीं आयी ये सब करते हुए.मम्मी जी की आवाज से चाचा जी भी खड़े हो गए. 

और उनका लंड हवा में लहराने लगा. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

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मैं – मम्मी जी इसमें शर्म की क्या बात है? मैं भी तो वही कर रही हु. जो आप चाचा जी के साथ इतने दिनों से कर रही है.मेरी बात सुनते ही मम्मी जी के मुह पर डर आ गया. उनके चेरे का रंग सुक गया.

मैं -मम्मी जी मैं तो इतने दिनों से अनजान थी की आप रोज रात चाचा जी के साथ चुदाई का खेल खेल रही थी. अगर मैं अपनी आँखों से नहीं देखती. तो मुझे तो यकीं ही नहीं होता.

चाचा जी मम्मी जी की तरफ देख रहे थे. मगर जयादा गांड मम्मी जी की फैट रही थी. मैं भी बेड से उठ गयी. और सीधा जाके चाचा जी का लंड पकड़ लिया. मम्मी जी मुझे घूर के देखने लगी.

मैं – वैसे मम्मी जी चाचा का लंड है ही ऐसे की कोई भी औरत इसकी सवारी करना चाहेगी. वैसे भी आप और मैं एक ही आग में जल रहे है. आपकी ज़िन्दगी में पापा जी नहीं है.और मेरी ज़िन्दगी में विजय होते हुए भी नहीं है. आप तो जानती ही है. विजय काम की वजह से बहार रहते है. तो क्यों न हम दोनों ही चाचा जी के लंड की सवारी करे.मेरी बात सुनते ही मम्मी जी बोल पड़ी.

मम्मी जी – तेरा दिमाग ख़राब हो गया बहु. माना मेरा बीटा आपने काम की वजह से बहार रहता है. मगर इसका मतलब ये नहीं है की तू बहार से अपनी गर्मी शांत करे. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

मैं – मम्मी जी मैं बहार कहा गयी हु. जैसे आपने अपने देवर को ही अपना यार बना लिया. वैसे ही मैंने भी चाचा ससुर को अपना यार बना लिया. अब हम दोनों का राज़ एक दूसरे के पास है. इसीलिए मैं कह रही हु. हम दोनों ही इस घोड़े की सवारी करते है.मम्मी जी मेरी बात सुनते ही नीचे चली गयी. और मैं और चाचा जी उन्हें देखते रहे.

चाचा जी –

बहु लगता है भाभी नहीं मानेगी.

मैं -अरे चाचा जी अभी अभी उन्हें इतना बड़ा राज़ पता चला है. अब आप उनके कमरे में जाये. और उन्हें वही समझाए. फिर चाचा जी और मैं नंगे ही नीचे चले गए. मैं मम्मी जी के कमरे के बहार ही खड़ी हो गयी. और चाचा जी अंदर चले गए. 

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चाचा जी ने दरवाजा बंद नहीं किया. ताकि मैं सब सुन सकू.जैसे ही चाचा जी कमरे में घुसे. मम्मी जी बोल पड़ी. मम्मी जी – अब यहाँ क्या लेने आया है? जा मेरी बहु की गांड में ही घुसा रहे. तूने ही बहु को सब बताया है.चाचा जी – अरे भाभी मेरी बात तो सुन लो. मैंने बहु को कुछ नहीं बताया. उल्टा उसने मुझे सब बताया की उसने हम दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया. 

उसके बाद से ही वह मुझे रिझाने लगी.

मम्मी जी – तो तूने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?चाचा जी – अरे भाभी उसने मुझे खुद ये बात आज ही बताई है की उसने आपको और मुझे चुदाई करते देखा है. वैसे सच कहु भाभी आज आपकी बहु को देखकर. मुझे आप याद आ गयी.आपको याद है कैसे आप मुझे रिझाती थी. 

क्युकी भैया आपके ऊपर धयान नहीं देते थे. बहु की भी यही समस्या है. नयी नहीं शादी हुई है. और इस समय तो उसे भरपूर चुदाई मिलनी चाहिए थी. मगर विजय काम से बहार ही रहता है.

मम्मी जी अब थोड़ी शांत हो गयी थी. और अब वह चाचा जी की बाते धयान से सुन रही थी. चाचा जी भी मम्मी जी के बिलकुल पास बैठ गए थे. और वह दोनों एक दूसरे को एक प्रेमी की तरह देख रहे थे.

चाचा जी ने मम्मी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. और मम्मी जी भी चाचा जी के होंठ चूसने लगी. कुछ देर वह एक दूसरे के होंठ चूसते रहे. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

चाचा जी -वैसे भाभी बहु अब सब जान ही गयी है. और अब तो वह भी अपने ही साथ है. इससे हम दोनों को ही फ़ायदा है. अब हम दोनों बिलकुल पहले जैसे रह सकते है.चाचा जी की बात सुनके मम्मी जी हसने लगी. और उनकी इस हसी का मतलब हा ही था.

मम्मी जी – मतलब अब तू एक ही घर में सास और बहु दोनों को चोदेगे.

चाचा जी -हा  भाभी अब तो इस घर में कोई टोक नहीं रहेगी.चाचा जी मम्मी जी के कपडे निकलने लगे. और मम्मी जी भी चाचा जी का पूरा साथ दे रही थी. मम्मी जी की मैक्सी निकलते ही वह नंगी हो गयी. क्युकी उन्होंने अंदर कुछ नहीं पहना था. मम्मी जी का बदन देखकर मेरी भी चुत गीली होने लगी.अब चाचा जी और मम्मी जी बेड पर नंगे थे. और वह एक दूसरे को सेहला रहे थे. तभी मैं भी नंगी ही कमरे में जाती हु. और मम्मी जी की नज़र मुझपे पड़ती है. मगर इस बार वह आराम से बैठी हुई थी.और मैं भी नंगी ही जाके बेड  पर बैठ जाती हु.

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मम्मी जी – देखो बहु जो कुछ भी इस घर में हो रहा है. उसकी खबर बहार किसी को नहीं होनी चाहिए. नहीं सब कुछ बर्बाद हो जायेगा. और खासकर मेरे बेटे को कुछ भी मालूम नहीं चलना चाइये.

मैं – मम्मी जी जब एक औरत होके. मुझे ये सब जान्ने में इतना टाइम लग गया. तो विजय तो घर में रहते ही नहीं है. उन्हें तो पता चलने का सवाल ही पैदा नहीं होता. अब मैं और आप चाचा जी के इस घोड़े की सवारी करेंगे.मेरी बात सुनके मम्मी जी भी स्माइल करने लगी. और चाचा उनकी चूचिया दबाने लगे.

चाचा जी – हे भगवान् लगता है. पिछले जनम में मैंने कुछ अच्छे  करम किये थे. इसीलिए इस जनम में तू मुझे इतना सुख दे रहा है. आज 2 हसीं औरते मेरे लंड के लिए लड़ रही है.चाचा जी की बात सुनके मैं और मम्मी जी हसने लगे. चाचा जी ने मम्मी जी के होंठों को मुँह में भर लिया. और उनके होंठों को चूस के फिर मेरे होंठों को चूसने लगे.

मुझे मम्मी जी के मुँह का स्वाद मिलने लगा. और फिर मैं कहा पीछे रहने वाली थी. चाचा जी मम्मी जी के होंठों को चूस रहे थे. और मैं मम्मी जी की चूचियों को मसलने लगी.मम्मी जी की चूचिया वाकई बहुत बड़ी थी. मैंने देर किये बिना उसे मुँह में भर लिया. चाचा जी और मम्मी जी मुझे ही घूर रहे थे.

मगर वह दोनों भी मज़े ले रहे थे.फिर मम्मी जी बेड पर लेट गयी. और चाचा जी उनके मुँह में आपने लंड देने लगे. मम्मी जी ने भी चाचा जी का लंड मुँह में भर लिया. और वह उसे चूसने लगी. और मैं सीधा मम्मी जी के पैरो के पास आ गयी.मैंने मम्मी जी के पेअर पकड़ के फैला दिए. और मम्मी जी की चुत का मुँह खुल गया. और मैंने देर किये बिना अपना मुँह मम्मी जी की चुत में लगा दिया. अब मैं मम्मी जी की चुत चाट रही थी. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

चाचा जी – देखो भाभी आपकी बहु आपको खुस करने के लिए कितनी मेहनत कर रही है.मैं पहले भी लेस्बियन सेक्स कर चुकी हु. और मम्मी जी को देखकर लग रहा था की वह भी अपने अंदर कई राज़ दबाये बैठी है. नहीं तो अगर ये उनका पहली बार होता. तो वह जरूर माना करती या चौक जाती.

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मम्मी जी का हाथ मेरे सर पर आ गया. और वह मेरा सर अपनी चुत पर दबाने लगी. मम्मी जी सिर्फ देखने में सीधी लगती है. मगर अंदर से तो वह पूरी काम देवी है. चाचा जी का लंड क्या गप गैप ले रही थी.कुछ देर चुत चटवाने के बाद मम्मी जी उठ गयी. और अब चाचा जी मम्मी जी की जगह लेट गए. मम्मी जी और मैं चाचा जी के लंड के पास आ गए. 

अब मैं चाचा जी का लंड चूस रही थी.तो मम्मी जी उनकी गोटिया चूस रही थी. हम दोनों ही चाचा जी के लंड की सेवा कर रही थी. तभी एक एक ऐसा हुआ की मम्मी जी गोटिया चूसते चूसते लंड की तरफ आ गयी. और पहली बार मेरा और मम्मी जी का मुँह आपस में मिल गया.

हम दोनों के होंठों के बीच चाचा जी का लंड था. और मम्मी जी और मेरी जीभ आपस में टकरा रही थी. फिर एक बार चाचा जी का लंड मम्मी जी मुँह में लेती.तो दूसरी बार मैं उनका लंड मुँह में लेती. मम्मी जी के साथ ऐसे खुल के मज़े लेने में बहुत अच्छा लग रहा था. 

और फिर मम्मी जी ने मेरा हाथ पकड़ के मुझे लंड पर बैठने के लिए कहा.

मैं – मम्मी जी पहले आप ही इस घोड़े की सवारी कर लीजिये. मेरा नंबर तो आपके बाद ही आएगा.और फिर मम्मी जी चाचा जी के लंड पर बैठ गयी. मम्मी जी चुत में आराम से लंड चला गया. और चाचा जी ने भी मुझे अपने मुँह पर बैठा लिया.

इधर मम्मी जी अपनी कमर चला रही थी. तो उधर चाचा जी मेरी चुत को चाट रहे थे. ऐसा मज़ा मुझे पहले कभी नहीं मिला था. मम्मी जी मुझे ही देख रही थी. और मैं फिर से उनकी चूचियों को चूसने लगी.मम्मी जी भी मेरी चूचिया दबाने और मसलने लगी. 

चाचा जी का मुँह मेरी चुत में लगा हुआ था. और उनका लंड मम्मी जी की चुत में था. ऐसा मज़ा शायद ही किसी बहु को मिला हो.और मैं इस दुनिया की सबसे भाग्य शाली बहु थी. जो अपनी सास और चाचा ससुर के साथ चुदाई का मज़ा ले रही थी.

 कुछ देर बाद मम्मी जी चाचा के लंड से उठ गयी. और चाचा जी का मोटा लंड मम्मी जी की चुत के पानी से गिला होके चमक रहा था. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

मैंने भी तुरंत उसे मुँह में ले लिया. और चाचा जी का लंड चाट चाट के साफ़ कर दिया.चाचा जी – देखा भाभी कितनी गर्मी है आपकी बहु में इसे देखकर मुझे आपकी जवानी की याद आ गयी.

दामाद ने अपनी सास की चुदाई की कहानी

मम्मी जी – तुम ठीक कह रहे हो किशोर. सच में ये बिलकुल मेरा ही रूप है. जैसे मैं अपने पति के लिए तड़पती थी. वैसे ही ये भी तड़पती है. 

अब तुम इसकी गर्मी शांत कर दो.

बेड पर ही घोड़ी बन गयी. और चाचा जी मेरे पीछे आ गए. और फिर मेरी गांड और चुत पर अपना लंड रगड़ने लगे. फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चुत पर लगा दिया.

और हलके हलके मेरी चुत को चीरते हुए. उन्होंने अपना लंड मेरे चुत में डाल दिया. चाचा जी का लंड अंदर जाते ही नेरे मुँह से आह्हः की आवाज निकल गयी. 

चाचा जी का लंड वाकई मज़ेदार था.और फिर चाचा जी ने मेरी गांड पकड़ के अपने लंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. चाचा जी का लंड अंदर रगड़ मार रहा था. 

और मेरे मुँह से आह्हः अह्ह्ह उम् की आवाज निकल रही थी.मम्मी जी चाचा जी के पास खड़ी होक. उन्हें किश कर रही थी. और बार बार मेरी गांड को सेहला रही थी.

मैं -मम्मी जी आप भी अहह आगे आहा  आके लेट जाये.और फिर मम्मी जी तुरंत मेरे आगे आके लेट गयी. और मैंने अपने मुँह मम्मी जी की चुत में लगा दिया. मम्मी जी आँखे बंद करके चुत चटवाने का मज़ा लेने लगी.

और चाचा जी पीछे से मेरी चुत में तेज तेज धक्के लगाने लगे. फिर कुछ देर बाद चाचा जी ने अपने लंड निकाल लिया. और सीधा मम्मी जी के पास आके उनकी चुत में लंड डाल दिया. Bahu aur Saas ki chudai ki kahani:

मम्मी जी का जिस्म कांप ने लगा था. क्युकी मेरी चुत चटाई से और चाचा जी की चुदाई से वह चरमसुख भोगने वाली थी. चाचा जी मम्मी जी की टाँगे कंधे पर रख कर चुदाई कर रहे थे. अगले भाग मे आपको बतऔगा की कैसे मेरे पति ने हमे चुदाई करते हुये देखा था.

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