By | February 1, 2023

Sasu Maa ki Chudai ki kahani:-हैलो दोस्तो, आज मैं आपके सामने लाया हु पिछली कहानी का भाग 2 : माँ का नया रूप.
मैं राहुल जिसके बारे में अपने भाग 4 में पढ़ा था

जिसमे किस तरह से मैं अपनी खूबसूरत सेक्सी माँ को अपनी गर्लफ्रेंड बनता हूँ. कल रात क्या हुआ आपको तो पता चला ही. कैसे उनको बहला फुसलाकर मुझे उनकी चूत और बूब्स देखने और साथ ही उनकी चूत में ऊँगली करने को भी मिला.पर मेरी बत किस्मती की उन्होंने मुझे कोई मज़ा नहीं दिया.

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रात को माँ को सोचकर और कहने में गलत है .पर खुद की माँ को ही सोचकर मैंने मुठ मारा और सो गया. सुबह करीब 8 बजे जब नींद खुली तो याद आया की कल रात क्या हुआ था.

अब मैं वह बेटा नहीं रहा था अपनी माँ का जो कल रात से पहले तक था. और न ही मेरी माँ वह औरत थी मेरे नज़र में जो कल रत से पहले थी. सब एक ही रात में बदल चूका था. सुबह मेरा लंड माँ को सोचकर खड़ा सलामी देने लगा मेरे शार्ट में.

Sasu Maa ki Chudai

सोचा जल्दी से जाकर माँ को यानि की अब जो मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड और साथ ही मेरी सीक्रेट गर्ल फ्रेंड थी उनसे मिलु. मैं उठ कर पहले बाथरूम जाकर लम्बी सी सुसु मारा और फिर रूम से बहार निकला. बहार देखा तो लिविंग में कोई नहीं था.

जब पापा होते थे तो वह कोई न कोई न्यूज़ चॅनेल टीवी पर लगा कर जाते थे जिससे घर में ख़ामोशी नहीं होती थी.पर आज सन्नाटा था उस पर मेरी दीदी टीना भी नहीं थी.

फिर मैं जाकर माँ डैड का रूम खोल कर देखा तो वह भी कोई नहीं था. तभी किचन से कुछ आवाज़े आने लगी. तो समझ गया की माँ किचन में है. वहा जाते ही देखा तो मेरे होश उड़ गए माँ को देख के.

वह बिलकुल पार दर्शी लम्बी नाइटी के तरह कुछ पहनी हुई थी. जिसका बैक पूरा ओपन और कमर से नीचे वह कपडा पुरे पाव तक था. लेकिन इतना पार दर्शी की मुझे उनकी पेंटी भी दिख रही थी यकीनन मैंने सोच लिया की आज तो माँ के मन में बहुत नॉटी खिचड़ी पक रही है.मैंने झट से बोला: गुड मॉर्निंग माँ.

तभी माँ पलट कर बोली: बेटा उठ गया. बादाम मिल्क बना रही थी तुम्हारे लिए. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

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मैं: ओके माँ पर काफी अलग लग रही हो आप आज.माँ: क्यों?मैं: मैंने आपको ऐसे कपड़ो में कभी नहीं देखा.माँ: है है है! तुम्हारे और टीना के आने से पहले मैं तुम्हारे पापा के साथ ऐसे ही कपडे पहना करती थी घर पे.

मैं: ओहो! तभी तो हम जैसे मस्त बचे पैदा हुए.माँ: होगया तुम्हारा बादाम मिल्क रेडी. अब बोलो क्या प्लान है आज का?मैं सोचने लगा की मैंने कब बोला किसी प्लान के बारे मैं और पुछा: कौनसा प्लान?

माँ मेरे तरफ पलट कर अपने कमर पर हाथ रख कर खड़ी हुई. तब पता चला की उनका कपडा दोनों तरफ से कटा हुआ था. और जब वह पलटी तो मुझे उनकी पूरी खुली झंगो का दर्शन हो गया सुबह सुबह.

सच बोलो तो कितनी सेक्सी लग रही थी.और मुझसे सच बोलो तो रहा भी नहीं गया और बोल दिया: माँ यू लुक सो सेक्सी की मन करता है कूद जॉन आप पर.माँ खिलखिला के हस्ते हुए बोली: अब जाकर तुम्हे लगा की तुम्हारी माँ सेक्सी है?मैं: माँ ऐसा नहीं है. आप जब भी सज के जाती थी बहार में यही सोचता था की मुझे भी आपके तरह कोई मिल जाये लाइफ में.

माँ: तो अब तक मिली या नहीं कोई.मैं: हाँ मिली न मेरी अपनी माँ. और वैसे क्या प्लान है आपके मन में जो आप पूछ रही थी?माँ: प्लान है सब बताउंगी अभी तुम अपने रूम जाओ मैं तुम्हारा बादाम मिल्क लेकर आती हूँ. Sasu Maa ki Chudai ki kahani

मैं उनकी रूम जाने की बात को टालते हुए थोड़ा आगे बढ़कर उन्हें पीछे से गले लगा लिया. कितनी मुलायम थी वह कपडा जो उन्होंने पहना था और इतना पतला की लग ही नहीं रहा था की मेरे हाथो ओर उनके जिस्म के बीच कुछ हो. माँ एकदम से बोली: अरे ये क्या कर रहे हो? जाओ छोडो अभी. मैं उनके बूब्स को कपडे के ऊपर से सहलाते हुए बोला: क्या करू माँ आपको देख कर रहा नहीं गया. अब तक मेरा लंड भी शार्ट में पूरा तन गया था और वह माँ की गांड पर रगड़ मार रहा था.

माँ को भी पता चल गया था की मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया है तो माँ ने कहा: महसूस हो रहा है बिलकुल नहीं हो रहा तुमसे कण्ट्रोल.

इतना कहती हुई उन्होंने अपनी गांड से मुझे एक धक्का दिया और बोली: चलो छोडो भी राहुल. पूरा दिन है हमारे पास. अभी छोडो.तब मैंने उन्हें छोड़ते हुए कहा: पूरा दिन नहीं माँ पुरे 3 दिन है हमारे पास.

माँ मुड़कर मुझे बादाम मिल्क का एक कप दिया. और मुस्कुराते हुए सर हिलाकर ऐसा इशारा किया जैसे की मैं पूरी प्लानिंग कर बैठा हूँ और बोली: चलो आगे बड़ो मुझे लिविंग रूम में जाने दो.फिर हम लीविंग रूम में जाकर सोफे पर बैठ गए. और धीरे धीरे बादाम मिल्क पिने लगे. माँ ने टीवी का रिमोट उठाकर टीवी ऑन करते हुए बोली: कल तो तुमने मुझे वह मूवी देखने ही नहीं दिया. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

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मैं: कोई बात नहीं माँ हमारे पास तो काफी वक़्त है देखने के लिए.माँ हस्ते हुए बोली: तुम सच मे देखने दोगे?मैं: आप ही बताओ देखने में मज़ा आया जायदा या…माँ: हम्म्म बात तो सही है. कल मज़ा तो आया. लेकिन अगर कभी भी किसी को ये बात पता चला तो फिर हम कही मुँह दिखने के लायक नहीं रहेंगे.

मैं: अरे माँ. प्रॉमिस मैं तो किसी को नहीं बताने वाला. और बोल सकता भी नहीं ये बात. की मैं अपनी ही माँ के साथ….यू .माँ ने अपने एक पेअर दूसरे के ऊपर क्रॉस करके रखे. जिससे उनका पहना कपडा सरका और जांगे खुल कर अपना प्रदर्शन करने लगी और वह बोली: तो क्या इरादा है?मैं: इरादा तो बहुत है माँ. की शायद टाइम काम पड़ जाये.माँ: अच्छा इतना क्या है जो तीन दिन भी काम पड़ जाये तुम्हारे लिए.

मैं: वह पता चल जायेगा आपको. आप बताओ अपने क्या सोचा है?माँ आंख मारती हुई बोली: मैंने तो सब अपने नए बेस्ट फ्रेंड पर छोड़ दिया है.उनके आंख मारते हुए ऐसा कहने पर समझ गया की अब सच मे हमारे बीच माँ बेटे का कोई रिश्ता नहीं था. अब वह मुझे और में उन्हें हवस की नज़र से देख रहे थे.

अब तक मेरा लंड भी तना हुआ था. तो देर न की बादाम मिल्क का कप टेबल पर रखा और अपने शार्ट से लंड बहार निकल कर आगे पीछे हिलने लगा.पर इस बार कल रात के तरह माँ ने कुछ बोला नहीं. बस मुझे और मेरे लंड को देखा और हलकी मुस्कराहट देने लगी.

मैं: पापा का मेरे से बड़ा है क्या?माँ: सच बोलू तो उनका थोड़ा सा छोटा है पर मोटा है इससे.मैं: तो मतलब मेरा ही बड़ा है.माँ: हाँ पर बोली न तुम्हारा थोड़ा कम मोटा है.मैं: कोई बात नहीं लम्बा तो है. मतलब ज़ादा अंदर जायेगा.माँ अपने नीचे के होंठ काटते हुई बोली: अंदर? कहा अंदर?

मैं: जहा आप चाहो.माँ: बोलना. कहा अंदर जायेगा वह?मैं: आपको भी डर्टी बाते करना पसंद है माँ.माँ: हाँ अच्छी लगती है. तो अब बोलो कहा अंदर?मैं अपने लंड को ऊपर नीचे धीरे धीरे हिलाते हुए बोला: आपके खूबसूरत चेहरे में जो मुँह है उसमे.माँ अपने उंगलियों को दन्त से दबती हुई शर्म और शरारत भरी आँखों से बोली: और?

मैं: आपकी जांघो के बीच आपकी रसीली चूत है उसमे.माँ: और?इस बार जब माँ ने और बोलै तो मेरे अंदर एक लहार दौड़ गयी ये सोच कर की माँ गांड भी मरवाना चाहती है मुझसे. मेरा लंड और तन गया. अंदर ही अंदर में पागल हो गया की पहली बार लाइफ में चूत और गांड दोनों चोदने को मिलेंगे.मैं: और आपकी सेक्सी गांड के अंदर जायेगा मेरा लंड माँ.माँ को इन बातो से बहुत मज़ा आ रहा था वह एक हाथ में कप को कस कर पकड़ी हुई थी और दूसरा हाथ अब उनकी खुली जांघो को सहला रही थी. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

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माँ: गांड भी चोदोगे अपनी माँ का?मैं: हाँ.माँ: पर तुम्हारे पापा ने आज तक नहीं किया वह.मैं: कोई बात नहीं आपकी चूत का सील पापा ने फाड़ा तो गांड का उट्घाटन मैं कर दूंगा.माँ अपनी टाँगो को ठीक से रख बैठी. फिर बाए हाथ से अपने झंगो से कपडे को हटाकर टाँगो को फैला दी. अब मैं सीधे उनकी पैंटी को देख रहा था.

फिर वह मुझे देख मुस्कुराई. फिर उसी हाथ से दूसरे हाथ में पकडे कप में ऊँगली डाल कर बादाम मिल्क लगा कर अपने पैंटी पर चूत के पास दूध को लगायी.वह बोली: होर देना मिल्क राहुल?मैं ये देख और सुनकर अपने लंड को थोड़ा जल्दी हिलाने लगा और माँ ने ऊँगली से मुझे बुलाने का इशारा करते बोली: के बादाम मिल्क का नया फ्लेवर चख के बताओ कैसा है.

मैं झट से उठ खड़ा हुआ. लंड को शार्ट के बहार ही झूलते हूँ उनके पास जाकर उनकी टाँगो के बीच घुटनो पे बैठ गया. मैं बस देख ही रहा था उनकी पैंटी जो पता नहीं उनके रस या दूध से गीली थी. माँ ने तभी अपने हाथ से पैंटी को एक तरफ सरका कर अपनी रसीली गुलाबी चूत दिखा दी.रात को तो टीवी के लाइट में उनकी चूत साफ़ नहीं दिख रही थी.

पर अब मैं अपनी माँ की चूत को साफ़ रौशनी में देख रहा था. मेरे लंड में खून की तेज़ धार दौड़ रही थी. Sasu Maa ki Chudai ki kahani

उनकी चूत के होंठ बहार थी. पता चल रहा था की काफी गीली चूत है.काफी बार चुदी हुई चूत है. यह सोच मेरे अंदर आग भड़क रही थी. तभी माँ ने टोकते हुए मुझे अपने खयालो से बहार निकलती हुई बोली: सिर्फ देखते रहोगे क्या? या…..इतना कहती हुई माँ ने मेरे सर के बाल पकडे और खींचकर मेरे मुँह को अपनी चूत से सत्ता डाली.

अब क्या था में उनकी चूत को चाटने लगा. वह नमकीन सा स्वाद और वह चूत की खुशबू. अपने जीब से उनकी चूत की होंटो को फैलाने लगा. और बीच की सुराख़ में जीब को आगे बढ़ाते हुए चाटने लगा.

माँ आहे भर्ती हुई सोफे पर आराम से पीठ टेकती हुई आँखों को बंद कर के बैठ गयी. उन्हें काफी मज़ा आ रही थी और उन्हें मज़े में देख मुझे और भी मज़ा आ रहा था.

मेरी जीब उनकी चूत की हर नसों में जादू भर रही थी. कुछ ही देर में उनकी चूत की होंठ जो पहले कोमल थे अब हलकी सी सख्त होने लगी.तब मैंने अपने एक अंघूठे से उनकी चूत के ऊपर की दाने को सहलाते हुए जीब अंदर जितना जा सके उतना गहराई तक धकेल कर चाटने लगा. उनकी मुँह से निकलती आहे बढ़ने लगी.

उनके एक हाथ में जो दूध का कप था वह टेड़ा होकर उसमे से दूध फर्श पर गिरने लगी.साथ ही जो दूसरा हाथ मेरे बालो को पकड़ी हुई थी वह मुझे और ज़ोर से खींचने लगी. वह मेरे चेहरे को अपनी चूत पर दबा रही थी की मनो चाहती हो की मेरा जीब और अंदर जाये. मेरे अंघूठे का दाने पर रगड़ और जीभ से चूत के अंदर चाटने से वह अब चरम सीमा की और बढ़ रही थी.

इसी कारन उनके हाथ से कप छूट गयी और वह नीचे गिर कर टूट गया. उसके नीचे गिरने और टूटने से जो आवाज़ आयी उससे झट से उनकी आंखे खुली और मेरे बालो से पकड़ भी छूट गया.

आवाज़ से मैं भी झट से उन्हें देखा तो वह बोली: ओह वाओ!मैं अपने होंटो को जीब से चूसते हुए बोलै: क्या हुआ माँ? होश उड़ गए. है है है!वह इस बात पर हसी और फिर बोली: अब मुझे ये साफ़ करना होगा उफ़.मैं: बाद मैं करते है ना माँ. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

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माँ ने मुझे देखा और होंटो को काटती हुई शैतान भरी मुस्कान देती हुई बोली: यू अरे राइट.और इतना कहकर माँ मेरे सर को दोनों हाथ से पकड़ा. और खींच कर वापस अपनी चूत पर लगा दी. मैं फिर अपने काम पर लग गया. एक अंगूठे से उनकी चूत के दाने को मसलते हुए जीभ अंदर बहार डालते हुए चाटने लगा.

उनकी आहे अब और तेज़ होने लगी.उनकी सिसकारियां मुझे और जोश दे रही थी और फिर मैंने अपने दूसरे हाथ को भी काम पर लगा दिया. बाए हाथ के अंघूठे से माँ की चूत के दाने को मसाला. जीभ को चूत की होंटो पर फड़फड़ाया और दूसरे हाथ की दो ऊँगली चूत में घुसाने लगा. माँ का हाथ मेरे सर पर और ज़ोर से कसने लगी.

मेरी दो उंगलिया उनकी चूत में वाइब्रेटर की तरह हिल कर मज़ा दे रही थी. और फिर मैंने दो ऊँगली बहार निकली तो माँ ने ऊंची आवाज़ में बोली: बीटा. प्लीज वापस डालो अंदर.उन्हें पता नहीं था की मैं अब क्या करने की सोच रहा था.

वह पूरी फैल कर बैठी थी और मैंने उनकी पैंटी को थोड़ा और सरकाया. उनकी गांड की छेद को अपने आँखों के सामने खुला देखा और फिर उसे चाटने लगा.

और साथ ही चूत की दाने को मसलता रहा.माँ: ओह्ह्ह्हह! योर लिकिंग माय . यू अरे सो डर्टी बेटा गांड को अच्छे से चाटकर गीला करने के बाद में वापस चूत चाटने के काम पर लग गया और फिर अपनी उंगलियों को निशाने पर सेट किया. उंगलियों को ऐसा सेट किया की दो ऊँगली चूत के मुँह पर और उसके नीचे की एक ऊँगली गांड के मुँह पर थी.

माँ को अंदाजा हो गया की क्या करने वाला हूँ. तो उन्होंने हलकी आवाज़ में कहा: सलौली प्लीज. आराम से डालना.मैंने धीरे से दो ऊँगली चूत में घुसाया और एक गांड में. चूत भले ढीली थी पर उनकी गांड काफी टाइट थी मेरी एक ऊँगली के लिए भी.माँ: आआआअह्ह्ह! बहुत टाइट लग रहा है वही रहने दो. चूत चोदो मेरी राहुल.

मैंने ऐसे ही चूत में दो ऊँगली और गांड में एक ऊँगली डालते हुए उनकी चूत को चाटने लगा. फिर लगा की माँ को आराम लग रहा है. तो धीरे धीरे उंगलियों को अंदर बहार करते हुए उनकी चूत और गांड दोनों उंगलियों से चोदने लगा.

माँ की सिसकारियों से और चूत से निकलती रस की तेज़ खुशबू से रूम भर गया. जल्द ही उनकी पकड़ मेरे सर पर इतनी कस गयी की मैं समझ गया की माँ झड़ने वाली है. तो मैंने ज़ोर ज़ोर से उंगलियों को चूत और गांड के अंदर बहार घुसना शुरू कर किया.कुछ ही देर में बड़ी ज़ोर की ‘आह’ के साथ चूत से लसल से पानी की धार निकल कर मेरे मु और होंटो पर पड़ गयी. पर मैं रुका नहीं उंगलिया अब भी अंदर बहार जा रही थी.

वह मुझे जिस हाथ से पहले खींच रही थी अब ढाका देने लगी और बोली: स्टॉप अह्ह्ह स्टॉप.मैं तब माँ की हालत देख रुक गया और सर उठा कर उन्हें देखने लगा. वह सोफे पर चित आंखे बंद कर ज़ोर ज़ोर की सांसे लेती हुई वापस होश को आ रही थी. Sasu Maa ki Chudai ki kahani

माँ के दोनों हाथ सोफे को दो तरह पड़े थे जैसे उनमे जान नहीं. साथ ही फैली हुई जांगे चूत का बेशर्मी से खुलकर प्रदर्शन कर रही थी.माँ को इस हाल में देख मुझे एक गीत का एहसास हो रहा था. मैं अब एक औरत को उसकी चरम सीमा पर ला सकता हूँ बिना चोदे . मैंने नीचे देखा तो मेरा लंड तना हुआ नहीं था और वह सिकुड़ गया था. थोड़ी देर में माँ ने आंख खोली और पहले मुझे देखा उन्हें देखते हुए.

माँ: वाओ कहा से सीखा ये सब तुमने?मैं: सब सीक्रेट माँ. है है है! मज़ा आया?माँ: मत पूछो अब मुझे चोदो बेटा.मैं: सच्ची?माँ: हाँ. पर अभी नहीं जाओ जाकर नहा कर फ्रेश हो आओ. मैं ब्रेक फ़ास्ट क लिए कुछ बनाती हूँ.

मैं: ब्रेकफास्ट और नहाना रहने दोना अभी क्यों न आपकी मुराद पूरी कर दूँ.माँ: कौनसी मुराद?मैं: अपने बेटे से चुदवाने की.माँ: ओफ्फो उसी लिए तो कहा जाकर नाहा कर आओ. फ्रेश हो जाओ ब्रेक फ़ास्ट बना देती हूँ पर…मैं: पर?

माँ: पर बिना मुझे फ़क किये नो ब्रेकफास्ट. नाउ जो गेट बाथ. नहाकर आओ. ब्रेकफास्ट माँ.इतना कहते हुए मैं नहाने को भागा. समझ आ आ गया था की मेरी माँ बिना मेरे नहाये कुछ नहीं करने वाली. क्यों की वह हमेशा से थोड़ी साफ़ सुथरी चीज़ो की शौकीन थी. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

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इतने में जब मैं जा रहा था तो माँ ने कहा: रुको ज़रा.मुझे लगा शायद माँ का मूड बदल गया हो और वह अभी ही चुदवाना चाहती हो पर नहीं.माँ: नहाने ही जा रहे होना तो ये साफ़ कर दो.माँ ने मुझे नीचे फ्लोर पर पड़ी टूटी कप और बिखरे कफ पर इशारा किया.मैं: मैं क्यों करू?माँ: तुम्हारे कारन हुआ न तो तुम्ही करो.

चलो साफ़ करो वरना नो फ़क.मैं: अच्छा अच्छा ओके माँ. साफ़ कर देता हूँ.इसके बाद माँ किचन को गयी. फिर मैं कप के टूटे टुकड़ो को लेकर किचन में रखे डस्ट बिन में डाला और माँ को देखने लगा.

माँ ब्रेड के पैकेट को खोल रही थी और तभी मुझे देख बोली: उफ़ कितना घुरोगे अपनी माँ को. जल्दी फ्लोर को भी साफ़ करके नहाकर आओ.मैं: ऐसा लग रहा है की जितना भी काम है माँ.माँ: वही तो ऍम योर माँ. माँ हूँ तुम्हारी वह भूलो मत.मैं: वही तो ज़ादा मज़ा दे रही है की आप मेरी माँ हो एंड ऍम गोना फ़क यू.माँ:

हाँ ओके योर गोना फ़क मी पर पहले फ्लोर साफ़ करो फिर नहाओ और फिर करेंगे फ़क ओके.इतना कहती हुई माँ ने मेरे तरफ फ्लोर साफ़ करने के लिए मोप दे दिया मैंने उसे लिया और कहा: बे रेडी माँ तो गेट फक.

माँ: ऍम एवर रेडी बीटा अगले तीन दिन फ़क करने के लिए.मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था और मोप लेकर फ्लोर साफ़ किया और फिर नहाने को भगा. नहाते हुए माँ को नहीं पर एक औरत को चोदने जा रहा हूँ सोच कर अपने लंड पर अच्छे से साबुन मल मल कर नहाया.

मन में आया की एक बार मुठ मार लू. पर फिर सोचा की कही चोदते हुए थक गया तो यह सोच मुठ भी नहीं मारा. नहाकर तुरंत बहार निकला और कपडे पहनने को सोचा भी नहीं टॉवल लपेट कर ही किचन को चला गया और देखा तो माँ ने 2 प्लेट सैंडविच बना रखा था मैं: माँ आयी आवाज़ पर वह पलटी और मुझे टॉवल में देख बोली: इतनी जल्दी?

तुम तो काफी देर लागते हो नहाने में?मैं: आज बस रहा नहीं गया. काफी काम जो करना है.मैंने इतना कहते हुए आंख मार दी तो माँ ने भी पूरा सेक्सी पोज़ देती हुई बोली: ऊँगली करना आसान है पर चोदना नहीं. सोच लो.मैं: कोसिस तो करो मुझे आखिर अपने बाप का बीटा हूँ जिसने आपको चोदके मुझे बनाया. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

इतना मेरे कहते ही माँ ने एक झूट मूट की गुस्से भरी नज़र से मुझे देखा और मेरे तरफ बढ़ी. पास आकर माँ ने मेरे बाल पकड़ी और खींचती हुई मुझे लिविंग रूम ले जाकर मुझे सोफे के पास धक्का देती हुई बैठा दी.

इस बीच मेरा टॉवल खुल चूका था.और मेरे जांघो को साफ़ दिख रही थी. तभी मेरे सामने खड़ी होकर माँ ने एक साथ हाथ अपने कपडे के अंदर डाल कर एक ही झटके में मुझसे नज़र मिलाती हुई अपनी पैंटी को नीचे सरकती हुई बोली: नाउ आईटी’स टाइम देखते है किस्मे है दम बाप में या बेटे मैं.

धीरे से टाँगे हिलाती हुई उन्होंने अपनी पैंटी नीचे पहुंचाई और फिर एक एक कर अपने पेअर उसके अंदर से निकाला. अब मेरी माँ मेरे सामने बिना पैंटी के उस पारदर्शी कपडे में खड़ी थी. मेरा लंड टॉवल के अंदर उभार बना के तन चूका था जिसे देख माँ ने कहा: लेट में राइड यू बीटा. देखते है तुम कितना संभाल सकते हो.

इतना कहती हुई माँ मेरे सामने झुक कर मेरे टॉवल को सरकायी. मेरा लंड तन कर उनको सलामी देने लगा. झट से उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथो से पकड़ा.और मुझसे नज़र मिलाती हुई धीरे से अपनी थूक की एक लम्बी धार मेरे लंड के मुँह पर दे दी.थूक से मेरे लंड को अपने हाथ से लसलसाने के बाद वह बोली: अरे यू रेडी तो फ़क योर माँ बीटा?

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तो मैंने भी कहा: यस ऍम रेडी माँ.इतना कहते ही वह अपने टाँगो को फलाती हुई. कपडे को उठा कर मेरे लंड को पकड़ कर अपने चूत की दरार पर रखा. फिर मेरी नज़रो से नज़र मिलती हुई धीरे से बैठ गयी और मेरा लंड माँ की चूत में समां गया. पहली बार मैं किसी चूत में अपना लंड डाल रहा था.

कई बार हाथो से हिलाया लेकिन ये एक नया एहसास था. माँ की चूत अब भी लंड के लिए कसी हुई थी. और इतनी गर्मी थी मानो मेरा लंड माँ के तरह पिघल जाये. फिर माँ ने मेरे कंधे पर अपना हाथ टिकाया और फिर उसके सहारे खुद को ऊपर नीचे करने लगी. इस तरह से मेरा लंड माँ की चूत के अंदर और फिर बहार आने लगा.

पहले धीरे धीरे की और फिर माँ को मज़ा आने लगी. तो वह थोड़ी ज़ोर ज़ोर से जल्दी जल्दी उठने बैठने लगी. कुछ तीन या चार मिनट में ही मैंने माँ से कहा: माँ स्लो डाउन मेरा निकलने को है.माँ हस्ती हुई और ज़ोर ज़ोर से उठकर बैठने लगी मेरे लंड पर और बोली: इसी लिए बोली थी उतना आसान नहीं चूत चोदना जितना हाथ से हिलाते हो तुम.

और तभी मुझे ऐसा लगा की मेरा मुठ निकलने वाला है तो मैंने कहा: माँ स्पर्म आने वाला है.माँ: तो निकलने दोना आअह्ह्ह! मेरे अंदर निकालो.ये सुन कर तो मुझसे अब रहा नहीं गया और झट से मुठ की पिचकारी की लाइन लग गयी. मैंने अपनी माँ की चूत अपने मुठ से भर दी. और आंखे बंद कर ज़ोर की साँसे लेकर पड़ा रहा.

जिस हाल में मेरी माँ पड़ी थी जब मैंने उन्हें मज़ा दिया. माँ मेरे लंड को नरम होता महसूस की अपने चूत में और उसके बाद वह उठ गयी.

उनके उठते ही मेरा मुठ उनकी चूत से धीरे धीरे बहने लगा तो माँ ने कहा: आंख खोलो और देखो तुमने क्या किया?मैंने अपनी आंखे खोली और देखा तो मेरा पानी उनकी चूत से बहता हुआ उनके कपडे पर निशान बना रही थी. वह पानी का निशान कपडे पर जो धीरे धीरे बड़ा हो रहा था. Sasu Maa ki Chudai ki kahani:

उन्होंने मुझे देखते हुए कहा: . मेरा कपडा गन्दा कर दिया.मैं थके हुए आवाज़ में बोला: माँ सब अपने किया.माँ फिर मुझे चिढ़ाती हुई बोली: क्या हुआ तुम तो पांच मिनट भी नहीं टीके.मैं: माँ ये मेरा पहला बार था.

माँ: अब समझे हाथ से हिलाने में और चूत में घुसा कर करने में बहुत अंतर है. पर तुम चिंता मत करो.मैं: मतलब?माँ: ये तीन दिन ख़तम होते होते मैं तुम्हे सब सीखा दूँगी.मैं: पापा का भी ऐसे ही जल्दी होता है क्या?

तब वह झुक कर मेरे चेहरे पर थप थापा कर बोली: जिस तरह से तुम कोई भी सब्जेक्ट पढ़ते हो उसी तरह एक औरत को या लड़की को चोदना एक पढ़ाई है. पहली बार ही तुम रैंक नहीं ला सकते.मैं: ओके माँ अब समझा मैं. हाथ से हिलाना बंद आज से बस आपको चोदुगा और सीखूंगा.

माँ: ओके पर ये तीन दिन के बाद मुश्किल होगा जब तुम्हारे पापा और टीना यहाँ होंगे.मैं: उसकी आप चिंता न करो आपकी क्लासेज का टाइम बना लेंगे.माँ: तुम भी चिंता न करो. वैसे भी तुम्हारे पापा मुझे अब चोदते नहीं तो अब मुझे नया सेक्स तो मिल गया है. तो मैं भी मौका ढून्ढ लुंगी.

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मैं: मैं तयार हु आगे के लिए माँ.माँ: तुम रेडी हो पर तुम्हारा वह तो नहीं. देखो कैसे छोटा सा हो गया है है है है!मैं: उसे बड़ा करना तो आपके हाथ में है.माँ: पता है मुझे कैसे बड़ा करना है पर अभी बेटा खाना खाओ पहले .

माँ हूँ तुम्हारी. कोई और होती तो भूखे ही चुदवाती जब तक मेरा मन नहीं भरता पर तुम. चलो ब्रेकफास्ट बनाया है वह करते है उसके बाद बाकि.इसके बाद मैंने अपना सिकुड़ा हुआ लंड शार्ट में घुसाया और उठ कर माँ के पीछे पीछे चलने लगा. माँ ऐसे गांड लचका लचका के चल रही थी मानो मुझे दिखने के लिए ही ऐसे चल रही हो. मैंने भी पीछे से उनकी लचकती गांड पर एक दे मारा.

माँ पलट कर हस्ते मुस्कुराती हुई बोली: आउच!मैं: सच बताऊँ मस्त गांड है आपकी माँ.माँ: सच्ची? इसी लिए अपना हाथ दूर नहीं रख सके? Sasu Maa ki Chudai ki kahani:
मैं: हाथ तो क्या कुछ भी दूर नहीं रखा जा रहा मन तो कर रहा है की…माँ: की? बोलो क्या?मैं: कह जाओ आपकी पाव रोटी को.माँ हस्ते हुए बोली: है है है! पाव रोटी?मैं: हाँ क्रीम बन. क्रीम से भरा हुआ आपके चिकने बदन को.माँ: वाओ वह नाम अच्छा लगा.हम दोनों अब किचन में थे और माँ प्लेट में सैंडविच लगा रही थी. फिर हम दोनों डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठे और बाते करते हुए माँ के बनाये सैंडविच खाने लगे.


तो दोस्तो आज इस कहानी मे इतना ही आगे क्या हुआ ये मैं अगले भाग मे बतौगा .
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